लखनऊ, स्पेशल डेस्क (क्राइम वॉच)। आज के डिजिटल दौर में जहां रिश्तों की डोर इंटरनेट के जरिए जुड़ रही है, वहीं साइबर अपराधी इसी भरोसे का फायदा उठाकर लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। नवाबों के शहर लखनऊ में साइबर ठगी का एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां सात फेरे लेने और घर बसाने का सपना देख रहे एक युवक को क्या पता था कि जिस 'वर्चुअल हमसफर' पर वह भरोसा कर रहा है, वह असल में एक शातिर ठग है।
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अमीनाबाद जैसे व्यस्त इलाके के रहने वाले एक युवक के साथ मैट्रिमोनियल साइट (Matrimonial Site) के जरिए 51.41 लाख रुपये की भारी-भरकम ठगी हुई है। जालसाजों ने ठगी की स्क्रिप्ट इतनी सफाई से लिखी कि पीड़ित को अंत तक एहसास ही नहीं हुआ कि वह लुट रहा है। पीड़ित की तहरीर पर लखनऊ साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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जीवनसाथी की तलाश में मिला धोखा
\r\n\r\nमामला राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद थाना क्षेत्र के अम्बेडकर नगर का है। यहां रहने वाले मो. अवैस (Md. Awais) एक सामान्य और प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उम्र और समाज के दस्तूर के मुताबिक, उन्होंने अपना घर बसाने का सोचा। इसके लिए उन्होंने आज के दौर के सबसे प्रचलित माध्यम—एक मशहूर मैट्रिमोनियल वेबसाइट—का सहारा लिया।
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अवैस ने अपनी पूरी जानकारी के साथ प्रोफाइल बनाया। कुछ दिनों बाद, उनकी प्रोफाइल पर एक रिस्पॉन्स आया। साइट के जरिए एक महिला से उनकी बातचीत शुरू हुई। शुरुआत में बातें बिल्कुल औपचारिक थीं—परिवार, पसंद-नापसंद और भविष्य की योजनाएं। धीरे-धीरे यह बातचीत विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव में बदलने लगी। महिला ने अपनी मीठी और सधी हुई बातों से अवैस को यह यकीन दिला दिया कि वह ही उनकी 'परफेक्ट मैच' है और जल्द ही वे निकाह के बंधन में बंध जाएंगे।
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प्यार के जाल में 'बिजनेस' का एंगल
\r\n\r\nसाइबर अपराध की दुनिया में इसे 'रोमांस स्कैम' (Romance Scam) या 'पिग बुचरिंग स्कैम' (Pig Butchering Scam) कहा जाता है। इसमें ठग शिकार को पहले भावनात्मक रूप से मोटा (तैयार) करते हैं और फिर काट देते हैं। अवैस के साथ भी यही हुआ।
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जब महिला को यकीन हो गया कि अवैस अब पूरी तरह उसके प्रभाव में हैं, तो उसने अपनी असली चाल चली। उसने खुद को एक बड़ी बिजनेस वुमन और ट्रेडिंग एक्सपर्ट के रूप में पेश किया। पीड़ित ने पुलिस को बताया, "उसने मुझसे कहा कि वह एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के साथ जुड़कर ट्रेडिंग और निवेश का काम करती है। उसने दावा किया कि उसकी कंपनी में पैसा लगाने पर कुछ ही दिनों में रकम दोगुनी हो जाती है।"
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चूंकि अवैस उस महिला को अपनी होने वाली पत्नी मान चुके थे, इसलिए उन्होंने उसकी बिजनेस सलाह को गंभीरता से लिया। यहीं से उनकी बर्बादी की शुरुआत हुई।
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ट्रस्ट गेम: पहले मुनाफा, फिर बड़ी लूट
\r\n\r\nठगों का यह गिरोह मनोवैज्ञानिक खेल खेलने में माहिर था। उन्होंने अवैस से सीधे 50 लाख नहीं मांगे।
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- \r\n छोटा निवेश: पहले उन्होंने एक छोटी रकम निवेश करने को कहा। अवैस ने टेस्ट करने के लिए पैसे लगाए।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी मुनाफा: कुछ ही समय बाद, ठगों ने अवैस के वर्चुअल खाते में (फर्जी ऐप या वेबसाइट के जरिए) दिखाया कि उनका पैसा मुनाफे के साथ बढ़ गया है। इतना ही नहीं, विश्वास जीतने के लिए उन्होंने कुछ रकम वास्तव में अवैस के बैंक खाते में वापस भी भेज दी।\r\n \r\n
- \r\n भरोसा कायम: जैसे ही अवैस के खाते में मुनाफे के पैसे आए, उनका बचा-कुचा शक भी दूर हो गया। उन्हें लगा कि महिला न केवल उन्हें प्यार करती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी उन्हें मजबूत बनाना चाहती है।\r\n \r\n
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इसके बाद शुरू हुआ असली खेल। महिला के कहने पर अवैस ने अलग-अलग तारीखों में बड़ी रकम ट्रांसफर करनी शुरू की। कभी 5 लाख, कभी 10 लाख। देखते ही देखते, किस्तों में कुल 51 लाख 41 हजार रुपये जालसाजों के अलग-अलग खातों में चले गए।
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पैसे वापसी की मांग और ठगी का खुलासा
\r\n\r\nजब अवैस ने अपनी जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा निवेश कर दिया, तो उन्हें पैसों की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने महिला और कंपनी से अपनी मूल रकम और स्क्रीन पर दिख रहा मुनाफा (Profit) वापस (Withdraw) करने की मांग की।
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यहीं से कहानी पलट गई। कंपनी के तथाकथित अधिकारियों ने पैसे देने से इनकार नहीं किया, बल्कि नई मांगें रख दीं:
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- \r\n "आपका पैसा विदेशी मुद्रा में है, इसे बदलने के लिए टैक्स देना होगा।"\r\n \r\n
- \r\n "कैश हैंडलिंग चार्ज जमा करें।"\r\n \r\n
- \r\n "सिक्योरिटी डिपॉजिट और पेनल्टी लगेगी।"\r\n \r\n
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अवैस को बताया गया कि अगर वे ये एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देंगे, तो उनका पूरा पैसा फ्रीज हो जाएगा। अपनी डूबी हुई रकम को बचाने की घबराहट में कई बार पीड़ित और पैसे दे देते हैं, लेकिन गनीमत रही कि अवैस को समझ आ गया कि वे एक दलदल में फंस चुके हैं। जब महिला ने भी संपर्क तोड़ दिया और फोन उठना बंद हो गए, तब अवैस के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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पुलिस की कार्रवाई: डिजिटल सुरागों की तलाश
\r\n\r\nठगी का एहसास होने पर बदहवास अवैस ने लखनऊ साइबर क्राइम थाने (Cyber Crime Police Station) का दरवाजा खटखटाया।
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मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर बृजेश यादव ने बताया:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"पीड़ित मो. अवैस की तहरीर पर सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यह मामला 'इन्वेस्टमेंट फ्रॉड' और 'मैट्रिमोनियल फ्रॉड' का मिला-जुला रूप है। हम उन सभी बैंक खातों की डिटेल (KYC) खंगाल रहे हैं जिनमें पैसा ट्रांसफर किया गया है। बैंक मैनेजरों को नोटिस भेजकर खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।"\r\n
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पुलिस की टेक्निकल टीम निम्नलिखित बिंदुओं पर काम कर रही है:
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- \r\n IP Address Tracking: जिस सिस्टम या मोबाइल से मैट्रिमोनियल प्रोफाइल बनाई गई थी, उसका आईपी एड्रेस ट्रेस किया जा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n Call Detail Records (CDR): जिस नंबर से महिला बात करती थी, उसकी लोकेशन और कॉल हिस्ट्री निकाली जा रही है।\r\n \r\n
- \r\n Money Trail: पैसा किन खातों में गया और वहां से कहां निकाला गया (ATM या अन्य ट्रांसफर), इसकी कड़ी जोड़ी जा रही है। अक्सर ऐसे मामलों में ठग 'मनी म्यूल्स' (किराए के बैंक खातों) का इस्तेमाल करते हैं जो बिहार, पश्चिम बंगाल या मेवात जैसे इलाकों के होते हैं।\r\n \r\n
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एक्सपर्ट की राय: क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?
\r\n\r\nसाइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन (नाम प्रतीकात्मक) बताते हैं कि मैट्रिमोनियल साइट्स ठगों के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' बन गई हैं।
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- \r\n इमोशनल वल्नरेबिलिटी: यहां लोग रिश्ता खोजने आते हैं, इसलिए वे भावनात्मक रूप से जल्दी जुड़ जाते हैं और बचाव की दीवार (Guard) नीचे गिरा देते हैं।\r\n \r\n
- \r\n लालच का तड़का: ठग जानते हैं कि शादी के बाद हर कोई आर्थिक सुरक्षा चाहता है। इसलिए वे 'हाई रिटर्न' का लालच देते हैं।\r\n \r\n
- \r\n प्रोफेशनल सेटअप: ये ठग अकेले काम नहीं करते। इनके पास पूरी टेलीकॉलर टीम, फर्जी वेबसाइट बनाने वाले डेवलपर्स और मनोवैज्ञानिक तरीके से बात करने की ट्रेनिंग होती है।\r\n \r\n
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सावधान: अगर आप भी मैट्रिमोनियल साइट पर हैं
\r\n\r\nलखनऊ पुलिस और साइबर सेल ने आम जनता के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य ऑनलाइन रिश्ता खोज रहा है, तो इन 5 बातों को 'गांठ बांध' लें:
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- \r\n पैसे की बात = धोखा: अगर आपकी होने वाली पार्टनर या दोस्त, जिससे आप कभी मिले नहीं, वह किसी भी बहाने (बीमारी, बिजनेस, टिकट, कस्टम ड्यूटी) से पैसे मांगे, तो समझ लें यह 100% फ्रॉड है। तुरंत ब्लॉक करें।\r\n \r\n
- \r\n वीडियो कॉल वेरिफिकेशन: चैटिंग पर भरोसा न करें। वीडियो कॉल पर बात करने की जिद करें। आज कल 'डीपफेक' (Deepfake) तकनीक भी आ गई है, इसलिए वीडियो कॉल में भी चेहरे के हाव-भाव को गौर से देखें।\r\n \r\n
- \r\n फाइनेंशियल जानकारी न दें: अपनी बैंक डिटेल्स, ओटीपी, या सैलरी की जानकारी शादी पक्की होने और व्यक्ति से व्यक्तिगत रूप से मिलने से पहले साझा न करें।\r\n \r\n
- \r\n अंधा निवेश न करें: कोई भी स्कीम जो बिना रिस्क के दोगुने मुनाफे का दावा करे, वह फर्जी होती है। सेबी (SEBI) या आरबीआई (RBI) से मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें, किसी के कहने पर अनजान ऐप डाउनलोड न करें।\r\n \r\n
- \r\n रिवर्स इमेज सर्च: प्रोफाइल फोटो को गूगल पर 'रिवर्स इमेज सर्च' करें। अक्सर ठग मॉडल्स या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की फोटो चुराकर प्रोफाइल बनाते हैं।\r\n \r\n
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क्या करें अगर ठगी हो जाए?
\r\n\r\nअगर दुर्भाग्यवश आप ऐसे किसी जाल में फंस जाते हैं, तो समय बर्बाद न करें। ठगी के पहले कुछ घंटे 'गोल्डन ऑवर्स' होते हैं।
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- \r\n तुरंत 1930 (नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें।\r\n \r\n
- \r\n www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत रजिस्टर करें।\r\n \r\n
- \r\n अपने बैंक को सूचित करें।\r\n \r\n
- \r\n सारे स्क्रीनशॉट्स, ट्रांजेक्शन आईडी और चैट हिस्ट्री सुरक्षित रखें।\r\n \r\n
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अमीनाबाद के मो. अवैस के साथ हुई यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। वर्चुअल दुनिया में दिखने वाली हर प्रोफाइल हकीकत नहीं होती। रिश्तों की बुनियाद भरोसे पर होती है, लेकिन जब बात पैसों की आए, तो 'सतर्कता' ही सबसे बड़ा बचाव है। पुलिस अपनी जांच कर रही है, लेकिन खोई हुई रकम की वापसी बेहद मुश्किल होती है। इसलिए, अपनी गाढ़ी कमाई को किसी अनजान 'ऑनलाइन चेहरे' के कहने पर दांव पर न लगाएं।
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अस्वीकरण (Disclaimer): इस खबर में दी गई जानकारी पुलिस एफआईआर और पीड़ित द्वारा दी गई प्रारंभिक सूचना पर आधारित है। जांच जारी है और तथ्यों में पुलिस विवेचना के बाद बदलाव संभव है। हमारा उद्देश्य पाठकों को जागरूक करना है।
Sabse pehle comment karne wale banein.