मुज़फ़्फ़रनगर (Khabreelal News Desk): उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस को एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत, मुज़फ़्फ़रनगर के बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र में शुक्रवार की सुबह पुलिस और एक बेहद खतरनाक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के बीच आमना-सामना हो गया। दोनों तरफ से हुई इस भीषण मुठभेड़ के बाद पुलिस ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए गिरोह के चार खूंखार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरोह के तार केवल उत्तर प्रदेश या भारत के अन्य राज्यों तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि जांच में सामने आया है कि ये शातिर अपराधी चोरी की गई गाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार म्यांमार (बर्मा) तक सप्लाई करने वाले सिंडिकेट का अहम हिस्सा हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे पुलिस महकमे और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।READ ALSO:-यूपी में आफत की बारिश: पहाड़ों के पानी से उफनाईं नदियां, 87 गांवों पर मंडराया बाढ़ का भयंकर खतरा; 7 दिन भारी बारिश का अलर्ट
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विज्ञाना रोड पर कैसे हुई मुठभेड़? (ग्राउंड रिपोर्ट)

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घटना शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे की है। बुढ़ाना कोतवाली पुलिस को अपने विश्वस्त मुखबिरों से यह गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ शातिर अपराधी चोरी के वाहनों के साथ क्षेत्र से गुजरने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तुरंत विज्ञाना रोड पर सघन चेकिंग अभियान शुरू कर दिया। बैरिकेडिंग लगाकर हर आने-जाने वाले संदिग्ध वाहन की तलाशी ली जा रही थी।
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इसी दौरान, पुलिस को कुछ संदिग्ध वाहन तेजी से आते हुए दिखाई दिए। जब पुलिस टीम ने उन्हें रुकने का इशारा किया, तो बदमाशों ने गाड़ी रोकने के बजाय पुलिस टीम पर सीधे जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी और बैरिकेड्स तोड़कर भागने का प्रयास किया। पुलिस ने भी आत्मरक्षा और बदमाशों की घेराबंदी करते हुए तुरंत जवाबी फायरिंग की। इस क्रॉस फायरिंग के दौरान गिरोह का एक मुख्य सदस्य राजू उर्फ योगेश पुलिस की गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया और वह वहीं गिर पड़ा।
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खेतों में घंटों चला कॉम्बिंग अभियान

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राजू के घायल होकर गिरने के बाद, उसके अन्य तीन साथी गाड़ियों से कूदकर सड़क के किनारे स्थित जंगलों और खेतों की तरफ भागने लगे। लेकिन बुढ़ाना पुलिस ने भी हार नहीं मानी। भारी पुलिस बल के साथ पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया और खेतों में एक सघन 'कॉम्बिंग ऑपरेशन' (तलाशी अभियान) चलाया गया। घंटों की कड़ी मशक्कत और घेराबंदी के बाद पुलिस ने खेतों में छिपे बैठे तीन अन्य शातिर बदमाशों को दबोच लिया। पकड़े गए इन तीनों आरोपियों की पहचान अनिल, प्रदीप और आसिफ कमाल के रूप में हुई है। घायल बदमाश राजू को तुरंत पुलिस अभिरक्षा में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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पुलिस से बचने का 'हाई-टेक' और शातिर तरीका: 'PRESS' का दुरुपयोग

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जब पुलिस ने गिरफ्तार किए गए इन बदमाशों से प्रारंभिक पूछताछ की और बरामद वाहनों की जांच की, तो उनके काम करने के तरीके (Modus Operandi) को जानकर अधिकारी भी हैरान रह गए। यह गिरोह बेहद सुनियोजित और हाई-टेक तरीके से काम करता था। ये लोग मास्टर की (Master Key) और विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करके चंद मिनटों में महंगी से महंगी गाड़ियों का लॉक तोड़कर उन्हें चुरा लेते थे।
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सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि चोरी की गई इन लग्जरी और महंगी गाड़ियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में सुरक्षित ले जाने के लिए ये अपराधी मीडिया के नाम का सहारा लेते थे। ये लोग चोरी की गई गाड़ियों के शीशे और नंबर प्लेट के ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में 'PRESS' (प्रेस) लिखवा देते थे या स्टीकर चिपका देते थे। उनका मानना था कि प्रेस लिखी हुई गाड़ी देखकर रास्ते में पड़ने वाले टोल प्लाजा और पुलिस नाकों पर तैनात जवान उनसे पूछताछ नहीं करेंगे और न ही उनकी गाड़ी की सघन चेकिंग होगी। इसी चालाकी का फायदा उठाकर ये गिरोह लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमाएं आसानी से पार कर रहा था। यह न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) की छवि को भी धूमिल करने की एक घिनौनी साजिश है।
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म्यांमार (बर्मा) तक फैला है तस्करी का काला नेटवर्क

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पुलिस की अब तक की जांच में जो सबसे बड़ा और खतरनाक खुलासा हुआ है, वह है इस गिरोह का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि यह कोई साधारण चोर गिरोह नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़े इंटरनेशनल सिंडिकेट की एक अहम कड़ी है।
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पूछताछ में पता चला है कि ये लोग उत्तर प्रदेश (NCR क्षेत्र), दिल्ली, हरियाणा और आसपास के इलाकों से लग्जरी गाड़ियां चुराते थे। इसके बाद इन गाड़ियों पर जाली नंबर प्लेट और 'प्रेस' के स्टीकर लगाकर इन्हें बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के सुरक्षित रास्तों से होते हुए पूर्वोत्तर भारत (North East India) तक पहुंचाया जाता था। पूर्वोत्तर राज्यों के तस्करों के साथ साठगांठ करके, इन चोरी की गाड़ियों को अंततः अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराकर म्यांमार (बर्मा) और अन्य पड़ोसी देशों में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस बड़े सिंडिकेट के असली सरगना (Kingpin) कौन हैं और उनके म्यांमार तक के कनेक्शन में कौन-कौन से सफेदपोश लोग शामिल हैं।
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खूंखार आपराधिक इतिहास: 48 मुकदमों का बोझ

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बुढ़ाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए ये चारों आरोपी राजू उर्फ योगेश, अनिल, प्रदीप और आसिफ कमाल पेशेवर और बेहद खूंखार अपराधी हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन आरोपियों पर केवल चोरी के ही नहीं, बल्कि हत्या के प्रयास (Attempt to Murder), लूटपाट, आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार रखने) और गैंगस्टर एक्ट (Gangster Act) जैसी गंभीर धाराओं के तहत लगभग चार दर्जन (करीब 48) आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनका आपराधिक साम्राज्य उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और देश के अन्य कई राज्यों में फैला हुआ है। कई राज्यों की पुलिस लंबे समय से इन शातिर अपराधियों की सरगर्मी से तलाश कर रही थी।
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क्या-क्या हुआ बरामद? मुठभेड़ स्थल और बदमाशों की निशानदेही पर पुलिस ने एक बड़ा जखीरा बरामद किया है। मौके से कुल चार (4) चोरी की गाड़ियां बरामद की गई हैं, जिन्हें आगे सप्लाई करने की तैयारी थी। इसके अलावा बदमाशों के पास से पुलिस पर फायरिंग में इस्तेमाल किया गया एक अवैध तमंचा, कई जिंदा और खोखा कारतूस, तथा लग्जरी वाहनों का लॉक तोड़ने और चोरी करने में इस्तेमाल होने वाले कई विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और औजार भी बरामद किए गए हैं।
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पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई

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इस बड़ी सफलता के बाद पुलिस महकमे में उत्साह का माहौल है। क्षेत्राधिकारी (CO) बुढ़ाना, श्री गजेंद्र पाल सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मीडिया को दी। सीओ गजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि, "हमारी पुलिस टीम ने अदम्य साहस दिखाते हुए एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के आपराधिक नेटवर्क, उनके फंडिंग सोर्स और बरामद वाहनों के असली मालिकों के संबंध में गहन और विस्तृत जांच की जा रही है। विशेष रूप से म्यांमार तक वाहनों की तस्करी वाले एंगल पर खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।"
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पुलिस अब इन पकड़े गए बदमाशों को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि इनके अन्य फरार साथियों और गिरोह के आकाओं के ठिकानों का पता लगाकर उन्हें भी सलाखों के पीछे धकेला जा सके। फिलहाल, सभी चारों आरोपियों के विरुद्ध सुसंगत और गंभीर धाराओं में विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि उत्तर प्रदेश में अब अपराध और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं बची है।
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