उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने के बाद अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पूरा फोकस राज्य की सड़कों को सुरक्षित बनाने पर है। प्रदेश में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और उनमें जा रही निर्दोष लोगों की जान पर चिंता व्यक्त करते हुए सीएम योगी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। बुधवार को परिवहन विभाग की एक महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सड़कों पर बेलगाम दौड़ने वाले वाहनों, स्टंटबाजी करने वाले युवाओं और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ अब किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
\r\n\r\nइस अहम बैठक में मुख्यमंत्री ने हाल ही में लखीमपुर खीरी, अमरोहा, आगरा और अलीगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों में हुई भीषण मार्ग दुर्घटनाओं पर गहरा शोक और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हर एक नागरिक का जीवन अमूल्य है और सड़क हादसों में होने वाली मौतें न केवल एक परिवार को उजाड़ती हैं, बल्कि यह पूरे देश और राज्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
\r\n\r\nदुर्घटनाओं के आंकड़े: एक कड़वी सच्चाई और सुधरते हालात
\r\n\r\nसड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश की स्थिति चिंताजनक रही है। देश भर में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर आता है, जबकि इन दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में राज्य पहले नंबर पर है। यह आंकड़ा किसी भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों और लगातार मॉनिटरिंग का सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है।
\r\n\r\nपरिवहन विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की सख्ती के बाद इस साल जनवरी से अप्रैल माह के बीच सड़क दुर्घटनाओं में 21 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। इसके साथ ही, दुर्घटनाओं में होने वाली मृतकों की संख्या में भी 22 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़े साबित करते हैं कि यदि प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम करे, तो हादसों पर लगाम लगाई जा सकती है।
\r\n\r\n'टॉप टू बॉटम' तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
\r\n\r\nबैठक का सबसे बड़ा और कड़ा संदेश अधिकारियों के लिए था। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि अब केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में यदि कोई लापरवाही सामने आती है, तो 'टॉप टू बॉटम' (ऊपर से लेकर नीचे तक) हर अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
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- पाक्षिक समीक्षा बैठक: शासन स्तर पर सड़क सुरक्षा के संबंध में हर 15 दिन (पाक्षिक) में बैठक की जाएगी, जिसमें अब तक हुए कार्यों की प्रगति का कड़ाई से मूल्यांकन होगा। \r\n
- आरटीओ-एआरटीओ (RTO-ARTO) पर नजर: जिलों में तैनात आरटीओ और एआरटीओ को अब अपने वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर फील्ड में उतरना होगा। दुर्घटनाएं बढ़ने पर सीधे तौर पर उनकी जवाबदेही तय होगी। \r\n
हॉटस्पॉट्स की पहचान: अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन जिलों और विशेष स्थानों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान करें जहां सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बाद उन कारणों का पता लगाकर समस्याओं के समाधान के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
\r\n\r\nस्टंटबाजी, नशे और ओवरस्पीडिंग पर 'परमानेंट ब्रेक'
\r\n\r\nयुवाओं द्वारा सड़कों पर की जाने वाली स्टंटबाजी और तेज रफ्तार (Over-speeding) जानलेवा साबित हो रही है। मुख्यमंत्री ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सड़कों पर स्टंटबाजी, तय सीमा से अधिक रफ्तार और नशे की हालत में वाहन चलाना किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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- ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। \r\n
- किसी भी दशा में अवैध वाहनों (डग्गामार वाहनों) का संचालन नहीं होना चाहिए। \r\n
- सड़कों और चौराहों से सभी प्रकार के अवैध टैक्सी स्टैंड तत्काल प्रभाव से हटाए जाएं। \r\n
- सड़क के किनारे बेतरतीब वाहनों की पार्किंग पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और वाहनों को केवल निर्धारित उपयुक्त स्थलों पर ही पार्क कराया जाए। \r\n
स्कूली बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
\r\n\r\nमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सबसे अधिक संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने शिक्षा और परिवहन विभाग को संयुक्त रूप से निर्देश दिए हैं कि बच्चों को लाने-ले जाने वाले सभी वाहनों की फिटनेस जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए।
\r\n\r\nस्कूल मैनेजमेंट की यह जिम्मेदारी होगी कि वे सुनिश्चित करें कि कोई भी बिना फिटनेस वाला वाहन सड़क पर न उतरे।
\r\n\r\nयदि किसी स्कूल बस या वैन का बार-बार चालान हो रहा है, तो उस वाहन को जब्त कर कठोरतम कार्रवाई की जाए।
\r\n\r\nचालकों और परिचालकों (कंडक्टर) का नियमित रूप से स्वास्थ्य और नेत्र परीक्षण (Eye Test) कराया जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे वाहन चलाने के लिए पूरी तरह से फिट हैं।
\r\n\r\nबुनियादी ढांचा और जागरूकता अभियान (Public Awareness)
\r\n\r\nसड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण बुनियादी ढांचे की कमी और जागरूकता का अभाव भी है। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:
\r\n\r\nब्लैक स्पॉट का निराकरण: लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रदेश की सभी सड़कों पर मौजूद 'ब्लैक स्पॉट्स' (ऐसे स्थान जहां लगातार हादसे होते हैं) को तुरंत चिह्नित करें। एक तय समय सीमा के भीतर इन खामियों को दूर किया जाए।
\r\n\r\nटेबलटॉप स्पीड ब्रेकर और साइनेज: दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, चौराहों और स्कूलों के पास उचित दिशा-निर्देश वाले साइनेज (Signboards) लगाए जाएं और आवश्यक स्थानों पर 'टेबलटॉप स्पीड ब्रेकर' बनाए जाएं।
\r\n\r\nजागरूकता अभियान: चौराहों, टोल प्लाजा और व्यस्त मार्गों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम (PA System) के माध्यम से लगातार यातायात नियमों की जानकारी दी जाए। लोगों को हेलमेट पहनने और सीट बेल्ट लगाने के लिए जागरूक किया जाए।
\r\n\r\nहाईवे पेट्रोलिंग और त्वरित चिकित्सा व्यवस्था
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- राजमार्गों (Highways) और एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों में घायलों को तुरंत इलाज मिलना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है। \r\n
- सभी एक्सप्रेसवे और हाईवे पर नियमित रूप से पुलिस की पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए। \r\n
- सड़कों पर एंबुलेंस की समुचित व्यवस्था हो, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंच सके। \r\n
- राजमार्गों के समीप स्थित अस्पतालों (Trauma Centers) में आपातकालीन इलाज की व्यापक व्यवस्था हमेशा तैयार रहे। \r\n
ट्रैफिक पुलिस की हाई-टेक पहल और जीरो फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना
\r\n\r\nयातायात पुलिस भी सड़क सुरक्षा को लेकर तकनीकी रूप से उन्नत हो रही है। बैठक में यातायात पुलिस के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि सड़क सुरक्षा कोष (Road Safety Fund) से मिले अनुदान का सही इस्तेमाल किया जा रहा है।
\r\n\r\nजिलों की पुलिस को 25 चार पहिया इंटरसेप्टर, 62 दोपहिया इंटरसेप्टर और 82 हाई-टेक स्पीड लेजर गन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि ओवरस्पीडिंग करने वालों को तुरंत पकड़ा जा सके।
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है, जहां सभी 75 जिलों के 487 क्रिटिकल (संवेदनशील) पुलिस थानों पर 'जीरो फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना' (Zero Fatality District Scheme) लागू की गई है।
\r\n\r\nइन संवेदनशील थानों में 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों का गठन किया गया है, जो 24 घंटे निगरानी करती हैं।
\r\n\r\nइस योजना के शानदार परिणाम भी सामने आए हैं। पिछले मात्र चार महीनों में इस योजना के सटीक क्रियान्वयन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण 566 व्यक्तियों की जान बचाने में सफलता प्राप्त हुई है।
\r\n\r\nमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह उच्च स्तरीय बैठक इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर अब पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में है। नियमों को ताक पर रखकर वाहन चलाने वालों के दिन अब लद गए हैं। प्रशासन की यह सख्ती, आधुनिक तकनीक का उपयोग और आम जनता की जागरूकता मिलकर निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर अधिकारी इन सख्त निर्देशों को कितनी तत्परता और ईमानदारी के साथ लागू करते हैं।
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Sabse pehle comment karne wale banein.