अमरोहा। बच्चे जब भी जिद करते हैं, तो माता-पिता उन्हें खुश करने के लिए अक्सर दुकान से चिप्स, कुरकुरे, नूडल्स या नमकीन के पैकेट खरीद कर दे देते हैं। हम आंख मूंदकर इन रंग-बिरंगे पैकेट्स पर भरोसा कर लेते हैं कि अंदर का सामान सुरक्षित होगा। लेकिन, उत्तर प्रदेश के अमरोहा (Amroha) जिले से एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जो हर माता-पिता की नींद उड़ाने के लिए काफी है।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में खौफनाक मंजर: ई-रिक्शा चार्जिंग पॉइंट बना 'आग का गोला', बैटरियों में एक के बाद एक बम जैसे धमाकों से दहला पूरा इलाका
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यहां चंद रुपयों के लालच में मासूम बच्चों और आम लोगों की जिंदगी के साथ एक बेहद घिनौना और खतरनाक खेल खेला जा रहा था। अमरोहा के जोया ब्लॉक क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) ने एक बड़ी और गुप्त कार्रवाई करते हुए एक ऐसे गोदाम का भंडाफोड़ किया है, जहां सड़े हुए और एक्सपायरी (Expiry) डेट पार कर चुके चिप्स और कुरकुरे को नए पैकेटों में भरकर दोबारा बाजार में खपाया जा रहा था। इस गोरखधंधे का मुख्य आरोपी कलीम अब प्रशासन के निशाने पर है। आइए, इस पूरी विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि यह मौत का व्यापार कैसे चल रहा था और अधिकारियों ने इसका पर्दाफाश कैसे किया।
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कैसे हुआ भंडाफोड़: ढकिया चमन गांव में पड़ा छापा

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अमरोहा जिले के जोया ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम 'ढकिया चमन' में पिछले कुछ समय से एक संदिग्ध गतिविधि चल रही थी। स्थानीय स्तर पर मिल रही गुप्त सूचनाओं और मुखबिरों की सटीक जानकारी के आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम अलर्ट मोड पर आ गई थी। सूचना पक्की होने के बाद, सहायक आयुक्त खाद्य (Assistant Commissioner Food) विनय कुमार अग्रवाल के कड़े नेतृत्व में विभाग की एक विशेष टीम ने ढकिया चमन गांव के एक गोदाम पर अचानक धावा बोल दिया।
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छापेमारी के दौरान जब टीम ने गोदाम का शटर उठाया, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। पूरा गोदाम नामी-गिरामी कंपनियों के चिप्स, नमकीन, कुरकुरे, नूडल्स और अन्य स्नैक्स के बड़े-बड़े बोरों और कार्टन से भरा पड़ा था। जब इन पैकेट्स की बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि यह सारा माल महीनों पहले अपनी 'एक्सपायरी डेट' (Expiry Date) पार कर चुका है और खाने के लिहाज से पूरी तरह से सड़ चुका है।
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कलीम का 'काठ का उल्लू': क्या था काम करने का तरीका (Modus Operandi)

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जांच और पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। इस पूरे काले धंधे का मास्टरमाइंड कलीम नामक एक व्यक्ति बताया जा रहा है। कलीम का यह गोरखधंधा कोई छोटा-मोटा काम नहीं था, बल्कि वह इसे एक पूरी संगठित सप्लाई चेन की तरह चला रहा था।
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ऐसे दिया जा रहा था मौत को अंजाम:

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    कबाड़ के भाव खरीद: कलीम बड़े थोक विक्रेताओं और डिस्ट्रीब्यूटर्स से वह माल औने-पौने दामों (कबाड़ के भाव) में खरीदता था, जिसकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी होती थी और जिसे कायदे से नष्ट (Destroy) कर दिया जाना चाहिए था।
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    पैकेट खोलकर खुले में बिक्री: गोदाम के अंदर इन एक्सपायरी पैकेट्स को फाड़ा जाता था। इसके बाद इस खराब माल को बोरियों में भरकर ग्रामीण इलाकों के साप्ताहिक बाजारों, मेलों और छोटी दुकानों पर 'खुले माल' के रूप में बेचा जाता था।
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    नई पैकिंग का फर्जीवाड़ा: इतना ही नहीं, कलीम के गुर्गे कुछ खराब आइटम्स को चमचमाते नए और नकली रैपर (Wrappers) में पैक कर देते थे, जिन पर नई मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट छपी होती थी।
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    टारगेट पर थे गांव के लोग: इस नकली और सड़े हुए माल को खपाने के लिए मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों, छोटे ढाबों और स्कूल के बाहर लगने वाली खोखों को निशाना बनाया जाता था, जहां लोग जागरूकता की कमी के कारण पैकेट पर लिखी तारीखों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं।
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बताया जा रहा है कि आरोपी कलीम ने यह बड़ा गोदाम महज एक महीने पहले ही किराए पर लिया था और इतनी जल्दी उसने अपना यह खतरनाक नेटवर्क फैला लिया था।
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4 लाख से ज्यादा का माल जब्त, सीलिंग की कार्रवाई

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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके से भारी मात्रा में माल जब्त किया है।
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    बरामदगी: अधिकारियों के अनुसार, गोदाम से करीब ढाई से तीन क्विंटल (250-300 KG) एक्सपायरी नमकीन, चिप्स और कुरकुरे बरामद किए गए हैं।
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    अनुमानित कीमत: इस बरामद किए गए जहरीले माल की बाजार में कीमत 4 लाख रुपये से ज्यादा आंकी जा रही है।
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    कार्रवाई: टीम ने तुरंत प्रभाव से पूरे माल को अपने कब्जे में लेकर गोदाम को सील (Seal) कर दिया है। मौके से बरामद सभी खाद्य पदार्थों के सैंपल (नमूने) लेकर उन्हें जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला (State Laboratory) भेज दिया गया है।
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सहायक आयुक्त खाद्य विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि आरोपी कलीम को विभाग की ओर से सख्त नोटिस जारी कर दिया गया है। अगर वह तय समय सीमा के भीतर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है, तो उसके खिलाफ एडीएम कोर्ट (ADM Court) में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत गंभीर धाराओं में वाद दायर किया जाएगा। इसके अलावा, प्रशासन अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रहा है कि आखिर कलीम को यह भारी मात्रा में एक्सपायरी सामान कौन सा डिस्ट्रीब्यूटर या कंपनी सप्लाई कर रही थी। इस चेन से जुड़े सभी सफेदपोशों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।
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विशेषज्ञों की चेतावनी: एक्सपायरी चिप्स-नमकीन शरीर के लिए है 'धीमा जहर'

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कलीम जैसे लोग सिर्फ पैसे नहीं कमा रहे थे, बल्कि वे सीधे तौर पर लोगों, खासकर मासूम बच्चों की सेहत के साथ एक खौफनाक खिलवाड़ कर रहे थे। चिकित्सा विशेषज्ञों और डाइटीशियंस (Dietitians) का कहना है कि एक्सपायरी डेट पार कर चुके पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।
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    खराब तेल और फंगस: नमकीन और चिप्स को तलने में जिस तेल का इस्तेमाल होता है, वह एक्सपायरी के बाद 'रैन्सिड' (Rancid) यानी विषैला हो जाता है। इसमें हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं, जो आंखों से दिखाई नहीं देते।
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    गंभीर बीमारियां: ऐसे सड़े हुए स्नैक्स खाने से बच्चों और बड़ों में भयंकर फूड प्वाइजनिंग (Food Poisoning), उल्टी, लगातार दस्त, तेज पेट दर्द और बुखार जैसी गंभीर समस्याएं तुरंत हो सकती हैं।
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    लंबे समय के नुकसान: लंबे समय तक ऐसे तेल और रसायनों का सेवन करने से लिवर (Liver), किडनी और आंतों में अल्सर जैसी स्थायी और जानलेवा बीमारियां पनपने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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आक्रोशित जनता और प्रशासन का कड़ा संदेश

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इस खुलासे के बाद से जोया ब्लॉक और ढकिया चमन गांव के आसपास के इलाकों में भारी सनसनी और दहशत का माहौल है। जब स्थानीय लोगों को यह पता चला कि उनके बच्चों को पैसों के लालच में मौत का यह सामान परोसा जा रहा था, तो उनमें भारी आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे 'फूड माफियाओं' पर रासुका (NSA) जैसी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी इंसान की जिंदगी से खेलने की जुर्रत न कर सके।
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खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी स्पष्ट और कड़ा संदेश जारी किया है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। त्योहारी सीजन हो या आम दिन, जिले भर में ऐसी छापेमारी की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
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प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे जब भी बाजार से कोई भी खाने-पीने का सामान या पैकेट खरीदें, तो उसकी 'मैन्युफैक्चरिंग' और 'एक्सपायरी' डेट जरूर चेक करें। यदि पैकेट फूला हुआ न हो, कटा-फटा हो या उसमें से अजीब सी महक आ रही हो, तो उसे बिल्कुल न खरीदें और तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग के टोल-फ्री नंबर पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं। आपकी एक छोटी सी सावधानी आपके परिवार को बड़े खतरे से बचा सकती है।
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