प्रयागराज से 40 किलोमीटर दूर, गंगा के पावन तट पर स्थित श्रृंगवेरपुर धाम... यह वही पवित्र भूमि है, जहाँ त्रेता युग में वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम की भेंट उनके अनन्य मित्र निषादराज केवट से हुई थी और यहीं से उन्होंने गंगा पार की थी। सामाजिक समरसता के इस प्रतीक स्थल को अब योगी सरकार एक विश्व-स्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर रही है।READ ALSO:-कर्मचारियों के लिए मोदी सरकार का बड़ा फैसला- 8वें वेतन आयोग के गठन को मिली मंजूरी, 50 लाख कर्मचारियों को 18 महीने में मिलेगा तोहफा!
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस समग्र विकास परियोजना का मुख्य आकर्षण केंद्र बन रहा है ₹19.58 करोड़ की लागत से 2 हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाला एक अनोखा 'बोट के आकार का म्यूजियम'। यह म्यूजियम न सिर्फ एक इमारत होगी, बल्कि 'टाइम ट्रेवल' का एक ज़रिया भी बनेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
रथ पर बैठकर 'त्रेता युग' का अनोखा अनुभव
\r\n\r\nक्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह के अनुसार, यह म्यूजियम पर्यटकों को एक अविस्मरणीय अनुभव देने के लिए डिज़ाइन किया गया है:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n रथ पर सवारी: दर्शकों को म्यूजियम के भीतर एक भव्य रथ में बैठाकर ले जाया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति: अंदर पहुँचते ही, पर्यटक अत्याधुनिक दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति (Audio-Visual Presentation) के माध्यम से त्रेता युग के घने जंगलों, बहती नदी और वन्य जीवन को साक्षात अनुभव कर पाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n नंगे पांव जंगल की सैर: सबसे अनूठी व्यवस्था यह होगी कि पर्यटकों को म्यूजियम में नंगे पांव टहलने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए फर्श को विशेष रूप से मिट्टी और पत्थर के मिश्रण से तैयार किया जा रहा है, ताकि लोगों को जंगल और नदी किनारे की प्राकृतिक और आध्यात्मिक भावना का गहराई से स्पर्श महसूस हो सके।\r\n \r\n
\r\n\r\n
कब तक होगा तैयार? (मार्च 2026 का लक्ष्य)
\r\n\r\nपर्यटन विभाग और PWD की संयुक्त देखरेख में चल रहे इस प्रोजेक्ट का लगभग 40% काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने इसे मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
सिर्फ म्यूजियम नहीं, एक संपूर्ण सांस्कृतिक हब
\r\n\r\nयह पूरा परिसर पर्यटकों को हर सुविधा देने के लिए विकसित किया जा रहा है:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n ओपन एम्फीथिएटर: एक खुला सांस्कृतिक मंच बनेगा, जहाँ स्थानीय कलाकार रामायण, निषादराज कथा और लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगे।\r\n \r\n
- \r\n क्राफ्ट ज़ोन: निषाद समुदाय और स्थानीय कारीगरों के हस्तशिल्प को यहाँ प्रदर्शित किया जाएगा। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि प्रयागराज के 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) के तहत मूंज क्राफ्ट को भी यहाँ विशेष बढ़ावा मिलेगा।\r\n \r\n
- \r\n आधुनिक कैफेटेरिया: 'देसी लुक' वाले इस कैफेटेरिया में पर्यटक स्थानीय और पारंपरिक शाकाहारी व्यंजनों का लुत्फ उठा सकेंगे।\r\n \r\n
- \r\n रिवर व्यू प्वाइंट: गंगा की लहरों और श्रृंगवेरपुर के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए एक 'रिवर व्यू प्वाइंट' भी बनाया जा रहा है, जो सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का अद्भुत नज़ारा पेश करेगा।\r\n \r\n
- \r\n विशाल पार्किंग: पर्यटकों के वाहनों के लिए विशाल पार्किंग बनेगी, जहाँ से म्यूजियम तक शटल बस और रथ जैसी सवारी की व्यवस्था होगी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
₹37.81 करोड़ से बदल रही है श्रृंगवेरपुर की सूरत
\r\n\r\nयोगी सरकार ने श्रृंगवेरपुर के समग्र विकास के लिए कुल ₹37.81 करोड़ स्वीकृत किए हैं। बोट म्यूजियम के अलावा, यहाँ कई कार्य पहले ही पूरे हो चुके हैं, जिनमें निषादराज पार्क, श्रीराम-निषादराज की 18 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा, घाटों का सौंदर्यीकरण और टूरिस्ट गेस्ट हाउस शामिल हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इसके अतिरिक्त, ₹3300 करोड़ की लागत से गंगा पर 6-लेन पुल की घोषणा भी हो चुकी है, जो 'राम वन गमन मार्ग' के इस प्रमुख पड़ाव को सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ेगा और स्थानीय नाविकों के लिए सीएनजी नावों की व्यवस्था भी की जा रही है।
Sabse pehle comment karne wale banein.