उत्तर प्रदेश में इन दिनों आसमान से आग बरस रही है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों ने आम जनजीवन को बुरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। ऐसे में अगर किसी इलाके में लगातार पांच दिनों तक पीने के पानी की सप्लाई ठप हो जाए, तो वहां के हालात कितने खौफनाक होंगे, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कुछ ऐसा ही दर्दनाक और अमानवीय नजारा क्षेत्र के ग्राम हसनपुर लुहारी (Hasanpur Luhari) में देखने को मिल रहा है।READ ALSO:-शामली के हसनपुर लोहारी में मानसून से पहले 'सर्जिकल स्ट्राइक': ग्राम प्रधान रजिया कुरैशी के नेतृत्व में युद्धस्तर पर महा-सफाई अभियान, जलभराव से मिलेगी 100% मुक्ति
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यहाँ की कश्यप बस्ती (Kashyap Basti) और नयाबास मोहल्ले के करीब 300 परिवार पिछले पांच दिनों से पानी की एक-एक बूंद के लिए मोहताज हो गए हैं। घरों के नल सूखे पड़े हैं, टंकियों में पानी नहीं है और प्यास बुझाने के लिए जो सरकारी हैंडपंप लगे हैं, वे जहर समान पीला और दूषित पानी उगल रहे हैं। प्रशासन और ग्राम पंचायत की घोर लापरवाही से आक्रोशित होकर बुधवार को ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया और उन्होंने खाली बाल्टियां व बर्तन लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
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\r\n— Bijnor Police (@bijnorpolice) June 23, 2026
\r\nथाना चांदपुर क्षेत्रान्तर्गत एक महिला द्वारा सल्फास का सेवन करने से मृत्यु होने के उपरान्त स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में क्षेत्राधिकारी चांदपुर जनपद बिजनौर की बाइट।#UPPolice pic.twitter.com/8bGOzJRyCV
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आइए, हसनपुर लुहारी के इस गंभीर जल संकट की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट और ग्रामीणों की पीड़ा को विस्तार से समझते हैं।
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प्यास से बेहाल 300 परिवार: न नहाने को पानी, न पीने को
\r\n\r\nजल ही जीवन है, यह कहावत हसनपुर लुहारी के कश्यप बस्ती और नयाबास मोहल्ले के लोगों के लिए इन दिनों एक क्रूर मजाक बन गई है। पिछले पांच दिनों से इस इलाके में पानी की सप्लाई पूरी तरह से बाधित है।
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पानी न आने के कारण ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। सुबह उठकर पीने के पानी का इंतजाम करना ही परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। महिलाओं को कपड़े धोने, खाना बनाने और घर की साफ-सफाई जैसे जरूरी कामों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशुपालकों के लिए स्थिति और भी विकट है, क्योंकि तपती दोपहरी में बेजुबान मवेशियों को पिलाने के लिए भी पानी नहीं है। पानी के अभाव में बच्चों को बिना नहाए स्कूल जाना पड़ रहा है और कई परिवारों को बिना नहाए-धोए ही अपना दिन गुजारना पड़ रहा है।
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सिस्टम की नाकामी: 30 हजार की आबादी, लेकिन सप्लाई का ढांचा जर्जर
\r\n\r\nजानकारी के अनुसार, ग्राम हसनपुर लुहारी एक बड़ी आबादी वाला गांव है। यहाँ करीब 30 हजार की आबादी को पानी की सप्लाई देने के लिए जल निगम द्वारा एक बड़ी पानी की टंकी (Overhead Water Tank) का निर्माण कराया गया था।
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- \r\n खराब पाइपलाइन नेटवर्क: पूरे गांव में पानी की सप्लाई के लिए केवल दो मुख्य पाइपलाइनें बिछाई गई हैं, जो इतनी बड़ी आबादी के लिए नाकाफी साबित हो रही हैं।\r\n \r\n
- \r\n लो-प्रेशर की समस्या: कश्यप बस्ती और नयाबास मोहल्ला टंकी से कुछ दूरी पर स्थित हैं या वहां तक जाने वाली लाइनों में तकनीकी खराबी आ गई है। इस वजह से पिछले पांच दिनों से लाइनों में पानी का प्रेशर (Water Pressure) बिल्कुल खत्म हो गया है।\r\n \r\n
- \r\n अमीरी-गरीबी का अंतर: इस जल संकट ने गांव में एक अजीब सा भेदभाव पैदा कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि जिन संपन्न घरों में पाइपलाइन पर पानी खींचने वाली 'टुल्लू मोटर' (Water Motor Pump) लगी हुई है, वे लो-प्रेशर में भी थोड़ा-बहुत पानी खींच लेते हैं। लेकिन गरीब परिवारों के घरों में, जिनके पास मोटर नहीं है, नलों से एक बूंद पानी भी नहीं टपक रहा है।\r\n \r\n
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बीमारी को दावत: पीला और दूषित पानी उगल रहे हैंडपंप
\r\n\r\nजब सरकारी नलों से सप्लाई बंद हो जाती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आमतौर पर इंडिया मार्का हैंडपंपों (Handpumps) का रुख करते हैं। लेकिन कश्यप बस्ती के लोगों के लिए यह विकल्प भी एक बड़ी मुसीबत बन गया है।
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प्रदर्शन के दौरान स्थानीय निवासी टिंकू और अनुज ने मीडिया और प्रशासन को गांव की जमीनी हकीकत दिखाते हुए बताया कि मोहल्ले में लगे सरकारी हैंडपंप काफी समय से पूरी तरह से दूषित पानी उगल रहे हैं।
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- \r\n पीला और बदबूदार पानी: इन हैंडपंपों से निकलने वाला पानी मटमैला, गहरे पीले रंग का और बदबूदार है। यह पानी पीने योग्य तो दूर, कपड़े धोने के लायक भी नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n महामारी का खौफ: भीषण गर्मी के बीच मजबूरी में अगर कोई इस पानी को पीता है, तो उसे भयंकर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों को डर है कि इस दूषित जल के उपयोग से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में हैजा, पीलिया, डायरिया, टायफाइड और पेट दर्द जैसी घातक संक्रामक बीमारियां (Waterborne Diseases) फैल सकती हैं।\r\n \r\n
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खेतों की दौड़ और टैंकरों का आर्थिक बोझ
\r\n\r\nसरकारी तंत्र के पूरी तरह फेल हो जाने के बाद अब ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
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- \r\n खेतों से पानी ढोना: बस्ती की महिलाओं और बच्चों को चिलचिलाती धूप में सिर पर मटके और हाथों में बाल्टियां लेकर एक से दो किलोमीटर दूर स्थित खेतों की तरफ जाना पड़ रहा है। वे वहां लगे निजी नलकूपों (Tubewells) से पानी भरकर लाते हैं। यह शारीरिक रूप से बेहद थका देने वाला काम है।\r\n \r\n
- \r\n निजी टैंकरों की शरण: जिन परिवारों के पास थोड़ा पैसा है, वे मजबूरी में मोटी रकम खर्च करके निजी पानी के टैंकर (Private Water Tankers) मंगवा रहे हैं। जो मजदूर दिहाड़ी कमाकर अपना घर चलाते हैं, उनके लिए रोज पानी खरीदना एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बन गया है।\r\n \r\n
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मूकदर्शक बनी ग्राम पंचायत: अनसुनी की गई गुहार
\r\n\r\nइस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा निराशाजनक रवैया स्थानीय ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) का रहा है। लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई होने के नाते ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्यों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं का तुरंत समाधान करें।
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कश्यप बस्ती के लोगों ने बताया कि पानी की सप्लाई बाधित होने के पहले ही दिन उन्होंने ग्राम पंचायत कार्यालय जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। लगातार कई दिनों तक गुहार लगाने के बावजूद उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। समस्या का समाधान करना तो दूर, पंचायत के नुमाइंदों ने मौके पर आकर स्थिति का जायजा लेना भी मुनासिब नहीं समझा। ग्राम पंचायत की इस घोर अनदेखी और 'मूकदर्शक' बने रहने की नीति ने ही ग्रामीणों के गुस्से को भड़काने का काम किया।
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48 घंटे का अल्टीमेटम: 'समाधान नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन'
\r\n\r\nजब प्यास से तड़पते गले सूख गए और प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली, तो बुधवार को कश्यप बस्ती का आक्रोश सड़कों पर आ गया। बड़ी संख्या में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने हाथों में खाली बाल्टियां, डिब्बे और बर्तन लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने जल निगम, स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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ग्रामीणों की चेतावनी: प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन को स्पष्ट और दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, "प्रशासन हमारी बुनियादी समस्याओं को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। यदि अगले 48 घंटों के भीतर पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया और कश्यप बस्ती तक पाइपलाइन का प्रेशर ठीक कर जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो पूरे मोहल्ले के लोग मजबूर होकर प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों का घेराव करेंगे और सड़क पर बैठकर बड़ा धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे।"
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इस उग्र प्रदर्शन में मुख्य रूप से राधेश्याम, विनोद कुमार, सतीश, नवीन, अनुज, रमेश, सुखबीर, संजू, बबीता, राजबाला, और प्रमिला देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से जल्द से जल्द पानी की आपूर्ति शुरू कराने की मांग की।
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'जल जीवन मिशन' पर उठते सवाल
\r\n\r\nहसनपुर लुहारी की यह घटना केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल जीवन मिशन' (Jal Jeevan Mission - Har Ghar Jal) योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ फाइलों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वास्तविक धरातल पर 300 परिवार 45 डिग्री की गर्मी में पानी की एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।
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अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों के इस अल्टीमेटम के बाद सोया हुआ प्रशासन जागता है या फिर कश्यप बस्ती के लोगों को पानी के लिए अपनी लड़ाई को और तेज करना पड़ता है। फिलहाल, इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सबकी नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
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