बागपत (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश का पश्चिमी जिला बागपत एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट, पुरानी रंजिश और दुस्साहसिक गैंगवार के चलते दहल उठा है। मंगलवार की शाम बड़ौत के व्यस्त और घनी आबादी वाले बाजार में जो कुछ भी हुआ, उसने सूबे की कानून-व्यवस्था और अपराधियों के बेखौफ हौसलों की एक खौफनाक तस्वीर पेश की है। यह कहानी केवल एक दोहरे हत्याकांड की नहीं है, बल्कि यह कहानी है उस प्रतिशोध की आग की जो पिछले 10 सालों से सुलग रही थी और जिसका अंत मंगलवार को तीन लाशों के साथ हुआ।READ ALSO:-हाथरस विवाद में नया मोड़: हरियाणवी डांसर का आपत्तिजनक वीडियो वायरल; ट्रोल्स के निशाने पर आई डांसर ने दिया करारा जवाब
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इस पूरी वारदात में जहां बदमाशों ने एक प्रतिष्ठित टेंट कारोबारी और उनके इकलौते बेटे को मौत के घाट उतार दिया, वहीं भाग रहे मुख्य शूटर और इलाके के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर को जनता ने घेरकर 'ऑन-द-स्पॉट' खूनी सजा दे दी। इस सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड (Triple Murder) के बाद से पूरे बड़ौत क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल है, चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात है और गुस्साए व्यापारियों ने बाजार पूरी तरह बंद कर रखा है।
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शाम 5:50 बजे: बड़ौत बाजार में यमराज का तांडव

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मंगलवार की शाम बड़ौत का बस अड्डा इलाका हमेशा की तरह आम लोगों और ग्राहकों की चहल-पहल से गुलजार था। टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल (50 वर्ष) अपनी दुकान के भीतर बैठे थे। उनका 30 वर्षीय इकलौता बेटा विकास अग्रवाल भी किसी काम से पिता के पास दुकान पर आया हुआ था। दोनों रोजमर्रा के काम निपटा रहे थे कि तभी अचानक शाम ठीक 5:50 बजे दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर तीन नकाबपोश शूटर दुकान के बाहर आकर रुकते हैं।
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बदमाश पिस्टल लेकर दुकान पर चढ़ा और अंदर बैठे कारोबारी और उसके बेटे पर फायरिंग करने लगा। गोली लगने से कारोबारी की मौत हो गई।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बदमाश ने अपनी कमर से पिस्टल निकाली, बेहद ठंडे दिमाग से दुकान के अंदर झांका और सोहनलाल व विकास को देखते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा बाजार गूंज उठा। अचानक हुए इस आत्मघाती हमले में बाप-बेटे को संभलने का मौका ही नहीं मिला। कई गोलियां लगने के कारण दोनों लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। इस दौरान सड़क से गुजर रहा एक राहगीर रोहित (35) भी पैर में गोली लगने से घायल हो गया।
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मरते-मरते भी बेटे ने दिखाया अदम्य साहस, शूटर को दबोचा

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इस खूनी खेल में सबसे बड़ा और नाटकीय मोड़ तब आया जब 30 साल के युवा विकास ने अंतिम सांसें लेते हुए भी गजब के साहस का परिचय दिया। गोलियों से छलनी होने के बावजूद विकास पीछे हटने की बजाय सीधे मुख्य शूटर और इलाके के कुख्यात गैंगस्टर वरुण लुहारी से भिड़ गया।
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दूसरा बदमाश पीछे से आया और कारोबारी के बेटे की पीठ में गोली मार दी।

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विकास ने अपनी पूरी ताकत झोंककर वरुण लुहारी को कसकर दबोच लिया। वरुण के बाकी साथियों ने जब देखा कि उनका सरगना फंस चुका है, तो उन्होंने विकास की पकड़ ढीली करने के लिए उस पर दोबारा गोलियां चलाईं। लेकिन हड़बड़ाहट में बदमाशों का निशाना चूक गया और उनके अपने ही साथी वरुण लुहारी को एक गोली लग गई।
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जनता की अदालत: जमीन पर पड़े गैंगस्टर को भीड़ ने सरेआम मारी गोली

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अपने ही साथियों की गोली का शिकार होने और विकास की मजबूत पकड़ के कारण वरुण लुहारी वहीं सड़क पर गिर पड़ा, जबकि उसके बाकी साथी हवा में गोलियां चलाते हुए अपनी बाइक छोड़कर भाग निकले। इसी बीच बाजार के सैकड़ों दुकानदारों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। भीड़ ने घायल पड़े हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी को चारों तरफ से घेर लिया।
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वायरल वीडियो का खौफनाक सच बुधवार सुबह इस घटना का एक बेहद चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बदमाश वरुण लुहारी लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़ा हुआ है और तड़प रहा है। इसी दौरान आक्रोशित भीड़ में से एक अज्ञात व्यक्ति आगे बढ़ता है, अपनी जेब से अवैध असलहा निकालता है और जमीन पर पड़े बदमाश पर बेहद करीब से 2-3 राउंड और गोलियां दाग देता है। जनता के इस 'खूनी इंसाफ' ने मौके पर ही वरुण का काम तमाम कर दिया।
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आखिर क्या थी इस खूनी खेल की पृष्ठभूमि? 2016 की वो ₹100 की रंजिश

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बागपत पुलिस की शुरुआती जांच में जो कहानी निकलकर सामने आई है, वह बेहद हैरान करने वाली है। पुलिस के मुताबिक, इस तिहरे हत्याकांड की पटकथा आज से 10 साल पहले यानी साल 2016 में लिखी गई थी, जिसकी वजह मात्र 100 रुपये का एक विवाद था।
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    चखने की दुकान से शुरू हुआ विवाद: साल 2016 में सोहनलाल अग्रवाल बड़ौत में एक शराब की दुकान के बगल में कैंटीन (चखना दुकान) चलाते थे। एक शाम कुख्यात बदमाश वरुण लुहारी वहां शराब पीने आया और उसने कैंटीन से कुछ सामान लिया। महज 100 रुपये के लेनदेन को लेकर वरुण का सोहनलाल और उनके बेटे विकास से विवाद हो गया। उस समय वरुण ने बाप-बेटे के साथ जमकर मारपीट की थी।
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    भाई की मौत का प्रतिशोध: इस घटना के दो दिन बाद वरुण लुहारी अपने सगे भाई कपिल और अन्य साथियों के साथ सोहनलाल से बदला लेने उनकी दुकान पर धमक गया। वहां दोनों पक्षों के बीच जमकर गोलियां चलीं। इस क्रॉस-फायरिंग में वरुण के भाई कपिल को गोली लग गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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    10 साल से सुलग रही थी आग: इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों को जेल भेजा था और 2023 में वरुण की संपत्ति भी गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क कर दी गई थी। जेल से छूटने के बाद वरुण देहरादून में रहने लगा था, लेकिन उसके दिल में अपने भाई की मौत का बदला लेने की आग सुलग रही थी। हाल ही में वह कोर्ट की पैरवी के बहाने बागपत आया था और उसने इस खूनी साजिश को अंजाम दे डाला।
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कीमतों की तुलना: अपराध की दुनिया का क्रूर चेहरा

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मारे गए गैंगस्टर वरुण लुहारी का अपराध का इतिहास बेहद लंबा और डरावना था। वह कोई साधारण अपराधी नहीं था, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के टॉप बदमाशों की सूची में शामिल था।
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विवरण
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वरुण लुहारी का क्रूर इतिहास
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कुल दर्ज मुकदमे
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हत्या, रंगदारी, लूट और जानलेवा हमले के 16 से अधिक केस।
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अपराध की शुरुआत
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साल 2010 में मामूली मारपीट और गुंडागर्दी से शुरुआत।
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पुलिस पर हमला
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हाल ही में एक मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम और एक दरोगा पर सीधी फायरिंग।
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चर्चित गोलीकांड
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17 जुलाई 2015 को दिल्ली बस स्टैंड पर हुआ चर्चित गोलीकांड, जिसमें टेंट कारोबारी परिवार पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई थीं।
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उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार: घर में बचीं सिर्फ 'सास और बहू'

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इस भीषण हत्याकांड ने अग्रवाल परिवार को पूरी तरह खत्म कर दिया है। सोहनलाल के इकलौते बेटे विकास की शादी महज 6 महीने पहले यानी दिसंबर 2025 में हुई थी। विकास की पत्नी नेहा वर्तमान में दो महीने की गर्भवती हैं। जिस घर में आने वाले बच्चे की खुशियों की तैयारी चल रही थी, वहां अब केवल सोहनलाल की पत्नी ऊषा और उनकी विधवा बहू नेहा बची हैं। बुधवार सुबह जब एक ही घर से पिता और पुत्र की दो अर्थियां एक साथ उठीं, तो बड़ौत का हर नागरिक रो पड़ा।
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सड़कों पर आक्रोश: नेशनल हाईवे जाम, बुलडोजर और एनकाउंटर की मांग

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इस सनसनीखेज वारदात के विरोध में बड़ौत के व्यापारियों ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं और सड़कों पर जुलूस निकाला। आक्रोशित परिजनों और उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे पर शव रखकर जाम लगा दिया। मृतक की पत्नी और गर्भवती बहू भी सड़क पर बैठकर इंसाफ की भीख मांगने लगीं।
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नेताओं और अधिकारियों का रुख:

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    उद्योग व्यापार मंडल: व्यापार मंडल के महामंत्री विक्की चौधरी ने पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अपराधियों का तुरंत एनकाउंटर किया जाए।
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    सपा व्यापार सभा: सपा व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मांग की कि अपराधियों के घरों पर तुरंत योगी सरकार का बुलडोजर चलना चाहिए।
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    पुलिस की 10 टीमें सक्रिय: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बागपत के डीएम अस्मित लाल और एसपी सूरज राय खुद मौके पर पहुंचे। एसपी ने बताया कि फरार बदमाशों को पकड़ने के लिए 10 विशेष टीमों का गठन किया गया है और देर रात कार्रवाई करते हुए मृतक बदमाश वरुण के पिता बाबूराम को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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मामले में नया पेंच: बदमाश के ग्रामीणों ने की 'मॉब जस्टिस' के खिलाफ केस की मांग

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इस पूरे घटनाक्रम में बुधवार दोपहर को एक और नया कानूनी पेंच फंस गया है। जब भीड़ द्वारा बदमाश वरुण को गोली मारने का वीडियो वायरल हुआ, तो वरुण के पैतृक गांव लुहारी के ग्राम प्रधान करीब 10-12 लोगों के साथ बड़ौत कोतवाली पहुंच गए। ग्रामीणों का आरोप है कि वरुण को पुलिस के सामने भीड़ ने कानून हाथ में लेकर मारा है। उन्होंने पुलिस को तहरीर देकर उन लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है जिन्होंने जमीन पर पड़े वरुण पर गोलियां चलाई थीं। हालांकि, पुलिस ने फिलहाल इस तहरीर को लेने से इनकार कर दिया है।
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बागपत का यह तिहरा हत्याकांड इस बात का गवाह है कि कैसे एक मामूली सा विवाद अगर समय रहते पुलिस द्वारा पूरी तरह से खत्म न किया जाए, तो वह सालों बाद एक भयानक नरसंहार का रूप ले लेता है। हालांकि, इस घटना ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्हें पहले से ही लुहारी गैंग से जान का खतरा था। अब देखना यह होगा कि बागपत पुलिस बाकी फरार बदमाशों को कितनी जल्दी सलाखों के पीछे भेजती है और इस 'मॉब जस्टिस' (भीड़ के न्याय) वाले नए विवाद से कैसे निपटती है।
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