मेरठ में वायरल वीडियो विवाद के बीच सस्पेंड मेरठ महिला पुलिसकर्मी अनु रानी ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी अनुमति के बिना सोशल मीडिया प्रोफाइल से फोटो और वीडियो निकाले गए और उन्हें गलत दावों के साथ वायरल किया गया। महिला पुलिसकर्मी ने कहा कि विवाद के बाद उनकी सामाजिक जिंदगी प्रभावित हुई है और उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं।

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महिला पुलिसकर्मी ने क्या आरोप लगाए?

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महिला पुलिसकर्मी ने लाइव के दौरान अमित किटोड़ पर आरोप लगाया कि उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल से बिना अनुमति फोटो और वीडियो निकाले गए। इसके बाद उन्हें अश्लील वीडियो बनाने से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।

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उन्होंने कहा कि पूरे मामले में उनका पक्ष सुने बिना उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए। महिला पुलिसकर्मी के मुताबिक, इस विवाद के कारण वह पिछले पांच दिनों से अपने कमरे से बाहर नहीं निकली हैं।

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'व्यूज के लिए लगाए गए झूठे आरोप'

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महिला पुलिसकर्मी ने आरोप लगाया कि यदि उन्हें पुलिस विभाग के नियमों को लेकर कोई शिकायत थी तो सीधे एसएसपी या संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने के पीछे व्यूज हासिल करने की मंशा थी। और अब उन्होंने वीडियो डिलीट करके माफी मांग ली, लेकिन इससे मेरी लाइफ तो खराब हो गई ना।

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उन्होंने अपने कपड़ों को लेकर भी सफाई दी। महिला पुलिसकर्मी ने बताया कि वायरल वीडियो में उन्होंने वही फ्रॉक पहनी थी, जिसे लेकर आपत्तियां जताई गईं। उन्होंने कहा कि यह कपड़ा उनकी मां की पसंद से खरीदा गया था और उनके परिवार में इस तरह के कपड़े सामान्य हैं।

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मां को निशाना बनाने का भी आरोप

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महिला पुलिसकर्मी ने कहा कि विवाद बढ़ने के बाद उनकी मां को भी निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सेक्स चैट से जुड़े आरोपों पर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई स्क्रीनशॉट या अन्य सबूत हैं तो उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने के बजाय विभाग, एसएसपी या साइबर थाने को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

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उन्होंने दावा किया कि वह खुद इस मामले में साइबर विक्टिम हैं और उनके बारे में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं।

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QR कोड और पुलिस की वर्दी पर भी दी सफाई

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महिला पुलिसकर्मी ने वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले QR कोड को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि यह किसी आपत्तिजनक गतिविधि से संबंधित नहीं था, बल्कि उनके Instagram अकाउंट का QR कोड था। उनके अनुसार, वह अपने सोशल मीडिया वीडियो में लोगों से Instagram पर उन्हें फॉलो करने की अपील करती थीं।

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उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर पुलिस की वर्दी में कोई वीडियो नहीं बनाया। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी ओर से पुलिस की वर्दी की गरिमा कैसे प्रभावित हुई।

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पढ़ाई और सरकारी नौकरी का भी किया जिक्र

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लाइव के दौरान महिला पुलिसकर्मी ने अपनी पढ़ाई और नौकरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह स्कूल में पढ़ाई में अच्छी थीं और स्कूल टॉप किया था। कॉलेज में भी उनके अच्छे अंक रहे। उन्होंने बताया कि वह सब-इंस्पेक्टर हैं और यह उनकी दूसरी सरकारी नौकरी है।

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महिला पुलिसकर्मी ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया से जुड़े नियमों और गाइडलाइंस की जानकारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों के व्यूज हासिल करने की कोशिश ने उनकी जिंदगी को प्रभावित किया है।

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आत्महत्या जैसे विचार आने की बात कही

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लाइव के दौरान महिला पुलिसकर्मी भावुक भी हुईं। उन्होंने कहा कि विवाद और धमकियों के कारण उनके मन में आत्महत्या जैसे विचार आ रहे हैं। यह बयान उनके मानसिक दबाव को दर्शाता है और ऐसे संवेदनशील मामलों में सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाने से बचना जरूरी है।

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फिलहाल महिला पुलिसकर्मी की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उन्हें तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। मामले में पुलिस या संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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