रामपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश की सियासत में कभी अपनी हनक और रसूख के लिए पहचाने जाने वाले समाजवादी पार्टी (SP) के दिग्गज नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पर कानून का शिकंजा और कस गया है। शनिवार को रामपुर की विशेष MP/MLA (सांसद/विधायक) कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए बहुचर्चित 'फर्जी पैन कार्ड (Fake PAN Card)' मामले में दोनों की सजा को 3-3 साल के लिए और बढ़ा दिया है।READ ALSO:-बिजली कटौती पर शासन का बड़ा चाबुक: मेरठ और गाजियाबाद के दो अधिशासी अभियंता निलंबित
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस नए फैसले के बाद अब आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को कुल 10-10 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने होंगे। इसके साथ ही अदालत ने बाप-बेटे पर 5-5 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला आजम खान के सियासी करियर और उनके परिवार के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
क्या है कोर्ट का ताजा फैसला और सरकार की दलील?
\r\n\r\nआपको बता दें कि 17 नवंबर 2025 को इसी मामले में MP/MLA कोर्ट ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई थी और दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। इसी सजा के चलते दोनों नेता रामपुर जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
हालांकि, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार इस 7 साल की सजा से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी। सरकार का मानना था कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह सजा कम है। इसी कड़ी में 5 मई 2026 को यूपी सरकार की ओर से एडीजीसी (ADGC - Assistant District Government Counsel) सीमा राणा ने सजा को उम्रकैद में तब्दील करने के लिए कोर्ट में एक नई अपील दायर की थी।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
सरकारी वकील का तर्क: कोर्ट में जिरह के दौरान सरकारी पक्ष ने बेहद सख्त दलीलें पेश कीं। एडीजीसी सीमा राणा का तर्क था कि यह मामला महज किसी सामान्य 'दस्तावेजी गड़बड़ी' या भूल-चूक का नहीं है। यह सीधे तौर पर सरकारी पहचान पत्र (Government ID) के गंभीर दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और लोकतंत्र की चुनावी प्रक्रिया के साथ किए गए एक बड़े फर्जीवाड़े से जुड़ा गंभीर अपराध है। इसलिए दोनों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा दी जानी चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद उम्रकैद तो नहीं दी, लेकिन सजा में 3-3 साल का इजाफा जरूर कर दिया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
\r\n\r\n\r\nएक और मामले में हालिया सजा: गौरतलब है कि आजम खान के लिए यह हफ्ता बेहद खराब रहा है। महज एक हफ्ते पहले ही रामपुर MP/MLA कोर्ट ने उन्हें 'कलेक्टर-फलेक्टर तनखैया' वाले एक पुराने भड़काऊ और विवादित बयान के मामले में भी 2 साल की सजा सुनाई थी।\r\n
\r\n\r\n
फैसले के बाद गदगद हुए भाजपा विधायक आकाश सक्सेना
\r\n\r\nइस पूरे 'फर्जी पैन कार्ड' और 'फर्जी जन्म प्रमाण पत्र' के मकड़जाल को उजागर करने वाले और एफआईआर दर्ज कराने वाले रामपुर से मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक आकाश सक्सेना इस फैसले से बेहद खुश हैं। साल 2019 में आकाश सक्सेना ने ही अब्दुल्ला पर दो पैन कार्ड रखने के आरोप में रामपुर के सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस जांच के बाद साजिशकर्ता के रूप में पिता आजम खान का नाम भी इसमें जोड़ा गया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आकाश सक्सेना की प्रतिक्रिया: फैसला आने के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक आकाश सक्सेना ने कहा, "यह फैसला ऐतिहासिक है। हिंदुस्तान के कानूनी इतिहास में यह संभवतः पहली बार है, जब ऐसे किसी मामले में सजा को इस तरह बढ़ाया गया है। मैंने अदालत से आरोपियों को अधिकतम सजा देने की अपील की थी। कोर्ट ने हमारी दलीलों और अपराध की गंभीरता को समझा और सजा बढ़ाई। मैं इस न्यायपूर्ण फैसले से पूरी तरह संतुष्ट और खुश हूं। सत्य की हमेशा जीत होती है।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
सरकारी वकील सीमा राणा का बयान: यूपी सरकार की तरफ से पैरवी करने वाली सरकारी वकील सीमा राणा ने कहा, "दो पैन कार्ड मामले में सरकार की सजा बढ़ाने की अपील पर आज माननीय अदालत का फैसला आया है। हालांकि, हमने एक गंभीर अपराध मानते हुए आजीवन कारावास की मांग रखी थी, लेकिन कोर्ट ने सभी पहलुओं को देखते हुए 3-3 साल की सजा बढ़ाई है। हम अदालत के इस फैसले का सम्मान करते हैं और इससे संतुष्ट हैं।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
फ्लैशबैक: आखिर क्या है पूरा 'फर्जी पैन कार्ड' और जन्म प्रमाण पत्र का मामला?
\r\n\r\nइस पूरे विवाद और फर्जीवाड़े की जड़ें साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों और आजम खान की अति-महत्वाकांक्षा से जुड़ी हैं। गलती पर गलती करते हुए आजम खान और उनके बेटे ने किस तरह कानून के साथ खिलवाड़ किया, इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
1. उम्र का फर्जीवाड़ा और राजनीतिक लॉन्चिंग: साल 2017 में प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार थी और आजम खान उस सरकार में कद्दावर नगर विकास मंत्री थे। उनकी तूती बोलती थी। विधानसभा चुनाव सिर पर थे और आजम खान रामपुर की स्वार (Swar) विधानसभा सीट से अपने बेटे अब्दुल्ला आजम को राजनीति में लॉन्च करना चाहते थे। लेकिन, यहां एक बड़ी कानूनी अड़चन थी।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
संविधान के मुताबिक, विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। एजुकेशन सर्टिफिकेट (शैक्षणिक दस्तावेजों) और असली जन्म तिथि (1 जनवरी, 1993) के मुताबिक, अब्दुल्ला 2017 में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे, क्योंकि उनकी उम्र 25 साल पूरी नहीं हुई थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
2. रसूख का इस्तेमाल और बना फर्जी सर्टिफिकेट: बेटे को विधायक बनाने की चाहत में आजम खान ने अपने पद और रसूख का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने लखनऊ नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) के अधिकारियों पर दबाव डालकर बेटे अब्दुल्ला का एक 'फर्जी जन्म प्रमाण पत्र' (Fake Birth Certificate) बनवा लिया। इस फर्जी दस्तावेज में अब्दुल्ला के जन्म का साल 1993 की जगह 1990 दर्शाया गया, ताकि वे कागजों में 25 साल के हो जाएं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
3. एक के बाद एक फर्जीवाड़े: इसी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाकर अब्दुल्ला ने नियमों को ताक पर रखते हुए फर्जी पैन कार्ड (PAN Card) बनवाए। बात यहीं नहीं रुकी, अब्दुल्ला ने दो पासपोर्ट भी बनवा लिए और उनका धड़ल्ले से इस्तेमाल भी किया।
\r\n\r\n 
विवाद का खुलासा और अब्दुल्ला की विधायकी का जाना
\r\n\r\n2017 के चुनाव हुए और सत्ता के रसूख व फर्जी कागजातों के दम पर अब्दुल्ला आजम स्वार सीट से चुनाव जीत भी गए। लेकिन उनका यह झूठ ज्यादा दिन छिप नहीं सका।
\r\n\r\n\r\n\r\n
उस चुनाव में उनके खिलाफ बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवार रहे नवाब काजिम अली खान ने इस फर्जी पैन कार्ड और उम्र के फर्जीवाड़े का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग और अदालत में शिकायत की कि नॉमिनेशन के समय अब्दुल्ला की उम्र 25 साल से कम थी। जब इस मामले की गहन जांच हुई, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। यह साबित हो गया कि अब्दुल्ला ने फर्जी आयु प्रमाण पत्र पर चुनाव लड़ा था। नतीजतन, कोर्ट के आदेश पर अब्दुल्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया गया और उनकी विधायकी छिन गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जेल यात्रा और 2022 का चुनाव: इस फर्जीवाड़े की परतें खुलने के बाद भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने भी 30 जुलाई 2019 को रामपुर में केस दर्ज कराया। इस मुकदमे में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की धाराओं के तहत अब्दुल्ला के साथ-साथ उनके पिता आजम खान और मां तंजीन फातिमा को भी जेल की हवा खानी पड़ी थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
हालांकि, राजनीति के दांव-पेंच देखिए कि 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में अब्दुल्ला स्वार सीट से दोबारा जीत गए। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद, सरकारी काम में बाधा डालने के एक अन्य आपराधिक मुकदमे में उन्हें फिर 3 साल से ज्यादा की सजा हो गई और जन प्रतिनिधित्व कानून (RPA) के तहत उनकी विधायकी एक बार फिर चली गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आकाश सक्सेना बनाम आजम खान: रामपुर में सियासी वर्चस्व की जंग
\r\n\r\nइस पूरे घटनाक्रम में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की भूमिका सबसे अहम रही है। आकाश सक्सेना और आजम खान के बीच सियासी और कानूनी अदावत बहुत पुरानी है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आजम खान की हेट स्पीच मामले में विधायकी जाने के बाद, रामपुर सदर नगर सीट पर 5 दिसंबर 2022 को उपचुनाव हुए थे। 7 दिसंबर को जब नतीजे आए, तो उसने रामपुर की राजनीति का इतिहास बदल दिया। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी आकाश सक्सेना ने आजम खान के सबसे करीबी और सपा प्रत्याशी आसिम रजा को 25,703 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया था। इससे पहले आकाश 2022 के मुख्य चुनाव में आजम खान के खिलाफ लड़े थे, लेकिन तब हार गए थे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पेशे से कारोबारी और पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना के बेटे आकाश सक्सेना ने आजम खान के सियासी किले को पूरी तरह से ढहा दिया है। एक आंकड़े के मुताबिक, आकाश सक्सेना अब तक आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ 43 से अधिक मामलों में सीधे पक्षकार (Complainant) हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
रामपुर कोर्ट का यह ताजा फैसला न केवल आजम परिवार के लिए एक गहरा कानूनी सदमा है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि राजनीतिक रसूख के बल पर किए गए फर्जीवाड़े का अंत आखिरकार कानून की चौखट पर ही होता है। 10 साल की इस लंबी सजा ने आजम खान की राजनीतिक विरासत पर एक बड़ा और गहरा सवालिया निशान लगा दिया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.