उत्तर प्रदेश के मेरठ महानगर में बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही ठेकेदारी प्रथा के तहत काम कर रहे सैकड़ों कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बुधवार को विक्टोरिया पार्क स्थित मुख्य अभियंता (Chief Engineer) कार्यालय पर मेरठ बिजली संविदा कर्मचारी प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। 'निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति (पंजीकृत) ऑल इंडिया' के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी की और अधिकारियों का घेराव किया।READ ALSO:-गाजियाबाद में पलक झपकते ही जमींदोज हुई 30 साल पुरानी विशालकाय पानी की टंकी, 5 सेकंड में उठा धूल का गुबार; देखिए तबाही और निर्माण की पूरी इनसाइड स्टोरी
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यह पूरा विवाद एक नए अनुबंध (Tender) से जुड़ा है, जिसमें अचानक 168 कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई है। संगठन का सीधा आरोप है कि शहर में उपभोक्ताओं की संख्या और वर्कलोड (Workload) लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके विपरीत कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में मेरठ की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है। आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है, नए टेंडर की शर्तें क्या हैं और इसका आम जनता पर क्या सीधा असर पड़ेगा।
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ग्लोबटेक क्रिएशन्स के नए टेंडर से खड़ा हुआ विवाद
\r\n\r\nविद्युत विभाग (PVVNL) में लाइनमैन से लेकर फॉल्ट ठीक करने तक का अधिकांश जमीनी काम संविदा (Contract) कर्मचारियों के भरोसे ही चलता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्व में 'अधना एंटरप्राइजेज' (Adhana Enterprises) के पास मेरठ शहर की विद्युत व्यवस्था के रखरखाव का ठेका था। इस कंपनी के तहत लगभग 603 संविदा कर्मचारी काम कर रहे थे।
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लेकिन, विभाग ने हाल ही में टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किया है। पत्रांक संख्या 1607 के तहत दिनांक 30 मार्च 2026 को 'ग्लोबटेक क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड' (Globetech Creations Pvt. Ltd.) को नए अनुबंध का 'लेटर ऑफ इंटेंट' (LOI) जारी कर दिया गया है। विवाद की मुख्य जड़ यह है कि इस नई कंपनी के साथ मेरठ शहर की विद्युत व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मात्र 435 कर्मचारियों का ही अनुबंध किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि पुराने 603 कर्मचारियों में से 168 कर्मचारियों को काम से बाहर (Layoff) का रास्ता दिखा दिया गया है।
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10-15 साल की सेवा के बाद रोजी-रोटी का गहरा संकट
\r\n\r\nसंगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि नई कंपनी (ग्लोबटेक क्रिएशन्स) द्वारा अभी तक किसी भी बिजलीघर पर कर्मचारियों से किसी प्रकार का कोई संपर्क नहीं किया गया है। जिन 168 कर्मचारियों को हटाया जा रहा है, उनमें से अधिकांश ऐसे हैं जो पिछले 10 से 15 वर्षों से लगातार बिजली विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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कड़ी धूप, भारी बारिश और कड़ाके की ठंड में अपनी जान जोखिम में डालकर बिजली की लाइनें ठीक करने वाले इन कर्मचारियों के सामने अब अपने परिवार का पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है। इतनी लंबी विभागीय सेवा करने के बाद, बढ़ती उम्र में इन कर्मचारियों के लिए कहीं और काम खोजना या नई नौकरी प्राप्त करना लगभग असंभव है। यह छंटनी न केवल आर्थिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी इन कर्मचारियों को तोड़ रही है।
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मेरठ बिजली संविदा कर्मचारी प्रदर्शन: आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
\r\n\r\nमेरठ बिजली संविदा कर्मचारी प्रदर्शन केवल कर्मचारियों की नौकरी का सवाल नहीं है; यह सीधे तौर पर मेरठ महानगर के लाखों बिजली उपभोक्ताओं की सुविधाओं से जुड़ा हुआ है।
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- \r\n ब्रेकडाउन और शटडाउन में देरी: मेरठ जैसे तेजी से बढ़ते महानगर में हर दिन नए उपभोक्ता जुड़ रहे हैं। बिजली का लोड बढ़ रहा है। ऐसे में 168 जमीनी कर्मचारियों की एक साथ कमी होने से फॉल्ट (Fault) खोजने और उन्हें ठीक करने में भारी देरी होगी। जो फॉल्ट पहले एक घंटे में ठीक हो जाता था, उसमें अब कई घंटे लग सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n फीडर के अनुसार तैनाती नहीं: समिति के पत्र के माध्यम से यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि बिजलीघरों पर संविदा कर्मचारियों की तैनाती फीडर (Feeder) के अनुसार की गई है, जबकि वास्तविकता यह है कि किसी भी बिजलीघर पर मानक के अनुरूप पर्याप्त कर्मचारी तैनात ही नहीं हैं।\r\n \r\n
- \r\n काम का बहिष्कार और नियम: कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे केवल अनुबंध के अनुसार 8 घंटे की पाली (Shift) में ही कार्य करेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि अब कोई भी कर्मचारी अपने निजी मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान का प्रयोग विभागीय कार्य के लिए नहीं करेगा। इससे अधिकारियों को कर्मचारियों से संपर्क करने और लाइन चालू/बंद कराने (Permit) के काम में भारी असुविधा होगी।\r\n \r\n
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संगठन ने सौंपा ज्ञापन, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
\r\n\r\nबुधवार को विक्टोरिया पार्क पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान 'निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति' के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री भूपेंद्र सिंह जी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मुलाकात की। संगठन ने मेरठ जोन के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) मुनीश चोपड़ा और मेरठ अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) मोहम्मद अरशद को अपनी समस्याओं का विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
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इस प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान राष्ट्रीय महामंत्री श्री अमित खारी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष/प्रदेश प्रभारी विनोद कुमार, पश्चिमांचल अध्यक्ष श्री सचिन सिंह और सभी डिवीजनों के अध्यक्ष एवं सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे।
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ज्ञापन की मुख्य मांगें:
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- \r\n कर्मचारियों की वापसी: नए अनुबंध में कर्मचारियों की संख्या कम करने के आदेश को तुरंत निरस्त किया जाए और पुराने सभी 603 कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।\r\n \r\n
- \r\n ठेकेदार की जवाबदेही: नई कंपनी के अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से बिजलीघरों का दौरा कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए जाएं।\r\n \r\n
- \r\n मानक के अनुरूप तैनाती: फीडर की संख्या और वर्कलोड के हिसाब से कर्मचारियों की तैनाती की जाए ताकि उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।\r\n \r\n
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संगठन ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें तुरंत नहीं मानी गईं और 168 कर्मचारियों की नौकरी बहाल नहीं की गई, तो यह मेरठ बिजली संविदा कर्मचारी प्रदर्शन एक बड़े और अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदल जाएगा। जरूरत पड़ने पर पूरे पश्चिमांचल में काम ठप कर दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) और जिला प्रशासन की होगी। समिति ने इस ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रबंध निदेशक (MD), मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मेरठ को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित की है।
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कुल मिलाकर, मेरठ में बिजली विभाग का यह नया टेंडर प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गया है। एक तरफ राजस्व बचाने और ठेके की लागत कम करने के नाम पर 168 संविदा कर्मियों की बलि चढ़ाई जा रही है, तो दूसरी तरफ बढ़ती गर्मी के इस मौसम में शहर की बिजली व्यवस्था दांव पर लग गई है। मेरठ बिजली संविदा कर्मचारी प्रदर्शन यह स्पष्ट संकेत देता है कि बिना जमीनी हकीकत को समझे लिए गए फैसले न केवल श्रमिकों का शोषण करते हैं, बल्कि आम जनता को भी सीधे तौर पर परेशान करते हैं। प्रशासन और पीवीवीएनएल (PVVNL) प्रबंधन को चाहिए कि वे ठेकेदार और श्रमिक संगठन के साथ बैठकर तुरंत इस गतिरोध को दूर करें, ताकि 10-15 साल से सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों की रोजी-रोटी सुरक्षित रहे और मेरठ की जनता को निर्बाध बिजली मिलती रहे।
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संक्षिप्त सारांश: मेरठ के विक्टोरिया पार्क स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय पर निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति ने जोरदार प्रदर्शन किया। नए टेंडर में ठेकेदार द्वारा 603 की जगह केवल 435 कर्मचारियों को रखने (168 की छंटनी) का कड़ा विरोध किया जा रहा है। कर्मचारियों ने 8 घंटे ही काम करने और निजी मोबाइल का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी है। मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपकर सभी कर्मचारियों की बहाली की मांग की गई है।
Sabse pehle comment karne wale banein.