बरेली के नवाबगंज में रील बनाने का जुनून जानलेवा साबित हुआ। निर्माणाधीन पुल पर पोज देते समय 22 वर्षीय फैजान 100 किलो वजनी स्लैब के नीचे दब गया। पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली पूरी रिपोर्ट और जान
Published at : 31 Jan 2026, 09:27 AM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
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Bareilly Young man dies tragically while making a reel for social media
बरेली (Bareilly): सोशल मीडिया पर 'हीरो' बनने की चाहत और कुछ सेकंड की रील (Reel) के लिए जान जोखिम में डालने का नशा आज के युवाओं पर इस कदर हावी हो चुका है कि वे मौत को भी गले लगाने से नहीं कतरा रहे। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां इंस्टाग्राम रील (Instagram Reel) बनाने के चक्कर में 22 साल के एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई।
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यह हादसा नवाबगंज थाना क्षेत्र में एक निर्माणाधीन पुल (Under-construction bridge) पर हुआ। युवक एक भारी-भरकम सीमेंट स्लैब पर चढ़कर पोज (Pose) दे रहा था, तभी उसका संतुलन बिगड़ा और वह नीचे गिर गया। विडंबना यह रही कि जिस स्लैब पर वह खड़ा था, वही काल बनकर उसके ऊपर आ गिरी। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है जो 'लाइक्स' और 'फॉलोअर्स' के लिए सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं।
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@khabreelal_news बरेली के नवाबगंज में रील बनाने का जुनून जानलेवा साबित हुआ। निर्माणाधीन पुल पर पोज देते समय 22 वर्षीय फैजान 100 किलो वजनी स्लैब के नीचे दब गया। पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली पूरी रिपोर्ट (https://t.co/RMTqh1xOXc)पर और जानें क्यों सोशल मीडिया का नशा बन रहा है काल। pic.twitter.com/jC47ChzXZk
Bareilly Reel Accident: कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
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शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे, रिछोला किफायतुल्ला निवासी मोहम्मद फैजान (22) अपने दोस्त अनुज गंगवार के साथ सिजौलिया गांव के पास बन रहे एक निर्माणाधीन पुल पर पहुंचा था। फैजान पेशे से नाई (Barber) था और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था। इंस्टाग्राम पर उसके 9635 फॉलोअर्स थे, और वह अक्सर अपनी वीडियो और फोटो पोस्ट करता रहता था।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, फैजान पुल के किनारे रखी सीमेंट की स्लैब्स (पत्थरों) पर चढ़ गया। वह अपने दोस्त अनुज से अपना वीडियो शूट करवा रहा था। अनुज अपने मोबाइल से फैजान की रील रिकॉर्ड कर रहा था। फैजान अलग-अलग एंगल से पोज दे रहा था।
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तभी अचानक फैजान का पैर फिसला। पुल के एक तरफ पक्की सड़क थी और दूसरी तरफ खेत था। फैजान का संतुलन बिगड़ने से वह दूसरी तरफ, यानी नीचे खेत की ओर गिर गया। हादसा यहीं नहीं रुका। जैसे ही फैजान नीचे गिरा, जिस स्लैब पर वह खड़ा था और उसके साथ रखी दो अन्य भारी स्लैब्स भी भरभराकर उसके ऊपर आ गिरीं।
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100 किलो की स्लैब और बेबस दोस्त
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फैजान के ऊपर जो सीमेंट की स्लैब गिरीं, उनका वजन करीब 100 किलो बताया जा रहा है। एक साथ तीन भारी पत्थरों के नीचे दब जाने से फैजान बुरी तरह फंस गया। उसका दोस्त अनुज, जो कुछ सेकंड पहले तक वीडियो बना रहा था, बदहवास होकर नीचे दौड़ा। उसने अपने दोस्त को बचाने की पूरी कोशिश की। उसने पत्थरों को हटाने का प्रयास किया, लेकिन स्लैब इतनी भारी थीं कि एक इंसान के लिए उन्हें हिला पाना भी नामुमकिन था।
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अनुज ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया। उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग और पुल निर्माण में लगे मजदूर मौके पर दौड़ पड़े। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। फैजान पत्थरों के नीचे तड़प रहा था, और धीरे-धीरे उसकी आवाज बंद हो गई।
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हाइड्रा मशीन से निकाला गया शव
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घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत हाईवे निर्माण कंपनी से संपर्क किया गया। भारी स्लैब्स को हाथों से हटाना संभव नहीं था, इसलिए आनन-फानन में एक हाइड्रा मशीन (Hydra Machine) बुलाई गई।
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मशीन के आने तक मौके पर भारी भीड़ जमा हो चुकी थी। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद मशीन की मदद से उन भारी पत्थरों को हटाया गया। जब फैजान को बाहर निकाला गया, तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। रील बनाने का शौक उसके जीवन का आखिरी वीडियो साबित हुआ।
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परिवार में कोहराम: 5वें नंबर का बेटा था फैजान
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फैजान की मौत की खबर जैसे ही उसके घर रिछोला किफायतुल्ला पहुंची, वहां कोहराम मच गया। फैजान अपने पिता मेहंदी हसन के छह बच्चों में पांचवें नंबर पर था। उसके भाई हुस्ने मुस्तफा, नूरे मुस्तफा, जीशान, उवैश और दो बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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पिता मेहंदी हसन ने बताया, "फैजान शाम करीब पांच बजे अपने दोस्त अनुज के साथ घूमने की बात कहकर घर से निकला था। हमें क्या पता था कि वह अब कभी वापस नहीं आएगा। कुछ ही देर बाद हमें यह मनहूस खबर मिली।"
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हैरानी की बात यह रही कि परिजन बदहवास हालत में मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दिए बिना ही शव को लेकर घर चले गए। हालांकि, बाद में सूचना मिलने पर कस्बा चौकी इंचार्ज सुनील कुमार ने घटनास्थल का मुआयना किया और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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सोशल मीडिया का खतरनाक नशा: एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण
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Bareilly Reel Accident जैसी घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। सवाल उठता है कि आखिर आज की युवा पीढ़ी एक 15 सेकंड की वीडियो क्लिप के लिए अपनी जान दांव पर क्यों लगा रही है?
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मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले 'Instant Gratification' (तुरंत संतुष्टि) की लत युवाओं के दिमाग पर गहरा असर डाल रही है।
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डोपामाइन रश (Dopamine Rush): जब किसी वीडियो पर लाइक्स और कमेंट्स आते हैं, तो दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है, जो खुशी का अहसास कराता है। युवा इसी अहसास को बार-बार पाने के लिए खतरे उठाते हैं।
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FOMO (Fear Of Missing Out): दूसरों को वायरल होते देख, युवाओं को लगता है कि अगर उन्होंने कुछ अलग या खतरनाक नहीं किया, तो वे पीछे रह जाएंगे।
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वर्चुअल दुनिया की हकीकत: फैजान के 9635 फॉलोअर्स थे। इस वर्चुअल भीड़ की वाहवाही ने शायद उसे उस खतरनाक स्लैब पर चढ़ने का साहस दिया होगा, जो उसकी मौत का कारण बना।
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भारत: 'सेल्फी डेथ' कैपिटल?
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आंकड़े बताते हैं कि भारत दुनिया में उन देशों में शीर्ष पर है जहां सेल्फी या रील बनाने के चक्कर में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। चाहे रेलवे ट्रैक हो, पहाड़ की चोटी हो, या निर्माणाधीन इमारतें—युवा हर जगह कैमरा ऑन करके खतरे को आमंत्रित कर रहे हैं।
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एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में होने वाली कुल सेल्फी मौतों में से लगभग 60% भारत में होती हैं। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। बरेली का यह हादसा उस लंबी सूची में एक और नाम जोड़ देता है जिसमें रील के क्रेज ने एक हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर दिया।
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निर्माणाधीन साइट्स पर खतरा
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इस हादसे ने निर्माण स्थलों (Construction Sites) की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं, हालांकि प्रथम दृष्टया गलती युवक की ही मानी जा रही है।
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अस्थिर ढांचा: निर्माणाधीन पुलों या इमारतों पर रखे गए सामान, जैसे सीमेंट स्लैब या लोहे की छड़ें, अक्सर फिक्स नहीं होतीं। वे केवल रखे हुए (Stack) होते हैं।
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छिपा हुआ खतरा: फैजान जिस स्लैब पर चढ़ा, उसे शायद लगा होगा कि वह मजबूत है, लेकिन वह महज एक अस्थायी सपोर्ट पर रखी हो सकती थी।
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प्रतिबंधित क्षेत्र: ऐसी जगहों पर आम लोगों का जाना प्रतिबंधित होना चाहिए, लेकिन अक्सर सुरक्षा गार्ड्स की कमी या लापरवाही के कारण लोग वहां पहुंच जाते हैं।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार?
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बरेली पुलिस ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और युवाओं से अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार जागरूकता अभियान चलाते हैं कि रेलवे ट्रैक, हाईवे, और खतरनाक स्थानों पर वीडियोग्राफी न करें।
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एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "आज के युवाओं को यह समझना होगा कि जान से बढ़कर कोई रील नहीं है। एक छोटी सी गलती न केवल आपकी जान ले सकती है, बल्कि आपके पूरे परिवार को जीवन भर का गम दे सकती है।"
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सुरक्षा के लिए क्या करें? (Safety Guidelines)
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अगर आप कंटेंट क्रिएटर (Content Creator) हैं या सोशल मीडिया के शौकीन हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
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लोकेशन का चयन: कभी भी ऐसी जगह वीडियो न बनाएं जो अस्थिर हो, जैसे—पहाड़ का किनारा, निर्माणाधीन इमारत, या फिसलन वाली जगह।
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सतर्कता: वीडियो बनाते समय अपने आसपास के वातावरण (Surroundings) के प्रति हमेशा सचेत रहें। कैमरे के लेंस में खो जाना जानलेवा हो सकता है।
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अकेले न जाएं: अगर आप किसी सुनसान जगह पर शूट कर रहे हैं, तो हमेशा किसी जिम्मेदार व्यक्ति को साथ रखें जो वीडियो बनाने के बजाय सुरक्षा पर ध्यान दे।
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कानूनी नियमों का पालन: प्रतिबंधित क्षेत्रों (Restricted Areas) में घुसकर वीडियो बनाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि खतरनाक भी है।
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बरेली में 22 वर्षीय फैजान की मौत (Bareilly Reel Accident) महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतावनी है। टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया हमारे मनोरंजन के लिए हैं, न कि जीवन खत्म करने के लिए। 100 किलो की स्लैब के नीचे दबकर एक युवा के सपनों का अंत हो जाना हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं।
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फैजान तो अब वापस नहीं आ सकता, लेकिन उसकी मौत से सबक लेकर अगर एक भी युवा अपनी जान जोखिम में डालने से रुक जाए, तो शायद ऐसी त्रासदियों को भविष्य में रोका जा सके। रील के लिए 'रियल' लाइफ को दांव पर न लगाएं। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें।
Sabse pehle comment karne wale banein.