उत्तर प्रदेश की अवसंरचना (Infrastructure) और कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) अब केवल अपनी लंबाई और रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक के लिए भी जाना जाएगा। मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला यह 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे प्रदेश का पहला ऐसा हाईवे बनने जा रहा है, जो पूरी तरह से 'सर्विलांस के अभद्य किले' में तब्दील होगा।READ ALSO:-Utility News: अब दलालों की छुट्टी और एजेंट का खेल खत्म! घर बैठे 10 मिनट में 'फ्री' में बनाएं अपना पैन कार्ड; बस आधार कार्ड में होनी चाहिए ये एक चीज
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सरकार और निर्माण एजेंसी ने सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए हैं कि यहां नियम तोड़ने वालों की खैर नहीं होगी। एक्सप्रेसवे के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए कोरियाई तकनीक (Korean Technology) वाले अत्याधुनिक कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे न केवल दिन के उजाले में बल्कि घने अंधेरे में भी बाज जैसी नजर रखेंगे।
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हर 1 किलोमीटर पर 'तीसरी आंख' का पहरा
\r\n\r\nगंगा एक्सप्रेसवे पर सफर करना अब पूरी तरह से सुरक्षित और अनुशासित होगा। योजना के तहत पूरे हाईवे के प्रत्येक किलोमीटर पर एक हाई-टेक कोरियाई कैमरा स्थापित किया जा रहा है। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि 594 किमी के लंबे सफर में एक इंच भी जगह ऐसी न हो जो निगरानी से बाहर (Blind Spot) रहे।
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मेरठ से बदायूं तक का काम अंतिम चरण में: पहले चरण (पैकेज-1) के तहत मेरठ से बदायूं तक के 130 किलोमीटर के हिस्से में सुरक्षा का खाका खींच लिया गया है। इस 130 किमी की दूरी में कुल 131 अत्याधुनिक कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं। ये कैमरे डिवाइडर पर लगाए गए हैं ताकि दोनों तरफ की लेन पर बराबर नजर रखी जा सके।
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क्या है इन 'कोरियाई कैमरों' की खासियत?
\r\n\r\nइन कैमरों को सामान्य सीसीटीवी कैमरे समझने की भूल न करें। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस कोरियाई तकनीक पर आधारित हैं, जिनकी कीमत लाखों में बताई जा रही है।
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- \r\n 360 डिग्री निगरानी: डिवाइडर पर लगा एक कैमरा अपनी धुरी पर 360 डिग्री घूम सकता है।\r\n \r\n
- \r\n 500-500 मीटर की रेंज: एक कैमरा अपने स्थान से 500 मीटर आगे और 500 मीटर पीछे तक स्पष्ट देख सकता है। यानी दो कैमरों के बीच का 1 किमी का पूरा हिस्सा कवर हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n नाइट विजन (Night Vision): अक्सर एक्सप्रेसवे पर रात के समय अंधेरे का फायदा उठाकर आपराधिक घटनाएं होती हैं या दुर्घटनाएं छिप जाती हैं। ये कैमरे 'नाइट विजन' तकनीक से लैस हैं, जो घुप अंधेरे में भी दिन जैसी साफ तस्वीरें लेने में सक्षम हैं।\r\n \r\n
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वाहन रुका तो तुरंत बज जाएगी खतरे की घंटी
\r\n\r\nएक्सप्रेसवे पर अक्सर देखा जाता है कि गाड़ियां खराब होने, टायर पंक्चर होने या तेल खत्म होने पर सुनसान इलाके में खड़ी हो जाती हैं। ऐसे में यात्रियों के साथ लूटपाट का खतरा बना रहता है। लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे पर ऐसा नहीं होगा।
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ऑटोमैटिक डिटेक्शन सिस्टम: सीजीएम आईआरबी (IRB), अनूप सिंह के अनुसार, यदि कोई वाहन हाईवे पर किसी भी कारण से रुकता है, तो यह स्मार्ट कैमरा उसे तुरंत 'डिटेक्ट' (Detect) कर लेगा। कैमरा समझ जाएगा कि यह सामान्य यातायात नहीं है।
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- \r\n जैसे ही वाहन रुकेगा, कैमरा उसकी लाइव लोकेशन और फोटो तुरंत दोनों छोर पर बने कंट्रोल रूम (Control Room) को एसएमएस और अलर्ट के जरिए भेज देगा।\r\n \r\n
- \r\n अलर्ट मिलते ही कंट्रोल रूम से पेट्रोलिंग टीम या एंबुलेंस को तत्काल मदद के लिए रवाना कर दिया जाएगा।\r\n \r\n
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पुलिस के सर्विलांस सिस्टम से सीधी कनेक्टिविटी
\r\n\r\nसुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए इन कैमरों को केवल एक्सप्रेसवे के कंट्रोल रूम तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) के सर्विलांस सिस्टम से भी जोड़ा जा रहा है।
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इसका सीधा फायदा अपराध नियंत्रण में मिलेगा:
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- \r\n अगर कोई अपराधी वारदात को अंजाम देकर एक्सप्रेसवे के जरिए भागने की कोशिश करता है, तो पुलिस उसे रियल टाइम में ट्रैक कर सकेगी।\r\n \r\n
- \r\n किसी भी आपात स्थिति या आपराधिक घटना (Crime Incident) की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी समय रहते मौके पर पहुंच सकेगी।\r\n \r\n
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रफ्तार के शौकीनों के लिए बुरी खबर: ओवरस्पीडिंग पर कटेगा चालान
\r\n\r\nगंगा एक्सप्रेसवे को रफ्तार का हाईवे कहा जा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यहां मनमानी स्पीड की छूट होगी। यह एक्सप्रेसवे 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS) से लैस होगा।
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- \r\n स्पीड डिटेक्शन: प्रत्येक किमी पर लगे ये कैमरे वाहनों की गति को मापने में सक्षम हैं।\r\n \r\n
- \r\n ऑटोमैटिक चालान: अगर आपने निर्धारित गति सीमा (Speed Limit) का उल्लंघन किया, तो कैमरा आपकी नंबर प्लेट स्कैन करेगा और जानकारी कंट्रोल रूम को भेजेगा। इसके बाद ऑटोमैटिक ई-चालान (E-Challan) जनरेट होकर आपके मोबाइल पर पहुंच जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n ये कैमरे 'औसत गति' (Average Speed) की भी गणना करेंगे, जिससे ड्राइवर केवल कैमरे के पास धीमा होकर और बाद में तेज होकर नहीं बच सकेंगे।\r\n \r\n
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150 KM/H की रफ्तार पर भी एंट्री, रुकने की जरूरत नहीं
\r\n\r\nगंगा एक्सप्रेसवे को निर्बाध (Seamless) यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है। यहाँ टोल प्लाजा या एंट्री पॉइंट पर लंबी कतारें नहीं लगेंगी।
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- \r\n हाई स्पीड रीडर्स: एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर ऐसे एडवांस सेंसर और रीडर लगाए गए हैं जो 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते वाहन को भी स्कैन कर सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n नॉन-स्टॉप एंट्री: इसका मतलब है कि एक्सप्रेसवे पर चढ़ते समय आपको गाड़ी रोकने या धीमी करने की भी जरूरत नहीं होगी। सिस्टम अपने आप आपके वाहन को रजिस्टर कर लेगा।\r\n \r\n
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अंतिम चरण में है तैयारी
\r\n\r\nकोरियाई कंपनी की एक विशेष टीम वर्तमान में इन कैमरों की स्थापना और उनकी कनेक्टिविटी पर दिन-रात काम कर रही है। सिस्टम का हार्डवेयर लगभग तैयार कर लिया गया है और अब सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन का काम चल रहा है। टोल प्लाजा के बूथ भी बनकर तैयार हैं और जल्द ही इनका फाइनल ट्रायल (Testing) शुरू किया जाएगा।
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यूपी के विकास का नया अध्याय
\r\n\r\nगंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की प्रगति का रनवे है। 594 किमी की यह यात्रा अब सुरक्षित, सुगम और स्मार्ट होगी। कोरियाई तकनीक और यूपी पुलिस के समन्वय से तैयार हो रहा यह सुरक्षा कवच निश्चित रूप से यात्रियों में सुरक्षा का भाव जगाएगा। अब देखना यह होगा कि जब यह एक्सप्रेसवे आम जनता के लिए खुलेगा, तो यह तकनीक कितनी प्रभावी साबित होती है। लेकिन इतना तय है कि गंगा एक्सप्रेसवे पर 'नजर हटी, दुर्घटना घटी' वाली कहावत के साथ-साथ अब 'नजर हटी, तो चालान कटी' की कहावत भी लागू होगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.