बागपत के बड़ौत में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी गैंग ने टेंट कारोबारी सोहनलाल और बेटे विकास की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। वारदात के बाद भाग रहे एक शूटर को भीड़ ने दबोचा। पुलिस के खिलाफ
Published at : 09 Jun 2026, 05:59 PM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
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Baghpat Double Murder Tent Businessman Father and Son Shot Dead in Baraut
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का बड़ौत (Baraut) इलाका उस वक्त गोलियों की तड़तड़ाहट और चीख-पुकार से गूंज उठा, जब हथियारों से लैस बदमाशों ने एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। दिनदहाड़े भरे बाजार में अंजाम दी गई इस दुस्साहसिक वारदात ने न केवल आम जनता के दिलों में खौफ पैदा कर दिया है, बल्कि अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, यह भी साबित कर दिया है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि पुलिस-प्रशासन के इकबाल पर एक सीधा और करारा तमाचा है। आइए, इस रोंगटे खड़े कर देने वाले दोहरे हत्याकांड की एक-एक कड़ी और इसके पीछे की पूरी खौफनाक कहानी को विस्तार से समझते हैं।READ ALSO:-मेरठ में 'ब्लैकआउट' का खतरा! 11 जून से बिजली संविदा कर्मचारियों का महा-कार्य बहिष्कार; बिना वेतन दाने-दाने को मोहताज हुए परिवार
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एक आम दिन जो बन गया 'काल': दुकान पर बैठे थे पिता-पुत्र
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घटना बागपत के बड़ौत कोतवाली क्षेत्र की है। दिल्ली-सहारनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (Delhi-Saharanpur Highway) के बिल्कुल किनारे स्थित अपनी टेंट और डेकोरेशन की दुकान पर 55 वर्षीय टेंट व्यवसायी सोहनलाल अग्रवाल और उनका 30 वर्षीय बेटा विकास रोजमर्रा की तरह अपना व्यापारिक कामकाज देख रहे थे।
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#baghpatpolice \r\nअवगत कराना है कि आज दिनांक 09.06.2026 को सायं लगभग 06:00 बजे थाना बड़ौत पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि दिल्ली-सहारनपुर रोड स्थित एक व्यक्ति द्वारा अपनी दुकान पर बैठे पिता-पुत्र के ऊपर फायरिंग की गई है, जिसमें दोनों गम्भीर रूप से घायल हो गये । दोनों को उपचार हेतु… pic.twitter.com/bP0xvVfyhR
\r\n— Baghpat Police (@baghpatpolice) June 9, 2026
बाजार में आम दिनों की तरह ही चहल-पहल थी। ग्राहक आ-जा रहे थे और किसी को भी इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि मौत कुछ ही पलों में उनके दरवाजे पर दस्तक देने वाली है। तभी अचानक वहां का माहौल पूरी तरह से बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दो तेज रफ्तार मोटरसाइकिलों पर सवार होकर कई नकाबपोश और हथियारबंद बदमाश तेजी से दुकान के सामने आकर रुके।
इन बाइक सवार बदमाशों की अगुवाई इलाके का कुख्यात और वांटेड हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी (Varun Luhari) कर रहा था। बदमाशों ने अपनी बाइकों के इंजन बंद भी नहीं किए थे कि उन्होंने अपने असलहों (पिस्टल और तमंचों) से सोहनलाल और उनके बेटे विकास को निशाना बनाते हुए सीधे तौर पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
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दुकान के अंदर एक के बाद एक कई राउंड फायर किए गए। यह हमला इतना अचानक और तीव्र था कि सोहनलाल और विकास को अपनी जान बचाने या छिपने का एक सेकंड का भी मौका नहीं मिला। बदमाशों ने बेहद करीब से दोनों के शरीर में कई गोलियां उतार दीं। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के दुकानदारों और सड़क से गुजर रहे राहगीरों में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही सेकंडों में वह व्यस्त व्यावसायिक इलाका एक खौफनाक क्राइम सीन में तब्दील हो गया और पिता-पुत्र खून से लथपथ होकर वहीं जमीन पर गिर पड़े।
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अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट गई दोनों की सांसें
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हमलावरों के भागने के बाद इलाके के लोग सहमे हुए कदमों से दुकान की तरफ दौड़े। अंदर का नजारा बेहद खौफनाक था; पिता और पुत्र दोनों खून से लथपथ तड़प रहे थे। घटना की सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम (Dial 112) को दी गई।
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चंद मिनटों में ही पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से गंभीर रूप से घायल सोहनलाल अग्रवाल और विकास को आनन-फानन में इलाज के लिए बड़ौत के नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन, अत्यधिक खून बह जाने और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में गोलियां लगने के कारण, दोनों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों की टीम ने पिता-पुत्र दोनों को मृत (Dead on Arrival) घोषित कर दिया। इस खबर के फैलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे शहर में मातम छा गया।
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जनता का फूटा गुस्सा: भीड़ ने एक शूटर को सड़क पर दौड़ाकर पीटा
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इस पूरी वारदात का एक सबसे चौंकाने वाला और हैरान करने वाला पहलू वह रहा, जब भीड़ ने खुद न्याय (Mob Justice) करने की ठान ली। जब हमलावर वारदात को अंजाम देकर भागने की कोशिश कर रहे थे, तब वहां मौजूद कुछ साहसी युवाओं और आम जनता ने अपनी जान की परवाह किए बिना बदमाशों का पीछा किया।
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हड़बड़ाहट और भीड़ के दबाव में एक हमलावर का संतुलन बिगड़ गया और वह बाइक से नीचे गिर गया। इसके बाद जो हुआ, वह जनता के गुस्से का चरम था। आक्रोशित भीड़ ने उस हथियारबंद शूटर को सड़क पर गिरा लिया और उसकी जमकर लात-घूंसों, डंडों और जूतों से पिटाई शुरू कर दी। लोग इतने गुस्से में थे कि अगर पुलिस मौके पर पहुंचकर बीच-बचाव न करती, तो शायद वह शूटर वहीं भीड़ के हाथों मारा (Mob Lynching) जाता। पुलिस ने बमुश्किल और कड़ी मशक्कत के बाद उस अधमरे हमलावर को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया और उसे हिरासत में लेकर कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल भिजवाया।
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कत्ल की असली वजह: पुरानी रंजिश और खूनी खेल
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पुलिस की शुरुआती जांच और परिवार के लोगों से की गई पूछताछ में इस खौफनाक डबल मर्डर के पीछे की जो मुख्य वजह सामने आई है, वह है— 'पुरानी रंजिश' (Old Enmity)।
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सूत्रों के मुताबिक, टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल का कुख्यात अपराधी वरुण लुहारी के साथ किसी पुरानी बात, लेन-देन या वर्चस्व को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। वरुण लुहारी कोई आम अपराधी नहीं है; वह जरायम की दुनिया का एक ऐसा नाम है जिसके खिलाफ हत्या, रंगदारी और लूट के कई संगीन मामले पहले से ही थानों में दर्ज हैं। पुलिस का मानना है कि इसी रंजिश का बदला लेने और इलाके में अपना खौफ कायम करने के लिए वरुण ने अपने गैंग के गुर्गों के साथ मिलकर इस पूरी वारदात की साजिश रची और पिता-पुत्र की जान ले ली।
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पुलिस प्रशासन के खिलाफ भड़का आक्रोश: नेशनल हाईवे जाम और 'बड़ौत बंद' का ऐलान
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इस पूरी घटना ने पुलिस की मुस्तैदी पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात को लेकर है कि जिस जगह (दिल्ली-सहारनपुर हाईवे) पर यह मर्डर हुआ, वहां से पुलिस चौकी महज कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित है।
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हाईवे पर चक्का जाम: दिनदहाड़े और पुलिस चौकी के इतने करीब इतनी बड़ी वारदात हो जाने से स्थानीय व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज व्यापारियों और परिजनों ने बड़ौत कोतवाली पुलिस पर लापरवाही और नाकामी का आरोप लगाते हुए दिल्ली-सहारनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-709) पर लंबा जाम लगा दिया।
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पुलिस के खिलाफ नारेबाजी: सड़क पर उतरे सैकड़ों लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि पुलिस केवल हेलमेट और चालान काटने तक सीमित रह गई है, जबकि अपराधी सरेआम अत्याधुनिक हथियारों के साथ खुलेआम घूम रहे हैं। "जब अपनी दुकान पर बैठा एक व्यापारी सुरक्षित नहीं है, तो पुलिस किस काम की?" यह सवाल हर किसी की जुबान पर था।
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व्यापार मंडल का बड़ा फैसला: शहर के बिगड़ते हालात और कानून व्यवस्था के विरोध में स्थानीय व्यापार मंडल ने कल पूरे 'बड़ौत शहर को पूर्ण रूप से बंद' (Baraut Bandh) रखने का सख्त ऐलान किया है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी आरोपियों का एनकाउंटर या गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे।
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पुलिस का एक्शन प्लान: 10 स्पेशल टीमें गठित, चप्पे-चप्पे पर फोर्स
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हालात को बेकाबू होता देख बागपत के पुलिस अधीक्षक (SP) सूरज कुमार राय भारी पुलिस बल, पीएसी (PAC) और कई थानों की फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित व्यापारियों से बात की और उन्हें कड़ी कार्रवाई का लिखित आश्वासन देकर बामुश्किल जाम खुलवाया।
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जांच की दिशा और पुलिस की रणनीति:
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सीसीटीवी कैमरों की जब्ती: पुलिस की फॉरेंसिक और टेक्निकल टीमों ने घटनास्थल और उसके आसपास (पूरे हाईवे और बाजार) लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर (DVR) को तुरंत अपने कब्जे में ले लिया है। इन फुटेज के जरिए बदमाशों के भागने के रूट और वारदात में शामिल अन्य चेहरों की पहचान की जा रही है।
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10 पुलिस टीमों का गठन: एसपी सूरज कुमार राय ने इस मामले को शासन स्तर की प्राथमिकता पर लेते हुए मुख्य आरोपी वरुण लुहारी और उसके फरार साथियों की तत्काल गिरफ्तारी के लिए 10 विशेष पुलिस टीमों का गठन किया है। इन टीमों में एसओजी (SOG), सर्विलांस सेल और क्राइम ब्रांच के सबसे तेज-तर्रार अधिकारियों को शामिल किया गया है।
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पकड़े गए शूटर से पूछताछ: जो शूटर भीड़ के हत्थे चढ़ा था, उसके होश में आते ही पुलिस उससे कड़ाई से पूछताछ कर रही है, ताकि वरुण लुहारी के छिपने के संभावित ठिकानों का पता लगाया जा सके।
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क्या पुलिस लौटा पाएगी जनता का भरोसा?
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बागपत का यह डबल मर्डर केवल दो लोगों की हत्या नहीं है, बल्कि यह कानून के राज पर एक गहरा आघात है। उत्तर प्रदेश पुलिस, जो अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति और 'ऑपरेशन लंगड़ा' के लिए जानी जाती है, उसके सामने वरुण लुहारी जैसे अपराधियों ने एक बहुत बड़ी चुनौती पेश कर दी है। फिलहाल बड़ौत में भारी पुलिस बल तैनात है और इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और पूरा शहर बंद की तैयारी में है। अब देखना यह है कि बागपत पुलिस कितनी जल्दी इस पूरे गैंग का सफाया करती है और जनता के दिलों में वापस सुरक्षा का भाव पैदा कर पाती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.