झांसी (Khabreelal News Desk): उत्तर प्रदेश के झांसी (Jhansi) में सर्राफा व्यापारियों ने सुरक्षा को लेकर एक कड़ा और बड़ा फैसला लिया है। आए दिन होने वाली टप्पेबाजी, चोरी और लूट की वारदातों से परेशान होकर दुकानदारों ने अब "नो फेस, नो एंट्री" (No Face, No Entry) की नीति अपना ली है।READ ALSO:-Meerut News: संगीत सोम को 'बम' से उड़ाने की धमकी! बांग्लादेशी नंबर से आया कॉल, शाहरुख खान को 'गद्दार' कहने पर भड़के कट्टरपंथी?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सीपरी बाजार क्षेत्र के सर्राफा कमिटी ने एक फरमान जारी किया है, जिसके तहत दुकानों के अंदर बुर्का, नकाब या घूंघट (Burqa or Ghunghat) में आने वाली महिलाओं को सीधे प्रवेश नहीं मिलेगा। अगर उन्हें खरीदारी करनी है, तो पहले अपना चेहरा दिखाना होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

दुकानों के बाहर चस्पा किए गए नोटिस

\r\n\r\n
झांसी के सीपरी सर्राफा व्यापार मंडल (Sipri Sarafa Vyapar Mandal) के निर्देश के बाद सुनारों ने अपनी दुकानों के बाहर और अंदर नोटिस चिपका दिए हैं। इन पोस्टर्स पर साफ शब्दों में अपील की गई है:
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
\r\n
"कृपया दुकान में प्रवेश करते समय अपना चेहरा खुला रखें। बुर्का, नकाब या घूंघट हटाकर ही प्रवेश करें। सुरक्षा कारणों से हमारा सहयोग करें।"
\r\n
\r\n\r\n

 

खबरों के लिए ज्वाइन करें हमारा Whatsapp Channel
\r\n\r\n
व्यापार मंडल ने सभी छोटे-बड़े सुनारों को इस निर्देश का सख्ती से पालन करने को कहा है। दुकानदारों का कहना है कि यह नियम किसी धर्म या जाति विशेष के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो पहचान छिपाकर दुकान में आता है।
\r\n\r\n

 ज्वेलरी शॉप पर ग्राहकों के लिए नोटिस चस्पा करता दुकानदार।

\r\n\r\n

क्यों लिया गया इतना सख्त फैसला? (The Reason Behind The Ban)

\r\n\r\n
इस फैसले के पीछे मुख्य वजह सुरक्षा (Security) है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय में झांसी और आसपास के जिलों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जहां महिलाएं ग्राहक बनकर आईं और लाखों के जेवर पार कर दिए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    पहचान छिपाने का डर: अक्सर वारदातों में देखा गया है कि महिलाएं घूंघट या नकाब की आड़ में चोरी करती हैं। सीसीटीवी (CCTV) में भी उनका चेहरा कैद नहीं हो पाता, जिससे पुलिस को आरोपी को पकड़ने में मुश्किल होती है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    टप्पेबाजी की घटनाएं: कई बार महिलाएं गिरोह में आती हैं और दुकानदार का ध्यान भटकाकर गहने उड़ा ले जाती हैं।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    पुलिस कार्रवाई में देरी: दुकानदारों का तर्क है कि जब चोरी हो जाती है, तो पुलिस सुराग न होने की बात कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देती है। इसलिए "सावधानी ही बचाव है" की तर्ज पर यह फैसला लिया गया है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

नकली गहनों (Fake Jewelry) पर भी अलर्ट

\r\n\r\n
सिर्फ चेहरे की पहचान ही नहीं, बल्कि नकली सोने-चांदी को लेकर भी व्यापार मंडल ने अलर्ट जारी किया है। मंडल के अध्यक्ष ने सभी दुकानदारों को निर्देश दिए हैं कि:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    अगर कोई अनजान महिला या पुरुष पुराने गहने बेचने आता है, तो उसकी पूरी जांच-पड़ताल करें।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    गहनों को कसौटी पर कसने और गलाने के बाद ही खरीदें।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कई बार ठग सोने की पॉलिश चढ़ाकर नकली जेवर असली बताकर बेच जाते हैं, जिससे सुनारों को भारी नुकसान होता है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

व्यापार मंडल का बयान

\r\n\r\n
सीपरी सर्राफा व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि यह फैसला किसी की भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं, बल्कि व्यापार और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
"दुकान के अंदर आने वाले हर शख्स का चेहरा सीसीटीवी में रिकॉर्ड होना जरूरी है। अगर कल को कोई घटना होती है, तो हमारे पास पुलिस को देने के लिए सबूत होना चाहिए। जो असली ग्राहक है, उसे चेहरा दिखाने में कोई परहेज नहीं होगा।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या है कानूनी और सामाजिक पहलू?

\r\n\r\n
हालांकि, यह एक निजी संस्था (व्यापार मंडल) का फैसला है, लेकिन इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे निजता का मामला मान रहे हैं। लेकिन यूपी में बढ़ते अपराध को देखते हुए फिलहाल दुकानदार रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें