मुज़फ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मुज़फ्फरनगर जिला, जो अपनी ऐतिहासिक महत्ता और कृषि प्रधान संस्कृति के लिए जाना जाता है, रविवार को सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की एक अद्भुत मिसाल का गवाह बना। वर्तमान समय में जब समाज में कई बार अफवाहों और गलतफहमियों के कारण दूरियां पैदा हो जाती हैं, तब मुज़फ्फरनगर से उठी यह भाईचारे की आवाज पूरे देश के लिए एक नजीर बन गई है।READ ALSO:-राम नाम की बहेगी रसधार: मुजफ्फरनगर में 21 से 27 जुलाई तक भव्य 'श्रीराम कथा' और 'गुरु पूर्णिमा महोत्सव', तैयारियों ने पकड़ा जोर
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रविवार दोपहर करीब 2 बजे से अपराह्न 4 बजे तक शहर में जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-e-Hind) के तत्वावधान में पांचवें 'सद्भावना सम्मेलन' का भव्य आयोजन किया गया। इस महासम्मेलन में न केवल विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं ने मंच साझा किया, बल्कि सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी वर्ग और भारी संख्या में आम नागरिक भी इस मुहिम का हिस्सा बने। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी विश्वास को बहाल करना और भारत की समृद्ध गंगा-जमुनी तहज़ीब को और अधिक मजबूत करना था।
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नफरत की आंधी में मुहब्बत का चिराग
\r\n\r\nसम्मेलन की शुरुआत से ही पूरा प्रांगण देशभक्ति और आपसी भाईचारे के नारों से गूंजता रहा। कार्यक्रम में मौजूद हर वर्ग के व्यक्ति की जुबान पर एक ही नारा था- "हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई... आपस में हैं सब भाई-भाई।"
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विभिन्न वक्ताओं ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत का संविधान हमें एकता के सूत्र में पिरोता है और कोई भी समाज या राष्ट्र तभी तरक्की कर सकता है जब वहां के नागरिकों के बीच प्रेम और विश्वास कायम हो। धर्मगुरुओं ने एक सुर में कहा कि धर्म कभी भी आपस में बैर रखना नहीं सिखाता, बल्कि यह इंसान को इंसान से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
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मौलाना अरशद मदनी का राष्ट्रीय विजन: 1000 सम्मेलनों का लक्ष्य
\r\n\r\nइस भव्य आयोजन की पृष्ठभूमि और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम के मुख्य आयोजक एवं जमीयत उलेमा-ए-हिंद, मुज़फ्फरनगर के सदर कारी जाकिर हुसैन ने कई अहम जानकारियां साझा कीं।
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\r\n\r\n\r\n"जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना अरशद मदनी साहब ने देश में बढ़ती सामाजिक दूरियों को मिटाने के लिए एक ऐतिहासिक आह्वान किया है। उनके निर्देशानुसार पूरे देश में ऐसे एक हजार से अधिक सद्भावना सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। मुज़फ्फरनगर का यह सम्मेलन उसी राष्ट्रव्यापी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।" - कारी जाकिर हुसैन\r\n
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कारी जाकिर हुसैन ने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के इस डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं, जो समाज में नफरत का बीज बोती हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी (Fake News) या अफवाहों का शिकार न बनें। नागरिकों को स्वयं आगे आकर प्रेम, भाईचारे और आपसी विश्वास का वातावरण बनाने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
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सद्भावना सम्मेलन के मुख्य आकर्षण (एक नजर में):
\r\n\r\n| \r\n मुख्य बिंदु \r\n | \r\n \r\n विवरण \r\n | \r\n
| \r\n आयोजक \r\n | \r\n \r\n जमीयत उलेमा-ए-हिंद, मुज़फ्फरनगर इकाई \r\n | \r\n
| \r\n मुख्य संदेश \r\n | \r\n \r\n राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सौहार्द, अफवाहों से बचाव \r\n | \r\n
| \r\n नया अभियान \r\n | \r\n \r\n सामाजिक एकता के साथ 'पर्यावरण संरक्षण' और वृक्षारोपण \r\n | \r\n
| \r\n आगामी रणनीति \r\n | \r\n \r\n गांव-गांव और शहर-शहर में 'सद्भावना मंच समितियों' का गठन \r\n | \r\n
| \r\n विशेष अपील \r\n | \r\n \r\n आगामी कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाना \r\n | \r\n
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पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा सामाजिक सौहार्द का अभियान
\r\n\r\nइस सद्भावना सम्मेलन की एक और सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें केवल इंसानों के बीच के रिश्तों की बात नहीं की गई, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच के रिश्ते को भी अहमियत दी गई। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपने इस सद्भावना अभियान को 'पर्यावरण संरक्षण' (Environment Protection) से भी जोड़ दिया है।
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सम्मेलन के दौरान घोषणा की गई कि सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने के साथ-साथ एक व्यापक वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि जिस तरह एक पेड़ सभी को बिना किसी भेदभाव के ठंडी छांव और ऑक्सीजन देता है, उसी तरह समाज को भी हर वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए। पेड़ लगाने से न केवल प्रकृति बचेगी, बल्कि जब विभिन्न समुदायों के लोग मिलकर पौधे लगाएंगे तो उनके बीच की दूरियां भी कम होंगी।
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हर गांव, हर वार्ड में बनेंगे 'सद्भावना मंच'
\r\n\r\nभविष्य की रणनीतियों पर बात करते हुए कारी जाकिर हुसैन ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
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आने वाले समय में देश के प्रत्येक राज्य, हर छोटे-बड़े शहर, कस्बे और गांव-गांव में 'सद्भावना मंच समितियों' (Sadbhavana Manch Committees) का गठन किया जाएगा।
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- \r\n क्या होगा इन समितियों का स्वरूप? इन कमेटियों में किसी एक धर्म या जाति के लोग नहीं होंगे, बल्कि इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और समाज के हर वर्ग के जिम्मेदार और बुद्धिजीवी लोगों को शामिल किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n क्या होगा उद्देश्य? इन समितियों का मुख्य कार्य स्थानीय स्तर पर संवाद (Communication) स्थापित करना होगा। यदि किसी इलाके में कोई छोटी-मोटी गलतफहमी या विवाद पनपता है, तो यह समिति मध्यस्थता कर उसे वहीं सुलझा देगी, ताकि कोई भी असामाजिक तत्व उसका फायदा न उठा सके।\r\n \r\n
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कांवड़ यात्रा को लेकर हुई विशेष अपील: "अतिथि देवो भव:"
\r\n\r\nपश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेषकर मुज़फ्फरनगर जिले के लिए सावन माह में होने वाली 'कांवड़ यात्रा' (Kanwar Yatra) एक बहुत बड़ा धार्मिक आयोजन होता है। लाखों की संख्या में शिवभक्त (कांवड़िए) हरिद्वार से गंगाजल लेकर इस रूट से गुजरते हैं। सद्भावना सम्मेलन में इस आगामी कांवड़ यात्रा का भी प्रमुखता से उल्लेख किया गया।
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मंच पर मौजूद सभी धर्मों के वक्ताओं ने कांवड़ यात्रा के शांतिपूर्ण और सुरक्षित संपन्न होने की कामना की। उन्होंने कहा कि मुज़फ्फरनगर का हमेशा से यह इतिहास रहा है कि यहां सभी धर्मों के लोग मिलकर एक-दूसरे के त्योहारों का सम्मान करते हैं।
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- \r\n नागरिकों से अपील: वक्ताओं ने स्थानीय नागरिकों से अपील की कि वे श्रद्धालुओं (कांवड़ियों) के स्वागत में कोई कमी न छोड़ें और प्रशासन का पूरा सहयोग करें।\r\n \r\n
- \r\n अफवाहों से रहें सावधान: यात्रा के दौरान कई बार शरारती तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की अफवाह पर बिल्कुल ध्यान न दें। यदि कोई संदिग्ध बात सामने आती है, तो तत्काल पुलिस-प्रशासन को सूचित करें।\r\n \r\n
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एक मजबूत और एकजुट भारत की ओर कदम
\r\n\r\nमुज़फ्फरनगर में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद का यह 5वां सद्भावना सम्मेलन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत की आत्मा उसकी विविधता (Diversity) में बसती है। जब विभिन्न धर्मों के नुमाइंदे एक मंच पर आकर प्यार और अमन की बात करते हैं, तो वे नफरत फैलाने वाली ताकतों को कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हैं। कांवड़ यात्रा से ठीक पहले इस तरह के आयोजन का होना मुज़फ्फरनगर प्रशासन और आम जनता के लिए भी एक बड़ी राहत है, जो यह सुनिश्चित करता है कि आस्था का यह महापर्व पूरी तरह से शांति, सुरक्षा और भाईचारे के माहौल में संपन्न होगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.