भारत में साइबर अपराध के बढ़ते ग्राफ और विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट स्कैम की बढ़ती घटनाओं ने केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। गृह मंत्रालय के तहत संचालित 'इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर' (I4C) की एक ताजा और चौंकाने वाली रिपोर्ट के बाद, सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, व्हाट्सऐप (WhatsApp) को उन सभी डिवाइस की पहचान कर उन्हें स्थायी रूप से ब्लॉक करने का आदेश दिया है, जिनका इस्तेमाल ठग डिजिटल अरेस्ट स्कैम को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं।READ ALSO:-देश भर में गैस संकट के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय का 'मास्टरस्ट्रोक': कमर्शियल LPG सप्लाई में 20% का बंपर इजाफा, 23 मार्च से लागू होंगे ये 2 सख्त नियम
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यह कदम इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि अब तक केवल मोबाइल नंबर या व्हाट्सऐप अकाउंट ही ब्लॉक किए जाते थे, लेकिन अब पूरे स्मार्टफोन या गैजेट (डिवाइस ID) को ही ब्लॉक कर दिया जाएगा, जिससे अपराधी उसी फोन पर दोबारा कोई नया अकाउंट नहीं बना पाएंगे। (Internal link to related article: साइबर अपराध के खिलाफ भारत की नई डिजिटल रणनीति)
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डिजिटल अरेस्ट स्कैम: क्या है यह खौफनाक खेल?

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सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम आखिर है क्या। यह साइबर ठगी का एक ऐसा आधुनिक और मनोवैज्ञानिक रूप है, जिसमें ठग खुद को सीबीआई (CBI), दिल्ली पुलिस, नारकोटिक्स ब्यूरो या कस्टम विभाग का बड़ा अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को डराते हैं कि उनके नाम पर कोई अवैध पार्सल आया है या उनके आधार नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।
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अपराधी पीड़ित को "डिजिटल अरेस्ट" करने का झांसा देते हैं, जिसका मतलब है कि पीड़ित को अपने घर के अंदर कैमरे के सामने ही रहना होगा और वह किसी से बात नहीं कर सकता। डर के मारे लोग अपनी जमा पूंजी इन ठगों के खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। आंकड़ों के अनुसार, केवल जनवरी 2026 के पहले महीने में ही भारतीयों ने इस डिजिटल अरेस्ट स्कैम में लगभग ₹3,000 करोड़ गंवाए हैं।
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I4C और इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) का बड़ा फैसला

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इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय द्वारा गठित इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) की एक उच्च स्तरीय बैठक हाल ही में संपन्न हुई। इस बैठक में व्हाट्सऐप के प्रतिनिधियों को सख्त निर्देश दिए गए। बैठक में यह खुलासा हुआ कि ठग बार-बार नए नंबरों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
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I4C की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने तय किया है कि अब केवल नंबर बदलना अपराधियों के लिए काफी नहीं होगा। सरकार ने व्हाट्सऐप को आदेश दिया है कि वह संदिग्ध डिवाइस की IMEI (International Mobile Equipment Identity) और MAC एड्रेस जैसी यूनिक डिवाइस ID को अपनी प्रणाली में ब्लैकलिस्ट करे। 
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डिवाइस ID ब्लॉकिंग: कैसे काम करेगी यह तकनीक?

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हर स्मार्टफोन की अपनी एक डिजिटल पहचान होती है जिसे डिवाइस ID कहते हैं। यह आधार नंबर की तरह ही यूनिक होती है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
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    IMEI नंबर: सिम आधारित मोबाइल नेटवर्क पर फोन की पहचान के लिए।
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    MAC एड्रेस: वाई-फाई या अन्य इंटरनेट नेटवर्क पर डिवाइस की पहचान के लिए।
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    डिवाइस सीरियल नंबर: जो कंपनी द्वारा दिया जाता है।
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जब सरकार किसी डिवाइस ID को ब्लॉक करने का आदेश देती है, तो व्हाट्सऐप को अपनी बैकएंड टेक्नोलॉजी में उस विशेष हार्डवेयर को प्रतिबंधित करना होगा। इसका मतलब है कि अपराधी भले ही कितनी भी नई सिम खरीद ले, उस विशेष फोन पर व्हाट्सऐप कभी काम नहीं करेगा।
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व्हाट्सऐप में आएंगे स्काइप जैसे नए सेफ्टी फीचर्स

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सरकार ने व्हाट्सऐप को केवल ब्लॉक करने तक सीमित नहीं रहने को कहा है, बल्कि उसे अपनी कॉलिंग और मैसेजिंग सुरक्षा को माइक्रोसॉफ्ट के 'स्काइप' (Skype) जैसा बनाने का निर्देश दिया है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम को रोकने के लिए व्हाट्सऐप निम्नलिखित फीचर्स पर काम कर रहा है:
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    कॉलर की विस्तृत जानकारी: जब भी किसी अज्ञात नंबर से कॉल आएगी, तो व्हाट्सऐप संभवतः उस अकाउंट की 'सत्यता' और 'रिपोर्ट हिस्ट्री' को फ्लैश करेगा।
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    संदिग्ध अकाउंट चेतावनी: यदि कोई अकाउंट बहुत कम समय में कई लोगों को कॉल कर रहा है, तो रिसीवर को एक बोल्ड वॉर्निंग सिग्नल दिखाई देगा।
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    लोगो डिटेक्शन तकनीक: व्हाट्सऐप ने एक ऐसी AI तकनीक विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई है जो प्रोफाइल फोटो में पुलिस या सरकारी संस्थानों के लोगो की पहचान करेगी। यदि कोई फर्जी तरीके से इन लोगो का इस्तेमाल करेगा, तो उसका अकाउंट तुरंत डिलीट कर दिया जाएगा।
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सिम बाइंडिंग (SIM Binding) और आईटी रूल्स 2021 का अनुपालन

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सरकार ने व्हाट्सऐप को दूरसंचार विभाग (DoT) के 'सिम बाइंडिंग' निर्देश को लागू करने के लिए 4-6 महीने का समय दिया है। यह एक क्रांतिकारी कदम है। 'सिम बाइंडिंग' का मतलब है कि एक व्हाट्सऐप अकाउंट केवल उसी फोन में चलेगा जिसमें वह सिम सक्रिय (Active) है। यदि अपराधी सिम निकालता है या दूसरे डिवाइस में लॉगिन करने की कोशिश करता है, तो उसे कड़े सत्यापन से गुजरना होगा। इससे गुमनाम तरीके से या एक साथ कई डिवाइस पर एक ही अकाउंट चलाना नामुमकिन हो जाएगा।
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साथ ही, आईटी रूल्स 2021 के तहत अब व्हाट्सऐप को डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखना होगा। अक्सर अपराधी ठगी करने के बाद तुरंत अकाउंट डिलीट कर देते हैं जिससे सुबूत मिट जाते हैं। अब 180 दिन के बैकअप से जांच एजेंसियों को अपराधियों के पुराने रिकॉर्ड और कॉल हिस्ट्री निकालने में बड़ी मदद मिलेगी।
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खतरनाक APK फाइलों पर भी लगेगी रोक
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अक्सर डिजिटल अरेस्ट स्कैम के दौरान ठग पीड़ित को एक लिंक भेजते हैं और 'मैलिशियस APK' फाइल डाउनलोड करने को कहते हैं। यह ऐप असल में एक स्पाइवेयर (Spyware) होता है जो पीड़ित के फोन का पूरा कंट्रोल ठगों को दे देता है। केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप को ऐसी फाइलों की पहचान करने और उन्हें प्लेटफॉर्म पर साझा होने से रोकने के लिए अपनी तकनीक को मजबूत करने का आदेश दिया है।
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सुरक्षा टिप्स: खुद को डिजिटल अरेस्ट स्कैम से कैसे बचाएं?

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तकनीकी बदलाव अपनी जगह हैं, लेकिन जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि आपको भी व्हाट्सऐप पर किसी अनजान नंबर से वीडियो कॉल आती है, तो इन बातों का ध्यान रखें:
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    सच्चाई जानें: भारत में "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती।
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    आधिकारिक चैनलों से पुष्टि करें: यदि कोई खुद को पुलिस अधिकारी बताता है, तो कॉल काट दें और संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से नंबर लेकर सीधे कॉल करें।
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    निजी जानकारी साझा न करें: कभी भी अपना आधार नंबर, ओटीपी (OTP), या बैंक विवरण किसी अज्ञात व्यक्ति को न दें, भले ही वह खुद को कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न बताए।
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    धमकी से न डरें: साइबर ठग हमेशा आपको डराने और जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए मजबूर करते हैं। शांत रहें और अपने परिवार के सदस्यों को सूचित करें।
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कहां करें शिकायत?

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यदि आप या आपके आसपास कोई डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार होता है, तो तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएं:
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    भारत सरकार की साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें।
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    पोर्टल cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
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    ट्रांजैक्शन होने के 2 घंटे के भीतर बैंक को सूचित करें ताकि पैसे फ्रीज किए जा सकें।
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व्हाट्सऐप पर होने वाला डिजिटल अरेस्ट स्कैम आज एक राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। केंद्र सरकार की नई रणनीति—डिवाइस ID को ब्लॉक करना, सिम बाइंडिंग लागू करना और डेटा रिटेंशन को 180 दिन करना—निश्चित रूप से अपराधियों की कमर तोड़ेगी। हालांकि, तकनीकी कंपनियों और सरकार के प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों की सजगता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म को अब अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इन सुरक्षा मानकों को समय सीमा के भीतर लागू करना होगा ताकि भारत का डिजिटल भविष्य सुरक्षित रह सके।
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सारांश: 21 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम को रोकने के लिए व्हाट्सऐप को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब केवल सिम कार्ड ही नहीं, बल्कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले पूरे स्मार्टफोन (डिवाइस ID) को ब्लॉक किया जाएगा। साथ ही, व्हाट्सऐप को 180 दिनों तक डिलीटेड डेटा सुरक्षित रखने और स्काइप जैसे सुरक्षा फीचर्स लाने का आदेश दिया गया है। गृह मंत्रालय और I4C की यह पहल भारत में साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।
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