लखनऊ, रविवार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने और खुद को भारत के डिजिटल पावरहाउस के साथ-साथ एक वैश्विक टेक्नोलॉजी डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने का एक महत्वाकांक्षी विजन तैयार किया है। यह मेगा प्लान भविष्य की तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और स्पेस-टेक को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रदेश के 4 करोड़ से अधिक युवाओं को वैश्विक स्तर का कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है।READ ALSO:-काशी की जलयात्रा का नया अध्याय: गंगा तट पर बन रहा वर्ल्ड क्लास क्रूज टर्मिनल, 'क्रूज सिटी' बनेगा बनारस
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6 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का रोडमैप
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'विकसित यूपी @2047' के इस विजन का सबसे बड़ा लक्ष्य उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
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    मौजूदा लक्ष्य: इस वित्तीय वर्ष में $353 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था।
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    2030 तक: $1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था।
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    2036 तक: $2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था।
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    2047 तक: $6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, जो भारत की अनुमानित GDP का 20% होगा।
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इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश को वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2047-48 तक 16% की कम्पाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) बनाए रखनी होगी। इस दौरान प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय को 26 लाख रुपए तक पहुंचाने का भी लक्ष्य है।
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2030 और 2047: दो पड़ावों का टेक्नोलॉजी लक्ष्य
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इस आर्थिक विजन को साकार करने के लिए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को सबसे बड़ा हथियार बनाया गया है, जिसके लिए दो चरणों में लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:
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लघु अवधि (2030 तक):
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    AI सिटी: लखनऊ और कानपुर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा।
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    स्टार्टअप हब: प्रदेश में कम से कम 20 'यूनिकॉर्न' (1 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य वाले) स्टार्टअप तैयार किए जाएंगे।
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    स्पेस-टेक: इसरो के सहयोग से सैटेलाइट लॉन्चिंग पर काम होगा ताकि आपदा प्रबंधन और मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाया जा सके।
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    निर्यात: सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट को 5 गुना बढ़ाया जाएगा।
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दीर्घ अवधि (2047 तक):
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    डेकाकॉर्न कंपनियां: प्रदेश में 15 से 20 'डेकाकॉर्न' (10 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य वाली) कंपनियां स्थापित की जाएंगी।
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    ग्लोबल लीडर: यूपी को AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों में वैश्विक लीडर बनाया जाएगा।
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    आईटी निर्यात: उत्तर प्रदेश को भारत के आईटी निर्यात में सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य बनाने का लक्ष्य है।
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'स्किल कैपिटल' बनेगा उत्तर प्रदेश
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इस पूरे विजन की नींव प्रदेश के युवाओं के कौशल विकास पर रखी गई है। सरकार का लक्ष्य 4 करोड़ से अधिक युवाओं का एक 'ग्लोबल स्किल्ड वर्कफोर्स' तैयार करना है। इसके लिए इंडस्ट्री 4.0 की जरूरतों के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा और प्रदेश के पांच शैक्षणिक संस्थानों को दुनिया के 200 सर्वश्रेष्ठ संस्थानों की सूची में शामिल कराने का भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।
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साढ़े आठ साल में कितना बदला यूपी?
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योगी सरकार ने अपने साढ़े आठ साल के कार्यकाल को इस विजन की मजबूत नींव बताया है। सरकार के अनुसार, जहां 2017 से पहले प्रदेश में आईटी और डिजिटल क्षेत्र में कोई ठोस नीति नहीं थी, वहीं आज गौतमबुद्ध नगर में उत्तर भारत का पहला डाटा सेंटर स्थापित हो चुका है और सॉफ्टवेयर निर्यात में नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, जो इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
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