बिजनौर/मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाले सबसे महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे-119' (Meerut-Pauri Highway-119) के निर्माण में आ रही सबसे बड़ी बाधा अब पूरी तरह से दूर हो गई है। मेरठ से लेकर बिजनौर तक हाईवे के चौड़ीकरण और निर्माण कार्य में भूमि अधिग्रहण को लेकर चल रहे विवादों का हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद निपटारा कर लिया गया है। इस विवाद के सुलझने से न केवल बिजनौर बल्कि मेरठ और मुजफ्फरनगर के उन हजारों किसानों को राहत मिली है, जिनका मुआवजा लंबे समय से अटका हुआ था। खबरीलाल की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि कैसे यह विवाद सुलझा और अब इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से क्षेत्र को क्या बड़े फायदे होंगे।
\r\n\r\nहाईकोर्ट का अहम निर्देश और NHAI का त्वरित एक्शन
\r\n\r\nमेरठ-पौड़ी हाईवे-119 पर गंगा बैराज से लेकर बिजनौर तक का करीब 12.50 किलोमीटर का हिस्सा पड़ता है। इस हिस्से पर निर्माण कार्य तो पहले से ही जारी था, लेकिन भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) और मुआवजे के वितरण को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच असहमति बनी हुई थी। कई किसानों ने उचित मुआवजे की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत में मामले लंबित होने के कारण इस महत्वपूर्ण हाईवे का निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा था।
\r\n\r\nलेकिन, गुरुवार को स्थिति में एक बड़ा बदलाव आया। माननीय हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की। एनएचएआई ने लंबित विवादों का निपटारा करते हुए संबंधित किसानों के बैंक खातों में 19.8 करोड़ रुपये की भारी-भरकम मुआवजा राशि सीधे जमा करा दी है। इस कदम ने हाईवे के निर्माण में लगे उस बड़े 'ब्रेक' को हटा दिया है, जो पिछले काफी समय से अधिकारियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था।
\r\n\r\nजनपद न्यायालय में भी जमा होंगे 1.66 करोड़ रुपये
\r\n\r\nजिन किसानों के मामले अभी भी स्थानीय स्तर पर विवादित हैं या जिनके खाते की जानकारी पूरी नहीं है, उनके लिए भी प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि ऐसे किसानों के मुआवजे के रूप में 1.66 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि जनपद न्यायालय (District Court) में 5 जुलाई तक जमा करा दी जाएगी।
\r\n\r\nप्रशासनिक अधिकारियों और एनएचएआई ने न्यायालय से ऐसे किसानों के बैंक खातों की सटीक जानकारी मांगी है ताकि यह धनराशि बिना किसी देरी के उनके खातों में ट्रांसफर की जा सके। इसके अलावा, एक दिलचस्प मामला 8.29 लाख रुपये के मुआवजे का भी सामने आया है। यह भुगतान फिलहाल इसलिए रोक कर रखा गया है क्योंकि इस मुआवजा राशि का असली हकदार व्यक्ति अभी विदेश में रह रहा है। अदालत ने जनपद स्तरीय न्यायालयों में लंबित अन्य सभी छोटे-मोटे वादों के पूर्ण निस्तारण के लिए अधिकतम छह माह का समय निर्धारित किया है।
\r\n\r\nचार चरणों में बंटा है हाईवे-119 का विशाल नेटवर्क
\r\n\r\nमेरठ-पौड़ी हाईवे का यह प्रोजेक्ट पश्चिमी यूपी की लाइफलाइन बनने जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट को योजनाबद्ध तरीके से चार प्रमुख चरणों (Phases) में बांटा गया है, ताकि काम में पारदर्शिता और गति बनी रहे:
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- \r\n पहला चरण: मेरठ से बहसूमा तक का निर्माण।\r\n \r\n
- \r\n दूसरा चरण: बहसूमा से बिजनौर सीमा तक का विस्तार (वर्तमान में कार्य प्रगति पर)।\r\n \r\n
- \r\n तीसरा चरण: बिजनौर से नजीबाबाद तक का क्षेत्र, जिसका कार्य लगभग पूरा किया जा चुका है।\r\n \r\n
- \r\n चौथा चरण: नजीबाबाद से कोटद्वार (उत्तराखंड) तक, जहां निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।\r\n \r\n
इन सभी चरणों में 'बहसूमा से बिजनौर' तक का हाईवे निर्माण सबसे ज्यादा क्रिटिकल माना जा रहा था क्योंकि इसी हिस्से में किसानों की अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे को लेकर सबसे ज्यादा अदालती वाद लंबित थे। अब इन अड़चनों के दूर होने से पूरे 40 किलोमीटर लंबे इस विशेष हिस्से का काम निर्बाध रूप से हो सकेगा।
\r\n\r\nबाइपास का 50 मीटर का पेंच सुलझा, गंगा पुल पर गर्डर का काम शुरू
\r\n\r\nहाईवे-119 का बहसूमा से बिजनौर तक का काम अब टॉप गियर में आ गया है। बिजनौर शहर को भारी ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए शहर के बाहर से करीब 7 किलोमीटर लंबे एक शानदार बाइपास का निर्माण किया जा रहा है। आश्चर्य की बात यह थी कि करोड़ों के इस प्रोजेक्ट में मात्र 50 मीटर लंबे भूमि के टुकड़े का विवाद पूरे बाइपास के काम को रोके हुए था। अब मुआवजा राशि का भुगतान होने और विवाद निस्तारित होने के बाद इस बाइपास का निर्माण कार्य भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
\r\n\r\nइसके साथ ही, गंगा नदी पर तैयार हो रहे नए और आधुनिक पुल के निर्माण ने भी रफ्तार पकड़ ली है। पुल के पिलर्स तैयार होने के बाद अब उन पर भारी-भरकम गर्डर (Girder) डालने का महत्वपूर्ण कार्य शुरू हो चुका है। यह नया गंगा पुल इस पूरे हाईवे की जान है, जो मानसून के दिनों में भी कनेक्टिविटी को सुचारू रखेगा।
\r\n\r\nतीन जनपदों में फैला था विवाद, SDO ने दी पूरी जानकारी
\r\n\r\nइस पूरे घटनाक्रम पर एनएचएआई के एसडीओ (SDO) आशीष शर्मा ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हाईवे-119 का बहसूमा से बिजनौर तक का पूरा हिस्सा मुख्य रूप से तीन जनपदों से होकर गुजरता है और तीनों जगह कुछ न कुछ तकनीकी अड़चनें थीं:
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- \r\n मेरठ जनपद का मामला: मेरठ जिले में इस हाईवे का करीब 10.50 किलोमीटर का हिस्सा आता है। यहां चार गांवों में भूमि के 'सर्किल रेट' (Circle Rate) को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच मामला उलझा हुआ था। अधिकारियों की सूझबूझ और लंबी वार्ताओं के बाद अब इस सर्किल रेट के विवाद को पूरी तरह से सुलझा लिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n मुजफ्फरनगर जनपद: इस जिले में हाईवे का सबसे लंबा, लगभग 17 किलोमीटर का हिस्सा पड़ता है। यहां भी कई अलग-अलग स्थानों पर अधिग्रहण को लेकर छिटपुट विवाद थे, जिन्हें अब क्लियर कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n बिजनौर जनपद: यहां 12.50 किलोमीटर के हिस्से में सबसे ज्यादा पेचीदगियां थीं। लेकिन अदालत के आदेश के बाद यहां भी सारे विवाद हल कर लिए गए हैं और मुआवजे की करोड़ों की राशि सफलतापूर्वक जमा करा दी गई है।\r\n \r\n
\r\n\r\nपश्चिमी यूपी की तरक्की का नया रास्ता
\r\n\r\nमेरठ-पौड़ी हाईवे-119 सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास का एक नया द्वार है। भूमि अधिग्रहण की बाधाएं दूर होने से अब यह तय हो गया है कि यह प्रोजेक्ट अपने निर्धारित समय के आसपास ही पूरा हो जाएगा। इस हाईवे के पूरी तरह से चालू होने के बाद:
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- \r\n मेरठ से बिजनौर और आगे कोटद्वार (उत्तराखंड) तक का सफर बेहद आसान और कम समय का हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा।\r\n \r\n
- \r\n पहाड़ों की तरफ जाने वाले पर्यटकों के लिए यह एक शानदार और सुरक्षित विकल्प बनेगा।\r\n \r\n
कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के इस फैसले और NHAI की तेज कार्यप्रणाली ने मेरठ और बिजनौर क्षेत्र के लोगों को एक बड़ी सौगात दी है। अब जल्द ही इस हाईवे पर वाहन बिना किसी रुकावट के फर्राटे भरते नजर आएंगे।
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Sabse pehle comment karne wale banein.