मुजफ्फरनगर में 'ऑपरेशन सवेरा' की बड़ी कामयाबी: 10 लाख के गांजे के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए महिला को ढाल बनाते थे तस्कर
मुजफ्फरनगर पुलिस ने 'ऑपरेशन सवेरा' के तहत 50 किलो गांजे के साथ महिला समेत चार तस्करों को गिरफ्तार किया है। बरामद गांजे की कीमत 10 लाख रुपये आंकी गई है।
Published at : 13 Jul 2026, 11:44 AM
Updated at : 11 Sep 2026, 04:39 AM
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Muzaffarnagar Police Arrest Four Ganja Smugglers With 50 Kg Contraband
सोमवार दोपहर को पुलिस कार्यालय में एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस टीम द्वारा की गई इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मीडिया के सामने साझा की।
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उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर पुलिस के थाना सिविल लाइन और एसओजी की संयुक्त टीम बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास नियमित वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी चेकिंग के दौरान पुलिस टीम को एक संदिग्ध वाहन दिखाई दिया।
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“ऑपरेशन सवेरा ☀️ नशे के अंधकार से जीवन के उजाले की ओर” \r\n \r\n✔️ थाना सिविल लाइन पुलिस व एसओजी की संयुक्त टीम द्वारा अवैध मादक पदार्थ की तस्करी कर रहे 03 अभियुक्त व 01 अभियुक्ता को किया गिरफ्तार। \r\n \r\n✔️ गिरफ्तार अभियुक्तगण के कब्जे से 50 किलोग्राम गांजा(अनुमानित कीमत करीब 10 लाख… pic.twitter.com/30ifW7hSWn
पुलिस कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध आई-10 (i-10) कार को रुकने का इशारा किया। जब पुलिस ने कार को रोककर उसकी गहनता से तलाशी ली, तो उसमें छिपाकर रखा गया 50 किलो अवैध गांजा बरामद हुआ। इसके बाद मौके से ही चारों आरोपियों को दबोच लिया गया।
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तीन अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं आरोपी
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पकड़े गए तस्करों से जब पुलिस टीम ने सख्ती से पूछताछ की, तो इस पूरे नेटवर्क को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। गिरफ्तार किए गए आरोपी उत्तर प्रदेश के नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ राज्यों के मूल निवासी हैं।
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पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि ये सभी आरोपी इस नेटवर्क में केवल कैरियर (वाहक) के रूप में काम करते थे। इनका मुख्य काम नशीले पदार्थों की इस बड़ी खेप को सुरक्षित तरीके से तय स्थान तक पहुंचाना मात्र था।
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पुलिस के अनुसार, इस 50 किलो गांजे की खेप को गाजियाबाद के दो कथित तस्करों तक सुरक्षित पहुंचाया जाना था। मुजफ्फरनगर पुलिस अब उन मुख्य रिसीवर की पहचान और उनका पूरा विवरण जुटाने में लगी हुई है।
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इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के काम करने का तरीका बेहद शातिर और योजनाबद्ध था। एसएसपी ने बताया कि यह गिरोह रास्तों में पुलिस की पैनी नजरों और सघन चेकिंग से बचने के लिए हमेशा अपने साथ एक महिला को गाड़ी में बिठाकर रखता था।
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अपराधियों का यह स्पष्ट मानना था कि अगर कार में कोई महिला बैठी हो, तो पुलिस वाहन को ज्यादा शक की निगाह से नहीं देखती। ऐसे में परिवार समझकर सघन तलाशी की संभावना काफी कम हो जाती है, जिसका फायदा उठाकर ये आसानी से बॉर्डर पार कर लेते थे।
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इस जोखिम भरे काम के लिए बाकायदा पैसे तय किए गए थे। पूछताछ में सामने आया कि पुरुष कैरियरों को गांजे की प्रति खेप गंतव्य तक पहुंचाने के लिए 10-10 हजार रुपये मिलते थे। वहीं, इस काम में साथ देने वाली महिला आरोपी को हर खेप के बदले 6 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था।
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आपराधिक इतिहास वाले हैं पकड़े गए तीन आरोपी
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मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के सदस्य पेशेवर अपराधी हैं। गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों में से तीन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस के हाथ लगा है।
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जांच में पता चला है कि ये तीनों आरोपी पहले भी एनडीपीएस (NDPS) एक्ट और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में जेल की सजा काट चुके हैं। पुलिस अब इनके विस्तृत आपराधिक इतिहास का गहनता से सत्यापन कर रही है।
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इनके मूल राज्यों और अन्य जिलों के थानों से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि इनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों की सही जानकारी जुटाई जा सके और अदालत में इनके खिलाफ एक मजबूत और पुख्ता चार्जशीट पेश की जा सके।
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गाजियाबाद के मास्टरमाइंड की तलाश हुई तेज
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एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई केवल इन कैरियरों की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं रहेगी। अब इस पूरे तस्करी नेटवर्क के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज (Forward and backward links) को पूरी तरह से खंगाला जा रहा है।
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गाजियाबाद के जिन दो कथित मास्टरमाइंड को यह गांजे की खेप सप्लाई होनी थी, उनकी तत्काल गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है। जल्द ही पुलिस इन फरार मास्टरमाइंड के संभावित ठिकानों पर दबिश देने की तैयारी कर रही है।
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'ऑपरेशन सवेरा' के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस की यह सफल कार्रवाई नशे के कारोबारियों और तस्करों के लिए एक कड़ा संदेश है। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जनपद में नशे के अवैध व्यापार से जुड़े हर छोटे-बड़े सिंडिकेट को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जाएगा और समाज को नशामुक्त बनाने का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.