न्यूज़ डेस्क, कानपुर:
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उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से एक बेहद गंभीर और डराने वाली खबर सामने आई है। शहर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल की बड़ी लापरवाही के कारण अब 100 से अधिक लोगों की जान पर स्वाइन फ्लू (Swine Flu - H1N1) संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। एक 30 वर्षीय युवक की मौत के बाद जब पोस्टमार्टम और लैब की रिपोर्ट सामने आई, तो स्वास्थ्य विभाग (Health Department) में हड़कंप मच गया।READ ALSO:-मेरठ में बेखौफ बदमाश: पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी की बंद मीट फैक्ट्री में हथियारों के बल पर धावा, गार्डों को बंधक बनाकर 4 घंटे तक मचाई लूट
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रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि युवक की जान इलाज में लापरवाही से नहीं, बल्कि घातक 'स्वाइन फ्लू संक्रमण' के कारण गई थी। सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन को मरीज के स्वाइन फ्लू से पीड़ित होने की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इस संवेदनशील और जानलेवा बीमारी की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और परिजनों से पूरी तरह छिपा कर रखी।
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कैसे मंडराया 100 लोगों पर खतरा?

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अस्पताल की इस एक लापरवाही के कारण अब संक्रमण फैलने का बड़ा रिस्क पैदा हो गया है। मृतक युवक के संपर्क में आए उसके परिजन, अस्पताल के डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय और यहां तक कि युवक के अंतिम संस्कार में शामिल हुए 100 से अधिक लोग अब स्वाइन फ्लू के सीधे निशाने पर आ गए हैं।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए कानपुर स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
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एसीएमओ (ACMO) रमित रस्तोगी ने अस्पताल की लापरवाही पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

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"कानपुर के शारदा नगर स्थित अनुराग अस्पताल में स्वाइन फ्लू का मरीज भर्ती था। जानकारी होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने इस बात को छिपाया, जो कि महामारी नियंत्रण नियमों का सीधा उल्लंघन है। अस्पताल को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया जा रहा है। मरीज के संपर्क में आए सभी परिजनों, अस्पताल कर्मचारियों और पोस्टमार्टम हाउस के स्टाफ की तुरंत जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट आने तक सभी को सरकारी नियमानुसार क्वारंटीन (Quarantine) में रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।"
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वहीं, कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. हरिदत्त नेमी ने भी घटना का स्वतः संज्ञान लिया है और निगरानी टीमों (Surveillance Teams) को सक्रिय कर दिया है, ताकि संक्रमण की चेन को बढ़ने से रोका जा सके।
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पेट दर्द से हुई थी शुरुआत, 4 दिन बाद मौत

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इस पूरे मामले की शुरुआत 28 अगस्त को हुई थी। कन्नौज जिले के ग्राम तेरा जाकेट के रहने वाले मृतक के पिता राम राज ने बताया कि:
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    28 अगस्त को उनके 30 वर्षीय बेटे शिवम के पेट में अचानक तेज दर्द उठा था।
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    हालत बिगड़ने पर उसे पहले एक स्थानीय क्लीनिक और फिर गंभीर स्थिति में कानपुर के शारदा नगर स्थित 'अनुराग अस्पताल' में भर्ती कराया गया।
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    अस्पताल में चार दिनों तक चले इलाज के बावजूद शिवम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और 1 सितंबर को उसने दम तोड़ दिया।
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परिजनों के शक से खुला स्वाइन फ्लू का राज

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शिवम की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया और सच्चाई जानने के लिए पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़ गए। रावतपुर थाना पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर 2 सितंबर को शव का पोस्टमार्टम कराया। 5 सितंबर को जब पोस्टमार्टम और लैब की रिपोर्ट आई, तो सच्चाई जानकर सभी के होश उड़ गए। रिपोर्ट में साफ हो गया कि मौत की असली वजह कोई सामान्य बीमारी नहीं, बल्कि स्वाइन फ्लू (H1N1) का खतरनाक संक्रमण था।
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शहर में एक और मरीज वेंटिलेटर पर, सतर्कता बढ़ी

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कानपुर में स्वाइन फ्लू का खतरा केवल इस एक केस तक सीमित नहीं है। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, हैलट अस्पताल (Hallet Hospital) में भी स्वाइन फ्लू का एक 55 वर्षीय मरीज भर्ती है।
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    इस मरीज की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
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    यह मरीज पिछले 10 दिनों से शहर के ही एक अन्य निजी अस्पताल में भर्ती था, जहां उसकी जांच में एच1एन1 (H1N1) वायरस की पुष्टि हुई थी।
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    हैलट प्रशासन ने अब संक्रमण की अंतिम आधिकारिक पुष्टि के लिए मरीज के सैंपल को मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में 'आरटी-पीसीआर (RT-PCR)' जांच के लिए भेज दिया है।
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इन दोनों घटनाओं के सामने आने के बाद पूरे कानपुर शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें।
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