सहारनपुर पुलिस ने दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे (NH-72A) पर "यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है" लिखने के आरोप में 2 युवतियों और 1 युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी 'हिंदू रक्षा दल' से ज
Published at : 13 Mar 2026, 03:21 PM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
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Saharanpur 3 Arrested for Writing Hate Slogans
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश का यूपी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे पर सहारनपुर हाइवे नफरती स्लोगन (Saharanpur Highway Hate Slogan) लिखकर समाज में नफरत का बीज बोने वाले एक गिरोह को पुलिस ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। थाना बिहारीगढ़ पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो युवतियों और एक युवक को गिरफ्तार कर लिया है। ये तीनों आरोपी देहरादून के निवासी हैं और खुद को चरमपंथी हिंदू संगठन 'हिंदू रक्षा दल' का सक्रिय कार्यकर्ता बताते हैं। शुक्रवार को पुलिस ने तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से कोर्ट के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया गया है।READ ALSO:-यूपी में LPG गैस को लेकर मचा हाहाकार: पैनिक के बीच ₹2500 में बिक रहा सिलेंडर, कालाबाजारी पर CM योगी का बड़ा एक्शन
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इस घटना ने एक बार फिर से इस बहस को जन्म दे दिया है कि किस तरह सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और समाज को बांटने के लिए युवा पीढ़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है। आरोपियों ने नेशनल हाइवे पर खुलेआम स्प्रे पेंट से "यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है" (This road is not allowed for Muslims) जैसे बेहद आपत्तिजनक और असंवैधानिक नारे लिखे थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस की गिरफ्त में आने के बावजूद इन युवाओं के चेहरे पर अपने किए का कोई पछतावा या खौफ नजर नहीं आया। आइए इस पूरे सहारनपुर हाइवे नफरती स्लोगन मामले की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम, हिंदू रक्षा दल के विवादित इतिहास और इस कृत्य के कानूनी व सामाजिक पहलुओं का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ 26 फरवरी 2026 की शाम को जुड़ी हुई है। जानकारी के अनुसार, देहरादून की रहने वाली दो युवतियां और एक युवक अपने वाहन से दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे-72A (एलिवेटेड रोड) से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अपनी गाड़ी सड़क किनारे रोकी और एक सोची-समझी रणनीति के तहत सड़क किनारे बने सरकारी संपत्ति, विशेषकर सीमेंट के ब्लॉक और शेल्टर को अपना निशाना बनाया।
हाथों में स्प्रे पेंट के डिब्बे लिए इन युवतियों ने खुलेआम दीवारों पर सांप्रदायिक और नफरत भरे नारे लिखने शुरू कर दिए। उन्होंने यह भड़काऊ नारा केवल एक भाषा में नहीं, बल्कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा ताकि उनका नफरती संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। अंग्रेजी में स्पष्ट रूप से लिखा गया: "This road is not allowed for Muslims" (यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है)। वहीं दूसरी युवती ने इसी वाक्य को हिंदी में स्प्रे पेंट से दीवार पर उकेरा।
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जिस समय ये दोनों युवतियां इस गैर-कानूनी कृत्य को अंजाम दे रही थीं, उनके साथ मौजूद युवक इस पूरी घटना का बेखौफ होकर वीडियो बना रहा था। इस 59 सेकंड के वीडियो क्लिप को बाद में जानबूझकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया ताकि समाज के एक विशेष वर्ग को निशाना बनाया जा सके और अपने संगठन का प्रचार किया जा सके। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दोनों युवतियों ने अपने गले में भगवा रंग का गमछा डाला हुआ है। नारे लिखने के बाद, वे कैमरे की तरफ देखकर गर्व से "जय श्री राम" के नारे भी लगाती हैं, जिससे इस पूरी घटना को एक धार्मिक रंग देने की कोशिश साफ नजर आती है।
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गिरफ्तारी और आरोपियों का दुस्साहस: "सनातन के लिए 10 बार जेल जाएंगे"
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सोशल मीडिया पर जैसे ही यह 59 सेकंड का वीडियो क्लिप वायरल हुआ, सहारनपुर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एक व्यस्त नेशनल हाइवे पर इस तरह की सांप्रदायिक बयानबाजी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना को यूपी पुलिस ने बेहद गंभीरता से लिया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर थाना बिहारीगढ़ पुलिस ने तुरंत अज्ञात लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और साइबर सेल व सर्विलांस की मदद से आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।
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सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और सोशल मीडिया प्रोफाइल की सघन जांच के बाद, पुलिस ने आखिरकार इस गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया और देहरादून से दोनों युवतियों और वीडियो बनाने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी हैरानी की बात इन आरोपियों का रवैया था।
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अक्सर पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद अपराधी अपने किए पर शर्मिंदगी जताते हैं या माफी मांगते हैं। लेकिन इस सहारनपुर हाइवे नफरती स्लोगन मामले के आरोपियों ने ऐसा कुछ नहीं किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस कस्टडी में या उससे ठीक पहले रिकॉर्ड किए गए एक अन्य वीडियो में इन युवाओं ने खुलेआम प्रशासन को चुनौती दी। उन्होंने अपने कृत्य को सही ठहराते हुए कहा कि उन्हें इस बात का कोई पछतावा नहीं है। आरोपियों ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि "वे सनातन धर्म की रक्षा के लिए और अपने संगठन के लिए न सिर्फ एक बार, बल्कि 10 बार भी जेल जाने को तैयार हैं।" उनका यह बयान दर्शाता है कि किस हद तक इन युवाओं का 'ब्रेनवॉश' (Brainwash) किया गया है और वे संविधान से ऊपर अपनी कट्टरपंथी विचारधारा को मानते हैं।
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हिंदू रक्षा दल: विवादों और नफरती बयानों का पुराना नाता
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इस घटना के तार सीधे तौर पर 'हिंदू रक्षा दल' नामक एक दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन से जुड़े हुए हैं। पकड़े गए तीनों आरोपियों ने गर्व के साथ खुद को इस संगठन का सक्रिय कार्यकर्ता बताया है। इस घटना के वायरल होने के बाद, हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी (Pinky Chaudhary) ने बेशर्मी से इस घटना की जिम्मेदारी ली। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि सहारनपुर हाइवे पर ये नारे उनके संगठन की महिला कार्यकर्ताओं ने ही लिखे हैं और उनका संगठन इस कृत्य का पूरा समर्थन करता है।
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पिंकी चौधरी और उनके संगठन हिंदू रक्षा दल का विवादों से बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है। यह संगठन अक्सर समाज में सांप्रदायिक तनाव फैलाने, भड़काऊ भाषण देने और कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने के लिए जाना जाता है।
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शालीमार गार्डन, गाजियाबाद की हिंसक घटना (सितंबर 2025): सहारनपुर की घटना कोई पहली बार नहीं है जब इस संगठन ने दुस्साहस दिखाया हो। इससे कुछ महीने पहले ही, 29 सितंबर 2025 को हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं का एक बेहद खौफनाक 21 सेकंड का वीडियो क्लिप गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके से सामने आया था। इस फुटेज में संगठन के कई सदस्य हाथों में नंगी तलवारें, कुल्हाड़ियां और लाठी-डंडे लेकर सड़क पर खुलेआम घूमते नजर आ रहे थे। "भारत माता की जय" और अन्य धार्मिक नारे लगाते हुए, यह हथियारों से लैस भीड़ एक विशेष समुदाय के व्यक्ति के घर के सामने जाकर रुक गई थी और वहां जमकर दहशत फैलाई थी। उस समय भी पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं के खिलाफ बलवा करने और हथियारों का प्रदर्शन करने के आरोप में मामले दर्ज किए थे।
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बार-बार इस तरह की घटनाओं को अंजाम देना यह साबित करता है कि ऐसे संगठन लोकतांत्रिक मूल्यों और देश के कानून की परवाह नहीं करते। धर्म के नाम पर युवाओं को भड़काकर उन्हें अपराध की ओर धकेलना इनकी कार्यप्रणाली का एक मुख्य हिस्सा बन चुका है।
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कानूनी और संवैधानिक विश्लेषण: किन धाराओं में होगी कार्रवाई?
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भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहां का संविधान (अनुच्छेद 15) धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को पूरी तरह से निषेध करता है। भारत की सड़कें, हाइवे और सार्वजनिक संपत्तियां देश के हर नागरिक की हैं, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। ऐसे में सहारनपुर हाइवे नफरती स्लोगन जैसी घटना केवल एक शरारत नहीं, बल्कि देश के संविधान और कानून पर सीधा हमला है।
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कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, थाना बिहारीगढ़ पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS - जो पहले IPC थी) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
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सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना (Promoting Enmity): धर्म, जाति या जन्म स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बिगाड़ने वाले कार्य करना एक गंभीर गैर-जमानती अपराध है।
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धार्मिक भावनाओं को आहत करना (Outraging Religious Feelings): जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना। 'यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है' लिखकर आरोपियों ने स्पष्ट रूप से एक विशेष समुदाय को अपमानित करने और उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक महसूस कराने की कोशिश की है।
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सार्वजनिक शांति भंग करने का इरादा (Public Mischief): ऐसे बयान या नारे लिखना जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की पूरी संभावना हो या जिससे दंगा भड़क सकता हो।
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सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (Prevention of Damage to Public Property Act): नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की संपत्तियों, जैसे दीवारों, रेलिंग और शेल्टर पर स्प्रे पेंट से भद्दे नारे लिखकर सरकारी संपत्ति को विरूपित (Deface) करना और नुकसान पहुंचाना।
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इन सभी धाराओं में दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को 3 से 5 साल तक की कड़ी कैद और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है। इसके अलावा, राज्य सरकार ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) या गुंडा एक्ट लगाने पर भी विचार कर सकती है ताकि भविष्य के लिए एक सख्त नजीर (Precedent) पेश की जा सके।
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सोशल मीडिया: नफरत फैलाने का सबसे बड़ा हथियार
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सहारनपुर हाइवे नफरती स्लोगन मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया की दोधारी तलवार वाली भूमिका को उजागर किया है। आज के दौर में, अपराधी अपराध केवल इसलिए नहीं करते कि उन्हें किसी को नुकसान पहुंचाना है; वे अपराध इसलिए करते हैं ताकि उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया (Instagram Reels, Facebook, X/Twitter, WhatsApp) पर डाल सकें और रातों-रात 'हीरो' बन सकें।
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युवाओं के भीतर यह भ्रांति घर कर गई है कि कट्टरपंथी और नफरती बातें बोलकर या ऐसा कोई वीडियो बनाकर वे आसानी से हजारों 'फॉलोअर्स' (Followers) बटोर सकते हैं। इस घटना में भी 59 सेकंड का वीडियो क्लिप इसी मानसिकता का परिचायक है। युवक कैमरे के पीछे से निर्देश दे रहा था और युवतियां बड़े ही नाटकीय अंदाज में नारे लिख रही थीं। पृष्ठभूमि में धार्मिक नारों का इस्तेमाल इसे 'वायरल' सामग्री बनाने के लिए किया गया था।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम अक्सर विवादित और भड़काऊ सामग्री को तेजी से बढ़ावा देते हैं क्योंकि इससे लोगों का 'एंगेजमेंट' (Engagement) बढ़ता है। इसी खामी का फायदा हिंदू रक्षा दल जैसे संगठन उठा रहे हैं। वे भड़काऊ वीडियो के जरिए दूसरे युवाओं का 'ब्रेनवॉश' करते हैं, उन्हें एक झूठा गौरव (False Pride) महसूस कराते हैं, और अंततः उन्हें ऐसे आपराधिक कृत्य करने के लिए उकसाते हैं जिसके लिए उन्हें जेल की हवा खानी पड़ती है। पुलिस और साइबर सेल के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती केवल सड़क पर अपराध रोकना नहीं है, बल्कि इंटरनेट पर तेजी से फैल रहे इस 'वर्चुअल आतंकवाद' (Virtual Terrorism) से निपटना भी है।
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समाज और प्रशासन के लिए क्या हैं इसके मायने?
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यह घटना उत्तर प्रदेश प्रशासन और आम समाज दोनों के लिए एक गहरी चिंता का विषय है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार हमेशा से कानून-व्यवस्था (Law and Order) और 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति की वकालत करती रही है। ऐसे में प्रदेश के एक प्रमुख नेशनल हाईवे पर खुलेआम इस तरह की घटना का होना प्रशासन के लिए एक चुनौती है।
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हालांकि, सहारनपुर पुलिस ने जिस तत्परता से आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया और 24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश कर जेल भेजा, वह काबिले तारीफ है। इस त्वरित कार्रवाई से समाज में एक कड़ा संदेश गया है कि कोई भी व्यक्ति या संगठन खुद को कानून से ऊपर नहीं समझ सकता।
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लेकिन, केवल पुलिसिया कार्रवाई ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। समाज के बुद्धिजीवियों, धार्मिक गुरुओं और शिक्षाविदों को आगे आना होगा। युवाओं को यह समझाना होगा कि सनातन धर्म का मूल मंत्र 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (पूरी दुनिया एक परिवार है) है, न कि किसी विशेष समुदाय के प्रति नफरत फैलाना। जो नेता या संगठन उन्हें धर्म के नाम पर हथियार उठाने या नफरत फैलाने के लिए उकसा रहे हैं, वे दरअसल उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जेल जाने से न तो किसी धर्म की रक्षा होती है और न ही देश का विकास होता है; इससे केवल एक युवा का करियर और जीवन बर्बाद होता है।
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कानून का राज ही है सर्वोपरि
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अंततः, सहारनपुर हाइवे नफरती स्लोगन का यह पूरा मामला हमारे सामाजिक ताने-बाने पर एक गहरा आघात है। 'यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है' जैसी संकीर्ण और विभाजनकारी सोच को एक स्वतंत्र और विविधतापूर्ण भारत में कोई जगह नहीं दी जा सकती। हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया यह कृत्य और गिरफ्तारी के बाद उनका दुस्साहस इस बात का प्रमाण है कि कट्टरपंथ किसी भी धर्म में हो, वह हमेशा विनाशकारी ही होता है।
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न्यायपालिका और उत्तर प्रदेश पुलिस को इस मामले में ऐसी सख्त मिसाल कायम करनी चाहिए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या संगठन भारत की सड़कों, दीवारों और सोशल मीडिया का इस्तेमाल सांप्रदायिक जहर घोलने के लिए न कर सके। वहीं आम नागरिकों को भी ऐसे भड़काऊ वीडियो को शेयर करने से बचना चाहिए और अपने बच्चों को सही शिक्षा और सहिष्णुता के संस्कार देने चाहिए, ताकि वे किसी चरमपंथी संगठन के राजनीतिक मोहरे न बन सकें। भारत की सड़कें सभी भारतीयों के लिए हैं, और यह अधिकार उनसे कोई नहीं छीन सकता।
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सहारनपुर पुलिस ने दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे पर सांप्रदायिक और भड़काऊ नारे लिखने के आरोप में हिंदू रक्षा दल के 3 सदस्यों (दो युवतियों और एक युवक) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 26 फरवरी को इन आरोपियों ने सीमेंट ब्लॉक पर स्प्रे पेंट से "यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है" लिखा था और इसका वीडियो वायरल किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने कोई पछतावा नहीं जताया और कहा कि वे 'सनातन के लिए 10 बार जेल जाने को तैयार हैं'। हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस कृत्य की जिम्मेदारी ली है। पुलिस ने इस मामले में कठोर धाराओं में कार्रवाई की है, जिससे समाज में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने का सख्त संदेश दिया गया है।
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