भारतीय रेल के इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। दिल्ली-बनारस बुलेट ट्रेन (Delhi-Varanasi Bullet Train) परियोजना को लेकर रेलवे बोर्ड ने अपनी हरी झंडी दे दी है। इस मंजूरी के साथ ही उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के करोड़ों लोगों का हाई-स्पीड यात्रा का सपना हकीकत के करीब पहुंच गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले दो से तीन महीनों में इस 840 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर जमीनी काम (Ground Work) शुरू हो सकता है।READ ALSO:-ब्रेकिंग न्यूज़: आज शाम 6 बजे खुलेगा मेरठ-दिल्ली का 'रफ्तार द्वार'; नमो भारत और मेरठ मेट्रो में आम जनता कर सकेगी पहला सफर
\r\n\r\n\r\n\r\n
वर्तमान में दिल्ली से वाराणसी पहुंचने में वंदे भारत जैसी तेज ट्रेनों से भी 8 से 12 घंटे का समय लगता है, लेकिन बुलेट ट्रेन के शुरू होने के बाद यह दूरी महज 4 घंटे में सिमट जाएगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
840 किलोमीटर लंबा रूट और 14 अत्याधुनिक स्टेशन
\r\n\r\nनेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख औद्योगिक और पर्यटन केंद्रों को जोड़ेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रस्तावित स्टेशनों की सूची: यह ट्रेन दिल्ली के सराय काले खां से अपनी यात्रा शुरू करेगी और वाराणसी (बनारस) तक पहुंचने के लिए निम्नलिखित प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी:
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
- \r\n
- \r\n नोएडा (सेक्टर-144)\r\n \r\n
- \r\n जेवर (इंटरनेशनल एयरपोर्ट)\r\n \r\n
- \r\n मथुरा\r\n \r\n
- \r\n आगरा\r\n \r\n
- \r\n इटावा\r\n \r\n
- \r\n कन्नौज\r\n \r\n
- \r\n लखनऊ\r\n \r\n
- \r\n अयोध्या (प्रस्तावित विस्तार)\r\n \r\n
- \r\n रायबरेली\r\n \r\n
- \r\n प्रयागराज\r\n \r\n
- \r\n भदोही\r\n \r\n
- \r\n वाराणसी\r\n \r\n
\r\n\r\n
सटीक निर्माण लागत और मिट्टी की जांच के लिए फिलहाल LiDAR (Light Detection and Ranging) तकनीक का उपयोग करते हुए लेजर सर्वे किया जा रहा है।
\r\n\r\nसरकार का विशेष फोकस और 16 लाख करोड़ का निवेश
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
हालिया बजट में वित्त मंत्री ने देश में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए लगभग 16 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का खाका पेश किया है। इनमें से दिल्ली-बनारस बुलेट ट्रेन रूट को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इसके पीछे तकनीकी के साथ-साथ रणनीतिक कारण भी हैं। वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है और 2027 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सरकार इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को समय से पहले जमीन पर उतारना चाहती है। NHSRCL ने इसके लिए क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।
\r\n\r\nतकनीकी मानक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर ट्रेनें 250 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सभी सात प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए तकनीकी मानक एक समान रखे जाएंगे ताकि परिचालन में सुगमता रहे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रोजेक्ट के लिए तकनीक के चयन पर अभी मंथन जारी है। रेलवे जर्मनी, फ्रांस या रूस में से किसी एक देश की तकनीक का चुनाव कर सकता है। इसके साथ ही, इस उन्नत प्रणाली को संचालित करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ का आकलन भी शुरू कर दिया गया है। बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि भूमि अधिग्रहण और टेंडर की प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
दिल्ली-बनारस बुलेट ट्रेन परियोजना सिर्फ एक रेल मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक कायाकल्प का जरिया बनेगी। 4 घंटे में दिल्ली से बनारस की कनेक्टिविटी से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के असीम अवसर पैदा होंगे। जेवर एयरपोर्ट और आगरा-लखनऊ जैसे शहरों का बुलेट ट्रेन से जुड़ना पूरे उत्तर भारत के लॉजिस्टिक परिदृश्य को बदल देगा। रेलवे बोर्ड की सक्रियता और सख्त निर्देशों को देखते हुए उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों में हमें पटरियों पर बुलेट ट्रेन का काम होता दिखाई देगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
रेलवे बोर्ड ने दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है, जिसका निर्माण कार्य अगले 2-3 महीनों में शुरू हो सकता है। 840 किमी लंबे इस रूट पर नोएडा, आगरा, लखनऊ और प्रयागराज सहित 14 स्टेशन होंगे। 250-350 किमी/घंटा की रफ्तार वाली इस ट्रेन से दिल्ली से बनारस का सफर 12 घंटे से घटकर मात्र 4 घंटे रह जाएगा। सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण और सर्वे कार्य को तेज करने के निर्देश दिए हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.