मेरठ (उत्तर प्रदेश): क्रांतिधरा मेरठ में रविवार का दिन व्यापारियों और सांसद के बीच एक भावुक संवाद का गवाह बना। शहर के रिहायशी इलाकों में चल रहे बाजारों, विशेषकर शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट (Central Market) पर लटकी ध्वस्तीकरण की तलवार ने व्यापारियों की नींद उड़ा रखी है। इसी संकट से उबरने के लिए रविवार को व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट से सांसद और टीवी धारावाहिक रामायण में 'भगवान राम' का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल (Arun Govil) से मिलने पहुंचा।READ ALSO:-संभल में 'कलयुगी' पत्नी का खूनी खेल: 2 आशिकों के साथ मिलकर पति के किए टुकड़े-टुकड़े, 10 साल की बेटी ने रोते हुए खोला मां के पाप का 'चिट्ठा'
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मुलाकात के दौरान माहौल उस वक्त बेहद भावुक हो गया जब व्यापारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए रामायण के पात्रों का उदाहरण दिया। उन्होंने हाथ जोड़कर सांसद से कहा, "सांसद जी, आवास विकास परिषद हमारे लिए 'रावण' बन गया है। अब आप एक बार फिर से 'राम' का रूप धारण कीजिए और इस समस्या का वध कर हमें जीवनदान दीजिए।"
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व्यापारियों की पीड़ा: 'रावण' जैसा भय और अस्तित्व का संकट

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मेरठ के सेंट्रल मार्केट और अन्य रिहायशी इलाकों में बनी दुकानों को लेकर आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) का रुख सख्त है। परिषद ने कई दुकानों को अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई का नोटिस दिया है। व्यापारियों का कहना है कि वे दशकों से यहाँ व्यापार कर रहे हैं और यही उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया है।
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व्यापारियों ने सांसद से कहा कि आवास विकास के अधिकारी जिस तरह से कार्रवाई पर आमादा हैं, उससे ऐसा लगता है कि वे किसी नियम का पालन नहीं, बल्कि व्यापारियों के अस्तित्व को ही मिटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "हम डर के साये में जी रहे हैं। हमें समझ नहीं आ रहा कि हम अपने बच्चों का पेट कैसे पालेंगे। आप ही हमारी आखिरी उम्मीद हैं।"
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सांसद का आश्वासन: 'राम' नहीं, सेवक बनकर लड़ूंगा लड़ाई

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व्यापारियों की व्यथा सुनने के बाद सांसद अरुण गोविल ने उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जनप्रतिनिधि हैं और जनता के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े हैं।
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सांसद ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को एक विस्तृत पत्र लिखा है।
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    पत्र का मजमून: सांसद ने सीएम से मांग की है कि मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के रिहायशी क्षेत्रों में समय के साथ जो बाजार विकसित हो गए हैं, उन्हें एक व्यावहारिक नीति बनाकर नियमित (Regularize) किया जाए।
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    तर्क: उन्होंने तर्क दिया कि ये बाजार अब स्थानीय जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं और इनसे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। इन्हें उजाड़ने से अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर बुरा असर पड़ेगा।
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सांसद की नसीहत: 'सड़क पर उतरने का वक्त गया, अब कानूनी लड़ाई लड़ें'

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अक्सर देखा जाता है कि ऐसी स्थिति में व्यापारी धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाते हैं, लेकिन सांसद अरुण गोविल ने उन्हें एक अलग और सुलझी हुई सलाह दी।
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उन्होंने व्यापारियों को समझाते हुए कहा, "अब आंदोलन और प्रदर्शन का समय नहीं है। नारेबाजी से समाधान नहीं निकलेगा। हमें भावनाओं से नहीं, बल्कि कानून से लड़ना होगा।" सांसद ने सुझाव दिया कि:
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    एकजुटता: सभी व्यापारी संगठन एक मंच पर आएं।
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    कानूनी रास्ता: एक सक्षम और अनुभवी वकील के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपनी बात रखें।
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    राहत की मांग: कोर्ट के सामने मानवीय पक्ष रखते हुए कुछ समय की मोहलत मांगी जाए, ताकि सरकार को नीति बनाने का समय मिल सके।
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सांसद ने यह भी जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की बोर्ड बैठक शीघ्र ही लखनऊ में आयोजित होने जा रही है, जिसमें इस मुद्दे पर कोई सकारात्मक निर्णय लिए जाने की संभावना है।
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प्रशासन की तारीफ: ध्वस्तीकरण रुकना मानवीय कदम

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सेंट्रल मार्केट मामले में पिछले कुछ दिनों से चल रही गहमागहमी के बीच मेरठ मंडल की आयुक्त (Commissioner) सेल्वा कुमारी जे. ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। सांसद अरुण गोविल ने प्रशासन के इस कदम की सराहना की।
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सांसद ने कहा, "मेरठ मंडल आयुक्त के आदेश पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को स्थगित किया जाना शासन और प्रशासन के मानवीय दृष्टिकोण का परिचायक है। इससे हजारों व्यापारियों और उनके परिवारों को फौरी राहत मिली है। सरकार का उद्देश्य किसी को उजाड़ना नहीं, बल्कि व्यवस्था बनाना है।"
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क्या है पूरा मामला?

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दरअसल, मेरठ के शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट समेत कई इलाकों में आवास विकास परिषद ने रिहायशी भूखंडों (Residential Plots) पर व्यावसायिक गतिविधियों (Commercial Activities) को अवैध माना है।
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    नियमों के अनुसार, रिहायशी जमीन पर दुकानें नहीं चलाई जा सकतीं।
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    हालांकि, पिछले 30-40 सालों में शहर के विस्तार के साथ ये इलाके प्रमुख बाजारों में तब्दील हो चुके हैं।
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    सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी (NGT) के सख्त रुख के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव है।
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    व्यापारी चाहते हैं कि सरकार 'कंपाउंडिंग' (Compounding) या 'भू-उपयोग परिवर्तन' (Land Use Change) शुल्क लेकर इन बाजारों को वैध घोषित कर दे।
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उम्मीद की किरण

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सांसद अरुण गोविल के साथ हुई इस मुलाकात ने व्यापारियों में एक नई उम्मीद जगाई है। जहाँ एक तरफ वे प्रशासन के बुलडोजर से डरे हुए थे, वहीं अब उन्हें लगता है कि 'राम' रूपी उनके सांसद ने उनकी गुहार सुन ली है और सरकार के स्तर पर कोई न कोई बीच का रास्ता जरूर निकलेगा। अब सभी की निगाहें लखनऊ में होने वाली आवास विकास परिषद की बोर्ड बैठक और सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई पर टिकी हैं।
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