उत्तर प्रदेश में जमीन और प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त में होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को लोक भवन में सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई अहम कैबिनेट बैठक में यूपी रजिस्ट्री नए नियम को मंजूरी दे दी गई है। इस नए नियम के तहत, अब राज्य में किसी भी संपत्ति या जमीन को बेचने से पहले विक्रेता (Seller) का नाम राजस्व रिकॉर्ड यानी 'खतौनी' (Khatauni) में अनिवार्य रूप से मिलाया जाएगा। यदि विक्रेता का नाम खतौनी में दर्ज नाम से मेल नहीं खाता है, तो किसी भी सूरत में रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी।READ ALSO:-सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से नुकसान पर सरकार बनाएगी 'नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी', मिलेगा मुआवजा
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इस अहम कैबिनेट बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर गहन चर्चा की गई, जिनमें से 30 प्रस्तावों को सर्वसम्मति से हरी झंडी दिखा दी गई, जबकि 3 प्रस्तावों को आगे के विचार-विमर्श के लिए होल्ड पर रखा गया है। सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर को पारदर्शी बनाना और भू-माफियाओं द्वारा किए जाने वाले फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करना है। इसके साथ ही सरकार ने ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 'मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना' को भी मंजूरी दी है।
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हम यूपी रजिस्ट्री नए नियम, खतौनी की अहमियत, स्टांप शुल्क में हुए बदलाव और ग्रामीण परिवहन योजना के हर पहलू का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
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यूपी रजिस्ट्री नए नियम: खतौनी में नाम का मिलान क्यों हुआ अनिवार्य?

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उत्तर प्रदेश में लंबे समय से ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि भू-माफिया और जालसाज किसी और की जमीन को फर्जी दस्तावेज बनाकर भोले-भाले लोगों को बेच देते थे। इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग (Stamp and Registration Department) ने अपनी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है।
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यूपी रजिस्ट्री नए नियम के लागू होने के बाद अब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह से बदल जाएगी। नए प्रावधानों के अनुसार:
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    दस्तावेजों का सख्त मिलान: जब भी कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी बेचने के लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय जाएगा, तो सबसे पहले उस संपत्ति की खतौनी (अधिकार अभिलेख) निकाली जाएगी।
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    मालिकाना हक की पुष्टि: खतौनी में दर्ज जमीन के असली मालिक के नाम का मिलान प्रॉपर्टी बेचने आए व्यक्ति के पहचान पत्रों (आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि) से किया जाएगा।
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    संदिग्ध मामलों में जांच: यदि खतौनी में नाम कुछ और है और बेचने वाला कोई और व्यक्ति है, तो तत्काल प्रभाव से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया रोक दी जाएगी। इसके बाद स्टाम्प निबंधन विभाग इस पूरे मामले की गहनता से जांच करेगा कि आखिर संपत्ति का असली मालिकाना हक किसके पास है।
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पहले कैसे होती थी रजिस्ट्री और क्या थीं खामियां?

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इस नए फैसले के महत्व को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि पहले रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्या थी। (Internal link to related article: उत्तर प्रदेश में प्रॉपर्टी खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?) पहले के नियमों के तहत, जब कोई व्यक्ति जमीन बेचने आता था, तो सब-रजिस्ट्रार कार्यालय मुख्य रूप से उसका आधार कार्ड (Aadhaar Card) और वोटर आईडी (Voter ID) कार्ड ही देखता था। अधिकारियों का मुख्य फोकस इस बात पर होता था कि स्टांप ड्यूटी पूरी चुकाई गई है या नहीं।
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इसमें सबसे बड़ी खामी यह थी कि राजस्व विभाग (Revenue Department) के रिकॉर्ड (खतौनी) से रीयल-टाइम क्रॉस-चेकिंग नहीं होती थी। जालसाज अक्सर फर्जी आधार कार्ड बना लेते थे या ऐसे व्यक्ति को खड़ा कर देते थे जिसका नाम असली मालिक से मिलता-जुलता हो। कई मामलों में मृत व्यक्ति की जमीन को भी फर्जी मुख्तारनामा (Power of Attorney) के जरिए बेच दिया जाता था। प्रॉपर्टी की मिल्कियत (Ownership) की जमीनी जांच किए बगैर ही स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग रजिस्ट्रेशन कर देता था, जिससे बाद में असली मालिक और खरीदार के बीच सालों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर चलते रहते थे।
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खतौनी (Khatauni) क्या है और यह प्रॉपर्टी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

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जो लोग जमीन की खरीद-फरोख्त से ज्यादा परिचित नहीं हैं, उनके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि खतौनी क्या होती है।
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उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (UP Revenue Code) के तहत, 'खतौनी' एक कानूनी दस्तावेज है जो किसी भूमि या संपत्ति के मालिकाना हक (Ownership Rights) का विस्तृत विवरण देता है। इसे आसान भाषा में 'अधिकार अभिलेख' (Record of Rights) भी कहा जाता है।
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खतौनी में निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होती हैं:

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    खातेदार का नाम: जमीन के असली मालिक या मालिकों के नाम और उनके पिता/पति का नाम।
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    हिस्सा: यदि एक जमीन के कई मालिक हैं, तो खतौनी में स्पष्ट लिखा होता है कि किस व्यक्ति का कितना हिस्सा है।
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    जमीन का रकबा (Area): जमीन का कुल क्षेत्रफल (हेक्टेयर या बीघा में)।
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    गाटा संख्या/खसरा नंबर: जमीन की भौगोलिक पहचान संख्या।
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    ऋण और बंधक (Mortgage): क्या उस जमीन पर बैंक का कोई लोन (KCC आदि) चल रहा है, या वह जमीन किसी विवाद में कुर्क की गई है, यह जानकारी भी खतौनी के 'टिप्पणी' कॉलम में दर्ज होती है।
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राज्य सरकार ने यूपी भूलेख पोर्टल के माध्यम से खतौनी को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया है। अब सब-रजिस्ट्रार कार्यालय सीधे भूलेख पोर्टल से जुड़कर रीयल-टाइम में खतौनी का डाटा निकाल सकेंगे। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।
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स्टांप शुल्क और विकास शुल्क के नियमों में बड़ा बदलाव

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योगी कैबिनेट ने न केवल रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है, बल्कि नगर निगमों और स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए शुल्कों के वितरण (Fee Distribution) प्रणाली में भी बड़ा संशोधन किया है।
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सर्किल रेट और विकास शुल्क (Development Fee)

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राज्य की बीजेपी सरकार ने सर्किल रेट (Circle Rate) पर एक फीसदी शुल्क और विकास शुल्क के 2 फीसदी अतिरिक्त स्टांप शुल्क से जुड़े पुराने प्रावधानों में अहम बदलाव किया है।
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    क्या है सर्किल रेट? सर्किल रेट वह न्यूनतम सरकारी दर है जिस पर किसी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। इसी दर के आधार पर स्टाम्प शुल्क की गणना की जाती है।
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    विकास शुल्क: संबंधित नगर निगम या नगर निकाय की सीमा के अंदर प्रॉपर्टी खरीदने पर 2 फीसदी विकास शुल्क (Development Charge) अलग से देय होता है। इस फंड का इस्तेमाल उस क्षेत्र में सड़क, पानी, सीवर और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए किया जाता है।
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फंड रिलीज की नई छमाही प्रणाली (Half-Yearly Release System)

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पहले यह नियम था कि रजिस्ट्रेशन से प्राप्त होने वाली यह अतिरिक्त राशि (विकास शुल्क आदि) स्थानीय निकायों को तब दी जाती थी जब वे पुरानी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate - UC) जमा करते थे। इस लंबी कागजी कार्रवाई के कारण नगर निगमों के पास फंड पहुंचने में बहुत देरी होती थी और विकास कार्य ठप पड़ जाते थे।
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अब सरकार ने फैसला किया है कि यह राशि छमाही आधार (Half-Yearly Basis) पर सीधे निकायों को जारी कर दी जाएगी। यानी हर 6 महीने में नगर निगमों को उनके हिस्से का फंड स्वतः मिल जाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आएगी और फाइलों के लाल फीताशाही (Red Tapism) से छुटकारा मिलेगा।
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मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना: 59,163 गांवों तक पहुंचेगी बस सुविधा 

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प्रॉपर्टी और राजस्व के अलावा, योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 'मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना' (Mukhyamantri Gramin Parivahan Yojana) को मंजूरी दी गई है।
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हर ग्राम सभा को मिलेगी अपनी बस

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उत्तर प्रदेश में परिवहन निगम (UPSRTC) का एक विशाल नेटवर्क है, लेकिन इसके बावजूद राज्य के हजारों सुदूर गांव आज भी मुख्य सड़कों और शहरों से सीधे नहीं जुड़े हैं। ग्रामीण आबादी को ब्लॉक मुख्यालय, तहसील या जिला अस्पताल तक पहुंचने के लिए प्राइवेट डग्गामार वाहनों, ट्रैक्टर-ट्रॉली या महंगे ऑटो रिक्शा पर निर्भर रहना पड़ता है।
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इस नई योजना के तहत:

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    प्रदेश के सभी 59,163 गांवों को बस सेवा से जोड़ा जाएगा।
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    सरकार का लक्ष्य है कि हर ग्राम सभा (Gram Sabha) में कम से कम एक बस की पहुंच सुनिश्चित हो।
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    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अभी तक राज्य के 12 हजार से अधिक गांवों में कोई सरकारी या अधिकृत बस सेवा नहीं पहुंच रही थी। अब यह दूरी खत्म की जाएगी।
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प्राइवेट बस सर्विस और टैक्स में छूट 

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इस महात्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल का सहारा लेगी।
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    छोटी बसों का संचालन: संकरे ग्रामीण रास्तों को ध्यान में रखते हुए इस योजना में मुख्य रूप से छोटी बसों (Mini Buses) और मिनी वैन का इस्तेमाल किया जाएगा।
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    टैक्स फ्री सेवा: ग्रामीण परिवहन को सस्ता और ऑपरेटरों के लिए लाभदायक बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है। इस सेवा के तहत चलने वाली बसों से सरकार कोई परमिट टैक्स (Permit Tax) या अतिरिक्त कर नहीं लेगी।
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    प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी: सरकार स्थानीय युवाओं और प्राइवेट बस ऑपरेटरों को इस योजना से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी। टैक्स में छूट मिलने से ऑपरेटरों की लागत कम होगी और वे गांव के लोगों से कम किराया वसूल सकेंगे। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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योगी कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण फैसले (एक नजर में)

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भले ही यूपी रजिस्ट्री नए नियम और ग्रामीण परिवहन योजना इस कैबिनेट बैठक के सबसे बड़े आकर्षण रहे, लेकिन इसके अलावा भी कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी है जो राज्य के विकास को नई दिशा देंगे:
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    औद्योगिक विकास: राज्य में नए औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) की स्थापना और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रियाओं को और सरल बनाया गया है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    शिक्षा और स्वास्थ्य: कुछ चुनिंदा जिलों में नए मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग संस्थानों की स्थापना के लिए बजट को मंजूरी दी गई है।
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    पुलिस आधुनिकीकरण: राज्य की कानून व्यवस्था (Law and Order) को और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए पुलिस बल के आधुनिकीकरण और नए साइबर थानों के निर्माण से जुड़े प्रस्ताव पास किए गए हैं।
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    पर्यटन: धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अयोध्या, काशी और मथुरा के साथ-साथ अन्य छोटे तीर्थ स्थलों के विकास के लिए 'मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना' का दायरा बढ़ाया गया है।
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आम जनता और खरीदारों के लिए 'यूपी रजिस्ट्री नए नियम' के क्या मायने हैं?

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सरकार के इस फैसले का सीधा असर आम जनता, प्रॉपर्टी खरीदारों और रियल एस्टेट डेवलपर्स पर पड़ेगा। अगर आप उत्तर प्रदेश में कोई मकान, प्लॉट या खेती की जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना होगा:
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1. खरीदारों को मिलेगी 100% सुरक्षा

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पहले जमीन खरीदने वाले व्यक्ति के मन में हमेशा यह डर बना रहता था कि कहीं वह विवादित या फर्जी जमीन तो नहीं खरीद रहा है। अब खतौनी मिलान अनिवार्य होने से खरीदार का जोखिम (Risk) लगभग शून्य हो जाएगा। सरकार खुद इस बात की गारंटी लेगी कि बेचने वाला व्यक्ति ही असली मालिक है।
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2. पुरानी रजिस्ट्रियों के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) में आएगी तेजी

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अक्सर लोग जमीन की रजिस्ट्री तो करा लेते हैं, लेकिन तहसील में जाकर अपना 'दाखिल-खारिज' (Mutation) नहीं कराते। दाखिल-खारिज वह प्रक्रिया है जिससे सरकारी रिकॉर्ड (खतौनी) में पुराने मालिक का नाम हटकर नए मालिक का नाम दर्ज होता है। नए नियम के कारण अब हर व्यक्ति को अपनी खरीदी हुई जमीन का दाखिल-खारिज तुरंत कराना होगा। क्योंकि अगर खतौनी में नाम अपडेट नहीं हुआ, तो भविष्य में वह व्यक्ति उस जमीन को आगे किसी को बेच नहीं पाएगा।
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3. पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) के दुरुपयोग पर रोक

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प्रॉपर्टी मार्केट में 'पावर ऑफ अटॉर्नी' के जरिए बड़े पैमाने पर खेल होता था। जालसाज फर्जी मुख्तारनामा बनाकर जमीन बेच देते थे। अब खतौनी की जांच होने से यह साफ हो जाएगा कि जमीन के असली मालिक ने क्या वाकई में किसी को अधिकार दिया है या नहीं। यदि खतौनी में किसी तरह के कोर्ट के स्टे (Stay Order) का जिक्र होगा, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट दे देगा और रजिस्ट्री रुक जाएगी।
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4. रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ेगा भरोसा

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पारदर्शी व्यवस्था से उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट बाजार में निवेशकों (Investors) का भरोसा बढ़ेगा। जब कानूनी विवाद कम होंगे, तो बाहर से आने वाली कंपनियां और आम लोग बेखौफ होकर यूपी में संपत्तियां खरीदेंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था (Economy) को गति मिलेगी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है जो सिस्टम की कमियों को दूर कर जनता को सीधा लाभ पहुंचाएं। मंगलवार की कैबिनेट बैठक में पास हुए यूपी रजिस्ट्री नए नियम इसका एक ज्वलंत उदाहरण हैं। संपत्ति की खरीद-फरोख्त में विक्रेता के नाम का 'खतौनी' (Khatauni) से मिलान अनिवार्य करने का यह कदम भू-माफियाओं के लिए एक बड़ा झटका है। इससे न केवल आम आदमी की जीवन भर की गाढ़ी कमाई सुरक्षित होगी, बल्कि अदालतों में सालों से लंबित जमीन विवादों के मामलों में भी भारी कमी आएगी।
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दूसरी ओर, 'मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना' के तहत 59 हजार से अधिक गांवों तक टैक्स-फ्री मिनी बसें चलाने का फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) की रीढ़ मजबूत करेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए शहर जाने वाले ग्रामीणों के लिए यह योजना एक वरदान साबित होगी।
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कुल मिलाकर, स्टांप शुल्क वितरण प्रणाली को आसान बनाना, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन को पारदर्शी करना और ग्रामीण परिवहन को सुदृढ़ करना - ये सभी कदम उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था (One Trillion Dollar Economy) बनाने के योगी सरकार के लक्ष्य की दिशा में बेहद अहम और व्यावहारिक प्रयास हैं। प्रदेश की जनता अब बिना किसी डर के, पूरी कानूनी सुरक्षा के साथ अपनी संपत्तियों का लेनदेन कर सकेगी।
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