उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला एक ऐसा खौफनाक अपराध सामने आया है, जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया है। मांडी गांव स्थित एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में 12 बेबस मजदूरों को बंधक बनाकर पिछले डेढ़ साल तक अमानवीय यातनाएं देने का मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामला अब तूल पकड़ चुका है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि आधुनिक समाज में दासता का एक घिनौना चेहरा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इसका स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूरी घटना पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसके बाद से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में खौफ! रील बनाने के लिए 'BAT-BMS App' से बीच सड़क पर बंद कर रहे चलती ई-रिक्शा, बाल-बाल बच रहे यात्री
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस दर्दनाक मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामला में जिस तरह से गरीब और लाचार मजदूरों को शिकार बनाया गया, वह पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आइए, इस पूरी घटना के हर पहलू, पुलिस की कार्रवाई और एनएचआरसी (NHRC) के सख्त रुख को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामला: NHRC का यूपी सरकार पर सख्त एक्शन

\r\n\r\n
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना की मीडिया रिपोर्ट्स का कड़ा संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को एक सख्त नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि मीडिया में प्रकाशित तथ्य और आरोप सही हैं, तो यह मानवाधिकारों (Human Rights) का अत्यंत गंभीर उल्लंघन है। एनएचआरसी ने प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल और पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण को नोटिस भेजकर दो सप्ताह (14 दिन) के भीतर इस पूरे मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामला की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
\r\n\r\n
आयोग ने मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी (DM) को भी सख्त हिदायत दी है कि वे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम-1976 के कड़े प्रावधानों के तहत इस पूरे रैकेट की गहन जांच कराएं। मानवाधिकार आयोग का यह कदम सुनिश्चित करता है कि इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले फैक्ट्री मालिक और उनके गुर्गे किसी भी कीमत पर कानून के शिकंजे से बच न सकें।
\r\n\r\n

\r\n\r\n

नौकरी का सुनहरा झांसा और खौफनाक यातनाओं का दौर

\r\n\r\n
यह मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामला एक सोची-समझी साजिश का नतीजा है। मांडी गांव की इस दोना-पत्तल (पेपर प्लेट) फैक्ट्री में काम करने वाले ये मजदूर कोई स्थानीय निवासी नहीं थे। एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों और यहां तक कि पड़ोसी देश नेपाल के गरीब व बेरोजगार लोगों को अच्छी नौकरी और बेहतर वेतन का झांसा देकर यहां लाया गया था।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसे ही ये मजदूर इस फैक्ट्री में पहुंचते थे, उनके मोबाइल फोन, आधार कार्ड और अन्य सभी पहचान पत्र जबरन छीन लिए जाते थे। इसके बाद शुरू होता था प्रताड़ना का कभी न खत्म होने वाला खौफनाक सिलसिला। इन बेबस मजदूरों को न तो भरपेट भोजन दिया जाता था और न ही उनके काम की कोई मजदूरी तय थी। उनसे देर रात तक जबरन मशीनों पर काम कराया जाता था। जब कोई मजदूर इस अमानवीय व्यवहार का विरोध करता या अपने घर वापस जाने की गुहार लगाता, तो उसके साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया जाता और बेरहमी से मारपीट की जाती थी।
\r\n\r\n

\r\n\r\n

खूंखार पिटबुल कुत्तों से होती थी रखवाली

\r\n\r\n
इस मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामला का सबसे रोंगटे खड़े कर देने वाला पहलू यह है कि फैक्ट्री मालिक ने मजदूरों को भागने से रोकने के लिए खूंखार पिटबुल (Pitbull) कुत्तों को पाल रखा था। अगर कोई मजदूर रात के अंधेरे में या मौका पाकर भागने की कोशिश करता, तो उस पर इन हिंसक कुत्तों को छोड़ दिया जाता था। इस डर और खौफ के साये में इन 12 मजदूरों ने अपनी जिंदगी के डेढ़ साल नर्क से भी बदतर हालात में गुजारे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कैसे हुआ इस खौफनाक रैकेट का पर्दाफाश?

\r\n\r\n
इतने लंबे समय तक चल रहे इस खौफनाक खेल का अंत तब हुआ जब एक साहसी मजदूर अपनी जान की परवाह किए बिना किसी तरह उस यातना गृह (फैक्ट्री) से भागने में सफल हो गया। बदहवास और डरा हुआ यह मजदूर सीधा तितावी पुलिस थाने पहुंचा। उसने पुलिस को फैक्ट्री के अंदर चल रहे उस काले सच की पूरी दास्तान सुनाई, जिसे सुनकर पुलिस के भी होश उड़ गए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मजदूर की शिकायत के तुरंत बाद तितावी पुलिस ने भारी फोर्स के साथ मांडी गांव की उस दोना-पत्तल फैक्ट्री पर अचानक छापेमारी (Raid) की। पुलिस की रेड के दौरान फैक्ट्री के अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी सन्न रह गए। पुलिस ने मौके से बाकी बंधक बनाए गए 11 मजदूरों को सुरक्षित मुक्त कराया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन ने मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामला की भयावहता को पूरी दुनिया के सामने ला दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मेडिकल रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे और मौत की जांच

\r\n\r\n
मुक्त कराए गए सभी मजदूरों को तुरंत स्थानीय अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए भेजा गया। उनकी मेडिकल रिपोर्ट ने इस मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामला में और भी गंभीर खुलासे किए हैं। जांच में कई मजदूरों के शरीर पर मारपीट की वजह से आई गंभीर चोटें, पुराने गहरे घाव और यहां तक कि हड्डियां टूटने (Fractures) के निशान भी मिले हैं। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि उन्हें किस कदर शारीरिक यातनाएं दी जाती थीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुलिस की शुरुआती रिपोर्ट और मजदूरों के बयानों में एक साथी मजदूर की मौत का भी उल्लेख किया गया है, जिसकी कथित तौर पर इन्हीं यातनाओं के चलते जान चली गई। मुजफ्फरनगर पुलिस अब इस मौत के साथ-साथ अन्य संभावित मौतों के एंगल से भी मामले की गहराई से जांच कर रही है। यदि हत्या की पुष्टि होती है, तो आरोपियों पर और भी गंभीर धाराएं लगाई जाएंगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण और पुनर्वास के निर्देश

\r\n\r\n
एनएचआरसी ने न केवल रिपोर्ट मांगी है, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास (Rehabilitation) पर भी जोर दिया है। आयोग ने 8 दिसंबर 2021 को जारी अपनी एडवाइजरी का हवाला देते हुए स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया है कि मुक्त कराए गए सभी 12 श्रमिकों का तत्काल प्रभाव से 'ई-श्रम पोर्टल' (e-Shram Portal) पर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा, उन्हें बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के तहत मिलने वाली सभी सरकारी आर्थिक सहायता और कानूनी मदद तुरंत मुहैया कराई जाए ताकि वे अपने-अपने राज्यों में सुरक्षित लौटकर एक नया जीवन शुरू कर सकें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मांडी गांव की दोना-पत्तल फैक्ट्री में सामने आया मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामला आधुनिक भारत में मानवाधिकारों के हनन की एक शर्मनाक तस्वीर पेश करता है। 12 मजदूरों को झूठे वादों के जाल में फंसाकर डेढ़ साल तक बंधक बनाए रखना, उनसे बिना वेतन जबरन काम लेना और पिटबुल कुत्तों से डराना एक घृणित अपराध है। अब जब एनएचआरसी ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार, मुख्य सचिव और डीजीपी से जवाब तलब किया है, तो उम्मीद जगी है कि पीड़ितों को जल्द न्याय मिलेगा। इस मामले की निगरानी अब राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है, जिससे यह तय है कि दोषियों को उनके किए की कड़ी सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी अमानवीय घटनाओं पर लगाम कसी जा सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें