त्योहारों की चमक-दमक और उल्लास के बीच जब कोई अचानक मौत की खबर आती है, तो वह पूरे समाज को झकझोर कर रख देती है। भाई-बहन के अटूट प्रेम और रक्षा के वचन का प्रतीक 'रक्षाबंधन' का पावन पर्व मुरादाबाद के एक परिवार के लिए जिंदगी भर का नासूर बन गया। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। मायके से रक्षाबंधन का त्योहार मनाकर अपने पति और तीन मासूम बच्चों के साथ लौट रही एक महिला का सफर बीच रास्ते में ही हमेशा के लिए खत्म हो गया। गागन नदी पर बना एक जर्जर लकड़ी का पुल उनके लिए काल बन गया।READ ALSO:-मुरादाबाद में तेंदुए का खूनी खेल: चारपाई पर सोते दिव्यांग की गर्दन जबड़े में दबोची, 100 मीटर दूर जंगल में मिला क्षत-विक्षत शव, अनाथ हुए दो मासूम
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राखी की खुशियों से भरा था सफर, मायके से हो रही थी वापसी

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यह दर्दनाक हादसा मुरादाबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र का है। छजलैट इलाके के महमूदपुर गांव के रहने वाले 45 वर्षीय मजदूर अनिल जाटव रक्षाबंधन के मौके पर अपनी 42 वर्षीय पत्नी किरन और तीन बच्चों के साथ अपनी ससुराल गए थे। उनके बच्चों में 7 साल का बड़ा बेटा केशव, 5 साल की बेटी काफिया और 3 साल का सबसे छोटा बेटा प्रियांशु शामिल था। अनिल की ससुराल कुंदरकी थाना क्षेत्र के नानपुर गांव में है। शुक्रवार को दिनभर रक्षाबंधन की खुशियां मनाई गईं। किरन ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, लंबी उम्र की दुआएं कीं और हंसते- मुस्कुराते हुए शाम के वक्त अपने परिवार के साथ घर लौटने के लिए बाइक पर सवार हुई। पूरा परिवार एक ही बाइक पर था और उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है।
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अचानक चटका लकड़ी का पुल और नदी में जा गिरी बाइक

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शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे का वक्त था। सूरज ढल चुका था और हल्का अंधेरा छाने लगा था। अनिल जाटव अपनी बाइक से मझोला थाना क्षेत्र के मलकपुर स्थित 'चट्ठा' के पास पहुंचे। यहां गागन नदी को पार करने के लिए प्रशासन की अनदेखी के चलते कोई पक्का पुल नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के आवागमन के लिए लकड़ी का एक अस्थाई और बेहद कमजोर पुल बना हुआ है। अनिल ने जैसे ही अपनी बाइक इस लकड़ी के पुल पर चढ़ाई और वे बीचों-बीच पहुंचे, अचानक पुल की लकड़ियां चरमराने लगीं।
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इससे पहले कि अनिल कुछ समझ पाते या बाइक को रोक पाते, पुल की तीन भारी लकड़ियां एक झटके में टूट गईं। लकड़ियां टूटते ही बाइक का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया और वह अनियंत्रित होकर सीधे उफनती हुई गागन नदी में जा गिरी। नदी का जलस्तर बारिश के कारण बढ़ा हुआ था और पानी का बहाव बेहद तेज था।
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चीख-पुकार सुनकर अपनी जान पर खेल गए ग्रामीण

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नदी में गिरते ही अनिल, उनकी पत्नी किरन और तीनों मासूम बच्चे गहरे पानी में डूबने लगे। मौत को सामने देख परिवार के सदस्यों ने मदद के लिए जोर-जोर से चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। शाम का वक्त होने के कारण आसपास के खेतों में कुछ ग्रामीण मौजूद थे और सड़क से कुछ राहगीर भी गुजर रहे थे। जब उन्होंने गागन नदी से लोगों की चीख-पुकार सुनी, तो वे बिना एक पल गंवाए मदद के लिए दौड़ पड़े।
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ग्रामीणों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी जान की परवाह किए बिना उफनती नदी में छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों की बहादुरी और त्वरित कार्रवाई के चलते अनिल जाटव, उनके 7 वर्षीय बेटे केशव और 5 वर्षीय बेटी काफिया को पानी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लेकिन, पानी का बहाव इतना तेज था कि पत्नी किरन और सबसे छोटा 3 साल का बेटा प्रियांशु ग्रामीणों की पकड़ में नहीं आ सके और वे पानी की तेज लहरों में बह गए।
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अंधेरे में चला गोताखोरों का सर्च ऑपरेशन, दो घंटे बाद मिला मां का शव
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हादसे की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। किसी ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर दिया। सूचना मिलते ही मझोला थाना पुलिस भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने समय न गंवाते हुए मलकपुर गांव के स्थानीय गोताखोरों को नदी में उतारा। एसएसपी मुरादाबाद भी घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए लगातार मॉनिटरिंग कर रहे थे।
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चूंकि रात हो चुकी थी और चारों तरफ घुप्प अंधेरा था, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में बहुत बड़ी बाधा आ रही थी। गोताखोरों ने पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई बड़ी टॉर्च और सर्च लाइट्स की रोशनी में नदी की गहराई में तलाश शुरू की। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों को किरन का शरीर पानी में मिल गया। पुलिस ने तुरंत उन्हें एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल भिजवाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद किरन को मृत घोषित कर दिया। वहीं, रात अधिक होने और बहाव तेज होने के कारण 3 साल के मासूम प्रियांशु का कुछ पता नहीं चल सका और सर्च ऑपरेशन को रोकना पड़ा।
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20 घंटे की जद्दोजहद और मासूम प्रियांशु का बरामद हुआ शव

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शनिवार की सुबह होते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें दोबारा गागन नदी के तट पर पहुंच गईं। इस बार रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ - SDRF) की विशेष टीम को भी मुरादाबाद बुलाया गया। एसडीआरएफ के जवानों ने मोटर बोट और विशेष जालों की मदद से नदी के चप्पे-चप्पे को खंगालना शुरू किया।
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हादसे के करीब 20 घंटे बाद, शनिवार दोपहर को एसडीआरएफ की टीम को नदी के बहाव की दिशा में कुछ दूरी पर 3 वर्षीय मासूम प्रियांशु का शव उतराता हुआ मिला। जैसे ही बच्चे का शव पानी से बाहर निकाला गया, वहां मौजूद हर शख्स का दिल पसीज गया और कई लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। पिता अनिल जाटव और उनके बचे हुए दोनों बच्चों की हालत देखकर किसी का भी कलेजा फट जाए। एक ही झटके में उनका पूरा परिवार, उनकी दुनिया उजड़ चुकी थी।
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प्रशासनिक अनदेखी और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल

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इस हृदयविदारक हादसे ने एक बार फिर हमारे सिस्टम और बुनियादी ढांचे की खोखली सच्चाई को उजागर कर दिया है। 21वीं सदी के इस दौर में भी, जब हम विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, ग्रामीण इलाकों में लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर ऐसे अस्थाई और जर्जर लकड़ी के पुलों से गुजरना पड़ता है।
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मलकपुर में गागन नदी पर पक्के पुल का निर्माण न होना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का नतीजा है। अगर समय रहते वहां एक सुरक्षित पक्का पुल बना दिया गया होता, तो आज अनिल जाटव की पत्नी और उनका मासूम बेटा जिंदा होते। इस घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष है। उनकी मांग है कि सरकार और प्रशासन तुरंत इस मामले का संज्ञान ले, पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा दे और गागन नदी पर जल्द से जल्द एक पक्के पुल का निर्माण सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में किसी और के घर का चिराग इस तरह न बुझे। मुरादाबाद का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था के माथे पर एक गहरा कलंक है, जिसे मिटाने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
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