मेरठ के शास्त्रीनगर में आवास विकास परिषद के 'सेटबैक' नियम ने हजारों लोगों की नींद उड़ा दी है। अपने खून-पसीने की कमाई से बनाए गए 860 मकानों और प्लॉटों पर मंडराते खतरे को लेकर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। भीषण गर्मी के बावजूद सेंट्रल मार्केट धरने का अखाड़ा बन गया है। महिलाओं ने 108 बार राम नाम का जाप कर शांतिपूर्ण लेकिन सख्त संदेश दिया है— "जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।"READ ALSO:-मेरठ में 'गैस माफिया' का सबसे बड़ा और खौफनाक धोखा: ₹2500 नकद देकर खरीदा LPG सिलेंडर, जब पलटा तो गैस की जगह छूटी 'पानी की तेज फुहार'; वीडियो देख दहल जाएगा आपका दिल!
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उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर का पॉश इलाका माना जाने वाला 'शास्त्रीनगर' इन दिनों एक बड़े जन-आंदोलन का केंद्र बन गया है। इलाके के सेक्टर-2 और सेक्टर-4 के निवासियों पर अपने ही घरों से बेघर होने या मकान का एक बड़ा हिस्सा टूटने का खौफ साया बनकर मंडरा रहा है। कारण है— आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) का 'सेटबैक' (Setback) नियम, जिसके तहत 860 संपत्तियों को चिह्नित किया गया है।
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इस प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में शनिवार को भी महिलाओं का धरना प्रदर्शन पूरे जोर-शोर से जारी रहा। आसमान से बरसती आग और तपती दोपहरी की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में महिलाएं सेंट्रल मार्केट स्थित धरना स्थल पर पहुंचीं और सिस्टम के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
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'हमारी भूल, कमल का फूल': नारों में दिखा अपनों से ही बगावत का दर्द
\r\n\r\nइस धरने की सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात वह नारे रहे जो वहां मौजूद महिलाओं ने लगाए। महिलाओं ने आवास विकास परिषद और सत्ताधारी दल के खिलाफ तीखी नाराजगी जताते हुए 'हमारी भूल, कमल का फूल' के नारे लगाए।
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यह नारा राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि शास्त्रीनगर इलाके को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कोर वोटर बेस माना जाता है। जिन लोगों ने पार्टी को सत्ता के शिखर पर पहुंचाया, आज वही अपने घरों को बचाने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। महिलाओं का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से सेटबैक वापस लेने की मांग को लेकर लगातार अधिकारियों और नेताओं के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अभी तक उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन मिले हैं, समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
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'लिखित आदेश' के बिना नहीं हटेंगे: मातृशक्ति का अल्टीमेटम
\r\n\r\nधरना स्थल पर बैठी महिलाओं के चेहरों पर जहां एक तरफ थकान थी, वहीं दूसरी तरफ अपने आशियाने को बचाने का दृढ़ संकल्प भी साफ नजर आ रहा था। महिलाओं ने स्पष्ट और दो टूक शब्दों में ऐलान किया है कि उनका यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार या आवास विकास परिषद उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता।
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प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा— "हमें अपनी चुनी हुई सरकार पर भरोसा जरूर है, लेकिन अब हमें केवल मौखिक बातों से संतुष्टि नहीं मिलेगी। हमने अपनी मांग स्पष्ट रूप से बता दी है। जिस दिन हमें प्रशासन की तरफ से इस बात का लिखित आश्वासन (Written Assurance) मिल जाएगा कि हमारे मकान सेटबैक नियम के तहत नहीं तोड़े जाएंगे, हम उसी पल अपना धरना समाप्त कर देंगे। लिखित आदेश के बिना हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।"
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108 बार 'राम नाम' का सामूहिक जाप: आस्था और आंदोलन का संगम
\r\n\r\nअपने इस आंदोलन को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से चलाने के लिए महिलाओं ने एक अनूठा तरीका अपनाया। धरने के दौरान सभी महिलाओं ने सामूहिक रूप से 108 बार 'राम नाम' का जाप किया।
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इस आध्यात्मिक पहल के माध्यम से उन्होंने भगवान से अपनी मांगों के जल्द समाधान की प्रार्थना की और साथ ही यह भी संकल्प लिया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, उनका यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। यह जाप प्रशासन को यह संदेश देने के लिए भी था कि उनका विरोध हिंसात्मक नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और जीवन भर की पूंजी को बचाने की एक भावुक लड़ाई है।
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राजनीतिक चौखटों पर दस्तक: क्या कह रहे हैं सत्ताधारी नेता?
\r\n\r\nमकानों पर मंडराते बुलडोजर के खौफ ने स्थानीय नेताओं की रातों की नींद भी उड़ा दी है। धरने पर बैठी महिलाएं अपनी फरियाद लेकर हर उस दरवाजे पर जा चुकी हैं, जहां से उन्हें उम्मीद की किरण नजर आई।
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- \r\n विनीत शारदा से मुलाकात: बीते दिन सेक्टर-4 में धरना दे रही महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ भाजपा नेता विनीत शारदा से मुलाकात की। शारदा ने महिलाओं को ढांढस बंधाते हुए कहा, "सरकार आपके हितों की रक्षा के लिए कार्य कर रही है। इस पूरे प्रकरण को हमने मुख्यमंत्री (CM) के संज्ञान में डाल दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कोई नहीं कर सकता, लेकिन कानूनी दायरे में रहकर आपके मकानों को बचाने का हमारा प्रयास लगातार जारी है।"\r\n \r\n
- \r\n दिग्गजों के दरबार में फरियाद: इससे पहले भी यह महिलाएं राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर, और सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान से मिल चुकी हैं। इसके अलावा आवास विकास कार्यालय पर भी कई बार प्रदर्शन किया गया है। सभी जगह से महिलाओं को यही एक रटा-रटाया जवाब मिला है कि 'हम आपके हित में कार्य कर रहे हैं', लेकिन यह आश्वासन महिलाओं के डर को दूर करने में नाकाफी साबित हो रहा है।\r\n \r\n
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आंकड़ों की जुबानी: 860 संपत्तियों पर लटकी है तलवार (Detailed Breakdown)
\r\n\r\nयह पूरा विवाद सिर्फ कुछ मकानों का नहीं है, बल्कि यह 860 परिवारों के भविष्य से जुड़ा है। आवास विकास परिषद ने जिन संपत्तियों को चिह्नित किया है, उनका पूरा लेखा-जोखा (Data) इस प्रकार है:
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कुल प्रभावित संपत्तियां: 860
\r\n\r\nआवासीय मकानों का विवरण (कुल 630 मकान)
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इनमें से ज्यादातर वो मकान हैं जिनमें दशकों से परिवार रह रहे हैं:
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- \r\n 50 वर्ग मीटर तक: 249 मकान (सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे वर्ग के परिवार)\r\n \r\n
- \r\n 51 से 100 वर्ग मीटर तक: 222 मकान\r\n \r\n
- \r\n 101 से 150 वर्ग मीटर तक: 68 मकान\r\n \r\n
- \r\n 151 से 300 वर्ग मीटर तक: 80 मकान\r\n \r\n
- \r\n 301 से 500 वर्ग मीटर तक: 10 मकान\r\n \r\n
- \r\n 501 से 1200 वर्ग मीटर तक: 01 मकान\r\n \r\n
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खाली प्लॉट/आवासीय भूखंड (कुल 230 प्लॉट)
\r\n\r\nजिन लोगों ने भविष्य में घर बनाने के लिए जमीन लेकर छोड़ी है, उन पर भी यह नियम लागू हो रहा है:
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- \r\n 1 से 50 वर्ग मीटर तक: 1 प्लॉट\r\n \r\n
- \r\n 51 से 100 वर्ग मीटर तक: 17 प्लॉट\r\n \r\n
- \r\n 101 से 150 वर्ग मीटर तक: 6 प्लॉट\r\n \r\n
- \r\n 151 से 300 वर्ग मीटर तक: 124 प्लॉट (मध्यम वर्ग के सबसे ज्यादा प्लॉट)\r\n \r\n
- \r\n 301 से 500 वर्ग मीटर तक: 78 प्लॉट\r\n \r\n
- \r\n 501 मीटर से बड़े: 4 प्लॉट\r\n \r\n
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आवास विकास परिषद का यह 'सेटबैक' नियम (जिसके तहत भवन के चारों ओर एक निश्चित खाली जगह छोड़ना अनिवार्य होता है) शास्त्रीनगर के निवासियों के लिए गले की फांस बन गया है। सालों पहले बने मकानों में अब सेटबैक छोड़ना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए बने-बनाए घरों को तोड़ना पड़ेगा। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री इस मामले में दखल देकर हजारों परिवारों को राहत (लिखित आदेश) देंगे, या फिर विकास के नियमों की वेदी पर 860 आशियानों की बलि चढ़ जाएगी। फिलहाल, तपती धूप में महिलाओं का यह संघर्ष जारी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.