पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के एमडी रवीश गुप्ता ने स्मार्ट मीटरों पर रोक की सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। उपभोक्ताओं की समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए विशेष सेल का गठन किया गया है और अब हर मीटर पर एक 'क्यूआर कोड' (QR Code) लगाया जाएगा, जिससे उपभोक्ता अपने फोन से ही मीटर की पूरी कुंडली जान सकेंगे।
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मेरठ (Energy Desk): उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को हाईटेक बनाने और स्मार्ट ग्रिड (Smart Grid) की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के अंतर्गत आने वाले वेस्ट यूपी के 14 जिलों में 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' (Smart Prepaid Meter) लगाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। पिछले कुछ दिनों से इन मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं में कई तरह की भ्रांतियां और रोक लगने की अफवाहें फैल रही थीं। लेकिन बुधवार को ऊर्जा भवन (Urja Bhavan) में आयोजित एक अहम प्रेसवार्ता में पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक (MD) रवीश गुप्ता ने इन सभी अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है।READ ALSO:-आम आदमी को बड़ी राहत: खाड़ी देशों में भारी तनाव के बावजूद भारत में नहीं होगी रसोई गैस की किल्लत, सरकार ने किया 'फुल सप्लाई' का वादा
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एमडी रवीश गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के अभियान पर फिलहाल कोई रोक नहीं है और यह प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रहेगी। साथ ही, उपभोक्ताओं के अनुभव को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए विभाग कई नए और अभिनव प्रयोग करने जा रहा है।
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर रोक का कोई आदेश नहीं
\r\n\r\nहाल ही में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (Central Electricity Authority) द्वारा प्रीपेड मीटरों को लेकर जारी किए गए कुछ दिशा-निर्देशों के बाद यह अफवाह उड़ी थी कि इन मीटरों की स्थापना पर रोक लगा दी गई है। पत्रकारों द्वारा पूछे गए इस सीधे सवाल के जवाब में एमडी रवीश गुप्ता ने बताया, "वर्तमान में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की स्थापना रोकने का शासन या प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है। हमारा काम पूर्व निर्धारित लक्ष्य के अनुसार जारी है। यदि भविष्य में सरकार या उच्च स्तर से कोई आदेश आता है, तो उसका अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।"
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बड़ा बदलाव: अब स्मार्ट मीटर पर लगेगा 'QR कोड'
\r\n\r\nइस योजना का सबसे बड़ा और उपभोक्ता-हितैषी बदलाव 'क्यूआर कोड' (QR Code) प्रणाली है। वाणिज्य निदेशक (Director Commercial) संजय जैन ने इस नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि अब जिन भी उपभोक्ताओं के घरों या प्रतिष्ठानों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, उन मीटरों पर एक विशेष क्यूआर कोड वाला स्टिकर अनिवार्य रूप से चस्पा किया जाएगा।
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क्या होगा इसका फायदा? इस क्यूआर कोड को उपभोक्ता अपने स्मार्टफोन से स्कैन कर सकेंगे। स्कैन करते ही उपभोक्ता के मोबाइल स्क्रीन पर स्मार्ट मीटर से संबंधित सारी जानकारी आ जाएगी; जैसे— मीटर का सीरियल नंबर, कनेक्शन की क्षमता, पिछला रिचार्ज, वर्तमान बैलेंस, कस्टमर केयर नंबर और स्मार्ट मीटर के संचालन से जुड़े सभी आवश्यक दिशा-निर्देश। इससे उपभोक्ताओं को छोटी-छोटी जानकारी के लिए बिजली घर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और पूरी व्यवस्था में एक अभूतपूर्व पारदर्शिता (Transparency) आएगी।
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शिकायतों के निस्तारण के लिए बना 'विशेष सेल', 98% शिकायतें सुलझीं
\r\n\r\nशुरुआती दौर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की काफी शिकायतें आ रही थीं, जिनमें रिचार्ज के बाद भी बिजली चालू न होने की समस्या सबसे प्रमुख थी। एमडी रवीश गुप्ता ने बताया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने के लिए निगम मुख्यालय में एक 'विशेष सेल' (Special Grievance Cell) का गठन किया गया है।
\r\n\r\nआंकड़े पेश करते हुए उन्होंने बताया कि:
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- \r\n पश्चिमांचल क्षेत्र में स्मार्ट मीटर से जुड़ी कुल 24,396 शिकायतें प्राप्त हुई थीं।\r\n \r\n
- \r\n विभाग की मुस्तैदी से इनमें से 24,003 (लगभग 98%) शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण (Resolution) कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n वर्तमान स्थिति यह है कि 'रिकनेक्शन' (रिचार्ज के बाद बिजली न जुड़ने) से संबंधित लंबित शिकायतों की संख्या लगभग शून्य (Zero) हो चुकी है।\r\n \r\n
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ग्राउंड रियलिटी: 1700 घर बंद मिले, 300 पड़ोसी की बिजली से कर रहे थे काम
\r\n\r\nस्मार्ट मीटर के शुरुआती चरण में कुछ तकनीकी अड़चनें सामने आई थीं। पेमेंट गेटवे (Payment Gateway) के सर्वर में देरी के कारण कई बार ऐसा हुआ कि उपभोक्ता ने रिचार्ज कर लिया, लेकिन मीटर तक कमांड न पहुंचने से बिजली चालू नहीं हुई।
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इस समस्या के समाधान के लिए पीवीवीएनएल ने एक विशेष अभियान चलाया। अधिकारियों और तकनीकी टीमों ने ऐसे उपभोक्ताओं से सीधे फोन पर संपर्क किया और घर-घर जाकर स्थिति का जायजा लिया। इस फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
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- \r\n जांच टीम को 1700 उपभोक्ताओं के घर ऐसे मिले, जो बाहर से ताला बंद थे, जिस कारण मीटर की स्थिति जांचना संभव नहीं हो सका।\r\n \r\n
- \r\n वहीं, 300 लोग ऐसे पकड़े गए जो अपना स्मार्ट मीटर रिचार्ज करने के बजाय जुगाड़ लगाकर पड़ोसियों के कनेक्शन से बिजली का प्रयोग कर रहे थे। विभाग ने इन सभी लोगों को चेतावनी देने के साथ-साथ समय पर मीटर रिचार्ज करने और स्मार्ट मीटर के फायदों के प्रति जागरूक किया।\r\n \r\n
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नेगेटिव बैलेंस (Negative Balance) रिकवरी: 334 करोड़ रुपये का राजस्व मिला
\r\n\r\nस्मार्ट मीटर योजना से न केवल उपभोक्ताओं को सहूलियत मिल रही है, बल्कि बिजली विभाग के वित्तीय घाटे में भी बड़ी कमी आ रही है। बहुत से उपभोक्ताओं के खाते 'ऋणात्मक शेष' (Negative Balance) में चले गए थे। एमडी ने बताया कि पश्चिमांचल के सभी 14 जिलों में अधिकारियों द्वारा एक व्यक्तिगत संपर्क अभियान चलाया गया।
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इस अभियान के शानदार नतीजे मिले हैं। पश्चिमांचल के लगभग 8.50 लाख (साढ़े आठ लाख) उपभोक्ताओं ने अपने बकाया बिल का भुगतान कर अपने नकारात्मक शेष को सकारात्मक (Positive) बैलेंस में बदल लिया है। इससे डिस्कॉम (Discom) को सीधे तौर पर लगभग 334 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह विभाग की एक बहुत बड़ी वित्तीय सफलता मानी जा रही है।
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ऑडिट और जागरूकता अभियान से बढ़ रहा है भरोसा
\r\n\r\nबिलिंग प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं का भरोसा जीतने के लिए विभाग अब बिल सुधार प्रक्रिया का 'ऑडिट' (Audit) भी करा रहा है। इससे किसी भी प्रकार की वित्तीय हेराफेरी या मनमानी पर रोक लगेगी।
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रवीश गुप्ता ने बताया कि पश्चिमांचल के अंतर्गत आने वाले लगभग 80 लाख उपभोक्ताओं में से अब तक 22 प्रतिशत उपभोक्ताओं के यहाँ स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं। जैसे-जैसे लोग इस नई तकनीक के प्रति जागरूक हो रहे हैं, शिकायतों का ग्राफ तेजी से नीचे गिर रहा है।
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उन्होंने आश्वस्त किया कि मल्टी-लेवल मॉनिटरिंग (Multi-level Monitoring) के कारण तकनीकी खामियां खत्म हो रही हैं और जल्द ही वेस्ट यूपी की पूरी बिजली व्यवस्था स्मार्ट ग्रिड में तब्दील हो जाएगी। निगम की ओर से उपभोक्ताओं को पंफ्लेट बांटकर और 11 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मोबाइल पर SMS भेजकर भी जागरूक किया जा रहा है।
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इस महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता के अवसर पर पीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता (Chief Engineers) पी.के. सिंह, सोनम सिंह, सुनील कुमार, और एच.के. सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
Sabse pehle comment karne wale banein.