मुजफ्फरनगर के तितावी थाना क्षेत्र से हाल ही में एक बड़ी खबर सामने आई थी। यहां एक दोना-पत्तल फैक्ट्री से 12 मजदूरों को छुड़ाया गया था। इसी मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामले में अब एक भावुक कर देने वाला पल देखने को मिला है।READ ALSO:-मेरठ में ट्रैफिक नियमों को लेकर हाहाकार: 5 से ज्यादा ई-चालान पेंडिंग हैं? तो हमेशा के लिए रद्द हो सकता है आपका DL और RC!
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रेस्क्यू किया गया 13 साल का एक नाबालिग किशोर करीब डेढ़ साल बाद अपने परिवार से मिल गया है। पिता और पुत्र का यह मिलन देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। आइए जानते हैं कैसे इस बच्चे को उसका परिवार वापस मिला।
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1. मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामले का पूरा बैकग्राउंड

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बीते 22 जून को मुजफ्फरनगर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने एक संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाया था। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में यह छापेमारी की गई थी। इस दौरान 12 मजदूरों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया गया था।
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इन्हीं मजदूरों के साथ 13 साल का एक बच्चा भी बरामद हुआ था। पुलिस ने इस मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामले को पूरी गंभीरता से लिया और तुरंत बाल कल्याण समिति (CWC) को सूचित किया। शुरुआत में बच्चे के परिवार का कोई पता नहीं चल सका था।
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2. बाल कल्याण समिति (CWC) ने कैसे की मदद?

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बाल कल्याण समिति (CWC) की अध्यक्ष रीना पंवार ने इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू के तुरंत बाद परिजनों का सुराग न मिलने पर किशोर को सुरक्षित रखने के लिए मेरठ के संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया था।
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इसके बाद पुलिस और प्रशासन की टीम लगातार बच्चे के परिवार की तलाश में जुटी रही। अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और दिल्ली के नरेला इलाके में बच्चे के परिवार का सही पता चल गया। इसके बाद परिवार को तुरंत मुजफ्फरनगर बुलाया गया।
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महावीर चौक स्थित दफ्तर में हुआ मिलन

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रविवार को मुजफ्फरनगर के महावीर चौक स्थित CWC के दफ्तर में बच्चे और उसके पिता मोहम्मद असलम की मुलाकात कराई गई। प्रशासन की सक्रियता और सही दिशा में की गई जांच से एक भटके हुए बच्चे को उसका परिवार वापस मिल सका।
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3. 1.5 साल से लापता था नरेला का यह किशोर

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बरामद हुआ किशोर मूल रूप से दिल्ली के नरेला क्षेत्र का रहने वाला है। पीड़ित पिता असलम ने अधिकारियों को बताया कि करीब डेढ़ साल पहले उनका बेटा अपने चाचा की दुकान पर गया था। वहीं से वह अचानक लापता हो गया था।
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परिवार ने उसे हर जगह तलाशा। रिश्तेदारों से पूछताछ की और पुलिस में भी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। जब काफी समय तक कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार लगभग अपनी उम्मीद खो चुका था। लेकिन, इस मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर रेस्क्यू ऑपरेशन ने उनकी जिंदगी में फिर से खुशियां ला दीं।
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4. पिता को देखकर फूट-फूटकर रोया बच्चा

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जैसे ही 13 वर्षीय किशोर ने अपने पिता असलम को सामने देखा, वह खुद पर काबू नहीं रख सका। वह दौड़कर अपने पिता से लिपट गया और फूट-फूटकर रोने लगा। डेढ़ साल बाद बेटे को जिंदा और सुरक्षित देखकर पिता के भी खुशी के आंसू छलक पड़े।
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परिवार का हर सदस्य इस दौरान काफी भावुक नजर आया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और बाल कल्याण समिति के अधिकारियों की आंखें भी इस दृश्य को देखकर नम हो गईं। यह मिलन बेहद हृदयस्पर्शी और सुकून देने वाला था।
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5. फैक्ट्री में होता था अमानवीय व्यवहार और मारपीट

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मुलाकात के दौरान किशोर ने अपने साथ हुए जुल्म की दर्दनाक कहानी सुनाई। रोते हुए उसने बताया कि उसे करीब डेढ़ साल तक फैक्ट्री में बंधक बनाकर रखा गया था। बाल श्रम कानूनों को ताक पर रखकर उससे जबरन कई घंटों तक काम कराया जाता था।
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किशोर ने आरोप लगाया कि जब भी वह काम करने से मना करता या विरोध करता, तो उसके साथ बुरी तरह मारपीट की जाती थी। खाने के नाम पर उसे केवल सूखी रोटी दी जाती थी। बेटे की जुबानी यह दर्द सुनकर पिता असलम बेहाल हो गए।
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6. फोन कॉल ने लौटाई परिवार की खुशियां

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पिता असलम ने बताया कि उनके पास अचानक मुजफ्फरनगर पुलिस का फोन आया था। पुलिस ने उन्हें सूचना दी कि उनका लापता बेटा जीवित मिल गया है। शुरुआत में उन्हें इस खबर पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ।
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पुष्टि होने के बाद पूरा परिवार तुरंत मुजफ्फरनगर के लिए रवाना हो गया। इस मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर प्रकरण ने फैक्ट्री मालिकों की क्रूरता को उजागर किया है, लेकिन पुलिस की इस कामयाबी की हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है।
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यह घटना साबित करती है कि यदि प्रशासन और पुलिस पूरी लगन से काम करें, तो अपराध पर लगाम लगाई जा सकती है। मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर मामले में पुलिस और CWC की त्वरित कार्रवाई से एक परिवार फिर से एक हो गया। बाल श्रम एक गंभीर अपराध है, और उम्मीद है कि इस मामले में दोषी फैक्ट्री मालिक के खिलाफ प्रशासन आगे सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
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