शामली/जलालाबाद (क्राइम/बैंकिंग डेस्क): जब एक आम इंसान अपनी खून-पसीने और जीवन भर की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए किसी राष्ट्रीयकृत बैंक (Nationalized Bank) का रुख करता है, तो वह यह मानकर चलता है कि उसका पैसा वहां पूरी तरह से महफूज है। लेकिन, उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जलालाबाद कस्बे में स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा ने ग्राहकों के इस अटूट विश्वास को न केवल तोड़ा है, बल्कि उसे छलनी कर दिया है।READ ALSO:-PNB जलालाबाद में महाघोटाला: 'बैंक मित्र' बनकर ग्राहकों को लगाया 60 लाख से ज्यादा का चूना, विजिलेंस टीम ने शुरू की जांच
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बैंक में 'बैंक मित्र' (Bank Mitra/CSP) के रूप में कार्य कर रहे एक शातिर युवक ने बैंक अधिकारियों की नाक के नीचे से सैकड़ों गरीब किसानों, मजदूरों, महिलाओं और छोटे व्यापारियों को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया है। कई दिनों से चल रही टालमटोल और अपनी जीवन भर की पूंजी डूबती देख गुरुवार को ग्राहकों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। आक्रोशित और ठगे गए सैकड़ों उपभोक्ताओं ने बैंक परिसर पर जोरदार धावा बोलते हुए उग्र प्रदर्शन किया और बैंक के मुख्य चैनल गेट पर ताला जड़ दिया।
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क्या है पूरा घोटाला और कैसे हुआ 'खेल'? (The Modus Operandi)

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इस पूरे महाघोटाले का मुख्य सूत्रधार अंकुर सैनी नामक युवक बताया जा रहा है, जो पिछले कई वर्षों से जलालाबाद की इसी PNB शाखा में 'बैंक मित्र' के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा था। बैंक मित्र का मुख्य काम ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे ग्राहकों की सहायता करना होता है, लेकिन अंकुर सैनी ने इस पद का इस्तेमाल एक संगठित और सोची-समझी लूट के लिए किया।
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फर्जीवाड़े का तरीका: आरोप है कि अंकुर सैनी बहुत ही शातिराना अंदाज में ग्राहकों से नकद (Cash) रकम जमा कराने के लिए लेता था।
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    पैसे लेने के बाद वह ग्राहकों को कंप्यूटर से निकली असली रसीद के बजाय हाथ से भरी हुई 'फर्जी जमा पर्चियां' (Fake Deposit Slips) थमा देता था।
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    ग्राहकों का विश्वास पक्का करने के लिए वह उनकी बैंक पासबुक (Passbook) में अपने हाथ से या एक डमी प्रिंटर के जरिए रकम जमा होने की 'मैन्युअल एंट्री' (Manual Entry) कर देता था।
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    ग्रामीण और सीधे-सादे ग्राहक पासबुक में एंट्री देखकर आश्वस्त हो जाते थे कि उनका पैसा उनके खाते में सुरक्षित पहुंच गया है, जबकि असलियत में वह सारा कैश सीधे अंकुर सैनी की जेब में जा रहा था।
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लंबे समय तक बेखौफ होकर यह खेल चलता रहा। जब हाल ही में कुछ ग्राहकों को पैसों की सख्त जरूरत पड़ी और उन्होंने निकासी के लिए अपने खाते चेक किए, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। खातों में पैसा शून्य (Zero) था। जैसे ही यह खबर इलाके में फैली, हड़कंप मच गया। मामला उजागर होते ही मुख्य आरोपी अंकुर सैनी करोड़ों रुपये समेटकर रातों-रात भूमिगत (फरार) हो गया।
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गुरुवार का उग्र प्रदर्शन: ग्राहकों ने बैंक पर जड़ा ताला

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घोटाला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कानूनी या विभागीय कार्रवाई न किए जाने से ग्राहकों में भारी रोष पनप रहा था। ग्राहकों को लग रहा था कि बैंक प्रबंधन मामले की लीपापोती करने में जुटा है। इसी कड़ी में गुरुवार की सुबह जलालाबाद कस्बा छावनी में तब्दील होता दिखा। सैकड़ों की संख्या में पीड़ित महिला-पुरुष, बुजुर्ग और युवा PNB शाखा के बाहर इकट्ठा हो गए।
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नारेबाजी और हंगामे के बीच जब बैंक के अधिकारियों ने ग्राहकों की फरियाद को अनसुना करने का प्रयास किया, तो भीड़ बेकाबू हो गई। प्रदर्शनकारियों ने "PNB प्रशासन मुर्दाबाद" और "भ्रष्ट अधिकारी होश में आओ" के गगनभेदी नारे लगाते हुए बैंक के मुख्य गेट पर भारी-भरकम ताला जड़ दिया। बैंक के अंदर मौजूद सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से बंधक बन गए और बैंक का सारा कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक उनके खून-पसीने की कमाई वापस नहीं मिलती और दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक वे बैंक का ताला नहीं खोलेंगे।
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पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन: चौकी प्रभारी ने तुड़वाया ताला

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बैंक पर ताला जड़े जाने और सरकारी कर्मचारियों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। स्थिति की गंभीरता और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के खतरे को भांपते हुए जलालाबाद पुलिस चौकी प्रभारी अरविन्द कुमार भारी पुलिस बल (Police Force) के साथ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे।
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पुलिस ने सबसे पहले उग्र भीड़ को शांत करने और उनसे बातचीत करने का प्रयास किया। जब हालात बेकाबू लगने लगे और ग्राहक पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए बैंक के गेट पर लगे ताले को तोड़ दिया और अंदर फंसे बैंक कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला। चौकी प्रभारी अरविन्द कुमार ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन देकर समझा-बुझाकर वहां से हटाया और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया।
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बैंक अधिकारियों की 'मिलीभगत' पर उठे गंभीर सवाल

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पीड़ित उपभोक्ताओं का सीधा और बेहद तार्किक आरोप है कि करोड़ों रुपये का इतना बड़ा वित्तीय घोटाला (Financial Irregularity) बिना बैंक के आला अधिकारियों और कैश काउंटर पर बैठे कर्मचारियों की संलिप्तता के कतई संभव नहीं है।
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    अगर एक बाहरी व्यक्ति (बैंक मित्र) वर्षों तक बैंक के मुख्य परिसर के अंदर बैठता है।
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    वह लाखों-करोड़ों का नकद लेनदेन खुलेआम करता है।
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    वह फर्जी रसीदें बांटता है और पासबुक में मैन्युअल एंट्री करता है।
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तो क्या बैंक के सीसीटीवी कैमरे (CCTV Cameras), तत्कालीन ब्रांच मैनेजर, कैशियर और ऑडिट टीम अंधी थी? प्रदर्शनकारियों ने मांग उठाई है कि इस मामले में केवल फरार अंकुर सैनी ही नहीं, बल्कि वर्तमान प्रबंधक के साथ-साथ इस शाखा में पिछले 5 सालों में तैनात रहे सभी पूर्व प्रबंधकों (Former Managers) और कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए।
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मैनेजर मानवेन्द्र का विवादित बयान: "हमारी सीधी जिम्मेदारी नहीं"

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इस पूरे प्रकरण में आग में घी डालने का काम किया जलालाबाद PNB शाखा के वर्तमान बैंक प्रबंधक मानवेन्द्र के बयान ने। जब मीडिया और ग्राहकों ने उनसे जवाब मांगा, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक बेहद विवादित और गैर-जिम्मेदाराना बयान दे डाला।
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प्रबंधक मानवेन्द्र ने कहा कि "आरोपी अंकुर सैनी बैंक का कोई नियमित (Regular) कर्मचारी नहीं था, वह केवल एक आउटसोर्स या बैंक मित्र था, इसलिए इस धोखाधड़ी में बैंक प्रबंधन की कोई 'सीधी जिम्मेदारी' नहीं बनती।"
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यह बयान सुनते ही पीड़ित ग्राहकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। लोगों का तीखा सवाल है कि यदि वह बैंक का नियमित कर्मचारी नहीं था, तो बैंक प्रशासन ने उसे बैंक की चारदीवारी के अंदर बैठकर जनता का पैसा लूटने का 'लाइसेंस' कैसे दे दिया? यह बयान सीधे तौर पर PNB की गिरती साख, कार्यप्रणाली में भारी खामी और ग्राहकों के प्रति उनकी घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है।
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CBI जांच की मांग और भविष्य की चेतावनी

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अब यह मामला केवल एक कस्बे की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है। इस महाघोटाले ने पूरे शामली जिले की बैंकिंग व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और वित्त मंत्रालय से इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने के लिए सीबीआई (CBI) जांच की जोरदार मांग की है।
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पीड़ितों ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, संलिप्त बैंक अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई और उनके लूटे गए करोड़ों रुपये की भरपाई बैंक द्वारा नहीं की गई, तो वे चक्का जाम और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जैसा उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मामले की गहराई से जांच में जुट गए हैं, लेकिन खून-पसीने की गाढ़ी कमाई खो चुके ग्राहकों की आंखों से नींद कोसों दूर है। वे किसी भी कीमत पर अपना पैसा और न्याय चाहते हैं। बैंक के उच्च प्रबंधन को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर जनता का विश्वास बहाल करने की आवश्यकता है।
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