लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था के लिहाज से मंगलवार का दिन बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में लोक भवन में संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों (Shikshamitra) और अनुदेशकों के लिए खजाना खोल दिया गया है। लंबे समय से अपने मानदेय में वृद्धि और स्थायीकरण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे शिक्षामित्रों को योगी सरकार ने एक बहुत बड़ी राहत दी है। इसके साथ ही प्रदेश के बुनियादी ढांचे, उच्च शिक्षा और महापुरुषों के सम्मान से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई गई है। 'खबरीलाल' (Khabreelal) की इस खास रिपोर्ट में आइए जानते हैं योगी कैबिनेट के इन सभी बड़े और दूरगामी फैसलों का पूरा विश्लेषण।Read also:-सोने-चांदी के बाजार में भूचाल: ऑल टाइम हाई से औंधे मुंह गिरे दाम, सोना ₹29 हजार तो चांदी ₹1.54 लाख तक हुई सस्ती!
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शिक्षामित्रों का खत्म हुआ वनवास: 10 हजार से बढ़कर 18 हजार हुआ मानदेय
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था में शिक्षामित्र एक अहम रीढ़ की तरह काम करते हैं। सालों से ये शिक्षामित्र बहुत ही सीमित मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। महंगाई के इस दौर में 10 हजार रुपये में परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। इसे लेकर कई बार धरने और प्रदर्शन भी हुए। लेकिन मंगलवार को योगी कैबिनेट ने उनकी इस सबसे बड़ी पीड़ा को दूर कर दिया है।
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बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेसवार्ता में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को सहर्ष अनुमोदित कर दिया है।
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- \r\n शिक्षामित्रों का नया मानदेय: अब तक शिक्षामित्रों को प्रतिमाह 10,000 रुपये का मानदेय मिलता था, जिसे एकमुश्त 8,000 रुपये बढ़ाकर अब 18,000 रुपये कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n किसे मिलेगा लाभ: यूपी के परिषदीय स्कूलों में वर्तमान में कुल 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों के मानदेय का वहन केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर (समग्र शिक्षा अभियान के तहत) करेंगी। वहीं, बाकी बचे हुए शिक्षामित्रों का पूरा बढ़ा हुआ मानदेय अकेले उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार अपने खजाने से देगी।\r\n \r\n
- \r\n लागू होने की तिथि: सबसे अच्छी बात यह है कि मानदेय की यह बढ़ोतरी इसी वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल महीने से लागू मानी जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि 01 मई को शिक्षामित्रों के खाते में जो सैलरी आएगी, वह पूरे 18 हजार रुपये होगी। इस फैसले से प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।\r\n \r\n
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अनुदेशकों की भी हुई बल्ले-बल्ले, मानदेय लगभग दोगुना
\r\n\r\nशिक्षामित्रों के साथ-साथ यूपी के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 6 से 8) में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों (Part-time Instructors) की मुराद भी पूरी हो गई है। ये अनुदेशक बच्चों को कला, शारीरिक शिक्षा, और कार्यानुभव जैसे अहम विषय पढ़ाते हैं। मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि अनुदेशकों का मानदेय भी 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये कर दिया गया है। अनुदेशकों का मानदेय भी अप्रैल से ही लागू होगा और मई से उन्हें नया वेतन मिलना शुरू हो जाएगा। सरकार के इस कदम से बेसिक शिक्षा विभाग में काम करने वाले संविदा कर्मियों का मनोबल काफी ऊंचा हुआ है और उम्मीद की जा रही है कि इससे शिक्षण कार्य में और अधिक गुणवत्ता आएगी।
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गोरखपुर को मिला एक और ताज: 491 करोड़ से बनेगा वानिकी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
\r\n\r\nकैबिनेट बैठक में सिर्फ बेसिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि उच्च और तकनीकी शिक्षा को लेकर भी एक बड़ा फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के विकास को एक नई रफ्तार देते हुए वहां एक नया विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
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गोरखपुर के कैंपियरगंज (Campierganj) इलाके में 'वानिकी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय' (Forestry and Technology University) की स्थापना की जाएगी।
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- \r\n बजट और क्षेत्रफल: इस भव्य और अत्याधुनिक विश्वविद्यालय के निर्माण पर राज्य सरकार 491 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसे 50 हेक्टेयर की विशाल भूमि पर स्थापित किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n क्या होगा फायदा: इस विश्वविद्यालय के बन जाने से पूर्वांचल समेत पूरे उत्तर प्रदेश के छात्रों को वानिकी (Forestry), पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और इससे जुड़ी उन्नत प्रौद्योगिकियों में उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त करने का मौका मिलेगा। पर्यावरण परिवर्तन (Climate Change) की वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए यह विश्वविद्यालय रिसर्च और डेवलपमेंट का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि ईको-टूरिज्म को भी भारी बढ़ावा मिलेगा।\r\n \r\n
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'डॉ. भीमराव अंबेडकर मूर्ति विकास योजना': महापुरुषों के सम्मान की अनूठी पहल
\r\n\r\nसमाज में समरसता और महापुरुषों के प्रति आदर भाव को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने एक बेहद शानदार योजना को हरी झंडी दिखाई है। इस नई योजना का नाम 'डॉ. भीमराव अंबेडकर मूर्ति विकास योजना' रखा गया है। यह योजना संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की स्मृति और सम्मान में शुरू की गई है।
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- \r\n क्या है योजना का उद्देश्य: प्रदेश भर में सार्वजनिक स्थानों, चौराहों और पार्कों में लगी बाबा साहेब और अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं का सौंदर्यीकरण (Beautification) किया जाएगा। अक्सर देखा जाता है कि खुले में लगी प्रतिमाएं रखरखाव के अभाव में खराब होने लगती हैं।\r\n \r\n
- \r\n कैसे होगा काम: इस योजना के तहत प्रत्येक चिह्नित प्रतिमा स्थल पर एक सुंदर छतरी (Canopy) का निर्माण किया जाएगा ताकि मूर्ति को धूप और बारिश से बचाया जा सके। इसके अलावा वहां आकर्षक प्रकाश व्यवस्था (Lighting), इंटरलॉकिंग, और बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n बजट का आवंटन: एक सार्वजनिक प्रतिमा के सौंदर्यीकरण पर 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार ने इस काम के लिए पूरे प्रदेश की 403 विधानसभाओं को चुना है। हर विधानसभा क्षेत्र में यह काम सुनिश्चित करने के लिए कुल 403 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। यह कदम सरकार की सामाजिक न्याय और सबका साथ-सबका विकास नीति को और पुख्ता करता है।\r\n \r\n
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22 में से 20 प्रस्ताव पास: विकास की बुलेट ट्रेन बनी योगी कैबिनेट
\r\n\r\nकैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना (Suresh Kumar Khanna) ने बताया कि सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में है। मंगलवार की इस अहम बैठक में कुल 22 अलग-अलग प्रस्ताव लाए गए थे, जिन पर गहन मंथन के बाद 20 प्रस्तावों को सर्वसम्मति से हरी झंडी दे दी गई।
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इन प्रस्तावों में शिक्षा, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई अहम मुद्दे शामिल थे। कुछ अन्य प्रस्तावों में स्थानीय निकाय, नगर विकास और लोक निर्माण विभाग से जुड़े काम भी शामिल हैं, जो आने वाले दिनों में प्रदेश की तस्वीर बदलने का काम करेंगे।
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कुल मिलाकर, मंगलवार को हुई योगी कैबिनेट की यह बैठक उत्तर प्रदेश के विकास के पन्नों में एक सुनहरा अध्याय जोड़ गई है। जहां एक तरफ शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि करके सरकार ने अपनी संवेदनशीलता और कर्मचारी-हितैषी होने का प्रमाण दिया है, वहीं गोरखपुर में वानिकी विश्वविद्यालय और अंबेडकर मूर्ति विकास योजना जैसे फैसले यह दर्शाते हैं कि सरकार भविष्य की जरूरतों और सामाजिक सरोकारों को लेकर कितनी गंभीर है। इन फैसलों का जमीन पर कितना असर होगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल प्रदेश के लाखों घरों में जश्न का माहौल है।
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