प्रयागराज, विशेष संवाददाता: संगम नगरी प्रयागराज में आगामी चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग ने अब तक का सबसे बड़ा और गहन सत्यापन अभियान छेड़ दिया है। अगर आप सोचते हैं कि वोटर लिस्ट में आपका नाम सुरक्षित है, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। आयोग ने सत्यापन (Verification) का पैमाना बदल दिया है। अब आपकी पहचान मौजूदा आधार कार्ड या राशन कार्ड से नहीं, बल्कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची से की जा रही है।READ ALSO:-हवा में थम गईं सांसें: दिल्ली से उड़ी एअर इंडिया की विशालकाय फ्लाइट का इंजन 40 मिनट में फेल, 335 यात्रियों की जान पर बन आई; सफल इमरजेंसी लैंडिंग
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जिला निर्वाचन अधिकारी और डीएम मनीष कुमार वर्मा के नेतृत्व में चल रहे इस एसआईआर (Special Summary Revision) अभियान ने राजनीतिक दलों और आम जनता दोनों के बीच हलचल मचा दी है। प्रशासन का मकसद साफ है—मतदाता सूची से हर उस नाम को हटाना जो या तो फर्जी है, या जिसकी पुष्टि पुराने रिकॉर्ड्स से नहीं हो पा रही है।
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आइए विस्तार से समझते हैं कि आयोग की यह नई 'त्रि-स्तरीय' जांच क्या है और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा।
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क्यों खंगाले जा रहे हैं 2003 के पुराने पन्ने?

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चुनाव आयोग का मानना है कि मतदाता सूची में समय के साथ कई गड़बड़ियां आ जाती हैं। कई बार बाहरी लोग बिना पुख्ता सबूतों के नाम जुड़वा लेते हैं। इसे रोकने के लिए आयोग ने वर्ष 2003 को 'बेस ईयर' (आधार वर्ष) माना है।
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प्रक्रिया के तहत, वर्तमान मतदाता सूची में शामिल हर व्यक्ति का मिलान 2003 की सूची से किया जा रहा है। प्रशासन का तर्क है कि अगर कोई व्यक्ति मूल निवासी है, तो उसका या उसके पूर्वजों (माता-पिता, दादा-दादी) का नाम 2003 की सूची में होना ही चाहिए।
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मकसद:

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    चुनाव प्रक्रिया को सुचारू बनाना।
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    फर्जी वोटरों (Bogus Voters) की पहचान करना।
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    जनसांख्यिकीय बदलावों (Demographic Changes) की निगरानी करना।
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मतदाताओं की तीन श्रेणियां: आप किसमें हैं?

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जिला प्रशासन ने सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए वोटर्स को तीन श्रेणियों (Categories) में बांटा है। यह वर्गीकरण तय करेगा कि आपको नोटिस मिलेगा या नहीं।
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1. पहली श्रेणी: सुरक्षित मतदाता

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इस श्रेणी में वे लोग शामिल हैं जिनका नाम खुद वर्ष 2003 की मतदाता सूची में मौजूद है।
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    स्थिति: ये मतदाता पूरी तरह सुरक्षित हैं।
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    प्रक्रिया: इनका रिकॉर्ड उपलब्ध है, इसलिए इनका सत्यापन सबसे सरल है। इन्हें अपनी नागरिकता या निवास साबित करने के लिए कोई अतिरिक्त प्रमाण पत्र देने की आवश्यकता नहीं है।
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2. दूसरी श्रेणी: परिवार के नाम पर सत्यापन

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इस श्रेणी में वे युवा या मध्यम आयु वर्ग के लोग हैं, जो 2003 में वोटर बनने की उम्र में नहीं थे, लेकिन उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम 2003 की सूची में है।
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    स्थिति: ये भी सुरक्षित माने जाएंगे, लेकिन जांच के बाद।
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    प्रक्रिया: ऐसे मामलों में प्रशासन परिवार के पुराने रिकॉर्ड (Old Lineage Records) का मिलान करेगा। अगर लिंक स्थापित हो जाता है, तो नाम सूची में बरकरार रहेगा।
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3. तीसरी श्रेणी: रेड जोन (खतरे की घंटी)

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यह सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील श्रेणी है। इसमें वे मतदाता शामिल हैं जिनका न तो खुद का नाम और न ही उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम 2003 की सूची में मिल रहा है।
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    स्थिति: संदिग्ध। इनका नाम कटने की कगार पर हो सकता है।
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    प्रक्रिया: आयोग इन्हें नोटिस (Notice) जारी करने की तैयारी में है।
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    राहत की खबर: नोटिस भेजने से पहले आयोग ने एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नोटिस भेजने से पहले "एक बार फिर" गहराई से 2003 की सूची खंगाली जाए। हो सकता है नाम की स्पेलिंग में गलती हो या वार्ड बदला हो। आयोग का प्रयास है कि कम से कम लोगों को नोटिस भेजा जाए ताकि आम जनता परेशान न हो।
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ASD वोटर्स पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'

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एसआईआर (SIR) अभियान का एक और प्रमुख हिस्सा है ASD वोटर्स की पहचान करना। ASD का मतलब:
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    A - Absent (अनुपस्थित)
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    S - Shifted (स्थानांतरित/मकान बदल चुके)
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    D - Dead (मृतक)
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जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर साफ कर दिया है कि ASD लिस्ट को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
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मंगलवार से 3 दिन का महाभियान

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जिला प्रशासन मंगलवार से अगले तीन दिनों तक एक विशेष अभियान चला रहा है। इसके तहत:
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    जिला स्तरीय अधिकारी प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में जाएंगे।
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    वे बूथों पर जाकर प्रतिदिन चार चरणों में निरीक्षण करेंगे।
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    मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जो नाम ASD लिस्ट में डाले गए हैं, वे वाकई में वहां नहीं रहते या मृत हैं।
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26 दिसंबर: वापसी का आखिरी मौका

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डीएम ने बड़ी राहत देते हुए कहा है कि बीएलओ (Booth Level Officers) द्वारा बनाई गई ASD लिस्ट राजनीतिक दलों के साथ साझा कर दी गई है और वेबसाइट पर भी अपलोड है।
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    चेतावनी: "अगर किसी जीवित और वहां रहने वाले व्यक्ति का नाम गलती से ASD लिस्ट में डाल दिया गया है, तो उसे 26 दिसंबर तक ठीक (Rollback) कराया जा सकता है।"
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    इसके बाद लिस्ट फाइनल हो जाएगी और फिर नाम जुड़वाना मुश्किल होगा।
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डिजिटल हुआ डेटा: 30 लाख वोटर्स की मैपिंग

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प्रयागराज प्रशासन ने तकनीक का सहारा लेते हुए मतदाता सूची को डिजिटल कर दिया है।
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    आंकड़े: अब तक कुल 30,31,144 मतदाताओं का डिजिटाइजेशन और मैपिंग का कार्य पूरा हो चुका है। यह कुल काम का 86.15% है।
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    पारदर्शिता: भारत निर्वाचन आयोग के ECI-Net Portal पर ASD श्रेणी के मतदाताओं की पूरी सूची हिंदी अनुवाद के साथ उपलब्ध करा दी गई है। कोई भी व्यक्ति या पार्टी प्रतिनिधि इसे डाउनलोड कर जांच सकता है।
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डीएम ने सभी राजनीतिक दलों (बीजेपी, सपा, कांग्रेस, बसपा आदि) से अपील की है कि वे अपने बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) को सक्रिय करें। बीएलए और बीएलओ मिलकर काम करें ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए और कोई अपात्र सूची में बना न रहे।
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नए वोटर्स के लिए सुनहरा मौका (Form-6)

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जहां एक तरफ छंटनी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ नए वोटर्स को जोड़ने का काम भी जोरों पर है।
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    पात्रता:

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      जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है।
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      जो 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष के हो जाएंगे।
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      वे लोग जो पहले वोटर थे लेकिन किसी कारणवश उनका नाम कट गया है।
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    कार्रवाई: ऐसे सभी लोग अपने बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म-6 (Form-6) भरें।
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    कब आएगा नाम? अभी आवेदन करने वालों का नाम 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित होने वाले फाइनल ड्राफ्ट रोल (Final Draft Roll) में शामिल किया जाएगा।
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अधिकारियों का कड़ा रुख

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बैठक के दौरान एडीएम प्रशासन पूजा मिश्रा भी मौजूद रहीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं। अगर बीएलओ को सहयोग नहीं मिला या जानकारी छिपाई गई, तो सत्यापन में दिक्कत आ सकती है।
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डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा, "हमारा उद्देश्य किसी भी वास्तविक पात्र नागरिक का नाम सूची से न छूटने देना है। लेकिन साथ ही, सूची की शुद्धता (Purity of Roll) हमारी प्राथमिकता है। 2003 के रिकॉर्ड एक पैमाना हैं, अंतिम फैसला नहीं। हम हर संदिग्ध मामले की दोबारा जांच करवा रहे हैं।"
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आम जनता के लिए सलाह: अब क्या करें?

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    लिस्ट चेक करें: तुरंत चुनाव आयोग की वेबसाइट या अपने बीएलओ के पास जाकर चेक करें कि आपका नाम सामान्य सूची में है या ASD लिस्ट में।
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    दस्तावेज तैयार रखें: अगर आपके परिवार को नोटिस मिलता है, तो 2003 या उससे पहले के निवास प्रमाण (पुराना राशन कार्ड, पुराना बिजली बिल, पूर्वजों की वोटर आईडी) तैयार रखें।
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    26 दिसंबर की तारीख याद रखें: अगर आपका नाम गलत तरीके से कटा है या ASD में है, तो 26 दिसंबर से पहले आपत्ति दर्ज कराएं।
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प्रयागराज में चल रही यह कवायद न केवल मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाएगी, बल्कि आने वाले चुनावों में फर्जी वोटिंग की गुंजाइश को भी खत्म करेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनता मिलकर इस महाभियान को कितना सफल बना पाते हैं।
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