सोनभद्र (Sonbhadra): धर्म और आस्था के मंच पर कभी-कभी लापरवाही किस कदर भारी पड़ सकती है, इसका एक जीता-जागता और दुखद उदाहरण उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से सामने आया है। यहां एक सोनभद्र रामलीला हादसा (Sonbhadra Ramleela Accident) चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने न केवल एक कलाकार की जिंदगी बर्बाद कर दी, बल्कि अब यह मामला कानूनी पचड़ों में भी फंस गया है।READ ALSO:-शादी वाले घर में पसरा मातम: बहन की डोली उठने से पहले उठी भाई की अर्थी, कार्ड बांटने निकले दिल्ली मेट्रो कर्मी समेत 2 दोस्तों की दर्दनाक मौत
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
रामलीला में 'बुराई पर अच्छाई की जीत' का संदेश दिया जाता है, लेकिन सोनभद्र के शाहगंज थाना क्षेत्र में मंचन के दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिसने हकीकत में एक इंसान की दुनिया में अंधेरा कर दिया। राम का किरदार निभा रहे कलाकार द्वारा चलाया गया तीर सीधे रावण का अभिनय कर रहे युवक की आंख में जा लगा। इस हादसे में युवक की एक आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
हैरानी की बात यह है कि यह मामला सिर्फ दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा। जब पीड़ित परिवार ने आयोजकों और आरोपी कलाकार से इलाज के लिए मदद मांगी, तो कथित तौर पर उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकी मिली। इसके बाद पुलिस ने अब जाकर एससी-एसटी एक्ट (SC-ST Act) के तहत मामला दर्ज किया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

Sonbhadra Ramleela Accident: क्या है पूरा मामला?

\r\n\r\n
घटना करीब दो महीने पुरानी बताई जा रही है, लेकिन पुलिस केस दर्ज होने के बाद अब यह सुर्खियों में आई है। 13 नवंबर, 2025 की देर रात सोनभद्र जिले के शाहगंज थाना क्षेत्र के खैरा गांव में रामलीला का भव्य आयोजन चल रहा था। गांव वाले बड़े उत्साह के साथ राम-रावण युद्ध का मंचन देख रहे थे।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
मंच पर भगवान राम की भूमिका नैतिक पांडेय निभा रहे थे, जबकि रावण का किरदार सुनील कुमार निभा रहे थे। स्क्रिप्ट के मुताबिक, राम और रावण के बीच युद्ध का दृश्य चल रहा था। इसी दौरान, राम बने नैतिक पांडेय ने अपने धनुष से तीर छोड़ दिया। दुर्भाग्यवश, यह तीर निशाने पर लगने या हवा में जाने के बजाय सीधे सुनील कुमार (रावण) की आंख में जा लगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
तीर लगते ही सुनील कुमार दर्द से चीख पड़े और मंच पर ही गिर गए। वहां मौजूद दर्शकों को पहले लगा कि यह अभिनय का हिस्सा है, लेकिन जब सुनील के चेहरे से खून बहने लगा, तो वहां हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मंचन रोका गया और घायल सुनील को अस्पताल ले जाया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए गई

\r\n\r\n
हादसे के बाद सुनील कुमार को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उनकी जांच की और बताया कि तीर लगने से आंख के अंदरूनी हिस्सों को गहरा नुकसान पहुंचा है। सुनील को बेहतर इलाज के लिए वाराणसी (Varanasi) रेफर किया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सुनील के परिजनों के मुताबिक, पिछले दो महीनों से वाराणसी में उनका इलाज चल रहा है। कई सर्जरी और प्रयासों के बावजूद, डॉक्टरों ने जवाब दे दिया है। सुनील कुमार की उस आंख की रोशनी अब कभी वापस नहीं आ सकेगी। एक छोटी सी लापरवाही ने एक हंसते-खेलते युवा को जीवन भर के लिए दिव्यांग बना दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

इलाज मांगने पर मिली धमकियां और जातिसूचक शब्द

\r\n\r\n
यह सोनभद्र रामलीला हादसा (Sonbhadra Ramleela Accident) तब और गंभीर हो गया जब इसमें सामाजिक भेदभाव और दबंगई का एंगल जुड़ गया। पीड़ित सुनील कुमार अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सुनील के भाई ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अपने भाई के इलाज के खर्च के लिए रामलीला कमेटी के आयोजक रामसनेही सिंह और राम का किरदार निभाने वाले नैतिक पांडेय से संपर्क किया, तो उनका रवैया बेहद अपमानजनक था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
आरोप है कि मदद करने के बजाय, आरोपियों ने पीड़ित परिवार को जातिसूचक गालियां दीं। उन्होंने कहा कि "हादसा हो गया तो हम क्या करें?" जब परिवार ने दबाव बनाया, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं। इसी वजह से परिवार डरा हुआ था और पुलिस तक पहुंचने में देरी हुई।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पुलिस ने दर्ज किया SC-ST एक्ट में मुकदमा

\r\n\r\n
धमकियों से परेशान होकर और भाई की आंख की रोशनी जाने के गम में डूबे परिवार ने अंततः कानून का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने शाहगंज थाने में लिखित शिकायत दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पुलिस ने आरोपी कलाकार नैतिक पांडेय और आयोजक रामसनेही सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति एवं जनजाति नृशंसता निवारण अधिनियम (SC-ST Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पुलिस अधीक्षक (SP) सोनभद्र ने बताया कि मामले की जांच क्षेत्राधिकारी (CO) स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि रामलीला में इस्तेमाल किए गए तीर नुकीले क्यों थे और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

रामलीला में सुरक्षा मानकों की अनदेखी

\r\n\r\n
इस घटना ने एक बार फिर रामलीला और नाटकों के मंचन में सुरक्षा मानकों (Safety Standards) की पोल खोल दी है। अक्सर देखा जाता है कि स्थानीय रामलीला कमेटियां बजट बचाने या रोमांच बढ़ाने के चक्कर में असली जैसे दिखने वाले हथियारों का इस्तेमाल करती हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

विशेषज्ञों का कहना है कि:

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    नुकीले तीर: नाटकों में हमेशा ब्लंट (बिना धार वाले) या फोम वाले तीरों का इस्तेमाल होना चाहिए। असली लोहे या लकड़ी के नुकीले तीरों का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    दूरी का ध्यान: कलाकारों के बीच पर्याप्त दूरी होनी चाहिए ताकि अगर कोई हथियार गलती से चल भी जाए, तो चोट न लगे।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    रिहर्सल की कमी: कई बार कलाकार बिना पर्याप्त रिहर्सल के मंच पर उतर जाते हैं, जिससे टाइमिंग गड़बड़ा जाती है और ऐसे सोनभद्र रामलीला हादसे (Sonbhadra Ramleela Accident) होते हैं।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

SC-ST एक्ट क्यों लगा? (कानूनी विश्लेषण)

\r\n\r\n
इस मामले में साधारण लापरवाही (Negligence) का केस दर्ज हो सकता था, लेकिन SC-ST एक्ट लगने से आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    धाराओं का मतलब: जब किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति के साथ अपराध होता है और उस दौरान उसे जाति के आधार पर अपमानित किया जाता है, तो यह एक्ट लागू होता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    गैर-जमानती अपराध: इस एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे बेहद गंभीर होते हैं और इसमें आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मुआवजा: इस एक्ट के तहत पीड़ित को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता (Compensation) का भी प्रावधान होता है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद आरोपियों ने सहानुभूति दिखाने के बजाय उनकी जाति को लेकर अपशब्द कहे, जो कानूनन अपराध है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ग्रामीणों में आक्रोश और डर

\r\n\r\n
खैरा गांव में इस घटना के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है। एक तरफ जहां सुनील के भविष्य को लेकर चिंता है, वहीं दूसरी तरफ गांव के दो पक्षों के बीच तनाव भी है। ग्रामीणों का कहना है कि रामलीला गांव की एकता का प्रतीक होती है, लेकिन इस घटना ने भाईचारे को भी नुकसान पहुंचाया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन भविष्य में होने वाले ऐसे आयोजनों के लिए सख्त गाइडलाइन जारी करे। वे चाहते हैं कि रामलीला कमेटियां यह सुनिश्चित करें कि मंच पर इस्तेमाल होने वाले शस्त्र किसी को नुकसान न पहुंचा सकें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सोनभद्र में हुआ यह सोनभद्र रामलीला हादसा (Sonbhadra Ramleela Accident) महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का परिणाम है। 22-23 साल के सुनील कुमार के लिए दुनिया अब पहले जैसी नहीं रही। उनकी एक आंख की रोशनी चली गई है, जो किसी भी मुआवजे से वापस नहीं आ सकती।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उससे भी ज्यादा दुखद यह है कि समाज का एक वर्ग आज भी पीड़ितों की मदद करने के बजाय जाति का दंभ भरने में विश्वास रखता है। पुलिस की कार्रवाई से उम्मीद है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा। लेकिन यह घटना सभी आयोजकों के लिए एक सबक है—कला प्रदर्शन के लिए है, किसी की जान लेने या अपंग बनाने के लिए नहीं। "सावधानी हटी, दुर्घटना घटी"—यह मुहावरा यहां सुनील की जिंदगी पर बहुत भारी पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें