मेरठ। जिले के चर्चित Meerut Snake Murder Case में बुधवार को अदालत ने पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को अमित कश्यप की हत्या के मामले में दोषी करार दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों को हत्या का दोषी माना। अब अदालत 16 अक्टूबर को दोनों की सजा पर फैसला सुनाएगी। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 12 से अधिक गवाहों के बयान और पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट को अहम आधार बनाया गया।

कोर्ट रूम के बाहर पहुंची अनु कॉलिस

यह मामला मेरठ-पौड़ी हाईवे से करीब चार किलोमीटर अंदर स्थित अकबरपुर सादात गांव का है। अमित कश्यप उर्फ मिक्की की मौत के बाद शुरुआत में परिजनों को आशंका थी कि उसकी मौत सांप के डसने से हुई है। हालांकि जांच आगे बढ़ने पर मामला हत्या का निकला और पुलिस ने अमित की पत्नी रविता तथा उसके प्रेमी अमरदीप को आरोपी बनाया।

सांप के डसने से मौत दिखाने की थी कोशिश

पुलिस के अनुसार, अमित और अमरदीप दोनों टाइल्स-पत्थर लगाने का काम करते थे। इसी वजह से दोनों के बीच जान-पहचान थी और अमरदीप का अमित के घर आना-जाना था। जांच में पुलिस ने दावा किया कि इसी दौरान अमरदीप के रविता से संबंध हो गए।

अमित की मौत के बाद उसके शव के नीचे सांप दबा मिला था। सांप को पकड़कर डिब्बे में बंद किया गया। इसके बाद सपेरों को बुलाया गया। सपेरों ने सांप को देखने के बाद उसके जहरीले होने को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद परिजनों का शक बढ़ गया।

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शव पर गले में चोट के निशान और शरीर पर खरोंच के निशान मिलने की बात भी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच हत्या के एंगल से शुरू की।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने बदली जांच की दिशा

Meerut Snake Murder Case में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को अहम सबूत माना गया। रिपोर्ट के अनुसार अमित की मौत सर्पदंश से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई थी। इसके बाद पुलिस ने रविता और अमरदीप से पूछताछ की और दोनों के कथित संबंधों तथा हत्या की साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच की।

पुलिस ने यह भी जांच की कि अमित की मौत वाली रात सांप कहां से आया था। सांप उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति से पूछताछ की गई। इसके बाद पुलिस ने रविता और अमरदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

मोबाइल बातचीत बनी अहम कड़ी

केस की सुनवाई के दौरान मोबाइल कनेक्शन को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से केस लड़ रहीं एडीजीसी फरजाना के मुताबिक पुलिस ने करीब 500 से ज्यादा पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इसमें 12 से अधिक गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य शामिल थे।

अभियोजन के अनुसार, अमित की मौत के बाद भी रविता और अमरदीप के बीच लगातार फोन पर बातचीत हुई। जांच में चार दिनों के भीतर दोनों के बीच 70 से ज्यादा बातचीत की जानकारी सामने आई। वहीं, पूरे मामले की जांच में एक ऐसे मोबाइल नंबर का भी पता चला, जिसकी सिम किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर थी।

जांच में सामने आया कि जिस नंबर से अमरदीप रविता से बातचीत करता था, वह जागृति विहार निवासी सोनू के नाम से जुड़ा था। सोनू ने गवाही के दौरान उस नंबर का इस्तेमाल करने से इनकार किया और दोनों आरोपियों को जानने से भी इनकार किया। अभियोजन ने इस तथ्य को भी केस में अहम कड़ी बताया।

रविता और अमरदीप ने क्या कहा था?

गिरफ्तारी के समय रविता ने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाए थे। उसका कहना था कि अमित उसके साथ मारपीट करता था और उसके साथ अमानवीय व्यवहार करता था। रविता ने यह भी दावा किया था कि अमित को अमरदीप से उसकी बातचीत की जानकारी थी।

वहीं अमरदीप ने पुलिस के सामने कथित तौर पर कहा था कि 3500 रुपये के लेन-देन को लेकर अमित से उसका विवाद हुआ था। उसका दावा था कि अमित ने उसे नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ लोगों को पीछे लगाया था। इसी वजह से उसने अमित की हत्या की साजिश रची।

अमरदीप ने यह भी दावा किया था कि उसने मवाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर गांव के सपेरों से करीब एक हजार रुपये में सांप खरीदा था।

सहारनपुर से लौटने के बाद हत्या की साजिश का आरोप

पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन अमित और रविता सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी मंदिर गए थे। पुलिस का दावा है कि वहां से लौटते समय रविता ने अमरदीप से फोन और मैसेज के जरिए संपर्क किया था।

जांच के अनुसार, इसके बाद रात में अमित की हत्या की गई। पुलिस का आरोप था कि पहले उसका गला दबाया गया और फिर उसकी मौत को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के लिए शव के पास सांप रखा गया।

अब अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर रविता और अमरदीप को दोषी करार दिया है। रविता वर्तमान में मेरठ जेल में बंद है, जबकि अमरदीप जमानत पर बाहर बताया गया है। अदालत 16 अक्टूबर 2026 को दोनों की सजा तय करेगी।

तारीख को लेकर एक जरूरी तथ्य

आपके दिए टेक्स्ट में हत्या की तारीख 17 अप्रैल 2025 बताई गई है, जबकि उपलब्ध कोर्ट-वर्डिक्ट रिपोर्टों में घटना की तारीख को लेकर अलग विवरण प्रकाशित हुआ है। इसलिए प्रकाशित खबर में घटना की तारीख को आधिकारिक कोर्ट रिकॉर्ड/चार्जशीट से मिलान करके ही अंतिम रूप देना उचित होगा। 543 दिन की अवधि भी इसी तारीख के आधार पर दोबारा सत्यापित की जानी चाहिए।

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