उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने न केवल आम जनता बल्कि पुलिस महकमे को भी सकते में डाल दिया है। एक युवती, जो देखने में एक साधारण सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लगती है, असल में अपराध की दुनिया की एक ऐसी खिलाड़ी निकली, जिसने वर्दीधारियों तक को नहीं बख्शा।READ ALSO:-बिजनौर स्पेशल: "या तो मैं सुंदर की हो जाऊंगी या अपनी जान दे दूंगी..." धर्म की दीवार लांघकर जब 19 साल की सोनी ने लिखी बगावत की नई इबारत
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20 जनवरी को अपने जन्मदिन की पार्टी में एक युवक के पेट में गोली उतारने वाली अंशिका सिंह महज एक आक्रामक युवती नहीं, बल्कि एक 'सीरियल ब्लैकमेलर' और 'हनीट्रैप रैकेट' की मास्टरमाइंड निकली है। पुलिस की शुरुआती जांच और उसके मोबाइल फोन से मिले सबूतों ने एक ऐसे काले साम्राज्य का पर्दाफाश किया है, जिसकी जड़ें ब्लैकमेलिंग, सेक्सटॉर्शन और फर्जी मुकदमों तक फैली हुई हैं।
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वह खौफनाक शाम – जन्मदिन, केक और पिस्तौल

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इस पूरे मामले का खुलासा 20 जनवरी, 2026 की शाम को हुआ। स्थान था गोरखपुर का सिंघड़िया इलाका, जहाँ मॉडल शॉप के पास जश्न का माहौल था। अंशिका सिंह अपना जन्मदिन मनाने के लिए अपने दोस्तों के साथ वहां मौजूद थी। म्यूजिक, मस्ती और केक के बीच अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी।
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क्या हुआ था उस रात?

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प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, विशाल मिश्रा नाम का एक अस्पताल मैनेजर वहां पहुंचा। विशाल और अंशिका के बीच पुराने पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। विशाल का आरोप है कि अंशिका उससे ब्लैकमेल करके पैसे मांग रही थी। जब वह बातचीत करने पहुंचा, तो अंशिका का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया।
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 अंशिका ने पैसे न देने पर कुछ लड़कों पर केस भी दर्ज कराया था।

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बहस इतनी बढ़ी कि अंशिका ने आव देखा न ताव, अपनी कमर से पिस्तौल निकाल ली और तान दी। विशाल ने बचाव की कोशिश की, दोनों के बीच छीना-झपटी हुई और इसी दौरान ट्रिगर दब गया। गोली विशाल को न लगकर उसके साथी अमिताभ निषाद के पेट में जा लगी। खून से लथपथ अमिताभ को गिरता देख वहां अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, मौके पर मौजूद भीड़ ने हिम्मत दिखाई और भागने की कोशिश कर रही अंशिका और उसके साथियों को दबोच लिया। यहीं से शुरू हुई इस 'लेडी डॉन' के पतन की कहानी।
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मोबाइल का लॉक खुला और उड़ गए पुलिस के होश

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गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने अंशिका का मोबाइल जब्त किया और डाटा खंगाला, तो जांच अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। यह मामला सिर्फ एक गोलीकांड का नहीं था। मोबाइल की गैलरी में अश्लील वीडियो, स्क्रीनशॉट्स और चैट का ऐसा जखीरा मिला, जो एक बड़े 'सेक्सटॉर्शन रैकेट' (Sextortion Racket) की ओर इशारा कर रहा था।
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 मंगलवार को अंशिका बर्थडे मना रही थी। तभी अस्पताल के मैनेजर विशाल रंगदारी के 20 हजार रुपए लेकर पहुंचे। पैसे कम होने को लेकर उसकी कहासुनी हो गई।

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5 साल, 150 शिकार और 'न्यूड वीडियो कॉल' का खेल

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पुलिस पूछताछ में अंशिका ने बेबाकी से अपने गुनाह कबूल किए। उसने बताया कि वह पिछले 5 सालों से लोगों को अपने जाल में फंसा रही है। उसका तरीका (Modus Operandi) बेहद शातिर था:
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    शिकार की तलाश: वह सोशल मीडिया या किसी माध्यम से रईस या प्रतिष्ठित लोगों का नंबर हासिल करती थी।
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    दोस्ती और वीडियो कॉल: पहले मीठी बातों में फंसाना और फिर वीडियो कॉल करना।
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    न्यूड होकर रिकॉर्डिंग: वीडियो कॉल के दौरान वह खुद न्यूड हो जाती थी और सामने वाले को भी कपड़े उतारने के लिए उकसाती थी।
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    ब्लैकमेलिंग: उस वीडियो कॉल को वह स्क्रीन रिकॉर्डर से रिकॉर्ड कर लेती थी। इसके बाद शुरू होता था असली खेल—वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे वसूलना।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अब तक वह 150 से ज्यादा लोगों को इसी तरह फंसा चुकी है।
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वर्दी पर दाग – पुलिसवाले भी बने हवस और डर का शिकार

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इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अंशिका के जाल में फंसने वाले सिर्फ आम व्यापारी या नौकरीपेशा लोग नहीं थे, बल्कि वे लोग भी थे जिनका काम अपराध रोकना है। अंशिका के मोबाइल से मिले सबूतों ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
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DSP से लेकर थानेदार तक 'हनीट्रैप' में

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जांच में सामने आया है कि अंशिका के संपर्क में 12 से ज्यादा पुलिसकर्मी थे।
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    अयोध्या के DSP: सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या में तैनात एक पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारी भी इसके संपर्क में थे।
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    गीडा थाना प्रभारी: गोरखपुर के गीडा थाने के एक दरोगा को उसने मैसेंजर ऐप के जरिए फंसाया। पहले चैट की, फिर नंबर लिया और वीडियो कॉल पर आपत्तिजनक स्थिति में रिकॉर्ड कर लिया।
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    परिणाम: इज्जत के डर से ये पुलिसवाले न तो कोई कार्रवाई कर पाए और न ही किसी से शिकायत। वे चुपचाप इस लेडी ब्लैकमेलर की मांगों को पूरा करते रहे या दबाव झेलते रहे।
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अंशिका के मोबाइल में कई पुलिसकर्मियों के साथ उसकी तस्वीरें और आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं, जो यह साबित करते हैं कि उसका नेटवर्क कितना गहरा था और वह कितनी निडर थी।
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अपराध की दुनिया में अंशिका का 'कच्चा चिट्ठा'

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अंशिका सिंह का अपराधी इतिहास सिर्फ हनीट्रैप तक सीमित नहीं है। वह एक आदतन अपराधी (Habitual Offender) है, जो कानून का डर दिखाकर ही कानून तोड़ती रही। पुलिस की फाइल में दर्ज उसके तीन बड़े कारनामे उसकी मानसिकता को उजागर करते हैं।
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कांड नंबर 1: रेप केस का डर और लाखों की वसूली

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अंशिका ने कानून को अपनी ढाल बना लिया था।
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    संतकबीरनगर का सूरज सिंह: उसे प्रेम जाल में फंसाया और जब उसने पैसे देने से मना किया, तो उसके खिलाफ POCSO Act (नाबालिग से यौन शोषण) का फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया।
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    प्रियांशु सिंह: खलीलाबाद के रहने वाले प्रियांशु को भी फर्जी रेप केस में फंसाने की धमकी दी और उससे 50,000 रुपये वसूल लिए। प्रियांशु ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की थी, लेकिन तब कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी।
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कांड नंबर 2: मकान मालकिन को भी नहीं बख्शा

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साल 2021 में वह संतकबीरनगर में किराए पर रहती थी। उसकी अय्याशियों और संदिग्ध गतिविधियों (लड़कों का आना-जाना) से परेशान होकर जब मकान मालकिन गुड़िया पीटर ने उसे घर खाली करने को कहा, तो अंशिका ने अपना असली रंग दिखाया।
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    उसने घर खाली करने के बदले 2 लाख रुपये की रंगदारी मांगी।
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    धमकी दी कि अगर पैसे नहीं मिले, तो वह मकान मालिक के परिवार को झूठे केस में फंसा देगी।
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    डर के मारे मकान मालकिन को अपने ही घर में CCTV कैमरे लगवाने पड़े।
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कांड नंबर 3: दिल्ली से थार (Thar) चोरी और फर्जी नंबर प्लेट

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अंशिका को 'हाई-प्रोफाइल' लाइफ जीने का शौक था, चाहे वह चोरी के पैसों से ही क्यों न हो।
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    सितंबर 2025: वह अपने दोस्तों के साथ दिल्ली घूमने गई। वहां से उसने एक महिंद्रा थार (Mahindra Thar) किराए पर ली।
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    गाड़ी वापस करने के बजाय वह उसे चोरी कर गोरखपुर ले आई।
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    पुलिस से बचने के लिए उसने गाड़ी पर 4 अलग-अलग फर्जी नंबर प्लेट्स (हरियाणा, बिहार, गोरखपुर) का इस्तेमाल किया।
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    12 अक्टूबर 2025 को उसके साथियों (विक्की और बंटी) को पुलिस ने पकड़ लिया, लेकिन अंशिका चकमा देकर फरार हो गई और अंडरग्राउंड हो गई थी।
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भाग 5: रील्स की दुनिया का छलावा (Social Media Addiction)

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अंशिका सिंह की प्रोफाइल आज के दौर के उस "डार्क ट्रुथ" को भी दिखाती है, जहाँ सोशल मीडिया की चमक-धमक के पीछे अपराध पलता है।
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    700+ वीडियो: इंस्टाग्राम पर उसके 700 से ज्यादा रील्स हैं।
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    दबंगई का प्रदर्शन: वह अक्सर पुलिस जीप के सामने, हथियारों के साथ या आपत्तिजनक गानों पर रील्स बनाती थी।
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    फॉलोअर्स की भूख: अपनी रील लाइफ को रियल बनाने के लिए और महंगे शौक पूरे करने के लिए उसने अपराध का रास्ता चुना। उसे लगता था कि सोशल मीडिया की फेम और पुलिसवालों से उसकी जान-पहचान उसे हर गुनाह से बचा लेगी।
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भाग 6: पीड़ित विशाल मिश्रा की आपबीती – "वो मुझे और मेरे परिवार को मार डालती"

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इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य शिकायतकर्ता विशाल मिश्रा (द्विवेदी चाइल्ड केयर अस्पताल के मैनेजर) ने जो बताया, वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकता है।
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"अंशिका और उसका साथी बंटी वर्मा मेरे अस्पताल आए थे। उन्होंने धोखे से मेरा नंबर लिया। कुछ दिन बाद अंशिका आई और मुझे बाहर बुलाया। उसने सीधे पिस्तौल दिखाई और 12 हजार रुपये छीन लिए। उसने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए तो रेप के केस में अंदर करवा दूंगी। मेरी फैमिली है, इज्जत के डर से मैंने पैसे दे दिए।" — विशाल मिश्रा
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विशाल ने आगे बताया कि 20 जनवरी को अंशिका ने फिर फोन किया और 50 हजार रुपये की मांग की। धमकी दी कि अगर पैसे लेकर नहीं आए तो पूरे परिवार को जान से मरवा देगी। विशाल किसी तरह 20 हजार रुपये लेकर पहुंचा था, सिर्फ यह विनती करने कि उसका पीछा छोड़ दिया जाए। लेकिन वहां अंशिका ने गोली चला दी, जो उसके दोस्त अमिताभ को लगी। अमिताभ का अभी भी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।
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भाग 7: पुलिस की कार्रवाई और आगे की राह

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इस बार अंशिका की कोई भी चाल काम नहीं आई। भीड़ द्वारा पकड़े जाने के कारण उसे मौके से भागने का मौका नहीं मिला।
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    गिरफ्तारी: पुलिस ने अंशिका को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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    फरार आरोपी: उसके मुख्य सहयोगी बंटी वर्मा और अन्य 4 साथियों की तलाश में पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं।
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    फॉरेंसिक जांच: पुलिस उसके मोबाइल डेटा, डिलीट की गई चैट और क्लाउड डेटा को रिकवर कर रही है ताकि ब्लैकमेलिंग के शिकार हुए अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
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    गैंगस्टर एक्ट की तैयारी: जिस तरह का उसका आपराधिक इतिहास है, पुलिस उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई कर सकती है।
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एसपी सिटी अभिनव त्यागी और सीओ कैंट योगेंद्र कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि जांच अब केवल गोलीकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि 'सेक्सटॉर्शन रैकेट' के हर पहलू को खंगाला जा रहा है।
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समाज के लिए एक चेतावनी

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गोरखपुर का यह मामला सिर्फ एक अपराध की खबर नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में पनप रहे नए खतरों की घंटी है। अंशिका सिंह जैसे अपराधी तकनीक और कानून की खामियों का फायदा उठाकर लोगों की इज्जत से खेलते हैं।
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यह घटना सिखाती है कि:

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    सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती भारी पड़ सकती है।
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    वीडियो कॉल पर किसी भी तरह की अश्लीलता आपको ब्लैकमेलिंग का शिकार बना सकती है।
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    ब्लैकमेलर से डरने के बजाय पुलिस को सूचना देना ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।
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फिलहाल, गोरखपुर की यह 'लेडी ब्लैकमेलर' सलाखों के पीछे है, लेकिन सवाल यह है कि उसके नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और कितने सफेदपोशों के नकाब अभी उतरने बाकी हैं? पुलिस की विस्तृत चार्जशीट का अब पूरे शहर को इंतजार है।
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प्रमुख बिंदु (Key Highlights Recap):

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विवरण
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जानकारी
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आरोपी का नाम
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अंशिका सिंह (मूल निवासी: हरपुरबुदहट)
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मुख्य अपराध
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हत्या का प्रयास (धारा 307), ब्लैकमेलिंग, सेक्सटॉर्शन
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पीड़ितों की संख्या
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150+ (5 साल में)
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पुलिसकर्मी शिकार
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12+ (जिसमें DSP और SHO शामिल)
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ताजा घटना
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बर्थडे पार्टी में युवक को गोली मारी (20 जनवरी)
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पुराने केस
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थार चोरी, फर्जी रेप केस की धमकी, मकान कब्जाने की कोशिश
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बरामदगी
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मोबाइल में अश्लील वीडियो, पिस्तौल, फर्जी नंबर प्लेट्स
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सोशल मीडिया का काला चेहरा

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अंशिका के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 700 से ज्यादा रील्स हैं। इसमें से कई वीडियो पुलिस जीप के पास, हथियारों के साथ या आपत्तिजनक गानों पर बनाए गए हैं। यह दर्शाता है कि उसे कानून का कोई खौफ नहीं था। 'लाइक' और 'फॉलोअर्स' की भूख ने एक सामान्य लड़की को अपराधी बना दिया।
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सावधान रहें: यह घटना हम सभी के लिए एक चेतावनी है। सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने या वीडियो कॉल रिसीव करने से पहले सौ बार सोचें। एक छोटी सी गलती आपकी पूरी जिंदगी की कमाई और इज्जत को मिट्टी में मिला सकती है।
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