नई दिल्ली: यदि आप व्हाट्सएप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram) या सिग्नल (Signal) जैसे मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। भारत सरकार ने ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने नया SIM Binding नियम (SIM Binding Niyam) लागू कर दिया है।READ ALSO:-UP में मेट्रो क्रांति: मेरठ-गोरखपुर से प्रयागराज तक बिछेगा 1575 KM का जाल, 2047 तक बदल जाएगी प्रदेश की तस्वीर
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इस नए नियम के तहत, अब आप जिस सिम कार्ड से अपना सोशल मीडिया या मैसेजिंग अकाउंट रजिस्टर करेंगे, उस सिम का आपके स्मार्टफोन में मौजूद और सक्रिय (Active) होना अनिवार्य होगा। यह बदलाव 'टेलीकॉम कम्युनिकेशन सिक्योरिटी (TCS) रूल्स 2024' के तहत किया गया है। सरकार ने सभी कंपनियों को अपनी तकनीक अपडेट करने के लिए 90 दिनों का समय दिया है।
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क्या है SIM Binding नियम और कैसे काम करेगा?

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आसान भाषा में समझें तो SIM Binding नियम बैंकिंग ऐप्स की तरह काम करेगा। जिस तरह आप Google Pay या PhonePe का इस्तेमाल तभी कर पाते हैं जब आपके रजिस्टर्ड नंबर वाला सिम उसी फोन में लगा हो, ठीक वैसा ही अब मैसेजिंग ऐप्स के लिए भी होगा।
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सरकार द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक:

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    अनिवार्य सिम: यूजर को ऐप उसी डिवाइस पर चलाना होगा जिसमें वह सिम कार्ड मौजूद है जिससे रजिस्ट्रेशन हुआ है।
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    90 दिन की वैलिडेशन: DoT ने स्पष्ट किया है कि सिम की लगातार 90 दिनों तक वैलिडेशन की जाएगी। अगर कोई नंबर 'डेड' (Dead) या 'इनएक्टिव' (Inactive) हो जाता है, तो उस नंबर पर चल रहे सोशल मीडिया अकाउंट्स को तुरंत ब्लॉक कर दिया जाएगा।
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    मकसद: यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अकाउंट चलाने वाला व्यक्ति ही उस नंबर का असली मालिक है। 
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सरकार को क्यों पड़ी इस सख्ती की जरूरत?

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आजकल साइबर अपराधी और स्कैमर्स फर्जी नंबरों का इस्तेमाल करके व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर लोगों को ठग रहे हैं। DoT ने पाया कि कई बार लोग अपना पुराना नंबर बंद कर देते हैं या सिम फेंक देते हैं, लेकिन उस नंबर पर बना व्हाट्सएप अकाउंट वाई-फाई के जरिए चलाते रहते हैं। इसी खामी का फायदा अपराधी उठाते हैं।
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नया SIM Binding नियम यह सुनिश्चित करेगा कि अकाउंट उसी वास्तविक टेलीकॉम सब्सक्राइबर से जुड़ा हो जिसने उसे बनाया है। इससे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए फ्रॉड करने वाले को ट्रैक करना आसान हो जाएगा और अनट्रेस्ड (Untraced) नंबरों का खेल खत्म होगा। (Internal link: Related article on Rising WhatsApp Frauds in India)
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किन ऐप्स पर गिरेगी गाज?

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यह नियम उन सभी प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा जिन्हें 'टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर यूजर एंटिटी' (Telecommunication Identifier User Entities) की श्रेणी में रखा गया है। इस लिस्ट में भारत में इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी प्रमुख ऐप्स शामिल हैं:
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    WhatsApp (व्हाट्सएप)
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    Telegram (टेलीग्राम)
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    Signal (सिग्नल)
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    Snapchat (स्नैपचैट)
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    Meta Messenger (मेटा मैसेंजर)
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    JioChat और अन्य भारतीय ऐप्स।
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इन सभी कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी में बदलाव कर 90 दिनों के भीतर SIM Binding नियम को पूरी तरह से लागू करना होगा।
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लैपटॉप/PC यूजर्स और मल्टी-डिवाइस का क्या होगा?

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कई यूजर्स व्हाट्सएप वेब (WhatsApp Web) या टेलीग्राम का इस्तेमाल अपने लैपटॉप या डेस्कटॉप पर करते हैं, जहां सिम कार्ड नहीं लगता। ऐसे यूजर्स के मन में सवाल है कि क्या उनकी सर्विस बंद हो जाएगी?
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नियमों के अनुसार, लैपटॉप या पीसी पर ऐप इस्तेमाल करने की सुविधा जारी रहेगी, लेकिन सुरक्षा बढ़ा दी जाएगी।
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    समय-समय पर वेरिफिकेशन: वेब वर्जन चलाने वालों को समय-समय पर अपने प्राइमरी फोन (जिसमें सिम है) के जरिए 'सिम आधारित ऑथेंटिकेशन' (SIM Based Authentication) पूरा करना होगा।
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    QR कोड स्कैनिंग: लॉगिन प्रक्रिया में क्यूआर कोड के साथ-साथ ओटीपी या सिम वेरिफिकेशन के अतिरिक्त स्टेप जोड़े जा सकते हैं।
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यूजर्स के लिए अब क्या बदल जाएगा?

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आम यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन थोड़ी सावधानी बरतनी होगी।
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    सिम एक्टिव रखें: सबसे जरूरी बात यह है कि जिस नंबर से आपका व्हाट्सएप या टेलीग्राम चल रहा है, उस सिम को रिचार्ज कराकर एक्टिव रखें। अगर सिम बंद हुई, तो ऐप का एक्सेस भी चला जाएगा।
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    पुराने नंबर अपडेट करें: अगर आप कोई पुराना व्हाट्सएप अकाउंट चला रहे हैं जिसका सिम अब आपके पास नहीं है, तो उसे तुरंत अपने मौजूदा नंबर पर अपडेट कर लें, वरना SIM Binding नियम लागू होते ही वह अकाउंट बंद हो सकता है। 
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सरकार का यह SIM Binding नियम डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम है। भले ही इससे यूजर्स को थोड़ी असुविधा हो सकती है, खासकर उन्हें जो वाई-फाई पर पुराने नंबर चलाते थे, लेकिन यह साइबर फ्रॉड और फेक आइडेंटिटी के खतरे को काफी हद तक कम कर देगा। अगले 3 महीनों में आपके चैटिंग का तरीका पूरी तरह सुरक्षित होने वाला है।
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