नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नवंबर 2025 से बैंक लॉकर के लिए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन नए नियमों का प्राथमिक उद्देश्य ग्राहकों की सुरक्षा, लॉकर अलॉटमेंट में पारदर्शिता और लायबिलिटी (जवाबदेही) के मामलों पर स्पष्टता सुनिश्चित करना है। बैंक लॉकर का नया नियम लागू होने से बैंक और ग्राहक दोनों के बीच संबंध अधिक स्पष्ट और भरोसेमंद बनेंगे।READ ALSI:-सावधान! आपके फोन में भी आया है 'SIR KYC' का मैसेज? एक क्लिक और हैक हो जाएगा मोबाइल; आगरा पुलिस ने बजाई खतरे की घंटी
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नए नियमों की मुख्य बातें और ग्राहक सुविधा

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RBI की नई गाइडलाइंस के तहत, बैंक लॉकर के अलॉटमेंट, ऑपरेशन और लॉकर के सामान के खोने या क्षतिग्रस्त होने पर बैंक की लायबिलिटी कवर करने के लिए मानक तय किए गए हैं। ये बदलाव ग्राहकों की सुविधा और सुरक्षा को कई गुना बढ़ाते हैं:
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    लायबिलिटी क्लॉज (बैंक की जवाबदेही):
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      यह नए नियमों की सबसे खास बात है। यदि कोई बैंक अपनी सुरक्षा ड्यूटी में असफल होता है और लॉकर के सामान का नुकसान फ्रॉड, चोरी, आग या बिल्डिंग गिरने जैसी स्थिति में होता है, तो बैंक को ग्राहक को पूरा नुकसान रिफंड करना होगा।
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      यह नियम ग्राहकों और बैंक दोनों तरफ से लायबिलिटी के मामलों पर स्पष्टता बनाएगा।
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    नॉमिनेशन सुविधा में विस्तार:
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      पहले केवल एक नॉमिनी बनाने की अनुमति थी, लेकिन अब एक अकाउंट होल्डर बैंक लॉकर के लिए चार नॉमिनी तक बना सकता है।
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      यह सुविधा क्लेम मैच्योरिटी प्रक्रिया को आसान बनाएगी और ग्राहकों के प्रतिनिधियों के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाएगी।
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    स्टैंडर्ड लॉकर एग्रीमेंट:
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      सभी बैंकों को अब दो पेज का स्टैंडर्ड एग्रीमेंट लेना होगा और उसे RBI से मंजूरी लेनी होगी। इससे अलग-अलग बैंकों में लॉकर एग्रीमेंट को लेकर होने वाली भ्रम की स्थिति समाप्त हो जाएगी।
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    सुरक्षा और ऑपरेशनल अपग्रेड:
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      बैंकों को अब CCTV फुटेज और एक्सेस लॉग्स मेंटेन करने होंगे ताकि लॉकर ऑपरेशन की पूरी रिकॉर्डिंग और ऑडिटिंग हो सके।
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      इससे लॉकर के संचालन में सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होंगी। (Internal link to article on Bank Security Protocols)
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पुराने नियमों की खामियां और नए नियमों का महत्व

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बैंक लॉकर का नया नियम पुराने नियमों की कई खामियों को दूर करता है। पुराने नियमों में:
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    लॉकर एग्रीमेंट को लेकर अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग नियम थे।
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    सुरक्षा उपाय सीमित थे।
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    सिर्फ सिंगल नॉमिनी की इजाजत थी।
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    बैंकों की लायबिलिटी अस्पष्ट थी और सीमित भी थी।
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नए नियम इन सभी समस्याओं का समाधान करते हैं और उन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को नियंत्रित करने वाले सभी समझौतों को भी सही सेफ्टी स्टैंडर्ड के साथ आगे बढ़ाते हैं, जिन्हें लॉकर ऑपरेट करने की अनुमति है।
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क्या नहीं रख सकते लॉकर में?

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ग्राहकों को यह जानना आवश्यक है कि लॉकर का इस्तेमाल गैर-कानूनी कामों या कोई भी गैर-कानूनी सामान रखने के लिए नहीं किया जा सकता।
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रख सकते हैं
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रखना मना है
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ज्वेलरी, प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स
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नकद और करेंसी
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लोन डॉक्यूमेंट्स, मैरिज सर्टिफिकेट
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हथियार, ड्रग्स व नारकोटिक्स
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बर्थ सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस पॉलिसी
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एक्सप्लोसिव एवं गैर-कानूनी सामान
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सेविंग्स बॉन्ड, दूसरी कॉन्फिडेंशियल चीजें
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खराब होने वाली या रेडियोएक्टिव चीजें
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बीमा कवर: ग्राहक की अपनी जिम्मेदारी

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यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि बैंक लॉकर का नया नियम लागू होने के बावजूद, बैंक आपके लॉकर के सामान के लिए बीमा कवर प्रदान नहीं करते हैं। बैंक केवल सामान को सुरक्षित रखने का काम करते हैं। लॉकर में रखे कीमती सामान का बीमा कराना ग्राहक की अपनी जिम्मेदारी है। बैंक की जिम्मेदारी केवल तभी बनती है जब नुकसान बैंक की लापरवाही या सुरक्षा में चूक के कारण होता है।
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RBI का बैंक लॉकर का नया नियम नवंबर 2025 से लागू हो गया है, जो ग्राहकों को चार नॉमिनी बनाने और बैंक की लापरवाही की स्थिति में पूरा रिफंड पाने की सुविधा देता है। यह नियम लॉकर ऑपरेशन में पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करता है, हालांकि ग्राहकों को लॉकर में रखे सामान का बीमा खुद कराना होगा।
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