मथुरा/वृंदवन: कान्हा की नगरी वृंदावन में शुक्रवार को एक बड़ा और हृदयविदारक हादसा हो गया। यहाँ केसी घाट के पास यमुना नदी में विहार कर रहे पर्यटकों से भरी एक निजी नाव अचानक पलट गई। इस दुखद हादसे में पंजाब से आए 10 पर्यटकों की डूबने से मौत हो गई है, जिनमें 7 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। हादसे की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सेना व एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।READ ALSO:-कुंभ वायरल गर्ल मामला: डायरेक्टर सनोज मिश्रा बोले- 'सत्य की जीत हुई', फरमान पर POCSO लगने के बाद 'लव जिहाद' और गहरी साजिश पर किए बड़े खुलासे
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यह हादसा उस समय हुआ जब पंजाब के 'बांके बिहारी क्लब' के सदस्य यमुना विहार का आनंद ले रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव खचाखच भरी हुई थी और तेज हवाओं के बीच वह अपना संतुलन खो बैठी। मृतकों में पति-पत्नी और पिता-बेटी जैसे रिश्ते भी शामिल हैं, जिससे इस त्रासदी ने कई परिवारों को पूरी तरह उजाड़ दिया है।
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ये हादसे से पहले का फुटेज है। किसी ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। राधे-राधे जप रहे थे।

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क्षमता 15 की, सवार थे 25 से ज्यादा: लापरवाही ने ली जान

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प्रशासनिक जांच में इस हादसे के पीछे नाविक की घोर लापरवाही सामने आई है।
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    ओवरलोडिंग: जिस नाव (स्टीमर) की क्षमता मात्र 15 लोगों की थी, नाविक पप्पू निषाद ने उस पर 25 से 27 लोगों को बैठा लिया था।
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    लाइफ जैकेट की अनुपस्थिति: नाव पर सवार किसी भी पर्यटक ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। आर्मी इंजीनियरिंग कोर के सूबेदार अखिलेश पांडेय ने बताया कि अगर लाइफ जैकेट होती, तो डूबते लोगों को बचने के लिए कम से कम एक घंटे का समय मिल जाता।
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    तेज हवा और टक्कर: हादसे के वक्त हवा की रफ्तार करीब 40 किमी/घंटा थी। पर्यटकों ने नाविक को पुल के पास नाव रोकने को कहा था, लेकिन वह नहीं माना। दो बार टकराने से बचने के बाद, तीसरी बार नाव खंभे से टकराई और नदी के बीचों-बीच जलमग्न हो गई।
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आंकड़ों में वृंदावन नाव त्रासदी

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विवरण
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महत्वपूर्ण जानकारी
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हादसे का समय/स्थान
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दोपहर 3:00 बजे, केसी घाट (वृंदावन)
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कुल मृतक
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10 (7 महिलाएं, 3 पुरुष)
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घायलों की संख्या
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12 (अस्पताल में भर्ती)
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लापता
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3 से 5 लोग (तलाश जारी)
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नदी की गहराई
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लगभग 30 फीट
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मुख्य आरोपी
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नाविक पप्पू निषाद (हिरासत में)
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चश्मदीदों का बयान: "2 बार टकराने से बची थी नाव"

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हादसे से जुड़े दो वीडियो भी सामने आए हैं। पहले वीडियो में श्रद्धालु श्रद्धाभाव के साथ 'राधे-राधे' का जाप करते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरा वीडियो उनकी चीख-पुकार और डूबने के मंजर का है। पर्यटकों के अनुसार, नाव जुगल घाट से चली थी। बीच नदी में हवा का दबाव बढ़ा तो नाव डगमगाने लगी। श्रद्धालुओं ने नाविक से बार-बार नाव रोकने की विनती की थी, लेकिन स्टीमर चालक ने उनकी बातों को अनसुना कर दिया।
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प्रशासन और रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति

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मथुरा के डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और डीआईजी शैलेश पांडेय ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों का जायजा लिया। हादसे के तुरंत बाद नाविक फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने 6 घंटे की सघन तलाशी के बाद हिरासत में ले लिया है।
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    सेना और NDRF: गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम और सेना की इंजीनियरिंग कोर मौके पर मौजूद है। गोताखोर लगातार नदी की 30 फीट की गहराई में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।
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    घायलों का उपचार: नदी से सुरक्षित निकाले गए 12 लोगों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। जिला प्रशासन ने पंजाब सरकार को भी हादसे की सूचना दे दी है।
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सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह

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वृंदावन का यह हादसा एक बार फिर जल परिवहन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल खड़े करता है। बिना लाइफ जैकेट और क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना यमुना की लहरों के बीच 'मौत को दावत' देने जैसा साबित हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।
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