सहारनपुर के सरसावा में अमीन अशोक राठौर, उनकी पत्नी, मां और दो बेटों की गोली लगी लाशें मिलीं। पुलिस को मौके से 3 तमंचे मिले। क्या कर्ज या कलह बनी काल? पढ़िए रोंगटे खड़े कर देने वाली इनसाइड स्टोर
Published at : 20 Jan 2026, 07:15 AM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
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एक ही परिवार, तीन पीढ़ियां, और पांच लाशें। मरने वालों में घर का मुखिया, उसकी धर्मपत्नी, उसकी जन्मदात्री मां, और उसके दो किशोर बेटे। जिस घर में कल तक बच्चों की हंसी और परिवार की बातें गूंजती थीं, आज वहां सिर्फ बारूद की गंध और जमे हुए खून की बदबू थी।
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#SaharanpurPolice#बाईट \r\n \r\n➡️आज दिनांक 20.01.2026 को थाना सरसावा क्षेत्रान्तर्गत कौशिक विहार कॉलोनी में एक ही परिवार के 05 लोगों के शव मिलने की सूचना पर तत्काल थाना सरसावा पुलिस द्वारा घटनास्थल पर पहुँचकर शव को कब्जे में लिया गया एवं उच्चाधिकारीण द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया… pic.twitter.com/c5jltWa85l
नकुड़ तहसील में अमीन के पद पर तैनात अशोक राठौर (40) का परिवार अब इतिहास बन चुका है। पुलिस की शुरुआती थ्योरी और मौके पर मिले 3 तमंचे (Country-made Pistols) इशारा कर रहे हैं कि रक्षक ही भक्षक बन गया। क्या अशोक ने ही अपने पूरे परिवार को मौत की नींद सुलाकर खुद को गोली मारी? या इसके पीछे कोई और गहरी साजिश है? 'खबरी लाल' की यह विशेष रिपोर्ट आपको उस खौफनाक मंजर के हर एक पल से रूबरू कराएगी।
घटना का पता तब चला जब रिश्तों की डोर ने दस्तक दी। अशोक राठौर का परिवार सरसावा थाने क्षेत्र की शाश्वत विहार कॉलोनी में पिछले 5 महीने से किराए के मकान में रह रहा था। अशोक के बहनोई का घर वहां से महज 200 मीटर की दूरी पर है।
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सुबह के 9:00 बजे: फोन की घंटी और अनजाना डर अशोक के बहनोई ने पुलिस को बताया कि मंगलवार सुबह करीब 8 से 9 बजे के बीच उन्होंने अशोक को फोन किया। सामान्य दिनों में अशोक तुरंत फोन उठा लेते थे या कॉल बैक करते थे। लेकिन आज घंटी बजती रही। एक बार, दो बार, दस बार... लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया। यह असामान्य था। एक अजीब सी बेचैनी बहनोई के मन में घर कर गई।
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सुबह के 9:30 बजे: बेटे को भेजा गया संदेशवाहक बनकर जब काफी देर तक संपर्क नहीं हुआ, तो बहनोई ने अपने बेटे (अशोक के भांजे) को कहा, "जाओ, मामा के घर जाकर देखो, सब ठीक तो है?" बेटा पैदल ही मामा के घर की तरफ चल पड़ा। उसे क्या पता था कि वह आज अपने जीवन का सबसे भयानक दृश्य देखने जा रहा है।
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सुबह के 9:45 बजे: बंद दरवाजा और खामोशी भांजा जब घर पहुंचा, तो मेन गेट बंद था। उसने दरवाजा खटखटाया, मामा को आवाजें दीं। "मामा जी... दरवाजा खोलो!" लेकिन अंदर से सुई गिरने जैसी खामोशी थी। कॉलोनी के अन्य लोग भी वहां जुटने लगे। आशंकाएं गहराने लगीं। क्या वे कहीं बाहर गए हैं? लेकिन इतनी सुबह पूरा परिवार बिना बताए कहां जाएगा?
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सुबह के 10:00 बजे: खिड़की टूटी और होश उड़ गए जब सामने का दरवाजा नहीं खुला, तो भांजा और कुछ पड़ोसी घर के पिछले हिस्से की तरफ गए। वहां किचन की खिड़की थी। काफी आवाज देने के बाद भी जब हलचल नहीं हुई, तो निर्णय लिया गया कि खिड़की तोड़ी जाए। जैसे ही भांजे ने किचन की खिड़की की ग्रिल हटाई और कांच तोड़ा, उसकी नजर अंदर के कमरे (बेडरूम) तक गई। जो उसने देखा, उससे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके मुंह से चीख निकल गई। सामने फर्श पर उसके मामा और मामी खून से लथपथ पड़े थे। बेड पर नानी और दोनों भाई मृत अवस्था में थे।
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मौका-ए-वारदात का 'फॉरेंसिक' स्कैन
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सूचना मिलते ही सहारनपुर के जिलाधिकारी (DM) मनीष बंसल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) आशीष तिवारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम (Field Unit) ने घर को अपने कब्जे में ले लिया और पीली टेप लगाकर सील कर दिया।
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घर के अंदर का दृश्य किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। पुलिस सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कमरे के हालात कुछ इस तरह थे:
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1. लाशों की स्थिति (Position of Bodies)
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कमरे में घुसते ही मौत की विभत्सता बिखरी पड़ी थी।
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फर्श पर: घर के मुखिया अमीन अशोक राठौर (40) और उनकी पत्नी अंजिता (37) के शव जमीन पर पड़े थे। दोनों खून से सने थे।
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बिस्तर पर: अशोक की मां विद्यावती (70) और उनके दो बेटे कार्तिक (16) व देव (13) के शव बिस्तर पर थे। ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें शायद सोते समय या बैठे हुए ही गोली मारी गई।
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2. हथियारों का जखीरा (Weapons Recovered)
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इस पूरे कांड में सबसे अहम सुराग अशोक के शव के पास मिला।
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अशोक के दाएं हाथ के पास तीन देसी तमंचे (Pistols) पड़े थे।
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एक सरकारी कर्मचारी के घर में तीन अवैध हथियार क्या कर रहे थे? यह सवाल पुलिस को भी खटक रहा है। तीन तमंचों का होना इशारा करता है कि यह घटना आवेश में नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग (Pre-planned) के साथ अंजाम दी गई। शायद उसे डर था कि एक तमंचा जाम न हो जाए या गोलियां कम न पड़ जाएं।
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3. चोट की प्रकृति (Nature of Injury)
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फॉरेंसिक टीम के मुताबिक, पांचों मृतकों के सिर में गोली लगी है (Headshot)। गोली बेहद करीब से मारी गई है (Point Blank Range), जिससे बचने का कोई मौका नहीं मिला। कमरे में संघर्ष (Struggle) के कोई खास निशान नहीं मिले हैं, जो बताता है कि शायद पीड़ितों को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
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कौन था यह बदनसीब परिवार?
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इस घटना ने एक ऐसे परिवार को खत्म कर दिया जो बाहर से बिल्कुल सामान्य और खुशहाल दिखता था।
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अशोक राठौर (द हेड ऑफ फैमिली): अशोक एक पढ़े-लिखे व्यक्ति थे। उनके पिता की मृत्यु के बाद उन्हें मृतक आश्रित कोटे (Compassionate Ground) के तहत सरकारी नौकरी मिली थी। वे नकुड़ तहसील में अमीन के पद पर कार्यरत थे। अमीन का काम राजस्व वसूली और जमीन से जुड़े मामलों का होता है।
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अंजिता (पत्नी): वह एक गृहिणी थीं। पड़ोसियों के मुताबिक, वे कम ही बाहर निकलती थीं और अपने परिवार तक सीमित रहती थीं।
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बच्चे (भविष्य, जो बुझ गया):
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कार्तिक (16 वर्ष): बड़ा बेटा, नकुड़ के एक इंटर कॉलेज में कक्षा 10 का छात्र था। उसकी बोर्ड परीक्षाएं नजदीक थीं।
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देव (13 वर्ष): छोटा बेटा, सरसावा कस्बे के प्रतिष्ठित MTS पब्लिक स्कूल में कक्षा 9 का छात्र था।
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विद्यावती (मां): 70 वर्षीय बुजुर्ग मां, जो अपने बेटे और पोतों के साथ जीवन के अंतिम पड़ाव पर थीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका अपना बेटा ही उनका काल बन जाएगा।
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यह परिवार मूल रूप से कहाँ का था, इसकी जांच चल रही है, लेकिन सरसावा की शाश्वत विहार कॉलोनी में वे पिछले 5 महीनों से किराएदार के रूप में रह रहे थे।
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पुलिस की जांच और एसएसपी का बयान
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मौके पर पहुंचे एसएसपी आशीष तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए घटना की गंभीरता और पुलिस की जांच दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
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"प्रथम दृष्टया (Prima Facie) यह मामला गृह क्लेश या मानसिक तनाव के चलते उठाया गया कदम लगता है। अशोक के शव के पास जिस तरह तीन तमंचे मिले हैं और घर अंदर से बंद था, यह 'सुसाइड-मर्डर' की ओर इशारा करता है। संभावना है कि अशोक ने पहले अपनी मां, पत्नी और बच्चों को गोली मारी और फिर खुद को भी खत्म कर लिया। हालांकि, हम किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।"
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पुलिस की कार्रवाई:
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कॉल डिटेल्स (CDR): पुलिस ने सभी मृतकों, खासकर अशोक और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। आखिरी कॉल किसे की गई? क्या किसी से कोई विवाद हुआ था? इसकी जांच की जा रही है।
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बैलिस्टिक जांच: बरामद तीनों तमंचों को जांच के लिए लैब भेजा गया है ताकि यह पुष्टि हो सके कि गोलियां इन्हीं हथियारों से चली हैं।
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CCTV फुटेज: कॉलोनी के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घटना के वक्त कोई बाहरी व्यक्ति घर में तो नहीं आया था।
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वारदात के पीछे की 3 बड़ी थ्योरी (Theories Behind The Crime)
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पुलिस और जांच एजेंसियां फिलहाल तीन प्रमुख एंगल्स पर काम कर रही हैं। आखिर एक सरकारी नौकरी वाला व्यक्ति इतना बड़ा कदम क्यों उठाएगा?
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थ्योरी 1: आर्थिक तंगी और कर्ज का जाल (Debt Trap)
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अक्सर देखा गया है कि सामूहिक आत्महत्या के मामलों के पीछे बड़ा कर्ज होता है। क्या अशोक राठौर भारी कर्ज में डूबे थे? अमीन की नौकरी होने के बावजूद, क्या उन पर कोई देनदारी थी? क्या सट्टेबाजी, ऑनलाइन गेमिंग या किसी बड़े निवेश में नुकसान हुआ था? पुलिस उनके बैंक खातों को स्कैन कर रही है।
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थ्योरी 2: पारिवारिक कलह (Domestic Discord)
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पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पूछताछ में पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या पति-पत्नी के बीच संबंध ठीक थे? क्या घर में सास-बहू या पति-पत्नी के बीच कोई पुराना झगड़ा चल रहा था? कभी-कभी रोज-रोज के झगड़े इंसान को ऐसे मानसिक अवसाद (Depression) में धकेल देते हैं जहाँ उसे मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आता है।
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मानसिक स्वास्थ्य और 'साकोसिस' (Mental Health)
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क्या अशोक किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे? जिस तरह से उन्होंने 3 तमंचों का इंतजाम किया, वह एक 'सनक' या गहरे डिप्रेशन की ओर इशारा करता है। दिल्ली के बुराड़ी कांड की तरह, क्या यहाँ भी कोई अंधविश्वास या मानसिक भ्रम का मामला था? हालांकि, अभी तक अंधविश्वास के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन पुलिस इस एंगल को खारिज नहीं कर रही।
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थ्योरी 4: क्या यह हत्या है? (The Murder Angle)
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हालांकि घर अंदर से बंद था, लेकिन क्या ऐसा हो सकता है कि किसी ने हत्या करके दृश्य को आत्महत्या जैसा बना दिया हो? पुलिस इस एंगल की भी तस्दीक कर रही है। क्या अमीन की किसी से रंजिश थी? जमीन के मामलों से जुड़े होने के कारण क्या कोई पेशेवर दुश्मनी थी? यह जांच का विषय है।
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मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (Psychological Analysis)
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मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, 'फैमिलािसाइड' (Familicide) यानी पूरे परिवार की हत्या करके आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अक्सर 'नार्सिसिस्टिक' (Narcissistic) या गहरे 'डिप्रेशन' का शिकार होता है। वह सोचता है कि "मेरे बाद मेरे परिवार का क्या होगा? वे मेरे बिना नहीं जी पाएंगे, इसलिए उन्हें भी अपने साथ ले जाना ही बेहतर है।"
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इस केस में भी, अशोक ने अपनी बूढ़ी मां और मासूम बच्चों को नहीं बख्शा। यह दर्शाता है कि वह मानसिक रूप से बेहद अस्थिर हो चुके थे और उन्हें भविष्य में कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। तीन तमंचे जमा करना बताता है कि यह फैसला अचानक (Impulsive) नहीं था, बल्कि इसकी तैयारी शायद कई दिनों से चल रही थी।
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सवालो के घेरे में 'सिस्टम' और समाज
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यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
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हथियार कहाँ से आए? एक सरकारी कर्मचारी (अमीन) को 3 अवैध तमंचे और कारतूस कहाँ से मिले? क्या सहारनपुर में अवैध हथियारों का नेटवर्क इतना सुलभ है?
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पड़ोसी अनजान क्यों? 5 गोलियां चलीं और किसी पड़ोसी को आवाज नहीं आई? क्या आज का समाज इतना आत्म-केंद्रित हो गया है कि पड़ोस की दीवार के पीछे क्या हो रहा है, किसी को खबर नहीं होती?
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तनाव प्रबंधन: सरकारी नौकरियों में बढ़ते काम के दबाव और निजी जीवन की समस्याओं को सुलझाने के लिए क्या हमारे पास कोई मैकेनिज्म नहीं है?
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शाश्वत विहार का वह मकान अब सील है, लेकिन उसके अंदर की खामोशी बहुत शोर मचा रही है। अशोक राठौर अपनी समस्याओं का हल मौत में ढूंढने गए, लेकिन पीछे छोड़ गए सवालों का एक ऐसा पहाड़ जिसे सुलझाने में पुलिस को वक्त लगेगा।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ होगा कि मौत का समय क्या था और क्या परिवार के सदस्यों को कोई नशीला पदार्थ दिया गया था? तब तक, यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे आसपास हंसते-खेलते चेहरों के पीछे कितना दर्द छिपा हो सकता है।
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'खबरी लाल' इस मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है। जैसे ही पुलिस जांच में कोई नया मोड़ आएगा, हम आप तक सबसे पहले पहुंचाएंगे।
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सावधानी और अपील (Warning & Appeal)
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यह खबर अत्यंत संवेदनशील है। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव, अवसाद या कर्ज की समस्या से जूझ रहा है, तो कृपया बात करें। आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। सरकार और कई एनजीओ द्वारा चलाई जा रही हेल्पलाइन नंबर्स पर संपर्क करें। आपकी जिंदगी अनमोल है।
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