मेरठ (स्पेशल डेस्क): पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जो अपनी खुशहाली और गन्ने की मिठास के लिए जाना जाता है, एक बार फिर आतंकवाद की काली परछाई के कारण सुर्खियों में है। मेरठ के कोतवाली क्षेत्र की तंग गलियों से निकलकर एक ऐसा नाम सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है—उजैद कुरैशी।READ ALSO:-मेरठ में 'तेंदुए' की दहशत: परीक्षितगढ़ के अगवानपुर में पेड़ से उतरते गुलदार का वीडियो वायरल, 3 दिन से खाक छान रही वन विभाग की टीम
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ऊपर से देखने पर वह एक साधारण फल कारोबारी का बेटा है, लेकिन यूपी एटीएस (UP ATS) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की फाइलों में वह अलकायदा (Al-Qaeda) के एक खतरनाक स्लीपर सेल का सक्रिय सदस्य है। आरोप बेहद गंभीर हैं—भारतीय सेना पर आत्मघाती (Suicide) हमले की साजिश रचना और नौजवानों का ब्रेनवॉश करके उन्हें जिहाद की आग में झोंकना।
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18 जनवरी की वो रात: जब एटीएस ने दी दस्तक
\r\n\r\nतारीख 18 जनवरी, समय शाम का। मेरठ के कोतवाली थाना क्षेत्र का मोहल्ला बनियापाड़ा। आम तौर पर भीड़भाड़ वाले इस इलाके में अचानक सन्नाटा पसर गया जब सादे कपड़ों में और वर्दीधारी पुलिसकर्मियों की एक बड़ी टीम ने मोहम्मद साजिद कुरैशी के घर को घेर लिया। यह टीम साधारण पुलिस की नहीं थी; इसमें उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) के जांबाज और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अधिकारी शामिल थे।
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एटीएस को इनपुट मिला था कि उजैद घर पर ही मौजूद है। टीम ने घर का कोना-कोना छान मारा। अलमारियां खोली गईं, दस्तावेज खंगाले गए, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की तलाश की गई। लेकिन किस्मत उजैद के साथ थी, या शायद उसकी मुखबिरी तंत्र मजबूत था—वह घर पर नहीं मिला।
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छापेमारी के बाद, एटीएस की टीम ने घर के मुख्य दरवाजे पर एक कानूनी नोटिस चस्पा किया। इस नोटिस में बाहू फोर्ट थाना (जम्मू) में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 24 नवंबर 2025 का हवाला देते हुए उजैद को 24 जनवरी तक पेश होने का आदेश दिया गया था।
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फिल्मी स्टाइल में फरार हुआ संदिग्ध
\r\n\r\nइस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू एटीएस के जाने के चंद मिनटों बाद घटित हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एटीएस की गाड़ियां जैसे ही गलियों से बाहर निकलीं, कुछ ही देर बाद उजैद अपनी स्कूटी पर सवार होकर घर की तरफ आया। वह बेफिक्र था, शायद उसे लगा था कि खतरा टल गया है या उसे छापे की खबर ही नहीं थी।
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जैसे ही वह अपने दरवाजे पर पहुँचा, उसकी नजर वहां चस्पा पुलिस नोटिस पर पड़ी। नोटिस पढ़ते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक पल की भी देरी किए बिना, उसने स्कूटी मोड़ी और वहां से रफूचक्कर हो गया। यह दृश्य किसी थ्रिलर फिल्म जैसा था, जहाँ अपराधी कानून के शिकंजे से बाल-बाल बच निकलता है। तब से लेकर अब तक, उजैद का मोबाइल स्विच ऑफ है और वह भूमिगत (Underground) हो चुका है।
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डिजिटल जिहाद: वो 'वॉट्सऐप ग्रुप' जिसने खोली पोल
\r\n\r\nउजैद कुरैशी कोई साधारण अपराधी नहीं है। एटीएस के सूत्रों के मुताबिक, वह 'साइबर आतंकवाद' के उस नए दौर का हिस्सा है, जहाँ गोलियां चलने से पहले इंटरनेट पर दिमागों को हैक किया जाता है।
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सुसाइड अटैक की ब्लूप्रिंट
\r\n\r\nसुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक ऐसा वॉट्सऐप ग्रुप (WhatsApp Group) लगा है, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है। यह ग्रुप महज चैटिंग के लिए नहीं था, बल्कि यह एक 'वर्चुअल वॉर रूम' था।
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- \r\n टार्गेट इंडियन आर्मी: इस ग्रुप में भारतीय सेना के काफिलों, कैंपों और जवानों की आवाजाही को लेकर चर्चाएं होती थीं। सबसे खौफनाक खुलासा यह है कि ग्रुप में 'फिदायीन हमले' (Suicide Attack) की प्लानिंग डिस्कस की जा रही थी।\r\n \r\n
- \r\n उजैद की भूमिका: इस ग्रुप में कई स्लीपर सेल्स के सदस्य जुड़े थे। मेरठ के उजैद कुरैशी ने भी इस ग्रुप में एक बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ मैसेज भेजा था। इसी एक मैसेज ने उसके डिजिटल फुटप्रिंट (Digital Footprint) को ट्रेस करने में एजेंसियों की मदद की।\r\n \r\n
- \r\n जम्मू कनेक्शन: कुछ दिन पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी से एक आतंकी को गिरफ्तार किया था। जब उसके फोन की फॉरेंसिक जांच हुई, तो यह वॉट्सऐप ग्रुप सामने आया। उस आतंकी के तार मेरठ के उजैद से जुड़े मिले।\r\n \r\n
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प्रोफाइल: 'ब्रेनवॉश एक्सपर्ट' उजैद कुरैशी
\r\n\r\nआखिर उजैद कुरैशी कौन है? एक फल विक्रेता का बेटा आतंकी कैसे बन गया?
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- \r\n पारिवारिक पृष्ठभूमि: उजैद के पिता मोहम्मद साजिद कुरैशी मेरठ की मंडी में फलों के बड़े आढ़ती हैं। उनका कारोबार जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश तक फैला हुआ है। उजैद भी अपने पिता के साथ इसी कारोबार में हाथ बंटाता था।\r\n \r\n
- \r\n माइंडगेम का खिलाड़ी: जांच एजेंसियों का दावा है कि उजैद केवल एक 'फॉलोअर' नहीं है, बल्कि वह युवाओं का ब्रेनवॉश (Brainwash) करने में माहिर है। उसकी बातों में ऐसा जादू और कट्टरपंथ का ऐसा मिश्रण होता है कि सामने वाला देश विरोधी गतिविधियों के लिए तैयार हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n स्लीपर सेल का हिस्सा: उसे अलकायदा के स्लीपर सेल का हिस्सा माना जा रहा है। स्लीपर सेल के सदस्य वे होते हैं जो सामान्य जीवन जीते हैं—नौकरी करते हैं, पढ़ाई करते हैं या व्यापार करते हैं—लेकिन अंदर ही अंदर वे संगठन के आदेश का इंतजार करते हैं ताकि किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकें।\r\n \r\n
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द कश्मीर फाइल्स: फल के क्रेट और बारूद की गंध
\r\n\r\nउजैद की कहानी में सबसे बड़ा मोड़ नवंबर 2024 में आया। जांच में पता चला है कि उजैद 'काम के सिलसिले' में जम्मू-कश्मीर गया था। परिवार के लिए यह सेब और फलों की खरीद का ट्रिप था, लेकिन एजेंसियों के लिए यह 'रिक्रूटमेंट और प्लानिंग' का ट्रिप था।
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एटीएस का मानना है कि इसी यात्रा के दौरान उजैद ने वहां मौजूद अलकायदा और अन्य आतंकी संगठनों के हैंडलर्स (Handlers) से मुलाकात की। फलों के ट्रकों की आवाजाही का इस्तेमाल संदेशों और संभवतः संदिग्ध सामग्री को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाने के लिए किए जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। कश्मीर में बिताए गए उन दिनों में ही उसने उस वॉट्सऐप ग्रुप की सदस्यता ली और देश विरोधी साजिश का हिस्सा बना।
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BNS धारा 113: कानून का सख्त शिकंजा
\r\n\r\nउजैद कुरैशी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 113 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह नई धारा पुराने कानूनों से कहीं ज्यादा सख्त और व्यापक है। इसे समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है।
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क्या है BNS Section 113?
\r\n\r\nयह धारा सीधे तौर पर 'आतंकवादी कृत्य' (Terrorist Act) को परिभाषित करती है।
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- \r\n परिभाषा: कोई भी कार्य जो भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता, सुरक्षा या आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से किया गया हो।\r\n \r\n
- \r\n गतिविधियां: इसमें बम धमाके, जैविक या रासायनिक हथियारों का उपयोग, और आम जनता में दहशत फैलाना शामिल है।\r\n \r\n
- \r\n उजैद पर आरोप (BNS 113 sub-section 3): उजैद पर विशेष रूप से इस धारा का उप-खंड लागू हो सकता है जो आतंकी संगठनों की मदद करने, साजिश रचने, भर्ती करने (Recruitment) या आतंकवाद को बढ़ावा देने (Promotion of Terrorism) से संबंधित है।\r\n \r\n
- \r\n सजा का प्रावधान: इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान है। यह धारा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के प्रावधानों के साथ मिलकर और भी कठोर हो जाती है।\r\n \r\n
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पूछताछ और परिवार पर दबाव
\r\n\r\nउजैद के फरार होने के बाद पुलिस ने उसके दो भाइयों को हिरासत में लिया। यह एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) है ताकि फरार आरोपी पर दबाव बनाया जा सके और उसकी लोकेशन पता की जा सके।
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- \r\n भाइयों से सवाल: एटीएस ने उनसे उजैद की कश्मीर यात्रा, उसके दोस्तों, उसके बैंक ट्रांजेक्शन और उसके मोबाइल फोन के बारे में घंटों पूछताछ की।\r\n \r\n
- \r\n रिहाई: चूँकि भाइयों के खिलाफ प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिले और उन्होंने जांच में सहयोग करने का वादा किया, इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया। लेकिन पूरा परिवार अब पुलिस की 24 घंटे की निगरानी (Surveillance) में है।\r\n \r\n
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वेस्ट यूपी: स्लीपर सेल्स का गढ़?
\r\n\r\nमेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का आतंकी कनेक्शन नया नहीं है। पिछले एक दशक में यहाँ से लश्कर-ए-तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन और अब अलकायदा के कई संदिग्ध पकड़े गए हैं।
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- \r\n जनसांख्यिकीय लाभ: घनी आबादी और दिल्ली (NCR) से निकटता इसे आतंकियों के लिए छिपने की आदर्श जगह बनाती है।\r\n \r\n
- \r\n धार्मिक कट्टरपंथ: कुछ कट्टरपंथी तत्व यहाँ के युवाओं की बेरोजगारी और असंतोष का फायदा उठाकर उन्हें 'ब्रेनवॉश' करते हैं। उजैद कुरैशी इसी ईको-सिस्टम का एक नया उत्पाद नजर आता है।\r\n \r\n
- \r\n कनेक्टिविटी: कश्मीर से फलों और ड्राई फ्रूट्स का व्यापार पश्चिमी यूपी से बहुत गहरा जुड़ा है। आतंकी संगठन इस ट्रेड रूट (Trade Route) का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को फैलाने में कर रहे हैं।\r\n \r\n
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एजेंसियों के लिए चुनौती और अगला कदम
\r\n\r\nउजैद का फरार होना एटीएस के लिए एक झटका जरूर है, लेकिन यह अंत नहीं है।
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- \r\n टेक्निकल सर्विलांस: उजैद का मोबाइल बंद है, लेकिन उसका IMEI नंबर ट्रैकिंग पर है। जैसे ही वह नया सिम डालेगा, उसकी लोकेशन ट्रेस हो जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n मनी ट्रेल: उसके बैंक खातों की जांच की जा रही है। क्या उसे कश्मीर से या विदेश से कोई फंड मिला? फलों के व्यापार में पैसे का हेरफेर (Money Laundering) तो नहीं हो रहा था?\r\n \r\n
- \r\n नेटवर्क ब्रेकिंग: उजैद के फोन कॉन्टैक्ट्स और उस वॉट्सऐप ग्रुप के अन्य सदस्यों की तलाश में देश भर में छापेमारी जारी है।\r\n \r\n
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एटीएस अधिकारी का बयान:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"यह मामला बेहद संवेदनशील है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का सवाल नहीं है, बल्कि एक पूरे आतंकी मॉड्यूल (Terror Module) को बेनकाब करने की दिशा में बड़ा कदम है। हम उजैद के बेहद करीब हैं।"\r\n
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एक चेतावनी
\r\n\r\nउजैद कुरैशी का मामला हमें सिखाता है कि आतंकवाद का चेहरा बदल गया है। अब आतंकी जंगलों में नहीं, बल्कि हमारे शहरों, हमारे मोहल्लों और हमारे स्मार्टफोन्स में छिपे हैं। एक फल बेचने वाला युवक कब देश का दुश्मन बन जाए, यह पता लगाना मुश्किल है।
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अभिभावकों को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों और उनके बदलते व्यवहार पर नजर रखने की जरूरत है। 'ब्रेनवॉश' एक धीमी प्रक्रिया है, अगर समय रहते इसके संकेत मिल जाएं, तो किसी युवक को उजैद कुरैशी बनने से रोका जा सकता है।
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एटीएस की कार्रवाई जारी है, और उम्मीद है कि जल्द ही उजैद कानून की गिरफ्त में होगा, जिससे उस बड़ी साजिश का पूरा सच सामने आ सके जो इंडियन आर्मी के खिलाफ रची जा रही थी।
Sabse pehle comment karne wale banein.