खबरीलाल विशेष रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश की 3.10 लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए सोमवार का दिन एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया। राजधानी लखनऊ के लोक भवन सभागार में आयोजित एक भव्य सशक्तिकरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आंगनबाड़ी व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और डिजिटल क्रांति का शंखनाद किया।READ ALSO:-पेट्रोल पंपों पर अब मिलेगा केरोसिन: मिडिल ईस्ट की जंग के बीच मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, जानें आम आदमी पर क्या होगा असर?
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सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि जिस तरह प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्र अब 'स्मार्ट' हो रहे हैं, उसी तर्ज पर अब हमारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का 'मानदेय' (Honorarium) भी स्मार्ट होगा। मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद पूरे प्रदेश, विशेषकर मेरठ, बिजनौर और गाजियाबाद जैसे पश्चिमी यूपी के जिलों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। आइए, इस पूरी खबर और इसके दूरगामी प्रभावों को विस्तार से समझते हैं।
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मानदेय में बढ़ोतरी की तैयारी: सीएम योगी का स्पष्ट निर्देश

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कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा तालियां तब बजीं जब मुख्यमंत्री ने मानदेय बढ़ाने का जिक्र किया। सीएम योगी ने कहा, "हमारे आंगनबाड़ी केंद्र अब पहले जैसे नहीं रहे, वे स्मार्ट हो रहे हैं। जब केंद्र स्मार्ट हो रहे हैं, तो इन केंद्रों को चलाने वाली हमारी कार्यकर्ताओं का मानदेय भी स्मार्ट होना चाहिए।" उन्होंने मंच से ही अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि मानदेय वृद्धि को लेकर जल्द से जल्द एक नया और ठोस प्रस्ताव तैयार किया जाए। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्रों की ट्रेनिंग प्रक्रिया पूरी होते ही राज्य सरकार एक और भव्य समारोह आयोजित करेगी, जिसमें सीधे तौर पर मानदेय बढ़ाने की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। यह कदम उन लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता का एक बड़ा जरिया बनेगा जो सालों से जमीनी स्तर पर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए काम कर रही हैं।
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डिजिटल उड़ान: 69,804 कार्यकर्ताओं को मिले स्मार्टफोन

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उत्तर प्रदेश को 'कुपोषण मुक्त' बनाने और सरकारी योजनाओं में 100% पारदर्शिता लाने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने 69,804 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन वितरित करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया का शुभारंभ किया।
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स्मार्टफोन से क्या होगा फायदा?

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    रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग: अब रजिस्टरों में मैन्युअल एंट्री का झंझट खत्म होगा। स्मार्टफोन में मौजूद 'पोषण ट्रैकर' (Poshan Tracker) ऐप के जरिए बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं का डेटा रियल-टाइम में ऑनलाइन अपलोड किया जा सकेगा।
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    पारदर्शिता: पुष्टाहार (Nutrition) के वितरण में किसी भी तरह की धांधली को रोकने में यह तकनीक सबसे बड़ा हथियार साबित होगी।
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    सीधी रिपोर्टिंग: लखनऊ में बैठे उच्चाधिकारी सीधे जिले और ब्लॉक स्तर (जैसे बिजनौर या गाजियाबाद के दूरदराज गांव) की रिपोर्ट अपने डैशबोर्ड पर देख सकेंगे।
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स्वास्थ्य जांच के लिए हाई-टेक उपकरण: 2 लाख से अधिक डिवाइस वितरित

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सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और विकास की सटीक निगरानी के लिए मुख्यमंत्री ने दो लाख से अधिक 'ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस' (Growth Monitoring Devices) भी सौंपे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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    स्टैडियोमीटर (Stadiometer): बच्चों की ऊंचाई को एकदम सटीकता से मापने के लिए।
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    इन्फैंटोमीटर (Infantometer): नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की लंबाई मापने का उपकरण।
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    वेटिंग स्केल (Weighing Scale): वजन तौलने की आधुनिक डिजिटल मशीनें।
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इन उपकरणों की मदद से गांवों में ही बच्चों के स्वास्थ्य की एकदम सटीक जांच संभव हो सकेगी, जिससे कुपोषण (Malnutrition) के खिलाफ यूपी की लड़ाई और तेज होगी।
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रोजगार की बहार: 18,440 महिलाओं को मिले नियुक्ति पत्र

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इस कार्यक्रम ने न केवल मौजूदा कार्यकर्ताओं को सशक्त किया, बल्कि प्रदेश की हजारों महिलाओं को रोजगार की नई सौगात भी दी। सीएम योगी ने अपने हाथों से 18,440 नवचयनित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र (Appointment Letters) सौंपे। महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह उत्तर प्रदेश सरकार का एक और बड़ा कदम है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करेगा।
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बुनियादी ढांचे का विकास: 450 करोड़ से बनेंगे 3,170 नए 'स्मार्ट' केंद्र

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आंगनबाड़ी केंद्रों को 'प्ले-स्कूल' की तर्ज पर विकसित करने का सरकार का विजन अब धरातल पर उतर रहा है।
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    भवनों का लोकार्पण और शिलान्यास: मुख्यमंत्री ने 450 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाले 3,170 नए आंगनवाड़ी केंद्र भवनों का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
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    बाल विकास परियोजना कार्यालय: इसके साथ ही 140 बाल विकास परियोजना कार्यालय भवनों का शिलान्यास किया गया और 71 अन्य परियोजनाओं के कार्यालयों की आधारशिला रखी गई।
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    नया डिजाइन: नए आंगनबाड़ी केंद्रों का डिजाइन विशेष रूप से बच्चों के अनुकूल (Child-Friendly) बनाया गया है, जिसका विमोचन भी कार्यक्रम के दौरान किया गया। इसके निर्माण के लिए 137 करोड़ रुपये का अलग से बजट आवंटित किया गया है।
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सीएम योगी ने कार्यकर्ताओं को कहा 'यशोदा माता'

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अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहनों और एएनएम (ANM) के समर्पण की जमकर तारीफ की। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि प्री-प्राइमरी स्तर के बच्चों के लालन-पालन में एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका ठीक उसी तरह है, जैसे यशोदा माता ने भगवान कृष्ण का पालन-पोषण किया था।
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कोविड-19 के फ्रंटलाइन वॉरियर्स को नमन: सीएम योगी ने कोरोना महामारी के उस खौफनाक दौर को याद किया जब पूरी दुनिया पस्त थी। उन्होंने कहा, "विपत्ति के उस कठिन समय में जब लोग घरों से बाहर निकलने में डरते थे, तब हमारी ये बहनें फ्रंटलाइन वॉरियर्स (Frontline Workers) के रूप में गांव-गांव, घर-घर जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को धरातल पर उतार रही थीं। आप कुपोषण और बीमारियों से लड़ने के लिए बच्चों के साथ एक सारथी की भूमिका निभा रही हैं। आप लोग भारत के भविष्य की नींव के पत्थरों को गढ़ रही हैं।"
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विपक्ष पर तीखा प्रहार: "2017 से पहले शराब माफिया बांटता था पुष्टाहार"

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इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री ने पूर्व की सरकारों पर तीखा राजनीतिक हमला भी किया। उन्होंने 2017 से पहले की पुष्टाहार वितरण प्रणाली की पोल खोलते हुए कहा कि पहले इस व्यवस्था में भ्रष्टाचार चरम पर था।
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सीएम ने कहा, "2017 से पहले यूपी में गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं का पुष्टाहार बांटने का काम उत्तर भारत के सबसे बड़े शराब माफिया (Liquor Mafia) के हाथों में सौंप दिया गया था। वही माफिया तय करता था कि किस बच्चे को कितना खाना मिलेगा। ये वही लोग थे जो आज जाति के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि 2017 में सरकार बदलने के बाद इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया। इसी का नतीजा है कि कुपोषण से लड़ाई में आज उत्तर प्रदेश की राष्ट्रीय रैंकिंग में जबरदस्त सुधार हुआ है और राज्य तेजी से 'सुपोषण' की ओर कदम बढ़ा रहा है।
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डिजिटल और कुपोषण मुक्त उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ता कदम

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कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री प्रतिभा शुक्ला से चुटकी लेते हुए पूछा कि "आज उन्होंने गाना क्यों नहीं गाया।"
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कुल मिलाकर, लोक भवन में हुआ यह भव्य आयोजन सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण भारत की नींव—यानी महिलाओं और बच्चों—के स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है। स्मार्टफोन का वितरण, नए केंद्रों का निर्माण और मानदेय बढ़ाने का वादा, यूपी को एक 'कुपोषण मुक्त' और 'डिजिटल राज्य' बनाने के लक्ष्य को बहुत तेजी से पूरा करेगा।
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