नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 40 करोड़ से अधिक कामगारों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्रांति लाने का दावा करते हुए चार नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। 1930 से 1950 के बीच बने 29 पुराने, जटिल श्रम कानूनों को अब इन चार नए कोड— वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता— में समाहित कर दिया गया है।READ ALSO:-SIR का खौफ? वोटर लिस्ट से नाम कटा तो क्या छिन जाएगी नागरिकता? जानिए क्या है नियम और कैसे दोबारा जुड़ेगा नाम
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केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने इसे कामगारों के भले के लिए उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया है। सरकार का तर्क है कि नया लेबर कोड लागू करने का मकसद श्रम व्यवस्था को आधुनिक बनाना, श्रमिकों को गरिमा, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती देना है।
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ग्रैच्युटी और ओवरटाइम को लेकर सबसे बड़े बदलाव

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नया लेबर कोड लागू होने से प्राइवेट नौकरीपेशा और निश्चित अवधि (Fixed Term Employees - FTE) के कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव ग्रैच्युटी और ओवरटाइम के नियमों में आया है:
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    1 साल की नौकरी पर ग्रैच्युटी: पहले ग्रैच्युटी पाने के लिए एक ही कंपनी में लगातार 5 साल काम करना जरूरी होता था। अब फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को महज एक साल की सेवा के बाद ही ग्रैच्युटी पाने का हक मिल गया है। यह उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है, जिनका कॉन्ट्रैक्ट 5 साल से पहले खत्म हो जाता था।
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    ओवरटाइम का डबल पैसा: ओवरटाइम को लेकर स्थिति साफ करते हुए नए कोड में कड़े प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई कर्मचारी तय घंटों से ज्यादा काम करता है, तो नियोक्ता (Employer) को उसे सामान्य वेतन से दोगुना (Double Wages) भुगतान करना होगा।
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    नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) अनिवार्य: अब हर कर्मचारी को जॉइनिंग के वक्त लिखित में अप्वाइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे पारदर्शिता आएगी और कंपनियों की मनमानी रुकेगी। 
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40 करोड़ कामगारों को मिला सामाजिक सुरक्षा का 'कवच'

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इन सुधारों का सबसे बड़ा असर असंगठित क्षेत्र के कामगारों पर पड़ेगा। करीब 40 करोड़ असंगठित कामगारों को पहली बार सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे में लाया गया है।
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    PF, ESIC और पेंशन: इसका सीधा मतलब है कि अब इन कामगारों को भी पीएफ (PF), ईएसआईसी (ESIC) और पेंशन जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं मिल सकेंगी।
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    गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स: जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले 'गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स' को पहली बार कानूनी ढांचे में परिभाषित किया गया है। अब एग्रीगेटर्स (कंपनियों) को अपने सालाना टर्नओवर का 1-2% हिस्सा इन वर्कर्स के कल्याण के लिए देना होगा। आधार से लिंक 'यूनिवर्सल अकाउंट नंबर' (UAN) के जरिए वे देश के किसी भी कोने में योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
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महिलाएं, बुजुर्ग और खतरनाक क्षेत्रों के श्रमिक

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नया लेबर कोड लागू होने से महिलाओं और 40 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं:
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    महिलाओं के लिए समान अवसर: लैंगिक समानता पर जोर देते हुए, महिलाएं अब रात की शिफ्ट में भी काम कर सकेंगी, बशर्ते उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्हें समान काम के लिए समान वेतन (Equal Pay) की गारंटी भी दी गई है।
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    40+ के लिए मुफ्त हेल्थ चेकअप: नियोक्ताओं को अपने उन सभी कर्मचारियों का साल में एक बार मुफ्त हेल्थ चेकअप कराना अनिवार्य होगा, जिनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है। यह कदम कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
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    खतरनाक क्षेत्रों में 100% सुरक्षा: खतरनाक क्षेत्रों (Hazardous Sectors) में काम करने वाले श्रमिकों के लिए 100% स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी दी गई है। साथ ही, ईएसआईसी (ESIC) का दायरा अब पूरे देश में फैला दिया गया है। 
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'ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा

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प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि ये सुधार केवल श्रमिक केंद्रित नहीं हैं, बल्कि नियम मानना आसान हो जाता है और 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' (Ease of Doing Business) को भी बढ़ावा मिलता है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह सुधार मील का पत्थर साबित होंगे।
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केंद्र सरकार द्वारा नया लेबर कोड लागू करना देश के श्रम इतिहास में एक युगांतकारी परिवर्तन है। ग्रैच्युटी के नियमों में बदलाव, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, और 40 करोड़ असंगठित कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने जैसे प्रावधानों से कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित होगी। यह आधुनिक कानून आज की अर्थव्यवस्था की चुनौतियों से निपटने और श्रमिकों के हितों की रक्षा करने की दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है।
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