Anil Kumar Sharma | Special Correspondent Khabreelal Mrdia-धामपुर (बिजनौर): ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) और जलवायु परिवर्तन के इस गंभीर दौर में, जहां एक ओर नदियां सूख रही हैं और जंगल कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपनी व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को त्याग कर धरती मां को बचाने की मुहिम में जुटे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल पेश कर रही हैं पड़ोसी देश नेपाल (Nepal) की 36 वर्षीय पर्यावरण प्रेमी यमुना ढकल। पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर पूरे भारत के भ्रमण पर निकलीं यमुना ढकल का उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर (Dhampur) नगर में पहुंचने पर बेहद गर्मजोशी और भव्य तरीके से स्वागत किया गया।READ ALSO:-मेरठ में ट्रांसपोर्टरों का फूटा गुस्सा: 21 से 23 मई तक 'पूर्ण चक्का जाम' का ऐलान, NGT टैक्स और BS-IV बैन के विरोध में ठप होगा पहिया
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इस स्वागत समारोह ने न केवल भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को एक नया आयाम दिया, बल्कि पर्यावरण के प्रति आम जनमानस में एक नई जागरूकता भी पैदा की।
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'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प यमुना ढकल की यह भारत यात्रा केवल एक सामान्य भ्रमण नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा और पवित्र उद्देश्य छिपा है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय मुहिम 'एक पेड़ मां के नाम' (Ek Ped Maa Ke Naam) से यमुना ढकल बेहद प्रभावित हैं।
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उन्होंने इस मुहिम को सिर्फ भारत तक सीमित न रखकर इसे एक वैश्विक आंदोलन बनाने का संकल्प लिया है। यमुना ढकल का मानना है कि प्रकृति की कोई सीमा या सरहद नहीं होती। भारत और नेपाल दोनों ही हिमालय की गोद में बसे हैं, इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना दोनों देशों के नागरिकों का साझा कर्तव्य है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उन्होंने यह कठिन यात्रा शुरू की है।
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8 फरवरी 2026 को लुंबिनी से शुरू हुई थी यह ऐतिहासिक यात्रा यमुना ढकल के सफर की शुरुआत एक बेहद पवित्र और ऐतिहासिक स्थान से हुई। उन्होंने अपने भारत भ्रमण का शुभारंभ 8 फरवरी 2026 को भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली 'लुंबिनी' (Lumbini) से किया था। लुंबिनी से शांति और प्रकृति प्रेम का संदेश लेकर निकलीं यमुना ने अब तक भारत के कई राज्यों की खाक छानी है।
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- \r\n यात्रा का मार्ग: अपनी इस यात्रा के दौरान यमुना ढकल देश की राजधानी दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और देवभूमि उत्तराखंड के विभिन्न शहरों और गांवों से होते हुए अब उत्तर प्रदेश (UP) की सीमा में प्रवेश कर चुकी हैं।\r\n \r\n
- \r\n समापन: उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों (विशेषकर तराई और पश्चिमी यूपी के क्षेत्रों) में अपनी यात्रा पूरी करने और लोगों को जागरूक करने के बाद, वह अपनी इस लंबी और प्रेरणादायक यात्रा का समापन वापस अपने गृह देश नेपाल में ही करेंगी।\r\n \r\n
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धामपुर में भव्य स्वागत: कालिया वाला मंदिर पर हुआ पौधरोपण जैसे ही यमुना ढकल की पर्यावरण जागरूकता यात्रा धामपुर पहुंची, स्थानीय प्रशासन, वन विभाग (Forest Department) और पर्यावरण प्रेमियों ने पलक पावड़े बिछाकर उनका स्वागत किया। मुख्य स्वागत कार्यक्रम धामपुर-नगीना रोड (Dhampur-Nagina Road) पर स्थित प्रसिद्ध 'मंदिर कालिया वाला' पर आयोजित किया गया।
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इस अवसर पर पर्यावरण के प्रति समर्पण भाव दिखाते हुए यमुना ढकल और उपस्थित अतिथियों द्वारा मंदिर परिसर में 5 फलदार और छायादार पौधों का रोपण भी किया गया। यमुना ने लोगों से अपील की कि वे अपने जीवन के हर खास मौके (जैसे जन्मदिन, सालगिरह) पर अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसके पेड़ बनने तक उसकी देखभाल करें।
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वन विभाग और चिपको आंदोलन की विरासत के साक्षी बने गवाह इस स्वागत समारोह की सबसे खास बात यह रही कि इसमें सरकारी तंत्र के साथ-साथ जमीनी स्तर पर पर्यावरण के लिए काम करने वाले दिग्गजों ने शिरकत की। कार्यक्रम में धामपुर वन विभाग की ओर से:
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- \r\n डिप्टी रेंजर (Deputy Ranger) हरदेव सिंह\r\n \r\n
- \r\n बीट दरोगा (Beat Daroga) लख्मीचंद\r\n \r\n
- \r\n कांस्टेबल विपिन कुमार, मुकेश कुमार और नरेश कुमार उपस्थित रहे।\r\n \r\n
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इनके अलावा, इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रख्यात पर्यावरणविद् और 'चिपको आंदोलन' के प्रणेता रहे स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा (Sunderlal Bahuguna) के निकटतम सहयोगी सुबोध वर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम में एक नई ऊर्जा भर दी। साथ ही, जिला पर्यावरण संरक्षण संयोजक पराग अग्रवाल ने भी यमुना ढकल के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और बिजनौर जिले की ओर से उन्हें हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
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समाज के लिए एक बड़ा संदेश वक्ताओं ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज जब पूरा उत्तर भारत भीषण गर्मी, लू (Heatwave) और भूजल स्तर के गिरने जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में यमुना ढकल जैसी युवा महिलाओं का आगे आना समाज के लिए एक बड़ा सबक है। जब एक विदेशी नागरिक हमारे देश में आकर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को सफल बनाने के लिए दर-दर घूम सकती है, तो देश के नागरिकों का भी यह प्राथमिक कर्तव्य बनता है कि वे अपनी धरती को हरा-भरा बनाने में अपना पूर्ण योगदान दें।
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धामपुर में मिले इस अपार प्रेम और सम्मान से गदगद होकर यमुना ढकल ने सभी क्षेत्रवासियों और वन विभाग की टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया। कुछ समय विश्राम करने और स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करने के बाद, यमुना अपनी यात्रा के अगले पड़ाव की ओर रवाना हो गईं। उनके द्वारा रोपे गए पौधे और छोड़े गए संदेश धामपुर के निवासियों को हमेशा पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.