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\r\n\r\n— LUCKNOW POLICE (@lkopolice) December 21, 2025\r\n\r\n\r\n
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दुकान की तरह सजा रखा था 'डिग्री का मेन्यू'
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गिरोह का 'रेट कार्ड':
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- \r\n BA/MA (स्नातक/परास्नातक): 15,000 रुपये से 25,000 रुपये तक।\r\n \r\n
- \r\n B.Tech/MBA (प्रोफेशनल कोर्स): 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक।\r\n \r\n
- \r\n PhD (डॉक्टरेट): 2 लाख रुपये से 4 लाख रुपये तक।\r\n \r\n
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कौन है मास्टरमाइंड? (The Mastermind)
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n.@LkoCp के निर्देशन में @east_dcp के नेतृत्व में क्राइम/सर्विलांस
\r\n— LUCKNOW POLICE (@lkopolice) December 21, 2025
\r\nटीम व थाना गोमतीनगर पुलिस की संयुक्त पुलिस टीम को फर्जी मार्कशीट/डिग्री बनाने वाले अंतर्राज्जीय गिरोह के 03 अभियुक्तों को किया गया गिरफ्तार।
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\r\nभारी मात्रा में फर्जी मार्कशीट व नगद 02 लाख कैश बरामद ।@Uppolice pic.twitter.com/dY3j0aFgfi
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इस पूरे खेल का असली खिलाड़ी और मास्टरमाइंड सत्येंद्र द्विवेदी है।
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- \r\n योग्यता: सत्येंद्र ने समाजशास्त्र (Sociology) में पीएचडी कर रखी है। वह शिक्षा प्रणाली की हर बारीकी, खामी और यूनिवर्सिटी के कामकाज के तरीके से वाकिफ था।\r\n \r\n
- \r\n मोडस ऑपरेंडी: सत्येंद्र अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर उन छात्रों को टारगेट करता था जो या तो फेल हो गए थे, या जिनके पास पढ़ाई का समय नहीं था लेकिन नौकरी के लिए डिग्री चाहिए थी। उसने अपने ज्ञान का इस्तेमाल ठगी का नेटवर्क बनाने में किया।\r\n \r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
15 करोड़ का साम्राज्य और 1500 'फर्जी' डिग्रीधारी
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- \r\n कुल बिक्री: अब तक यह गैंग लगभग 1500 लोगों को फर्जी डिग्रियां बेच चुका है।\r\n \r\n
- \r\n कमाई: पुलिस के अनुमान के मुताबिक, इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए गिरोह ने करीब 15 करोड़ रुपये की काली कमाई की है।\r\n \r\n
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25 नामचीन विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जीवाड़ा
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इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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- \r\n स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी, मेरठ\r\n \r\n
- \r\n कलिंगा यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़\r\n \r\n
- \r\n साबरमती यूनिवर्सिटी, गुजरात\r\n \r\n
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- \r\n 923 बनी हुई और अधबनी फर्जी डिग्रियां/मार्कशीट।\r\n \r\n
- \r\n 15 विभिन्न विश्वविद्यालयों और अधिकारियों की फर्जी रबर स्टैम्प (मोहरें)।\r\n \r\n
- \r\n 6 लैपटॉप और हाई-क्वालिटी प्रिंटर, जिनका इस्तेमाल दस्तावेज छापने में होता था।\r\n \r\n
- \r\n भारी मात्रा में होलोग्राफिक स्टिकर्स और ब्लैंक लेटरहेड्स।\r\n \r\n
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अब उन 1500 लोगों की खैर नहीं!
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- \r\n डेटा रिकवरी: पुलिस आरोपियों के लैपटॉप और मोबाइल से उन 1500 छात्रों/ग्राहकों का डेटा रिकवर कर रही है जिन्होंने ये डिग्रियां खरीदी हैं।\r\n \r\n
- \r\n नौकरी पर खतरा: पुलिस उन संस्थानों और कंपनियों को पत्र लिखेगी जहां ये लोग फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ भी धोखाधड़ी (420 IPC) का मुकदमा दर्ज हो सकता है और उन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है।\r\n \r\n
- \r\n कानूनी गाज: पुलिस का कहना है कि फर्जी दस्तावेज खरीदना और उसका इस्तेमाल करना भी उतना ही बड़ा अपराध है जितना उसे बनाना।\r\n \r\n
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कैसे चलता था धंधा?
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शिक्षा व्यवस्था के लिए अलार्म
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Sabse pehle comment karne wale banein.