उत्तर प्रदेश के आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। अमूल (Amul) और मदर डेयरी (Mother Dairy) जैसी राष्ट्रीय कंपनियों के बाद अब यूपी के सबसे बड़े और लोकप्रिय डेयरी ब्रांड पराग (Parag Dairy) ने भी अपने ग्राहकों की जेब ढीली करने का फैसला किया है। कंपनी ने Parag Milk Price Hike का ऐलान करते हुए दूध की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है। पराग के महाप्रबंधक (GM) की ओर से गुरुवार को ही इसके आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए गए थे। नई दरें 15 मई 2026 की शाम से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएंगी। फुल क्रीम से लेकर टोंड और स्टैंडर्ड मिल्क तक, कंपनी ने अपने हर प्रमुख सेगमेंट में दाम बढ़ा दिए हैं।Read also:-15 मई की सुबह महंगाई का भीषण प्रहार: पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में लगी 'आग'; जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर
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इस बढ़ोतरी के बाद अब पराग का फुल क्रीम दूध 69 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 71 रुपए प्रति लीटर हो गया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में जब दूध, दही और छाछ की खपत अपने चरम पर होती है, तब इस तरह की मूल्य वृद्धि ने सीधे तौर पर घरेलू बजट का गणित बिगाड़ दिया है।
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Parag Milk Price Hike: जानिए आपके पसंदीदा दूध की नई दरें क्या हैं

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पराग डेयरी ने अपने अलग-अलग वेरिएंट और पैकिंग साइज के हिसाब से कीमतों में बदलाव किया है। छोटे पैक से लेकर व्यावसायिक इस्तेमाल में आने वाले बड़े पैक तक, सभी की नई रेट लिस्ट जारी कर दी गई है।
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    पराग गोल्ड (FCM Gold): पराग गोल्ड के 500 एमएल (आधा लीटर) पैक की कीमत अब 35 रुपए से बढ़ाकर 36 रुपए कर दी गई है। वहीं, एक लीटर का पैक अब 69 रुपए की जगह 71 रुपए में मिलेगा। अगर आप बड़ा पैक लेते हैं, तो पराग गोल्ड के छह लीटर पैक की कीमत 420 रुपए से बढ़ाकर 425 रुपए कर दी गई है।
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    पराग टोंड मिल्क (Toned Milk): जो लोग टोंड दूध का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अब 500 एमएल पैक के लिए 29 रुपए के बजाय 30 रुपए चुकाने होंगे। एक लीटर पैक अब 57 रुपए के स्थान पर 59 रुपए में मिलेगा। टोंड मिल्क के पांच लीटर पैक की दर 285 रुपए से बढ़ाकर 290 रुपए कर दी गई है।
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    स्टैंडर्ड मिल्क (Standard Milk): स्टैंडर्ड मिल्क के 500 एमएल पैक की कीमत 32 रुपए से बढ़ाकर 33 रुपए कर दी गई है। वहीं, पांच लीटर पैक में सबसे अधिक 10 रुपए की एकमुश्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी नई कीमत अब 300 रुपए होगी, जो पहले महज 290 रुपए थी।
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    टी-स्पेशल मिल्क (Tea Special): चाय की दुकानों और होटलों में इस्तेमाल होने वाले टी-स्पेशल मिल्क के एक लीटर पैक की कीमत भी 64 रुपए से बढ़ाकर 66 रुपए कर दी गई है।
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अमूल और मदर डेयरी के मुकाबले अभी भी एक रुपए सस्ता है पराग

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पराग ने भले ही दूध के दाम बढ़ा दिए हों, लेकिन बाजार में प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह अभी भी अन्य प्रमुख ब्रांड्स से मामूली रूप से सस्ता है। बुधवार, 13 मई 2026 को अमूल और मदर डेयरी ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जो 14 मई से लागू हो चुकी है। इन दोनों राष्ट्रीय ब्रांड्स की तुलना में पराग के दाम प्रति लीटर अभी भी एक रुपए कम हैं। यह एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है ताकि उत्तर प्रदेश के विशाल बाजार में पराग अपनी मजबूत पकड़ और ग्राहक आधार को बनाए रख सके।
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आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दूध के दाम? 30 फीसदी तक बढ़ा ट्रांसपोर्ट का खर्च

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दूध की कीमतों में अचानक आए इस उछाल के पीछे कई आर्थिक और ढांचागत कारण हैं। पराग के एक सीनियर अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दूध की कुल लागत में करीब 30 फीसदी तक का खर्च सिर्फ ट्रांसपोर्ट (परिवहन) का आता है। इसमें ग्रामीण इलाकों में किसानों और डेयरी वालों के यहां से दूध एकत्र करने से लेकर, उसे प्रोसेसिंग प्लांट तक लाने और फिर पैक करके शहरों की दुकानों तक पहुंचाने का पूरा चक्र शामिल है।
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अधिकारी के मुताबिक, "पिछले कुछ महीनों से डीजल की कीमतों और वाहनों के रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावा, गर्मियों के मौसम में कोल्ड चेन (Cold Chain) को मेंटेन करने के लिए बिजली और जनरेटर का खर्च भी बढ़ जाता है। अमूल और मदर डेयरी द्वारा रेट बढ़ाए जाने के बाद क्षेत्रीय कंपनियों पर भी दबाव था कि वे किसानों को उचित मूल्य देने और अपने बढ़ते खर्चों को संतुलित करने के लिए दाम बढ़ाएं।"
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पशु आहार (Fodder) और पैकेजिंग की लागत में भारी उछाल

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सिर्फ ट्रांसपोर्ट ही नहीं, बल्कि दूध उत्पादन की मूल लागत में भी भारी वृद्धि हुई है। गुजरात कॉपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF), जो अमूल ब्रांड का संचालन करता है, ने भी अपनी हालिया मूल्य वृद्धि के पीछे पशु आहार (Cattle Feed), पैकेजिंग सामग्री और ईंधन की बढ़ती लागत को मुख्य कारण बताया था। पिछले एक साल में चारे की कीमतों में 35 से 40 प्रतिशत तक का उछाल आया है। इसके अलावा, ग्लोबल वार्मिंग और बदलते मौसम के चक्र के कारण भी दुधारू पशुओं की दूध देने की क्षमता पर असर पड़ा है। डेयरी कंपनियों का कहना है कि वे उपभोक्ताओं से मिलने वाले पैसे का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे किसानों को ट्रांसफर कर रही हैं, ताकि किसान इस महंगाई में भी दूध उत्पादन के लिए प्रेरित रहें।
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पिछले एक साल में दूध की कीमतों का सफर: मई 2025 बनाम मई 2026

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अगर हम पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पराग डेयरी ने इससे ठीक एक साल पहले मई 2025 में दूध के दाम बढ़ाए थे। उस समय भी कंपनी ने लागत बढ़ने का हवाला देते हुए दूध की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। अब करीब एक साल के अंतराल के बाद फिर से पराग दूध के दाम बढ़ाए गए हैं।
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वहीं, अमूल ने भी मई 2025 के बाद अब जाकर पहली बार दूध के दाम बढ़ाए हैं। मदर डेयरी की बात करें तो उसने इससे पहले दूध की कीमतों में अप्रैल 2025 में बढ़ोतरी की थी। कुल मिलाकर, भारत में अप्रैल 2026 तक खाद्य महंगाई दर (Food Inflation Rate) 4.20% के करीब पहुंच चुकी है, जो स्पष्ट रूप से रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों में झलक रही है।
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आम आदमी की जेब पर सीधा असर

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भारत में दूध केवल एक पेय पदार्थ नहीं है, बल्कि यह हर घर की बुनियादी जरूरत है। सुबह की चाय से लेकर बच्चों के पोषण, दही, पनीर और मिठाइयों तक, दूध हर रसोई का अहम हिस्सा है। जब भी दूध के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ते हैं, तो एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार के मासिक बजट पर इसका सीधा असर 100 से 150 रुपए तक पड़ता है। ऐसे समय में जब सब्जियों और अन्य राशन सामग्री के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं, दूध की यह महंगाई आम जनता के लिए दोहरी मार साबित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में दूध के दामों में हुई इस वृद्धि का असर पनीर, घी, मक्खन और बेकरी उत्पादों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
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संक्षेप में कहा जाए तो, Parag Milk Price Hike केवल एक कंपनी का फैसला नहीं है, बल्कि यह पूरे डेयरी उद्योग में बढ़ रही परिचालन लागत, महंगे पशु आहार और ट्रांसपोर्टेशन खर्चों का सीधा परिणाम है। उत्तर प्रदेश में 15 मई 2026 की शाम से लागू हो रही इन नई दरों (फुल क्रीम 71 रुपए/लीटर, टोंड 59 रुपए/लीटर) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि महंगाई का चक्र थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि पराग अभी भी अपने प्रतिस्पर्धियों अमूल और मदर डेयरी से एक रुपए सस्ता है, लेकिन आम उपभोक्ता के लिए यह 2 रुपए की वृद्धि भी महीने के बजट में एक महत्वपूर्ण सेंध है। अब देखना यह है कि क्या आने वाले समय में सरकार डेयरी सेक्टर को कोई राहत पैकेज या सब्सिडी देती है, जिससे भविष्य में दूध की कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
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