लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों को लेकर छिड़े विवाद और उपभोक्ताओं की बढ़ती नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश भर से मिल रही ओवरबिलिंग और बिना जानकारी के मीटर बदले जाने की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की हाई-लेवल समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर होना चाहिए और ओवरबिलिंग की समस्या की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) गठित की जाए।READ ALSO:-मेरठ 'नीला ड्रम' हत्याकांड: लंदन से लौटे पति की हत्या में पत्नी मुस्कान और प्रेमी के खिलाफ 22 गवाहों ने खोला मोर्चा; 15 अप्रैल को होगा बड़ा फैसला
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यह विवाद तब और गहरा गया जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी लोकसभा में बयान दिया कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना परिसर पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं लगाए जाने चाहिए। अब यूपी सरकार ने भी इस दिशा में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।
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विशेषज्ञ समिति करेगी ओवरबिलिंग का निराकरण

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पावर कॉर्पोरेशन को दो-टूक निर्देश दिए हैं कि स्मार्ट मीटरों से जुड़ी तकनीकी खामियों और बिलिंग में आ रही विसंगतियों की गहन जांच की जाए।
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    समिति का गठन: ओवरबिलिंग की समस्या क्यों आ रही है और क्या मीटरों की रीडिंग में कोई तकनीकी त्रुटि है, इसके लिए विशेषज्ञों की एक टीम बनाई जाएगी।
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    उपभोक्ता का भरोसा: सीएम ने कहा कि आम उपभोक्ता ईमानदार होता है और सही बिल मिलने पर वह भुगतान करने में संकोच नहीं करता। इसलिए, बिलिंग सिस्टम को पारदर्शी बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।
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    फील्ड में उतरेंगे अफसर: ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के एमडी को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्वयं फील्ड में जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें और जनता की शिकायतों का मौके पर निस्तारण करें।
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यूपी में बिजली क्षेत्र की प्रगति (2017 बनाम 2026)

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मुख्यमंत्री को बैठक में बताया गया कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में विद्युत बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व सुधार हुआ है:
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विवरण
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वर्ष 2017
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वर्ष 2026
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वृद्धि (%)
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उपभोक्ताओं की संख्या
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1.65 करोड़
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3.71 करोड़
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126%
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विद्युत भार (Connected Load)
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46,000 MW
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84,000 MW+
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80%
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ऊर्जा बिक्री (Energy Sale)
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77,000 MU
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1.27 लाख MU
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63%
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नोट: वर्तमान में यूपी में 87% कनेक्शन घरेलू श्रेणी के हैं, जबकि राजस्व में सबसे बड़ा योगदान औद्योगिक और वाणिज्यिक वर्ग का है।
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गर्मी में निर्बाध आपूर्ति का मास्टरप्लान

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आने वाली गर्मी की चुनौतियों को देखते हुए सीएम योगी ने 'नो पावर कट' की रणनीति पर काम करने के निर्देश दिए हैं:
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  1. \r\n
    पूर्ण क्षमता संचालन: राज्य की सभी तापीय इकाइयों (Thermal Plants) को उनकी पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जाए।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    ट्रांसफार्मर रिपेयर: खराब ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। 2025-26 के प्री-मानसून अभियान के कारण ट्रांसफार्मर क्षति में भारी कमी आई है।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    नया प्लांट: घाटमपुर की 660 मेगावाट की इकाई अप्रैल से बिजली उत्पादन शुरू कर देगी। साथ ही ओबरा-डी और अनपरा-ई जैसी नई परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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  6. \r\n
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ग्रामीण विद्युतीकरण और 'पीएम सूर्य घर योजना'

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ग्रामीण और गरीब परिवारों के लिए मुख्यमंत्री ने बिजली पहुंच को और आसान बनाने के निर्देश दिए हैं:
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    मजरों का विद्युतीकरण: ऐसे मजरे (पुरवे) जहां केवल 5 आवास भी हैं, वहां भी बिजली पहुंचाई जाएगी।
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    सोलर पावर: 'पीएम सूर्य घर योजना' के तहत अब तक यूपी में 4.60 लाख रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं, जिससे 1560 मेगावाट बिजली मिल रही है। सीएम ने 'पीएम कुसुम योजना' (किसानों के पंपों का सोलराइजेशन) को भी समयबद्ध पूरा करने को कहा है।
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    कृषि फीडर: ओवरलोडिंग रोकने के लिए कृषि फीडरों को घरेलू लाइनों से अलग (Segregation) करने का काम तेज किया जाएगा।
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शिकायतों के लिए 'किल स्विच' और हेल्पलाइन

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मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि 1912 हेल्पलाइन नंबर पूरी तरह सक्रिय रहे और सोशल मीडिया/व्हाट्सएप के जरिए मिलने वाली शिकायतों का तुरंत समाधान हो।
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  • \r\n
    सिंगल विंडो मॉडल: उपभोक्ता सेवाओं के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
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    लाइन अंडरग्राउंडिंग: पुराने शहरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बिजली की लाइनों को चरणबद्ध तरीके से भूमिगत (Underground) किया जाएगा।
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सीएम योगी के इन निर्देशों से साफ है कि सरकार स्मार्ट मीटरिंग के लक्ष्य को तो पूरा करना चाहती है, लेकिन उपभोक्ताओं की संतुष्टि और पारदर्शिता की कीमत पर नहीं। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि ओवरबिलिंग की समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा और बिजली विभाग की जवाबदेही तय होगी।
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