लखनऊ/परिवहन डेस्क: उत्तर प्रदेश में अगर आपके पास 15 साल या उससे अधिक पुराना वाहन है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य के परिवहन विभाग (UP Transport Department) की कार्यप्रणाली और नियमों में एक बहुत बड़ा और सख्त बदलाव किया गया है। अब 15 साल की आयु पूरी कर चुके निजी वाहनों (Private Vehicles) का नवीनीकरण या री-रजिस्ट्रेशन (Re-registration) कराना पहले जैसा आसान नहीं रह गया है।
\r\n\r\nपरिवहन विभाग की ज्यादातर सेवाओं को अब आधुनिकीकरण और निजीकरण की दिशा में ले जाया जा रहा है। इसी कड़ी में, अब 15 साल पुराने वाहनों के फिटनेस और नवीनीकरण का अधिकार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से हटाकर निजी हाथों यानी 'ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन' (Automated Testing Station - ATS) को सौंप दिया गया है। केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के बाद यह व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों पर नकेल कसी जा सके।
\r\n\r\nक्या है नया नियम और कैसे होगा री-रजिस्ट्रेशन?
\r\n\r\nअभी तक उत्तर प्रदेश में व्यवस्था काफी सरल थी। 15 साल पुराने वाहन का मालिक अपने वाहन का इंश्योरेंस (Insurance), पुराना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) और टैक्स जमा करने की रसीद लेकर आरटीओ (RTO) कार्यालय जाता था। वहां कागजी कार्रवाई और सामान्य मैन्युअल चेकिंग के बाद वाहन का री-रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता था, जिससे वाहन स्वामी को अगले 5 वर्षों तक सड़क पर गाड़ी चलाने की कानूनी वैधता मिल जाती थी।
\r\n\r\nलेकिन, 8 मई को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए आदेश ने इस पूरी प्रक्रिया को बदल कर रख दिया है।
\r\n\r\nअब RTO नहीं, ATS जाना होगा: नए नियम के तहत, 15 साल की अवधि पूरी कर चुके किसी भी वाहन का सीधे RTO में नवीनीकरण नहीं होगा। वाहन मालिकों को अब अपनी गाड़ी लेकर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) जाना होगा।
\r\n\r\nमशीनों से होगी तकनीकी जांच: ATS में किसी इंसानी दखल के बजाय पूरी तरह से मशीनों और कंप्यूटरों द्वारा वाहन की तकनीकी जांच (Technical Inspection) की जाएगी। इसमें गाड़ी के ब्रेक, एमिशन (धुआं), इंजन की स्थिति, चेसिस और अन्य सुरक्षा मानकों को बारीकी से परखा जाएगा।
\r\n\r\nग्रीन सिग्नल मिलने पर ही नवीनीकरण: जब वाहन ATS की इस कड़ी परीक्षा को पास कर लेगा और वहां से उसे 'फिटनेस सर्टिफिकेट' (Green Signal) मिल जाएगा, केवल तभी उस रिपोर्ट के आधार पर RTO कार्यालय वाहन का 5 साल के लिए नवीनीकरण करेगा।
\r\n\r\nअनफिट होने पर क्या होगा? सीधा कबाड़ (Scrap) का रास्ता
\r\n\r\nइस नए नियम का सबसे कड़ा पहलू यह है कि अगर ATS की तकनीकी जांच में आपका 15 साल पुराना वाहन मानकों पर खरा नहीं उतरता है और 'अनफिट' (Unfit) घोषित कर दिया जाता है, तो उस वाहन का किसी भी सूरत में दोबारा पंजीकरण नहीं होगा।
\r\n\r\nऐसे अनफिट पाए गए वाहनों को अनिवार्य रूप से 'स्क्रैप' (Scrap - कबाड़) की श्रेणी में डाल दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि वह गाड़ी फिर कभी सड़क पर नहीं उतर सकेगी और उसे कबाड़ में काटना ही एकमात्र विकल्प होगा। मशीनी जांच होने के कारण इसमें किसी भी प्रकार की हेरफेर या जुगाड़ की गुंजाइश भी लगभग खत्म हो गई है।
\r\n\r\nप्रदूषण कम करने के लिए सरकार का बड़ा कदम
\r\n\r\nआखिर सरकार को इतना सख्त कदम क्यों उठाना पड़ा? इसका सबसे बड़ा कारण है— बढ़ता वायु प्रदूषण और पुरानी गाड़ियों से निकलने वाला जहरीला धुआं।
\r\n\r\nसरकारी वाहनों पर पहले ही लागू हो चुकी है स्क्रैप नीति:
\r\n\r\nप्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सबसे पहले इस नियम की शुरुआत खुद से की। उत्तर प्रदेश में 15 साल पुराने सरकारी वाहनों के लिए स्क्रैप नीति (Vehicle Scrappage Policy) पहले से ही सख्ती से लागू है। प्रदेश के जितने भी सरकारी विभागों में वाहनों ने 15 साल की आयु पूरी कर ली है, उनका दोबारा रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से रोक दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, इस नीति के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में अब तक 6,000 से ज्यादा सरकारी वाहनों को स्क्रैप (कबाड़ में तब्दील) किया जा चुका है, ताकि वे पर्यावरण को प्रदूषित न करें।
\r\n\r\nअब प्राइवेट वाहनों की बारी:
\r\n\r\nसरकारी स्तर पर सफलता मिलने के बाद अब इस नीति का दायरा निजी वाहनों तक बढ़ा दिया गया है। लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों की सड़कों पर आज भी लाखों की संख्या में ऐसे प्राइवेट दोपहिया और चार पहिया वाहन दौड़ रहे हैं जो 15 साल से ज्यादा पुराने हैं और भारी मात्रा में प्रदूषण फैला रहे हैं। चूंकि अभी तक आरटीओ से आसानी से 5 साल का एक्सटेंशन मिल जाता था, इसलिए लोग इन्हें बेधड़क चला रहे थे। लेकिन अब ATS पर सख्त तकनीकी जांच अनिवार्य होने से यह तय माना जा रहा है कि बहुत कम ही पुरानी गाड़ियां इस फिटनेस टेस्ट को पास कर पाएंगी, जिससे सड़कों से पुरानी और खटारा गाड़ियों का बोझ कम होगा।
\r\n\r\nअधिकारियों का क्या कहना है?
\r\n\r\nइस बड़े बदलाव पर लखनऊ के एआरटीओ (ट्रांस गोमती) हिमांशु जैन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया, "केंद्र सरकार की तरफ से स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं कि 15 साल पुराने प्राइवेट वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन से पहले उनका ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) पर फिटनेस टेस्ट अनिवार्य रूप से कराया जाए। अब मशीनों पर जांच के बाद अगर वाहन तकनीकी और पर्यावरण मानकों पर फिट पाया जाएगा, तभी इसका आरटीओ कार्यालय में री-रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। यदि वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाता है, तो फिर उस वाहन का पुनर्पंजीयन (Re-registration) किसी भी हाल में नहीं हो सकेगा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 8 मई को आए केंद्रीय मंत्रालय के आदेश के बाद विभाग ने इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी कर ली है।
\r\n\r\nआम जनता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
\r\n\r\nइस नए नियम का उत्तर प्रदेश के लाखों वाहन मालिकों पर सीधा और गहरा असर पड़ने वाला है:
\r\n\r\nपुरानी गाड़ियों का मोह छोड़ना होगा: जो लोग अपनी पुरानी गाड़ियों को सिर्फ इसलिए रखे हुए थे क्योंकि उनका रजिस्ट्रेशन आसानी से रिन्यू हो जाता था, उन्हें अब अपनी गाड़ी की मेंटेनेंस पर भारी खर्च करना होगा या फिर उसे कबाड़ में देना होगा।
\r\n\r\nरखरखाव (Maintenance) पर जोर: वाहन मालिकों को अब अपनी गाड़ियों को हमेशा अच्छी कंडीशन में रखना होगा। एमिशन नॉर्म्स (Emission Norms) और सुरक्षा मानकों को हल्के में लेने वालों की गाड़ियां अब सड़क पर नहीं चल सकेंगी।
\r\n\r\nपारदर्शिता (Transparency) में वृद्धि: RTO में होने वाले मैन्युअल फिटनेस टेस्ट में कई बार भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती थीं। ATS के आने से पूरी प्रक्रिया कंप्यूटरीकृत हो जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और केवल वास्तव में सुरक्षित गाड़ियां ही सड़कों पर आ सकेंगी।
\r\n\r\nपरिवहन विभाग का यह कदम सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बहुत बड़ा और आवश्यक सुधार है। हालांकि, शुरुआत में 15 साल पुराने वाहन मालिकों को इस नई और सख्त ATS प्रक्रिया से परेशानी हो सकती है और कई लोगों को अपनी पुरानी गाड़ियों से हाथ भी धोना पड़ सकता है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से देखें तो यह उत्तर प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाने और हवा को स्वच्छ रखने के लिए उठाया गया एक बेहद जरूरी कदम है। अब समय आ गया है कि वाहन मालिक समय रहते अपने पुराने वाहनों की तकनीकी जांच करवा लें, अन्यथा उन्हें अपनी गाड़ी कबाड़ में देने के लिए तैयार रहना होगा।
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Sabse pehle comment karne wale banein.