उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में इन दिनों आदमखोर तेंदुए का भारी आतंक छाया हुआ है। जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र के गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। शुक्रवार की रात इसी इलाके के बहापुर बलिया गांव में एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। एक खूंखार तेंदुए ने घर के बाहर अपनी चारपाई पर सो रहे 35 वर्षीय दिव्यांग युवक जगराज पर जानलेवा हमला कर दिया। तेंदुए का हमला इतना खौफनाक और अचानक था कि जगराज को संभलने या चीखने तक का मौका नहीं मिला। तेंदुआ उसकी गर्दन को अपने मजबूत जबड़े में दबोचकर उसे घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया और उसे बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।READ ALSO:-बरेली दहल उठा: रात के अंधेरे में BJP नेता की चाकुओं से गोदकर बेरहमी से हत्या, खून से लथपथ सड़क और कातिलों की खौफनाक साजिश
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वारदात की रात: आखिर क्या हुआ था उस खौफनाक अंधेरे में? शुक्रवार का दिन खत्म होने के बाद 35 वर्षीय दिव्यांग जगराज अपने रोजमर्रा के कामों से निवृत्त होकर घर लौटा था। जगराज का घर गांव के बाहरी छोर पर एक कच्ची झोपड़ीनुमा संरचना है, जिसमें सुरक्षा के लिहाज से कोई मजबूत दरवाजा तक नहीं लगा हुआ है। पत्नी के निधन के बाद वह अपने दो छोटे बच्चों के साथ इसी झोपड़ी में गुजर-बसर कर रहा था। शुक्रवार रात जगराज ने अपने 8 साल के बेटे और 6 साल की बेटी को प्यार से खाना खिलाया और उन्हें झोपड़ी के अंदर सुरक्षित सुला दिया।
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 वन विभाग की टीम ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंची। वन विभाग की टीम बंदूक लिए हुए थी। वहीं, ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर पहुंचे।

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चूंकि घर में दरवाजा नहीं था और जगह की कमी थी, इसलिए वह खुद रोज की तरह झोपड़ी के ठीक बाहर अपनी चारपाई डालकर सोने चला गया। रात के घुप अंधेरे में जब पूरा गांव गहरी नींद में सो रहा था, तभी जंगल की तरफ से एक खूंखार तेंदुआ दबे पांव वहां आ धमका। तेंदुए ने चारपाई पर सो रहे बेबस और दिव्यांग जगराज पर सीधा हमला कर दिया। तेंदुए ने अपने तेज दांतों से जगराज की गर्दन को बुरी तरह दबोच लिया। जबड़े की पकड़ इतनी मजबूत थी कि जगराज तड़प कर रह गया। इसके बाद तेंदुआ उसे चारपाई से खींचते हुए करीब 100 मीटर दूर घने जंगल और झाड़ियों की तरफ ले गया।
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सुबह का डरावना मंजर: क्षत-विक्षत हालत में मिला शव शनिवार की सुबह जब जगराज के छोटे बच्चे और आस-पड़ोस के लोग सोकर उठे, तो उन्होंने देखा कि जगराज अपनी चारपाई पर नहीं है। शुरुआत में लोगों को लगा कि वह शायद किसी काम से गया होगा, लेकिन जब काफी देर तक वह नहीं लौटा, तो परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की। झोपड़ी के आस-पास का मुआयना करने पर जमीन पर घसीटे जाने के निशान और खून की बूंदें दिखाई दीं।
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खून के इन निशानों का पीछा करते हुए ग्रामीण जब घर से करीब 100 मीटर दूर जंगल की ओर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनकी रूह कांप गई। वहां झाड़ियों के बीच जगराज का खून से सना और क्षत-विक्षत शव पड़ा हुआ था। तेंदुए ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए जगराज का सीना पूरी तरह से खा लिया था और अपने नुकीले दांतों से काटकर उसकी गर्दन को धड़ से लगभग अलग कर दिया था। यह वीभत्स दृश्य देखकर गांव वालों में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम के साथ-साथ भयंकर दहशत फैल गई।
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टूट गया मुसीबतों का पहाड़: दो मासूम बच्चे हुए पूरी तरह अनाथ इस दर्दनाक घटना ने सबसे गहरा घाव जगराज के दो छोटे और मासूम बच्चों को दिया है। जगराज का जीवन पहले से ही बेहद संघर्षपूर्ण था। वह शारीरिक रूप से दिव्यांग था, लेकिन अपनी मेहनत और हिम्मत के दम पर एक ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। किस्मत की मार देखिए कि करीब 3 साल पहले ही जगराज की पत्नी का बीमारी के कारण निधन हो गया था। पत्नी की मौत के बाद जगराज ही अपने 8 साल के बेटे और 6 साल की बेटी के लिए माता और पिता, दोनों की भूमिका निभा रहा था।
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दिन भर ई-रिक्शा चलाकर जो भी रूखी-सूखी कमाई होती, उससे वह अपने बच्चों का भविष्य संवारने की कोशिश कर रहा था। लेकिन शुक्रवार की उस मनहूस रात ने इन दोनों बच्चों से उनका इकलौता सहारा भी छीन लिया। अब ये दोनों बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं। गांव वाले जब उन बिलखते बच्चों को देखते हैं, तो उनकी भी आंखें नम हो जाती हैं। बच्चों को यह समझ ही नहीं आ रहा है कि जो पिता रात को उन्हें सुला कर बाहर गया था, वह अब कभी लौटकर वापस नहीं आएगा।
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दहशत के साये में ठाकुरद्वारा: 25 दिन में 4 दर्दनाक मौतें मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा इलाके में तेंदुए का यह कोई पहला हमला नहीं है। यह पूरा क्षेत्र पिछले कुछ हफ्तों से मौत के खौफ में जी रहा है। बहापुर बलिया गांव और इसके आस-पास के इलाकों में आदमखोर हो चुके तेंदुओं का लगातार मूवमेंट देखा जा रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले 25 दिनों के भीतर इस इलाके में तेंदुए के हमले से यह चौथी मौत है।
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हैरानी और खौफ की बात यह है कि बहापुर बलिया गांव में ही महज तीन दिन पहले भी एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना घटी थी। तब खेत में काम कर रही एक महिला को तेंदुए ने अपना शिकार बना लिया था और उसे मार डाला था। एक के बाद एक हो रहे इन जानलेवा हमलों के कारण ग्रामीणों का खेतों में जाना और रात के समय घरों से बाहर निकलना पूरी तरह से बंद हो गया है। किसान अपनी तैयार फसलें काटने खेतों तक नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका पर भी भारी संकट खड़ा हो गया है। बच्चों ने खौफ के कारण स्कूल जाना छोड़ दिया है।
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वन विभाग का एक्शन: ट्रैप कैमरे और पिंजरे लगाए गए घटना की सूचना जैसे ही पुलिस और वन विभाग को मिली, मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। वन विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस बल तुरंत बहापुर बलिया गांव पहुंचे। वन विभाग के अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और तेंदुए के पगमार्क (पैरों के निशान) ट्रेस किए। ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और दहशत को शांत करने के लिए वन विभाग ने तत्काल प्रभाव से इलाके में कई जगहों पर पिंजरे (जाल) बिछा दिए हैं।
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इसके अलावा, तेंदुए के मूवमेंट की सटीक जानकारी हासिल करने के लिए जंगल और गांव के बाहरी रास्तों पर ट्रैप कैमरे भी इंस्टॉल किए गए हैं। वन विभाग की गश्ती टीमें इलाके में लगातार पेट्रोलिंग कर रही हैं और ग्रामीणों को रात के समय समूह में रहने तथा अकेले घरों से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी गई है।
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क्या कहते हैं वन विभाग के अधिकारी? मुरादाबाद के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) डॉ. विनय कुमार पांडेय ने इस पूरी घटना और इलाके में बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष पर स्थिति स्पष्ट की है। डॉ. पांडेय ने बताया कि ठाकुरद्वारा और इसके आस-पास का यह पूरा इलाका तेंदुओं का प्राकृतिक वास (Natural Habitat) क्षेत्र रहा है। यहां पहले भी तेंदुओं की मौजूदगी और छिटपुट हमले होते रहे हैं। हालांकि, पहले संचार के साधन सीमित होने के कारण ऐसी घटनाओं की सूचनाएं ज्यादा लोगों तक नहीं पहुंच पाती थीं, लेकिन अब तुरंत जानकारी मिल जाती है।
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DFO ने हमलों के बढ़ने का एक बड़ा कारण मौसम और भौगोलिक बदलाव को भी बताया। उन्होंने कहा, "इस बार इलाके में बाढ़ नहीं आई है। सामान्यतः बाढ़ आने पर गन्ने के खेतों और जंगलों में पानी भर जाता था, जिससे जंगली जानवर पीछे हट जाते थे और किसानों की आवाजाही कम हो जाती थी। लेकिन इस बार सूखे हालात के कारण किसान लगातार खेतों में जा रहे हैं और फसलें भी घनी हैं, जो तेंदुओं को छिपने की जगह देती हैं। ऐसे में तेंदुओं और इंसानों का आमना-सामना होने की घटनाएं अचानक से बढ़ गई हैं, जिससे हमलों का यह डरावना आंकड़ा सामने आ रहा है।"
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फिलहाल प्रशासन का पूरा जोर जल्द से जल्द इस खूंखार तेंदुए को पिंजरे में कैद करने पर है, ताकि अनाथ हुए जगराज के परिवार को न्याय मिल सके और इलाके के लोग फिर से बिना किसी खौफ के अपना जीवन यापन कर सकें। ग्रामीण अब प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और अनाथ बच्चों के पालन-पोषण की व्यवस्था करने की भी गुहार लगा रहे हैं।
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