गाजियाबाद (24 मई, 2026): उत्तर प्रदेश में काले धन (Black Money), हवाला कारोबारियों और टैक्स चोरों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस को एक बहुत बड़ी और अहम कामयाबी हाथ लगी है। गाजियाबाद के थाना लिंक रोड पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान एक पल्सर बाइक सवार दो संदिग्ध युवकों को पकड़ा है। जब पुलिस ने उनके बैग की तलाशी ली, तो अधिकारियों की आँखें फटी की फटी रह गईं।READ ALSO:-मेरठ बकरा चोरी मामला: फिल्मी अंदाज में बकरा चुराकर भाग रहे बाइक सवार कुएं में गिरे, थाने पहुंचे तो कहानी में आया 'बॉलीवुड' से भी बड़ा ट्विस्ट!
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बैग के अंदर कपड़ों के बीच छिपाकर रखे गए 24 लाख रुपये नकद बरामद हुए। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ और मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि पकड़े गए दोनों युवक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक बड़े हवाला नेटवर्क (Hawala Network) के सक्रिय सदस्य हैं। इसके साथ ही, इनके मोबाइल से 10 फर्जी जीएसटी (GST) फर्मों का भी भंडाफोड़ हुआ है, जिनके जरिए करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व (Tax) की चोरी की जा रही थी। आइए इस पूरे 'ब्लैक मनी सिंडिकेट' के खुलासे को विस्तार से समझते हैं।
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कैसे हुआ 24 लाख रुपये का यह बड़ा खुलासा?

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अपराध पर लगाम कसने और अवैध नकदी के परिवहन को रोकने के लिए गाजियाबाद पुलिस लगातार सीमाओं (Borders) पर सघन चेकिंग अभियान चला रही है। इसी रूटीन ड्यूटी के तहत, थाना लिंक रोड पुलिस की एक तेज-तर्रार टीम दिल्ली-यूपी सीमा से सटे 'सनशाइन बॉर्डर' पर बैरिकेडिंग लगाकर वाहनों की सघन चेकिंग कर रही थी।
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एसीपी (साहिबाबाद) अमित सक्सेना ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि चेकिंग के दौरान एक पल्सर मोटरसाइकिल पर दो युवक आते हुए दिखाई दिए। पुलिस को देखते ही उनके चेहरे पर घबराहट साफ नजर आने लगी और उन्होंने अपनी बाइक पीछे मोड़ने की कोशिश की। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया। जब उनसे घबराहट का कारण पूछा गया तो वे पुलिस को गुमराह करने लगे।
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संदेह होने पर जब पुलिस ने उनके पास मौजूद एक भारी बैग की तलाशी ली, तो उसके अंदर कपड़ों की परतों में बहुत ही शातिराना तरीके से छिपाकर रखे गए 24 लाख रुपये कैश के बंडल बरामद हुए।
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कौन हैं पकड़े गए हवाला कारोबारी? (Accused Profile)

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पुलिस ने जब नकदी के बारे में पूछताछ की, तो दोनों युवक पुलिस को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। न तो उनके पास इतने भारी-भरकम कैश का कोई वैध स्रोत (Source) था, और न ही कोई बिल या दस्तावेज। पुलिस ने तुरंत दोनों को हिरासत में ले लिया और नकदी को जब्त कर लिया।
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मुख्य बिंदु
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आरोपी का विवरण
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आरोपी नंबर 1
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राशिद (पुत्र: समशेर अली)
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आरोपी नंबर 2
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सुहेल (पुत्र: लियाकत अली)
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मूल निवासी
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जनपद मेरठ (उत्तर प्रदेश)
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वर्तमान निवास स्थान
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मुस्तफाबाद, भागीरथी विहार, दिल्ली
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बरामदगी
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24,00,000 रुपये नकद और संदिग्ध मोबाइल फोन
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संदिग्ध बयानबाजी: पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि वे मूल रूप से मेरठ के रहने वाले हैं, लेकिन वर्तमान में दिल्ली के भागीरथी विहार इलाके में रह रहे हैं। कैश के मूवमेंट के बारे में पूछने पर उन्होंने झूठ बोलते हुए कहा कि वे यह पैसा बिहार से लेकर आए हैं और दिल्ली जा रहे थे। लेकिन 24 लाख रुपये किसके हैं, किसने दिए और दिल्ली में किसे सौंपने थे? इन तीखे सवालों के आगे दोनों ने चुप्पी साध ली, जिससे पुलिस का शक यकीन में बदल गया कि यह पैसा 100% हवाला का है।
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मोबाइल फोन की जांच ने खोले काले कारोबार के गहरे राज

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आरोपियों की गोलमोल बातों को देखते हुए, लिंक रोड पुलिस ने दोनों को थाने लाकर उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए। साइबर सेल की मदद से जब फोन का डेटा, व्हाट्सएप चैट्स और कॉल डिटेल्स खंगाली गईं, तो एक के बाद एक कई चौंकाने वाले राज सामने आने लगे।
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"फोन की फोरेंसिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि ये दोनों केवल मोहरे हैं। इनका काम कैश को एक राज्य से दूसरे राज्य में सुरक्षित पहुंचाना (Cash Courier) था। ये हवाला के इस अवैध धंधे में लंबे समय से जुड़े हुए हैं।"
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अंतर्राज्यीय हवाला नेटवर्क: जांच में सामने आया कि आरोपियों ने इससे पहले भी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार और उत्तराखंड में कई बार बड़े पैमाने पर हवाला के पैसों का लेन-देन (Transactions) किया है। फोन में ऐसे कई नंबर और कोडेड मैसेज (Coded Messages) मिले हैं, जो हवाला ऑपरेटरों के काम करने के तरीके की ओर इशारा करते हैं।
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10 फर्जी GST फर्मों का बड़ा रैकेट (The GST Evasion Syndicate)

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इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से 10 अलग-अलग जीएसटी (GST) फर्मों के दस्तावेज, बिल और लेन-देन का ब्योरा मिला। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि:
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    इन 10 फर्मों में से 9 फर्में दिल्ली में और 1 फर्म हरियाणा में रजिस्टर्ड है।
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    हैरानी की बात यह है कि ये सभी फर्में केवल कागजों (Paper Firms) पर चल रही थीं। जमीनी स्तर पर इनका कोई भौतिक अस्तित्व (Physical Existence) या असली व्यापार नहीं है।
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    इन कागजी फर्मों का मुख्य उद्देश्य जाली इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करना और फर्जी बिल (Fake Invoices) जारी करके सरकार को करोड़ों रुपये के जीएसटी (GST) का चूना लगाना था।
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    बरामद किए गए 24 लाख रुपये भी इसी टैक्स चोरी और फर्जी फर्मों के जरिए कमाए गए काले धन का हिस्सा माने जा रहे हैं।
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इनकम टैक्स (IT) और जीएसटी (GST) विभाग अलर्ट मोड पर

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मामले के तार सीधे तौर पर आर्थिक अपराध (Economic Offence) और बड़े स्तर की कर चोरी से जुड़े होने के कारण, गाजियाबाद पुलिस ने तुरंत इस पूरी जब्ती की आधिकारिक सूचना आयकर विभाग (Income Tax Department) और जीएसटी विभाग (CGST & SGST Departments) को दे दी है।
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    संयुक्त जांच शुरू: अब पुलिस के साथ-साथ आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग इस बात की जांच कर रही है कि यह 24 लाख रुपये वास्तव में किसके हैं।
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    सीडीआर (CDR) का विश्लेषण: पुलिस आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट के आकाओं (Masterminds) और दिल्ली-मेरठ में बैठे सफेदपोश कारोबारियों तक पहुंचा जा सके जो इस हवाला नेटवर्क को फंड कर रहे हैं।
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    फर्मों का भौतिक सत्यापन: जीएसटी विभाग ने मोबाइल से मिली जानकारी के आधार पर दिल्ली और हरियाणा में स्थित उन 10 फर्मों के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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प्रशासन का कड़ा संदेश

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गाजियाबाद पुलिस की यह कार्रवाई हवाला ऑपरेटरों और टैक्स चोरों के लिए एक करारा झटका है। यह मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे अपराधी आम जनता के बीच छिपकर, फर्जी दस्तावेजों के सहारे देश की अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं। जिस तरह से दो साधारण दिखने वाले युवकों के पास से इतनी बड़ी रकम और फर्जी फर्मों का जाल मिला है, उससे जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि कड़ाई से पूछताछ करने पर इस मामले में अभी कई और सफेदपोश अपराधियों के चेहरे बेनकाब होंगे और करोड़ों रुपये के अन्य घोटालों से भी पर्दा उठेगा। फिलहाल, दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और आगे की विधिक कार्रवाई तेजी से की जा रही है।
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