भारत में अर्बन ट्रांसपोर्ट (Urban Transport) की तस्वीर तेजी से बदल रही है। दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर (Delhi-Meerut Corridor) के सफल संचालन के बाद अब नमो भारत ट्रेन (Namo Bharat Train) का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बड़े पैमाने पर विस्तार होने जा रहा है। केंद्र सरकार और एनसीआरटीसी (NCRTC) ने दिल्ली और इसके आस-पास के शहरों को एक हाई-स्पीड और अत्याधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली-गुरुग्राम-बावल और दिल्ली-पानीपत-करनाल जैसे नए कॉरिडोर को सार्वजनिक निवेश बोर्ड (PIB) से मंजूरी मिल चुकी है।READ ALSO:-शोषित क्रांति दल की याचिका पर NHRC सख्त: दलित पार्षद रविंद्र पिटाई मामले में SSP मेरठ से 2 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
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इन महात्वाकांक्षी परियोजनाओं पर लगभग 65,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इतना ही नहीं, गाजियाबाद से बन रहे इंटरनेशनल जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport) तक भी एक नया कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस लेख में हम जानेंगे कि नमो भारत ट्रेन के इस विस्तार से एनसीआर के आम लोगों, व्यापार और पर्यावरण को क्या बड़े फायदे होने वाले हैं।
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एनसीआर में परिवहन क्रांति: नए कॉरिडोर की रूपरेखा

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दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट के तहत नमो भारत ट्रेन की शुरुआत ने यात्रियों को एक विश्वस्तरीय अनुभव दिया है। अब इसी तर्ज पर दूसरे चरण का काम तेज कर दिया गया है। एनसीआरटीसी (NCRTC) ने दूसरे चरण में दो प्रमुख कॉरिडोर— दिल्ली-गुरुग्राम-बावल और दिल्ली-पानीपत-करनाल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है। अधिकारियों के मुताबिक, इन परियोजनाओं को पीआईबी (PIB) से हरी झंडी मिल चुकी है और अब केवल केंद्र सरकार की अंतिम कैबिनेट मंजूरी का इंतजार है। स्वीकृति मिलते ही जमीन अधिग्रहण और निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।
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इन नए रूट्स का मुख्य उद्देश्य दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे प्रमुख हब को हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दूरदराज के औद्योगिक और आवासीय शहरों से निर्बाध रूप से जोड़ना है।
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1. सराय काले खां - गुरुग्राम - बावल कॉरिडोर

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यह कॉरिडोर औद्योगिक और कॉर्पोरेट कनेक्टिविटी के लिहाज से गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
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    रूट और लंबाई: यह रूट दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर मिलेनियम सिटी गुरुग्राम से होते हुए हरियाणा-राजस्थान के बॉर्डर 'बावल' तक जाएगा। इसकी कुल लंबाई करीब 93 किलोमीटर होगी।
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    लागत और स्टेशन: इस प्रोजेक्ट पर लगभग 32,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और पूरे रूट पर कुल 22 अत्याधुनिक स्टेशन बनाए जाएंगे।
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    फायदा: यह लाइन दिल्ली को मानेसर (Manesar) और बावल जैसे प्रमुख ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग हब से जोड़ेगी। इससे रोजाना काम के सिलसिले में अप-डाउन करने वाले लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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2. दिल्ली - पानीपत - करनाल कॉरिडोर

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हरियाणा के उत्तरी हिस्सों को दिल्ली से जोड़ने के लिए इस कॉरिडोर को डिजाइन किया गया है।
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    रूट और लंबाई: सराय काले खां से शुरू होकर यह कॉरिडोर सोनीपत और पानीपत होते हुए करनाल तक जाएगा। यह करीब 136 किलोमीटर लंबा एक विशाल कॉरिडोर होगा।
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    लागत: इस बड़े प्रोजेक्ट पर करीब 33,000 करोड़ रुपये का खर्च आने की उम्मीद है।
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    फायदा: सोनीपत एक बड़ा एजुकेशन हब बन चुका है और पानीपत अपने टेक्सटाइल उद्योग के लिए जाना जाता है। इस नमो भारत ट्रेन रूट के शुरू होने से इन शहरों की दिल्ली से दूरी समय के मामले में सिमट कर मात्र कुछ मिनटों की रह जाएगी।
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3. गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) कॉरिडोर

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एविएशन और अर्बन ट्रांसपोर्ट को एक साथ जोड़ने की दिशा में यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है। जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए गाजियाबाद से एक स्पेशल कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा।
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    रूट और डिजाइन: करीब 72 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 22 स्टेशन बनाए जाएंगे।
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    मंजूरी: इस योजना के लिए उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने अपनी सैद्धांतिक सहमति जता दी है और इसकी डीपीआर (DPR) भी पूरी तरह से तैयार है।
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    फायदा: इससे गाजियाबाद, मेरठ, दिल्ली और नोएडा के लोगों को एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए एक ट्रैफिक-फ्री और सुपरफास्ट विकल्प मिलेगा।
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व्यापार को उड़ान और ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति

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अधिकारियों का स्पष्ट दावा है कि इन तीन नए कॉरिडोर के निर्माण से दिल्ली-एनसीआर का सफर पूरी तरह बदल जाएगा। इसके दो सबसे बड़े फायदे होंगे:
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1. उद्योगों और रियल एस्टेट को बूम: कनेक्टिविटी सुधरने से बावल, पानीपत और जेवर के आसपास लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारी निवेश आएगा। इसके अलावा, इन रूट्स के आसपास रियल एस्टेट (Real Estate) सेक्टर में भी जबर्दस्त उछाल आने की उम्मीद है, क्योंकि लोग अब भीड़भाड़ वाली दिल्ली से बाहर शांत इलाकों में बसना पसंद करेंगे, जहां से दिल्ली आना-जाना आसान हो।
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2. प्रदूषण और जाम में भारी कमी: वर्तमान में दिल्ली की सीमाओं पर हर दिन लाखों गाड़ियों का दबाव रहता है। इन दोनों (बावल और करनाल) कॉरिडोर के बन जाने पर दावा किया जा रहा है कि दिल्ली में बाहरी राज्यों से आने वाले करीब 2 लाख निजी और कमर्शियल वाहनों की संख्या में सीधे तौर पर कमी आएगी। इससे न केवल हाईवे और सड़कों पर लगने वाले भारी जाम से निजात मिलेगी, बल्कि दिल्ली के दमघोंटू प्रदूषण (Air Pollution) के स्तर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की जाएगी।
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दिल्ली-एनसीआर में परिवहन के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने में नमो भारत ट्रेन एक अहम भूमिका निभा रही है। 65,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ये नए दिल्ली-गुरुग्राम-बावल, दिल्ली-पानीपत-करनाल और गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट कॉरिडोर भविष्य के स्मार्ट एनसीआर की रीढ़ बनेंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल आम जनता के समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि क्षेत्र का आर्थिक विकास भी नई ऊंचाइयों को छुएगा। पीआईबी की मंजूरी के बाद, अब सभी को बस केंद्र सरकार की फाइनल मुहर और ग्राउंड पर काम शुरू होने का बेसब्री से इंतजार है।
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